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लोक प्रशासन में नेतृत्व क्या है और इसके प्रमुख सिद्धांत कौन से हैं?
लोक प्रशासन में नेतृत्व संगठनात्मक लक्ष्यों की ओर अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों को प्रभावित करने, मार्गदर्शन देने और प्रेरित करने की क्षमता है; इसके प्रमुख सिद्धांत विशेषता, व्यवहारात्मक, परिस्थितिजन्य, पथ-लक्ष्य, परिस्थितिजन्य नेतृत्व और परिवर्तनकारी नेतृत्व से जुड़े हैं।
२.१ नेतृत्व की अवधारणा
नेतृत्व समूह या संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में दूसरों को प्रभावित करने, मार्गदर्शन करने और प्रेरित करने की क्षमता है। लोक प्रशासन में नेतृत्व में शामिल है:
- राजनीतिक नेतृत्व: मंत्री, विधायक जो दिशा निर्धारित करते हैं
- प्रशासनिक नेतृत्व: वरिष्ठ सिविल सेवक (आईएएस, आरएएस) जो नीति लागू करते और संगठनों का प्रबंधन करते हैं
- सामुदायिक नेतृत्व: जिला और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी जो नागरिकों को एकजुट करते हैं
चेस्टर बर्नार्ड (१९३८, दि फंक्शंस ऑफ द एक्जीक्यूटिव): कार्यपालक के आवश्यक कार्य हैं (१) संप्रेषण बनाए रखना; (२) आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित करना; और (३) उद्देश्य तैयार करना। नेतृत्व वह गुण है जो कार्यपालक को तीनों कार्य करने में सक्षम बनाता है।
भेद: नेतृत्व बनाम प्राधिकार
| आयाम | नेतृत्व | प्राधिकार |
|---|---|---|
| स्रोत | प्रभाव, योग्यता, विश्वास | औपचारिक पद, कानून |
| प्रकृति | व्यक्तिगत, संबंधात्मक | अव्यक्तिगत, पदीय |
| अनुपालन | स्वैच्छिक | अनिवार्य |
| बर्नार्ड का दृष्टिकोण | अनौपचारिक — स्वीकृति सिद्धांत | औपचारिक — ऊपर से प्रत्यायोजित |
२.२ नेतृत्व का विशेषता सिद्धांत
सबसे पहला दृष्टिकोण — नेताओं में जन्मजात गुण होते हैं जो उन्हें अनुयायियों से अलग करते हैं।
प्रमुख अध्ययन:
- राल्फ स्टोगडिल (१९४८): १२४ अध्ययनों की समीक्षा की; बुद्धिमत्ता, प्रभुत्व, आत्म-विश्वास, ऊर्जा और कार्य ज्ञान जैसी विशेषताओं की पहचान की — लेकिन कोई सार्वभौमिक विशेषता प्रोफ़ाइल नहीं पाई।
- रिचर्ड मान (१९५९): बुद्धिमत्ता नेतृत्व का सर्वश्रेष्ठ एकल पूर्वानुमानक है।
- वॉरेन बेनिस (आधुनिक): चार नेतृत्व विशेषताएं — ध्यान का प्रबंधन, अर्थ का प्रबंधन, विश्वास का प्रबंधन और स्व का प्रबंधन।
विशेषता सिद्धांत की आलोचना:
१. परिस्थितिजन्य कारकों की अनदेखी — एक ही नेता एक संदर्भ में सफल और दूसरे में असफल हो सकता है
२. विशेषताओं की कोई सहमत सूची नहीं
३. विशेषताएं बाद में सफल नेताओं का वर्णन करती हैं (वृत्तीय तर्क)
४. अनुयायी और पर्यावरणीय चरों की अनदेखी
२.३ नेतृत्व के व्यवहारात्मक सिद्धांत
जन्मजात विशेषताओं के बजाय, व्यवहारात्मक सिद्धांतकारों ने अध्ययन किया कि प्रभावी नेता क्या करते हैं।
ओहायो स्टेट नेतृत्व अध्ययन (१९४५–१९५०)
ओहायो स्टेट विश्वविद्यालय (हेमफिल, कून्स, स्टोगडिल) के शोधकर्ताओं ने नेता व्यवहार के दो स्वतंत्र आयाम पहचाने:
| आयाम | विवरण | उच्च अंक |
|---|---|---|
| प्रारंभ संरचना | कार्य-उन्मुखता — नेता भूमिकाएं परिभाषित करता, कार्य अनुसूचित करता, स्पष्ट प्रक्रियाएं स्थापित करता है | उच्च कार्यकुशलता, कार्य पूर्णता |
| विचारशीलता | संबंध-उन्मुखता — नेता परस्पर सम्मान, विश्वास, अधीनस्थों की भलाई के प्रति चिंता दिखाता है | उच्च मनोबल, नौकरी संतुष्टि |
निष्कर्ष: सबसे प्रभावी नेता दोनों आयामों पर एक साथ उच्च अंक प्राप्त करते हैं। एक नेता लोगों की उन्मुखता का बलिदान किए बिना कार्य-उन्मुख हो सकता है।
मिशिगन नेतृत्व अध्ययन (रेन्सिस लिकर्ट, १९४७–१९५०)
लिकर्ट के मिशिगन विश्वविद्यालय अध्ययनों ने उच्च-प्रदर्शन और निम्न-प्रदर्शन समूहों के पर्यवेक्षकों की तुलना की:
| शैली | फोकस | प्रभाव |
|---|---|---|
| कर्मचारी-केंद्रित | लोग, संबंध, विश्वास | उच्च मनोबल और उत्पादकता |
| उत्पादन-केंद्रित | कार्य, उत्पादन, प्रक्रियाएं | निम्न मनोबल; अल्पकालिक कार्यकुशलता |
लिकर्ट की चार प्रणालियां (१९६७):
१. प्रणाली १ — शोषणकारी-सत्तावादी: जबरदस्ती; अधीनस्थ भागीदारी नहीं
२. प्रणाली २ — कल्याणकारी-सत्तावादी: पितृसत्तावादी; सीमित विश्वास
३. प्रणाली ३ — परामर्शात्मक: पर्याप्त विश्वास; कुछ भागीदारी
४. प्रणाली ४ — सहभागी-समूह: पूर्ण विश्वास; समूह निर्णय-निर्माण; सर्वोच्च प्रदर्शन
लिकर्ट ने प्रणाली ४ (सहभागी) को आदर्श के रूप में अनुशंसित किया — विशेषकर जटिल, व्यावसायिक कार्यों के लिए। प्रणाली ४ के लोकतांत्रिक लोक प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं।
प्रबंधकीय ग्रिड (ब्लेक और माउटन, १९६४)
रॉबर्ट ब्लेक और जेन माउटन ने प्रबंधकीय ग्रिड (१९६४) विकसित किया — एक ९×९ मैट्रिक्स जो उत्पादन के प्रति चिंता (क्षैतिज अक्ष) को लोगों के प्रति चिंता (ऊर्ध्व अक्ष) के विरुद्ध दर्शाता है।
| ग्रिड स्थिति | शैली | विवरण |
|---|---|---|
| १,१ | निर्धन | न्यूनतम प्रयास; छोड़-दो शैली |
| ९,१ | प्राधिकरण-अनुपालन | अधिकतम उत्पादन फोकस; लोगों की अनदेखी |
| १,९ | क्लब शैली | अधिकतम लोग फोकस; उत्पादन गौण |
| ५,५ | मध्य मार्ग | संतुलित लेकिन सामान्य |
| ९,९ | टीम प्रबंधन | दोनों के प्रति अधिकतम चिंता — आदर्श; उच्च विश्वास, उच्च उत्पादन |
२.४ परिस्थितिजन्य/आकस्मिकता सिद्धांत
कोई एक नेतृत्व शैली सभी स्थितियों में सर्वोत्तम नहीं है। परिस्थितिजन्य सिद्धांत संदर्भ के अनुसार शैली से मेल खाते हैं। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की दसवीं रिपोर्ट, जिसे कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने प्रकाशित किया, क्षेत्र अधिकारियों के लिए न्यूनतम २ से ३ वर्ष के निश्चित कार्यकाल की सिफारिश करती है; यह नेतृत्व में स्थिरता और जवाबदेही दोनों के लिए ज़रूरी है।
फिडलर का आकस्मिकता मॉडल (१९६७)
फ्रेड फिडलर (इलिनोइस विश्वविद्यालय) ने तर्क दिया कि नेतृत्व प्रभावशीलता नेता की शैली और परिस्थितिजन्य अनुकूलता के बीच मेल पर निर्भर करती है।
नेता शैली: न्यूनतम पसंदीदा सहकर्मी पैमाने द्वारा मापी जाती है — जो नेता अपने न्यूनतम पसंदीदा सहकर्मी को सकारात्मक रूप से वर्णित करते हैं वे संबंध-उन्मुख हैं; जो नकारात्मक वर्णन करते हैं वे कार्य-उन्मुख हैं।
तीन परिस्थितिजन्य चर:
१. नेता-सदस्य संबंध (अच्छे/खराब): अनुयायियों से विश्वास और सम्मान की मात्रा
२. कार्य संरचना (उच्च/निम्न): कार्य कितना स्पष्ट और संरचित है
३. पद शक्ति (मजबूत/कमजोर): नेता का औपचारिक प्राधिकार
निष्कर्ष: कार्य-उन्मुख नेता बहुत अनुकूल और बहुत प्रतिकूल परिस्थितियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं; संबंध-उन्मुख नेता मध्यम अनुकूल परिस्थितियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं।
पथ-लक्ष्य सिद्धांत (हाउस, १९७१)
रॉबर्ट हाउस (टोरंटो विश्वविद्यालय) ने तर्क दिया कि नेता का काम अधीनस्थों को उनके लक्ष्य प्राप्त करने में मदद करना है — पथ स्पष्ट करके और बाधाएं हटाकर। नेता दो आकस्मिकताओं के आधार पर शैली समायोजित करते हैं: अधीनस्थ विशेषताएं और कार्य वातावरण।
चार नेतृत्व शैलियां:
| शैली | विवरण | कब सर्वश्रेष्ठ |
|---|---|---|
| निर्देशात्मक | स्पष्ट संरचना, विशिष्ट निर्देश | अस्पष्ट कार्य, अनुभवहीन अधीनस्थ |
| सहायक | मित्रवत, भलाई के प्रति चिंता | तनावपूर्ण या खतरनाक कार्य |
| सहभागी | निर्णयों में अधीनस्थों से परामर्श | गैर-नियमित कार्य, अनुभवी कर्मचारी |
| उपलब्धि-उन्मुख | चुनौतीपूर्ण लक्ष्य निर्धारित करना, उत्कृष्टता की अपेक्षा | कुशल कर्मचारियों के साथ जटिल, अस्पष्ट कार्य |
परिस्थितिजन्य नेतृत्व मॉडल (हर्सी और ब्लैंचर्ड, १९६९)
पॉल हर्सी और केनेथ ब्लैंचर्ड (१९६९) ने नेतृत्व शैली को अधीनस्थों की परिपक्वता (तत्परता) से मिलाने का प्रस्ताव रखा।
| अनुयायी परिपक्वता | नेता शैली |
|---|---|
| एम१: असमर्थ + अनिच्छुक | निर्देशन (उच्च कार्य, निम्न संबंध) |
| एम२: असमर्थ + इच्छुक | विक्रय (उच्च कार्य, उच्च संबंध) |
| एम३: सक्षम + अनिच्छुक | सहभागिता (निम्न कार्य, उच्च संबंध) |
| एम४: सक्षम + इच्छुक | प्रत्यायोजन (निम्न कार्य, निम्न संबंध) |
आईएएस/आरएएस क्षेत्र अधिकारियों पर प्रयोग: एक नए जिला अधिकारी (उच्च कार्य) को अप्रशिक्षित ग्राम-स्तरीय कर्मचारियों (एम१) के साथ निर्देशात्मक नेतृत्व देना होता है; जैसे-जैसे वे कौशल प्राप्त करते हैं, शैली प्रशिक्षण (एम२), सहभागिता (एम३), और अंततः प्रत्यायोजन (एम४) की ओर बढ़ती है।
