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मुख्य बिंदु
इस अध्याय में प्रशासनिक व्यवहार को नेतृत्व, संप्रेषण और मनोबल की आपस में जुड़ी हुई कड़ी के रूप में पढ़ना है।
१. प्रशासनिक व्यवहार (हर्बर्ट साइमन, १९४७): प्रशासकों के वास्तविक निर्णय-निर्माण के तरीके, जो औपचारिक रूप से निर्धारित प्रक्रियाओं से अलग हैं। साइमन ने तर्क दिया कि संगठनों को निर्णय-निर्माण प्रणाली के रूप में अध्ययन किया जाना चाहिए, न कि यांत्रिक पदानुक्रम के रूप में।
२. लोक प्रशासन में नेतृत्व: दूसरों को संगठनात्मक लक्ष्यों की ओर प्रभावित करने, प्रेरित करने और मार्गदर्शन करने की क्षमता। चेस्टर बर्नार्ड (१९३८): नेतृत्व किसी कार्यपालक के लिए आवश्यक सर्वाधिक सार्वभौमिक गुण है। नेता को संगठन का उद्देश्य संप्रेषित करना और सदस्यों को उसे स्वीकार करने के लिए प्रेरित करना होता है।
३. नेतृत्व का विशेषता सिद्धांत (२०वीं सदी के प्रारंभ): नेता कुछ विशेषताओं के साथ जन्म लेते हैं — शारीरिक ऊर्जा, बुद्धिमत्ता, पहल, आत्मविश्वास, सत्यनिष्ठा। स्टोगडिल (१९४८) और मान (१९५९) द्वारा प्रमुख विशेषताओं की पहचान। सीमा: कोई एक सार्वभौमिक विशेषता समूह सभी संदर्भों में नेतृत्व की भविष्यवाणी नहीं करता।
४. नेतृत्व के व्यवहारात्मक सिद्धांत — ओहायो स्टेट अध्ययन (१९४५–५०): दो आयाम — प्रारंभ संरचना (कार्य-उन्मुखता: भूमिका परिभाषित करना, व्यवस्थित करना, निर्देश देना) और विचारशीलता (संबंध-उन्मुखता: परस्पर सम्मान, विश्वास, अधीनस्थों के प्रति चिंता)। मिशिगन अध्ययन (लिकर्ट, १९४७–५०): कर्मचारी-केंद्रित बनाम उत्पादन-केंद्रित पर्यवेक्षण।
५. परिस्थितिजन्य/आकस्मिकता सिद्धांत: नेतृत्व शैली परिस्थिति के अनुकूल होनी चाहिए। फ्रेड फिडलर (१९६७): तीन परिस्थितिजन्य कारक — नेता-सदस्य संबंध, कार्य संरचना, पद-शक्ति। हाउस का पथ-लक्ष्य सिद्धांत (१९७१): नेता अनुयायियों की आवश्यकताओं और कार्य विशेषताओं के आधार पर शैली (निर्देशात्मक, सहायक, सहभागी, उपलब्धि-उन्मुख) समायोजित करते हैं। हर्सी और ब्लैंचर्ड (१९६९): परिस्थितिजन्य नेतृत्व — शैली को अधीनस्थ की परिपक्वता (तत्परता) से मिलाएं।
६. लोक प्रशासन में संप्रेषण: संगठनों के भीतर और बाहर सूचना, विचार और निर्देश संचारित करने की प्रक्रिया। द्विमार्गी संप्रेषण आवश्यक है: अधोगामी (आदेश, नीतियां) और ऊर्ध्वगामी (प्रतिपुष्टि, शिकायतें)। अनौपचारिक चैनल (अफवाह तंत्र) शक्तिशाली होते हैं और अक्सर औपचारिक चैनलों से तेज होते हैं।
७. संप्रेषण नेटवर्क (एलेक्स बैवेलस, १९५०): पांच प्रकार — व्हील (केंद्रीकृत; सरल कार्यों के लिए सबसे तेज), चेन (पदानुक्रमिक), वाई (संशोधित व्हील), सर्किल (प्रत्येक दो से जुड़ा), ऑल-चैनल (सभी एक-दूसरे से जुड़े — जटिल कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ)।
८. सरकार में संप्रेषण बाधाएं: अर्थगत बाधाएं (शब्दजाल, तकनीकी भाषा); संगठनात्मक बाधाएं (पदानुक्रम संदेश को विकृत करता है); भौतिक बाधाएं (भौगोलिक फैलाव); मनोवैज्ञानिक बाधाएं (वरिष्ठ का भय, चयनात्मक धारणा); सांस्कृतिक बाधाएं (क्षेत्रीय/जाति अंतर)।
९. प्रशासन में मनोबल: किसी समूह या संगठन का सामूहिक दृष्टिकोण, भावना और विश्वास का स्तर। उच्च मनोबल = प्रेरणा, उत्पादकता, कम अनुपस्थिति, टीम एकजुटता। मनोबल को प्रभावित करने वाले कारक: नेतृत्व गुणवत्ता, कार्य परिस्थितियां, व्यवहार में समानता, संप्रेषण पारदर्शिता, मान्यता, और नौकरी सुरक्षा।
१०. मनोबल बनाम प्रेरणा बनाम एस्प्री द कोर: मनोबल एक समूह घटना है (सामूहिक भावना); प्रेरणा व्यक्तिगत है (आंतरिक प्रेरक)। एस्प्री द कोर (फेयोल का १४वां सिद्धांत) — टीम भावना, एकजुटता और संगठन में गर्व — उच्च मनोबल का एक लक्षण और कारण दोनों है।
