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मुख्य बिंदु
इस नोट के मुख्य बिंदु भारत की विदेश नीति के संवैधानिक आधार, पड़ोस नीति, प्रमुख शक्तियों से संबंध, प्रवासी भारतीयों और सांस्कृतिक कूटनीति को परीक्षा-उपयोगी क्रम में रखते हैं।
१. विदेश नीति के संवैधानिक निर्धारक
- भारत की विदेश नीति अनुच्छेद ५१ और राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों पर आधारित है
- अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का संवर्धन
- राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण और सम्मानजनक संबंधों का रखरखाव
- अंतर्राष्ट्रीय विधि और संधि-दायित्वों के प्रति आदर
- अंतर्राष्ट्रीय विवादों का मध्यस्थता द्वारा निपटान
२. पड़ोसी प्रथम नीति
- सभी सार्क पड़ोसियों के साथ संबंधों को प्राथमिकता देती है
- नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, पाकिस्तान, अफगानिस्तान को समाहित करती है
- आधार-वाक्य: क्षेत्रीय स्थिरता भारत की आर्थिक वृद्धि और सुरक्षा की पूर्व-शर्त है
- गुजराल सिद्धांत (१९९६) में निहित और उसका विस्तार
३. ऐक्ट ईस्ट नीति
- २०१४ में प्रारंभ; “लुक ईस्ट” नीति (१९९१) से विकसित
- दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया के साथ सामरिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करती है
- आसियान, बिम्सटेक और द्विपक्षीय साझेदारियों से संचालित
- भारत-आसियान व्यापार: १३० अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक (२०२३)
४. प्रवासी कूटनीति
- भारतीय प्रवासी, यानी भारतीय मूल के व्यक्ति और अनिवासी भारतीय: आधिकारिक रूप से लगभग ३.७३ करोड़ लोग — विश्व में सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय
- प्रेषण: १२५ अरब अमेरिकी डॉलर (२०२३) — विश्व का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता
- प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन प्रतिवर्ष ९ जनवरी को आयोजित
- अमेरिका, खाड़ी, यूनाइटेड किंगडम, मॉरीशस और दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रमुख प्रभाव-साधन
५. भारत-अमेरिका संबंध
- शीत युद्ध-कालीन दुराव → आज “व्यापक वैश्विक सामरिक साझेदारी”
- आधारभूत समझौता: २००८ नागरिक परमाणु समझौता
- रक्षा मूलभूत समझौते: कॉमकासा (२०१८), बेका (२०२०), जीसोमिया
- महत्त्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी पहल (२०२३): सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, क्वांटम सहयोग
६. भारत-रूस संबंध
- १९७१ मैत्री संधि से समय-परीक्षित सामरिक साझेदारी
- रूस: भारत का बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता; रूस-निर्भरता को भारत अब विविध स्रोतों से संतुलित कर रहा है
- एस-४०० ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली: अनुबंध २०१८, आपूर्ति २०२१–२२, अमेरिकी काट्सा दबाव के बावजूद
- द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य: १०० अरब अमेरिकी डॉलर २०३० तक
७. भारत की जी-२० अध्यक्षता (२०२३)
- अध्यक्षता: दिसंबर २०२२ से नवंबर २०२३
- नई दिल्ली शिखर सम्मेलन (९–१० सितंबर २०२३) ने नई दिल्ली घोषणा-पत्र प्रस्तुत किया
- ऐतिहासिक: अफ्रीकी संघ को स्थायी जी-२० सदस्य के रूप में स्वीकार किया गया
- भारत-मध्य-पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर की घोषणा; भारत को “विश्वमित्र” के रूप में प्रस्तुत किया गया
८. भारत-चीन संबंध
- द्विपक्षीय स्थिति: “व्यापक सामरिक एवं सहयोगात्मक साझेदारी” — प्रतिस्पर्धी किंतु सहयोगात्मक
- द्विपक्षीय व्यापार: १३६ अरब अमेरिकी डॉलर (२०२३) तनावों के बावजूद
- गलवान घाटी संघर्ष (जून २०२०): २० भारतीय सैनिक शहीद; २०० से अधिक चीनी ऐप प्रतिबंधित
- अक्टूबर २०२४: ४ घर्षण-बिंदुओं पर बफर ज़ोन/गश्त व्यवस्था — आंशिक सामान्यीकरण
९. भारत-पाकिस्तान संबंध
- आतंकवाद, कश्मीर और परमाणु निरोध के इर्द-गिर्द संरचित
- प्रमुख घटनाएँ: संसद हमला (२००१), २६/११ मुंबई (२००८), उरी सर्जिकल स्ट्राइक (२०१६), पुलवामा-बालाकोट (२०१९)
- पाकिस्तान वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (२०१८–२०२२) द्वारा ग्रे-लिस्ट में; भारत ने पुलवामा के बाद सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र स्थिति निलंबित की
- सिंधु जल संधि (१९६०) वार्ताएँ भारत ने पहलगाम हमले (२०२५) के बाद निलंबित कीं
१०. सांस्कृतिक कूटनीति
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: २१ जून; दिसंबर २०१४ में संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित; १९० से अधिक देश
- भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (स्थापना १९५०): २९ देशों में ३७ सांस्कृतिक केंद्र; प्रतिवर्ष ३,२०० से अधिक छात्रवृत्तियाँ
- बौद्ध सर्किट + नालंदा विश्वविद्यालय पुनरुद्धार: बौद्ध एशिया में मृदु शक्ति
- बॉलीवुड और भारतीय व्यंजन वैश्विक सांस्कृतिक पहुँच के उपकरण के रूप में
११. भारत बहुपक्षीय संस्थाओं में
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य ८ बार (सबसे हाल में २०२१–२२)
- गुटनिरपेक्ष आंदोलन का संस्थापक सदस्य; जी-२०, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (पूर्ण सदस्य २०१७), क्वाड में सक्रिय
- इंडो-पैसिफिक आर्थिक ढाँचा (२०२२) का हिस्सा — चीन-प्रभुत्व वाली आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकल्प
- संयुक्त राष्ट्र सुधार एजेंडे के अंतर्गत सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की वकालत
१२. वसुधैव कुटुम्बकम्
- महा उपनिषद् से संस्कृत सूक्ति जिसका अर्थ है “विश्व एक परिवार है”
- भारत की जी-२० अध्यक्षता विषय (२०२३) की दार्शनिक आधारशिला
- अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के प्रति भारत के सभ्यतागत दृष्टिकोण को अभिव्यक्त करती है
- पश्चिमी शक्ति-संतुलन अथवा लेन-देन-आधारित विदेश नीति मॉडलों के विपरीत
