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मुख्य बिंदु
राजस्थान की चुनावी राजनीति को समझने के लिए प्रथम विधानसभा चुनाव, वर्तमान सीट संरचना, सत्ता-विरोधी रुझान, महिला भागीदारी, जनजातीय प्रतिनिधित्व और २०२३ के नतीजे सबसे ज़रूरी आधार हैं।
१. प्रथम विधानसभा चुनाव (१९५२)
- राजस्थान में १९५२ में १६० सीटों के साथ प्रथम विधानसभा चुनाव हुआ
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ८२ सीटें जीतीं
- आधिकारिक निर्वाचन आँकड़ों में कांग्रेस का मत-प्रतिशत ३९.४६ प्रतिशत और कुल मतदान ३५.१९ प्रतिशत दर्ज है
- टीकाराम पालीवाल १९५२ के चुनाव के बाद राजस्थान के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने; जय नारायण व्यास ने इसी चुनाव में हार के बाद उपचुनाव जीता और १ नवंबर १९५२ को मुख्यमंत्री बने
२. वर्तमान सीट संरचना
- राजस्थान विधानसभा में २०० सीटें हैं; लोकसभा: २५ सीटें; राज्यसभा: १० सीटें
- २०० विधानसभा सीटों में से ३४ सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित और २५ सीटें अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए हैं
३. सत्ता-विरोधी प्रवृत्ति
- भारत में अनूठी — १९९३ के बाद से प्रत्येक विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल को बिना किसी अपवाद के सत्ता से बाहर कर दिया गया है
- कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों बिना अपवाद हारे हैं
- २०२३ चुनाव ने इस प्रवृत्ति की पुष्टि की
४. २०२३ विधानसभा चुनाव परिणाम
- भारतीय जनता पार्टी ने ११५ सीटें जीतीं; कांग्रेस ६९ सीटें; बहुजन समाज पार्टी २; निर्दलीय ६; अन्य ८
- कुल मतदान प्रतिशत: ७४.४२ प्रतिशत
- भजनलाल शर्मा ने १५ दिसंबर २०२३ को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
५. महिला राजनीतिक भागीदारी
- २०२३ चुनाव: २०० में से २० महिला विधायक — महिला प्रतिनिधित्व अब भी कम है
- महिला मतदान प्रतिशत (७४.७० प्रतिशत) ने पुरुषों (७४.१६ प्रतिशत) को पहली बार २०२३ में पीछे छोड़ा
६. जनजातीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व
- राजस्थान में २५ आरक्षित अनुसूचित जनजाति सीटें हैं
- भील, मीणा, गरासिया समुदाय उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सिरोही और राजसमंद में केंद्रित हैं
- किरोड़ी लाल मीणा एक प्रमुख जनजातीय नेता हैं (भारतीय जनता पार्टी)
७. जाति और चुनावी व्यवहार
- राजपूत, जाट, गुर्जर, अन्य पिछड़ा वर्ग, ब्राह्मण और मीणा समुदायों के अलग-अलग चुनावी जुड़ाव हैं
- २०२३ में, गुर्जर समुदाय (पारंपरिक रूप से कांग्रेस-समर्थक) में आंतरिक विभाजन देखा गया
- राजपूत समुदाय मुख्यतः भारतीय जनता पार्टी के साथ रहा
८. मतदान प्रतिशत की प्रवृत्ति
- मतदान १९५२ में ३५.१९ प्रतिशत से बढ़कर २०२३ में ७४.४२ प्रतिशत हो गया
- जनजातीय जिले (बांसवाड़ा, डूंगरपुर) आमतौर पर राज्य औसत से अधिक रहते हैं
९. १९९० के बाद के मुख्यमंत्री
- भैरोंसिंह शेखावत (भारतीय जनता पार्टी): १९९०–९२, १९९३–९८; उपराष्ट्रपति २००२–०७
- अशोक गहलोत (कांग्रेस): १९९८–२००३, २००८–१३, २०१८–२३
- वसुंधरा राजे (भारतीय जनता पार्टी): २००३–०८, २०१३–१८
- भजनलाल शर्मा (भारतीय जनता पार्टी): दिसंबर २०२३–वर्तमान
१०. नोटा का उपयोग
- २०२३ में नोटा को ३.८२ लाख मत (०.९६ प्रतिशत) प्राप्त हुए
- यह सीमांत किंतु दिखने वाली विरोध-मतदान प्रवृत्ति का संकेत है
- नोटा का चुनावी नतीजे पर कानूनी प्रभाव नहीं पड़ता; सबसे अधिक वैध मत पाने वाला उम्मीदवार ही विजेता घोषित होता है
११. इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीन और चुनाव सुधार
- राजस्थान ने २००३ के चुनावों से इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीन पूर्णतः अपनाई
- मतदाता सत्यापन पेपर ऑडिट पर्ची २०१८ में प्रस्तुत की गई
- २०२३ में चुनिंदा बूथों पर बायोमेट्रिक मतदाता सत्यापन पायलट चलाए गए
१२. राजनीतिक नेतृत्व की शैलियाँ
- सामंती-परंपरागत (रियासत काल)
- करिश्माई नेतृत्व — भैरोंसिंह शेखावत
- तकनीकी-लोकलुभावन — अशोक गहलोत
- संगठनात्मक-कैडर — भजनलाल शर्मा (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-भारतीय जनता पार्टी कैडर धारा से प्रथम बार मुख्यमंत्री)
१३. पंचायती राज चुनाव और स्थानीय भागीदारी
- २०२० पंचायती राज चुनावों में ५० प्रतिशत आरक्षण के कारण महिलाओं ने कुल पंचायत सीटों का ५२.८ प्रतिशत जीता
- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों को भी जमीनी स्तर पर बढ़ा हुआ प्रतिनिधित्व मिला
