मतदान व्यवहार, चुनावी सुधार, निर्वाचन
मुख्य तथ्य
- भारत निर्वाचन आयोग — संवैधानिक आधार — अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित — संसद, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव की देखरेख
- EVM और VVPAT — मुख्य तथ्य — EVM 2004 से सभी आम चुनावों में उपयोग — BEL और ECIL द्वारा निर्मित (सरकारी PSU)
- NOTA — परिचय और प्रभाव — PUCL बनाम भारत संघ (2013) SC निर्देश के बाद शुरू — EVM पर अंतिम विकल्प के रूप में उपलब्ध
- आदर्श आचार संहिता — स्वरूप और दायरा — चुनाव कार्यक्रम घोषणा के साथ तत्काल लागू
- जन प्रतिनिधित्व अधिनियम — अंतर — जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950: परिसीमन और मतदाता सूचियाँ
मुख्य बिंदु
- 1
मतदान व्यवहार — प्रमुख निर्धारक
- व्यक्ति और समूह कैसे मतदान करते हैं, इसका पैटर्न
- जाति भारत में सबसे महत्त्वपूर्ण निर्धारक
- अन्य कारक: धर्म, क्षेत्रीय/भाषाई पहचान, सत्ता-विरोध
- उम्मीदवार की छवि, नेतृत्व, कल्याण वितरण भी प्रभावी
- 2
भारत निर्वाचन आयोग — संवैधानिक आधार
- अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित
- संसद, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव की देखरेख
- 2025 में: मुख्य चुनाव आयुक्त + 2 चुनाव आयुक्त
- स्वतंत्र संवैधानिक निकाय
- 3
EVM और VVPAT — मुख्य तथ्य
- EVM 2004 से सभी आम चुनावों में उपयोग
- BEL और ECIL द्वारा निर्मित (सरकारी PSU)
- इंटरनेट से असंबद्ध; तकनीकी समिति द्वारा प्रमाणित
- VVPAT 2019 लोकसभा चुनाव से राष्ट्रव्यापी तैनाती
- 4
NOTA — परिचय और प्रभाव
- PUCL बनाम भारत संघ (2013) SC निर्देश के बाद शुरू
- EVM पर अंतिम विकल्प के रूप में उपलब्ध
- NOTA वोट गिने और अलग प्रकाशित होते हैं
- परिणाम नहीं बदलते — सर्वाधिक NOTA से भी पुनर्चुनाव नहीं
- 5
आदर्श आचार संहिता — स्वरूप और दायरा
- चुनाव कार्यक्रम घोषणा के साथ तत्काल लागू
- प्रतिबंधित: नई योजनाओं की घोषणा, सरकारी मशीनरी का उपयोग, वरिष्ठ अधिकारियों का स्थानांतरण
- कोई वैधानिक आधार नहीं — ECI की नैतिक प्राधिकरण शक्ति (अनुच्छेद 324)
- 6
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम — अंतर
- जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950: परिसीमन और मतदाता सूचियाँ
- जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951: चुनाव आचरण, उम्मीदवार योग्यता, भ्रष्ट आचरण, चुनाव विवाद
- दोनों मिलकर प्राथमिक चुनावी विधान बनाते हैं
- 7
चुनावी बॉण्ड — योजना और रद्दीकरण
- चुनावी बॉण्ड योजना (2018): SBI से बॉण्ड खरीदकर राजनीतिक दलों को गुमनाम दान
- ADR बनाम भारत संघ (2024): 5-न्यायाधीश पीठ ने सर्वसम्मति से असंवैधानिक घोषित किया
- अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन
- ECI ने सभी डेटा सार्वजनिक किया
- 8
मतदाता मतदान प्रवृत्ति
- 2024 लोकसभा: 65.79%; 97 करोड़ पात्र मतदाता; 543 क्षेत्र; 7 चरण
- 1952 (45.7%) से मतदान सामान्यतः बढ़ा
- 2014 से कुछ चुनावों में महिला मतदान पुरुष से अधिक
- राजस्थान 2023 विधानसभा: 74.2%
- 9
सत्ता-विरोध — भारतीय पैटर्न
- भारतीय चुनावों को प्रभावित करने वाले सबसे बड़े कारकों में से एक
- राज्य स्तर पर सत्तारूढ़ दल लगभग 60–70% चुनावों में हारते हैं
- शासन में कमी, अधूरे वादे और नेतृत्व से ऊब का नतीजा
- राजस्थान: 1993 से भाजपा-कांग्रेस का 5-वर्षीय वैकल्पिक पैटर्न — इसका क्लासिक उदाहरण
- 10
चुनावी सुधार समितियाँ
- विधि आयोग रिपोर्ट 255 (2015): राज्य वित्त पोषण, व्यय सीमा, मत-खरीद आपराधीकरण, तीव्र विवाद समाधान
- दिनेश गोस्वामी समिति (1990): आंशिक राज्य वित्त पोषण की सिफारिश
- इंद्रजीत गुप्ता समिति (1998): आंशिक राज्य वित्त पोषण की भी सिफारिश
- 11
CEC नियुक्ति अधिनियम 2023 — बदली प्रक्रिया
- 3-सदस्यीय चयन समिति: PM (अध्यक्ष), एक कैबिनेट मंत्री, लोकसभा में विपक्ष का नेता
- 5 वरिष्ठ अधिकारियों की खोज समिति नामों का पैनल तैयार करती है
- पहले: राष्ट्रपति PM की सलाह पर नियुक्त करते थे — कोई औपचारिक समिति नहीं
- अनूप बरनवाल (2023): SC ने CJI सहित स्वतंत्र समिति निर्देशित की; नए कानून में CJI को बाहर रखा
- 12
एक राष्ट्र-एक चुनाव — कोविंद समिति (2024)
- राम नाथ कोविंद समिति (2024) ने LS और सभी विधानसभाओं के एक साथ चुनाव की सिफारिश
- लाभ: व्यय में कमी, निरंतर MCC बाधा समाप्त, शासन निरंतरता
- चुनौती: संघीय स्वायत्तता, समय-पूर्व विघटन
- संविधान संशोधन आवश्यक: अनुच्छेद 83, 85, 172, 174
परिचय एवं संदर्भ
मतदान व्यवहार, चुनावी सुधार और निर्वाचन भारतीय लोकतंत्र की उस पूरी श्रृंखला को समझाते हैं जिसमें मतदाता निर्णय लेता है, निर्वाचन आयोग प्रक्रिया चलाता है और सुधार चुनाव की विश्वसनीयता को लगातार कसते हैं। प्रेस सूचना ब्यूरो पर प्रकाशित निर्वाचन आयोग की १८ अप्रैल २०२४ सूचना के अनुसार पहले चरण में ही १.८७ लाख मतदान केंद्रों पर १६.६३ करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए व्यवस्था की गई थी।
भारतीय लोकतंत्र का पैमाना
भारत का चुनावी लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा है। २०२४ के लोकसभा चुनावों में लगभग ९७ करोड़ पात्र मतदाता ५४३ निर्वाचन क्षेत्रों की चुनावी प्रक्रिया में ७ चरणों (१९ अप्रैल–४ जून २०२४) में भाग ले सकते थे; मतदान ५४२ संसदीय क्षेत्रों में हुआ क्योंकि एक सीट निर्विरोध रही। ४ जून २०२४ को मतगणना ने १८वीं लोकसभा का परिणाम दिया।
इस पैमाने से अनूठी चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं: दूरस्थ हिमालयी गाँवों और रेगिस्तानी चौकियों में चुनाव प्रबंधन, संघर्ष-प्रवण निर्वाचन क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करना और तकनीक के ज़रिए फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं पर काबू पाना। निर्वाचन आयोग गुजरात के गिर स्थित महार गाँव जैसे एकल-मतदाता मतदान केंद्रों के लिए हेलीकॉप्टर मतदान दल भेजता है।
तीन मुख्य घटक
इस विषय के तीन विश्लेषणात्मक रूप से भिन्न किंतु परस्पर संबंधित घटक हैं:
- मतदान व्यवहार: चुनावी विकल्प का समाजशास्त्र और मनोविज्ञान — कौन मतदान करता है, लोग जिस तरह मतदान करते हैं वैसा क्यों करते हैं, और चुनावी परिणाम किन बातों से तय होते हैं
- चुनाव सुधार: चुनाव की अखंडता सुधारने का सतत प्रयास — ईवीएम की शुरुआत से लेकर चुनावी बॉण्ड विनियमन तक और एक साथ चुनाव की बहस तक
- चुनाव: भारतीय चुनावों का संवैधानिक और कानूनी ढाँचा तथा हाल के प्रमुख चुनाव डेटा
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M NOTA क्या है? इसे लागू करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख कीजिए।
आदर्श उत्तर
NOTA (उपरोक्त में से कोई नहीं) EVM पर मतदाताओं को सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने का विकल्प देता है। PUCL बनाम भारत संघ (2013) SC निर्णय के बाद नवंबर 2013 से लागू। NOTA मत गिने जाते हैं परंतु परिणाम नहीं बदलते — सर्वाधिक NOTA से भी पुनर्चुनाव नहीं।
~50 शब्द • 5 अंक
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