दलीय व्यवस्था, क्षेत्रवाद, गठबंधन राजनीति
मुख्य तथ्य
- - भारत में बहुदलीय व्यवस्था — 1989 के बाद अधिकांश चुनावों में कोई एकल दल बहुमत नहीं पाता
- - एकदल-प्रभुत्व (1952–1967): कांग्रेस युग — कांग्रेस-पतन (1967–89): राज्यों में गठबंधन — गठबंधन युग (1989–2014): 25 वर्ष बिना एकल-दल बहुमत
- - क्षेत्रवाद — किसी क्षेत्र के हितों, पहचान और स्वायत्तता का केंद्र के विरुद्ध दावा — सकारात्मक: क्षेत्रीय विकास, सांस्कृतिक गर्व
- - प्रमुख दल: DMK (1949), TDP (1982), TMC (1998), AAP (2012) - उप-राष्ट्रीय राजनीतिक पहचानों का उदय - 1989–2014 की गठबंधन सरकारों में संतुलनकारी शक्ति
- - पूर्व-चुनाव गठबंधन: BJP-NDA, INDIA गठबंधन 2024 — चुनाव-पश्चात् गठबंधन: 1996–2004 संयुक्त मोर्चा
मुख्य बिंदु
- 1
- भारत में बहुदलीय व्यवस्था — 1989 के बाद अधिकांश चुनावों में कोई एकल दल बहुमत नहीं पाता
- 2025 में ECI: 6 राष्ट्रीय दल, 57 राज्य दल, 2,000+ पंजीकृत दल
- 2
- एकदल-प्रभुत्व (1952–1967): कांग्रेस युग
- कांग्रेस-पतन (1967–89): राज्यों में गठबंधन
- गठबंधन युग (1989–2014): 25 वर्ष बिना एकल-दल बहुमत
- वापसी-प्रभुत्व (2014–वर्तमान): BJP-नेतृत्व; 2024 में आंशिक गठबंधन पुनरागमन
- 3
- क्षेत्रवाद — किसी क्षेत्र के हितों, पहचान और स्वायत्तता का केंद्र के विरुद्ध दावा
- सकारात्मक: क्षेत्रीय विकास, सांस्कृतिक गर्व
- नकारात्मक: अलगाववाद, प्रवासी-विरोध
- प्रबंधन: संघवाद, अनुच्छेद 3, अनुसूचित क्षेत्र प्रावधान
- 4
- प्रमुख दल: DMK (1949), TDP (1982), TMC (1998), AAP (2012)
- उप-राष्ट्रीय राजनीतिक पहचानों का उदय
- 1989–2014 की गठबंधन सरकारों में संतुलनकारी शक्ति
- 5
- पूर्व-चुनाव गठबंधन: BJP-NDA, INDIA गठबंधन 2024
- चुनाव-पश्चात् गठबंधन: 1996–2004 संयुक्त मोर्चा
- गठबंधन धर्म: नीति-समझौता, सत्ता-साझेदारी, समन्वय समिति
- 6
- 3 राज्यों से कुल LS सीटों का 2% जीतना, या
- 4+ राज्यों में 6% मत + 4 सीटें, या
- 4+ राज्यों में राज्य दल के रूप में मान्यता
- राष्ट्रीय दल का चुनाव चिह्न राष्ट्रव्यापी आरक्षित
- 7
- भाषाई माँगें (1953 आंध्र, 2014 तेलंगाना)
- आर्थिक असमानता — पिछड़े क्षेत्रों की पृथक राज्य माँग
- सांस्कृतिक पहचान — द्रविड़ गर्व, उत्तर-पूर्व जनजातीय अस्मिता
- केंद्र-राज्य नीति असंतोष — संसाधन, विशेष दर्जा विवाद
- 8
- NDA-I (1999–2004): 24 सहयोगी — सर्वाधिक विस्तृत गठबंधन
- UPA-I (2004–09): DMK, NCP, TMC सहित 10+ सहयोगी
- गठबंधन काल की उपलब्धियाँ: RTI (2005), NREGS (2005), RTE (2009)
- 9
- 52वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया — दल-बदल-जनित अस्थिरता रोकने के लिए
- दल-सदस्यता त्याग या व्हिप-उल्लंघन पर विधायक की अयोग्यता
- विलय छूट: 2/3 विधायकों का समर्थन
- निर्णयकर्ता: स्पीकर/सभापति (पक्षपात की आलोचना)
- 10
- 1993 से हर पाँच साल पर BJP-कांग्रेस सत्ता परिवर्तन
- 2023 में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) — तीसरी शक्ति के रूप में उभरी
- 11
- जून 2023 में गठित 26 दलों का विपक्षी महागठबंधन
- 2024 LS में 234 सीटें (NDA: 293, अन्य: 16)
- गठबंधन राजनीति भारतीय संघीय लोकतंत्र का केंद्रीय तत्त्व
- 12
- 1952–67: प्रमुखतावादी दल व्यवस्था (सार्टोरी — कांग्रेस प्रभुत्व)
- 1967 के बाद: ध्रुवीकृत बहुलवाद की ओर
- वर्तमान: मध्यम बहुलवाद — BJP राष्ट्रीय प्रभुत्व + क्षेत्रीय दलों की शक्तिशाली उपस्थिति
भारत की दलीय व्यवस्था क्षेत्रवाद और गठबंधन राजनीति से क्यों जुड़ी है?
भारत की दलीय व्यवस्था क्षेत्रवाद और गठबंधन राजनीति से इसलिए जुड़ी है क्योंकि भारत की सामाजिक, भाषाई, प्रादेशिक और राजनीतिक विविधता किसी एक दल या एकरेखीय राष्ट्रीय एजेंडे में आसानी से समा नहीं सकती। भारत की दलीय व्यवस्था विश्व की सबसे जटिल व्यवस्थाओं में से एक है — बड़ी जनसंख्या वाला बहुदलीय लोकतंत्र, जो २८ राज्यों, ८ केंद्रशासित प्रदेशों, २२ अनुसूचित भाषाओं और सैकड़ों विशिष्ट सांस्कृतिक पहचानों में फैला है। किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन के लिए इन विविध हितों को एक शासकीय बहुमत में समेटना चुनौतीपूर्ण है। जनगणना २०११ के अनुसार भारत की जनसंख्या १२१.०९ करोड़ थी, इसलिए दलीय प्रतिस्पर्धा को केवल राष्ट्रीय वोट-प्रतिशत से नहीं, बल्कि प्रदेश, भाषा, जाति, क्षेत्र और स्थानीय मुद्दों की परतों से भी समझना पड़ता है।
तीन परस्पर जुड़ी गतिकी
दलीय व्यवस्था का विकास
- कांग्रेस के निकट-एकाधिकार (१९५२–१९६७) से विखंडन और गठबंधन सरकारों (१९८९–२०१४) तक
- भाजपा का एक प्रभावी शक्ति के रूप में पुनः उभरना (२०१४–वर्तमान)
- राज्य स्तर और गठबंधन अंकगणित में क्षेत्रीय दल अभी भी महत्त्वपूर्ण बने हुए हैं
- इसी कारण लोकसभा में बहुमत मिलने के बाद भी राज्यसभा, राज्यों की विधानसभाओं और सहयोगी दलों का समीकरण राष्ट्रीय शासन को प्रभावित करता है
क्षेत्रवाद
- क्षेत्रीय पहचान और हितों का सतत दावा
- क्षेत्रीय दल, नए राज्यों की माँग और सहकारी संघवाद पर दबाव उत्पन्न करता है
- केवल अपकेंद्री शक्ति नहीं — स्थानीय आकांक्षाओं को लोकतांत्रिक राजनीति में स्थान दिलाता है
- सकारात्मक रूप में क्षेत्रवाद विकास, भाषा और सांस्कृतिक सम्मान की माँग है; नकारात्मक रूप में वही क्षेत्रवाद अलगाववाद या प्रवासी-विरोध तक जा सकता है
गठबंधन राजनीति
- गठबंधन बनाकर शासन करने की कला
- वैचारिक रूप से विविध साझेदारों का प्रबंधन, मंत्रालयों का बँटवारा, नीतिगत मतभेदों को सुलझाना
- साझा सत्ता के अनुशासन और समन्वय तंत्रों के ज़रिए गठबंधन की स्थिरता बनाए रखना
- परीक्षा में इस विषय का अच्छा उत्तर दलीय विकास, क्षेत्रवाद और गठबंधन-तंत्र को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही संघीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तीन पहलू मानकर लिखता है
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M कांग्रेस प्रणाली से आप क्या समझते हैं? इसे किसने प्रतिपादित किया?
आदर्श उत्तर
कांग्रेस प्रणाली को राजनीतिक वैज्ञानिक राजनी कोठारी ने प्रतिपादित किया। 1952–1967 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस "सहमति की पार्टी" के रूप में हावी थी — विभिन्न विचारधाराओं को अपने भीतर समेटते हुए। अन्य दल "दबाव की पार्टियाँ" थीं। 1967 में 8 राज्यों में कांग्रेस की पराजय से यह प्रणाली समाप्त हुई और बहुदलीय प्रतिस्पर्धा का दौर शुरू हुआ।
~50 शब्द • 5 अंक
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