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राजस्थान के खनिज संसाधन: प्रकार, वितरण, औद्योगिक उपयोग

पेपर II · इकाई 3 अनुभाग 1 / 14 PYQ-शैली 39 मिनट

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मुख्य बिंदु

  1. राजस्थान में खनिज संसाधनों का आधार बहुत व्यापक है: राज्य में लगभग ८२ प्रकार के खनिज मिलते हैं और २०२५-२६ तक ५७ खनिजों का व्यावसायिक उत्पादन हो रहा है।
  2. राजस्थान भारत में सीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट और वोलेस्टोनाइट का एकमात्र उत्पादक माना जाता है; आर्थिक समीक्षा २०२५-२६ में कैल्साइट और जिप्सम को भी राज्य की विशिष्ट अग्रणी स्थिति से जोड़ा गया है।
  3. राज्य चाँदी, कैल्साइट, जिप्सम, बॉल क्ले, फॉस्फोराइट, गेरू, स्टीटाइट, फेल्सपार, संगमरमर, ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर जैसे औद्योगिक खनिजों में राष्ट्रीय स्तर पर बहुत मजबूत स्थिति रखता है।
  4. खान एवं भूविज्ञान विभाग का २०२५-२६ राजस्व लक्ष्य ₹१२,९८० करोड़ है; दिसंबर २०२५ तक ₹६,८५७.९७ करोड़ संग्रह हो चुका है। पुराने २०२४-२५ संदर्भ में यही मद ₹९,५०० करोड़ लक्ष्य और दिसंबर २०२४ तक ₹६,३४०.८५ करोड़ संग्रह के रूप में पढ़ी जाती थी, इसलिए उत्तर में वर्ष स्पष्ट लिखना जरूरी है।
  5. आर्थिक समीक्षा २०२५-२६ के अनुसार राज्य में ३,३९५ प्रमुख खनिज खनन पट्टे, १३,४२८ लघु खनिज पट्टे और १६,०५८ खदान लाइसेंस हैं; राजस्थान खनिज नीति २०२४ की पृष्ठभूमि में १४८ प्रमुख, १६,८१७ लघु पट्टे और १७,४५४ लाइसेंस दिए गए थे, इसलिए परीक्षा में स्रोत-वर्ष देखकर आँकड़ा लिखें।
  6. राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड ने वित्त वर्ष २०२४-२५ में ₹१,७२६.०३ करोड़ का अनऑडिटेड सकल राजस्व और ₹६५८.२२ करोड़ करपूर्व लाभ अर्जित किया। इसकी ४ रणनीतिक व्यावसायिक इकाइयाँ हैं: रॉक फॉस्फेट (झामरकोटड़ा), जिप्सम (बीकानेर), चूना पत्थर (जोधपुर) और लिग्नाइट (जयपुर)।
  7. झामरकोटड़ा (उदयपुर) लगभग २० करोड़ टन भंडार वाली भारत की सबसे बड़ी रॉक फॉस्फेट खदान है।
  8. ज़ावर खदानें (उदयपुर) भारत की प्राथमिक सीसा-जस्ता खनन पहचान का केंद्र हैं, जिनका संचालन हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और वेदांता समूह से जुड़ा है।
  9. सिंदेसर खुर्द (राजसमंद) भारत की सबसे बड़ी प्राथमिक चाँदी खदान मानी जाती है; इस खदान से वार्षिक चाँदी उत्पादन ७०० टन से अधिक रहा है।
  10. राजस्थान भारत के गार्नेट उत्पादन का लगभग ९०-९५% हिस्सा देता है, जिससे भारत विश्व के शीर्ष तीन गार्नेट निर्यातकों में आता है।
  11. राजस्थान खनिज नीति २०२४ का लक्ष्य २०४७ तक खनित खनिजों की संख्या ५८ से बढ़ाकर ७० करना और २०४६-४७ तक १ करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार देना है।
  12. जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट ने खनन-प्रभावित क्षेत्रों में कल्याण कार्यों के लिए दिसंबर २०२५ तक ₹९,३९३.३८ करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियाँ जारी कीं; खर्च ₹५,९२७.८४ करोड़ हो चुका है। पुराने २०२४-२५ संदर्भ में स्वीकृति ₹७,९५२.७४ करोड़ और खर्च ₹५,०८५.९० करोड़ था।
  13. राजस्थान की अरावली श्रृंखला प्राथमिक धातुजनक पट्टी है; यही जस्ता, सीसा, ताँबा, चाँदी और लौह अयस्क का प्रमुख स्रोत है।
  14. मकराना (नागौर) का संगमरमर, जो ताजमहल में प्रयुक्त हुआ, प्रीमियम डोलोमिटिक संगमरमर है; राजस्थान भारत का शीर्ष संगमरमर उत्पादक है।
  15. राजस्थान बाड़मेर-सांचोर बेसिन से भारत के कच्चे तेल उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है; आर्थिक समीक्षा २०२५-२६ के अनुसार राज्य भारत के कुल कच्चे तेल उत्पादन का लगभग १२% देता है, जिसका उत्पादन लगभग ३.४२ एमएमटीपीए है।