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मुख्य बिंदु
- राजस्थान में खनिज संसाधनों का आधार बहुत व्यापक है: राज्य में लगभग ८२ प्रकार के खनिज मिलते हैं और २०२५-२६ तक ५७ खनिजों का व्यावसायिक उत्पादन हो रहा है।
- राजस्थान भारत में सीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट और वोलेस्टोनाइट का एकमात्र उत्पादक माना जाता है; आर्थिक समीक्षा २०२५-२६ में कैल्साइट और जिप्सम को भी राज्य की विशिष्ट अग्रणी स्थिति से जोड़ा गया है।
- राज्य चाँदी, कैल्साइट, जिप्सम, बॉल क्ले, फॉस्फोराइट, गेरू, स्टीटाइट, फेल्सपार, संगमरमर, ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर जैसे औद्योगिक खनिजों में राष्ट्रीय स्तर पर बहुत मजबूत स्थिति रखता है।
- खान एवं भूविज्ञान विभाग का २०२५-२६ राजस्व लक्ष्य ₹१२,९८० करोड़ है; दिसंबर २०२५ तक ₹६,८५७.९७ करोड़ संग्रह हो चुका है। पुराने २०२४-२५ संदर्भ में यही मद ₹९,५०० करोड़ लक्ष्य और दिसंबर २०२४ तक ₹६,३४०.८५ करोड़ संग्रह के रूप में पढ़ी जाती थी, इसलिए उत्तर में वर्ष स्पष्ट लिखना जरूरी है।
- आर्थिक समीक्षा २०२५-२६ के अनुसार राज्य में ३,३९५ प्रमुख खनिज खनन पट्टे, १३,४२८ लघु खनिज पट्टे और १६,०५८ खदान लाइसेंस हैं; राजस्थान खनिज नीति २०२४ की पृष्ठभूमि में १४८ प्रमुख, १६,८१७ लघु पट्टे और १७,४५४ लाइसेंस दिए गए थे, इसलिए परीक्षा में स्रोत-वर्ष देखकर आँकड़ा लिखें।
- राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड ने वित्त वर्ष २०२४-२५ में ₹१,७२६.०३ करोड़ का अनऑडिटेड सकल राजस्व और ₹६५८.२२ करोड़ करपूर्व लाभ अर्जित किया। इसकी ४ रणनीतिक व्यावसायिक इकाइयाँ हैं: रॉक फॉस्फेट (झामरकोटड़ा), जिप्सम (बीकानेर), चूना पत्थर (जोधपुर) और लिग्नाइट (जयपुर)।
- झामरकोटड़ा (उदयपुर) लगभग २० करोड़ टन भंडार वाली भारत की सबसे बड़ी रॉक फॉस्फेट खदान है।
- ज़ावर खदानें (उदयपुर) भारत की प्राथमिक सीसा-जस्ता खनन पहचान का केंद्र हैं, जिनका संचालन हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और वेदांता समूह से जुड़ा है।
- सिंदेसर खुर्द (राजसमंद) भारत की सबसे बड़ी प्राथमिक चाँदी खदान मानी जाती है; इस खदान से वार्षिक चाँदी उत्पादन ७०० टन से अधिक रहा है।
- राजस्थान भारत के गार्नेट उत्पादन का लगभग ९०-९५% हिस्सा देता है, जिससे भारत विश्व के शीर्ष तीन गार्नेट निर्यातकों में आता है।
- राजस्थान खनिज नीति २०२४ का लक्ष्य २०४७ तक खनित खनिजों की संख्या ५८ से बढ़ाकर ७० करना और २०४६-४७ तक १ करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार देना है।
- जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट ने खनन-प्रभावित क्षेत्रों में कल्याण कार्यों के लिए दिसंबर २०२५ तक ₹९,३९३.३८ करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियाँ जारी कीं; खर्च ₹५,९२७.८४ करोड़ हो चुका है। पुराने २०२४-२५ संदर्भ में स्वीकृति ₹७,९५२.७४ करोड़ और खर्च ₹५,०८५.९० करोड़ था।
- राजस्थान की अरावली श्रृंखला प्राथमिक धातुजनक पट्टी है; यही जस्ता, सीसा, ताँबा, चाँदी और लौह अयस्क का प्रमुख स्रोत है।
- मकराना (नागौर) का संगमरमर, जो ताजमहल में प्रयुक्त हुआ, प्रीमियम डोलोमिटिक संगमरमर है; राजस्थान भारत का शीर्ष संगमरमर उत्पादक है।
- राजस्थान बाड़मेर-सांचोर बेसिन से भारत के कच्चे तेल उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है; आर्थिक समीक्षा २०२५-२६ के अनुसार राज्य भारत के कुल कच्चे तेल उत्पादन का लगभग १२% देता है, जिसका उत्पादन लगभग ३.४२ एमएमटीपीए है।
