मुख्य तथ्य

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशासन में उन मशीन-लर्निंग प्रणालियों को कहते हैं जो डेटा विश्लेषण कर कल्याण लाभार्थी चयन से लेकर न्यायिक जोखिम-स्कोर तक निर्णय-अ…
  • विवेक वह नैतिक क्षमता है जो मनुष्य को किसी कार्य को उचित/अनुचित जानने देती है;
  • मूल तनाव एल्गोरिदम की कुशलता (गति, एकरूपता) और नैतिक स्वायत्तता (संदर्भगत निर्णय, करुणा) के बीच है: AI अतीत के पैटर्न के आधार पर काम करता है;
  • एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह तब होता है जब ऐतिहासिक डेटा पर प्रशिक्षित AI मौजूदा भेदभाव को जारी रखता है
  • व्याख्येयता (XAI) का अर्थ है कि नागरिकों और अधिकारियों को यह पता होना चाहिए कि AI ने कोई सिफारिश क्यों की;

मुख्य बिंदु

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    कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशासन में उन मशीन-लर्निंग प्रणालियों को कहते हैं जो डेटा विश्लेषण कर कल्याण लाभार्थी चयन से लेकर न्यायिक जोखिम-स्कोर तक निर्णय-अनुशंसाएँ उत्पन्न करती हैं।

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    विवेक वह नैतिक क्षमता है जो मनुष्य को किसी कार्य को उचित/अनुचित जानने देती है; यह तर्क, सहानुभूति और जीवन-अनुभव को एकीकृत कर नैतिक प्रशासन का आधार बनती है।

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    मूल तनाव एल्गोरिदम की कुशलता (गति, एकरूपता) और नैतिक स्वायत्तता (संदर्भगत निर्णय, करुणा) के बीच है: AI अतीत के पैटर्न के आधार पर काम करता है; विवेक नई नैतिक स्थितियों में भी उत्तर दे सकता है।

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    एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह तब होता है जब ऐतिहासिक डेटा पर प्रशिक्षित AI मौजूदा भेदभाव को जारी रखता है — जैसे पूर्वानुमानित पुलिसिंग जो विशेष समुदायों को अनुचित रूप से लक्षित करे।

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    व्याख्येयता (XAI) का अर्थ है कि नागरिकों और अधिकारियों को यह पता होना चाहिए कि AI ने कोई सिफारिश क्यों की; ब्लैक-बॉक्स निर्णय नैसर्गिक न्याय और तर्कसंगत आदेश के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।

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    जवाबदेही अंतराल: जब AI की गलत सिफारिश से नुकसान हो, जिम्मेदारी अस्पष्ट हो जाती है — एल्गोरिदम डिज़ाइनर, खरीद विभाग, या अनुमोदन अधिकारी? मानवीय विवेक में नैतिक जिम्मेदारी की जगह हमेशा स्पष्ट होती है।

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    नैतिक स्वायत्तता बनाम स्वचालन: कांट के निरपेक्ष आदेश के अनुसार नैतिक कर्ता सार्वभौम नियमों से कर्तव्यपरायण होते हैं; AI प्रणाली कांटीय नैतिक कर्ता नहीं हो सकती — उसमें इच्छाशक्ति, कर्तव्यबोध और स्वतंत्र चयन का अभाव है।

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    कल्याण वितरण और AI: भारत का आधार से जुड़ा DBT एल्गोरिदम से लाभार्थी चुनता है; इससे रिसाव कम होता है, किंतु गलत बहिष्करण असली लाभार्थियों को वंचित कर सकता है — इसलिए मानवीय ओवरराइड जरूरी है।

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    मानव-नियंत्रण सिद्धांत: बड़े दाँव वाले प्रशासनिक निर्णयों (अधिकार छीनना, लाभ बंद करना) में मानव विवेक ही अंतिम निर्णयकर्ता होना चाहिए; AI सिफारिश कर सकता है, शासन नहीं।

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    भारत के AI शासन कदम: नीति आयोग का "सबके लिए जिम्मेदार AI" (2021) ढांचा; MeitY की राष्ट्रीय AI रणनीति; G20 और GPAI में नैतिक AI को लेकर भारत का रुख; सार्वजनिक सेवाओं में AI के उपयोग को विनियमित करने के लिए प्रस्तावित डिजिटल इंडिया एक्ट।

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    करुणा की कमी: AI सूखाग्रस्त किसान की पीड़ा महसूस नहीं कर सकता; विवेक अधिकारियों को करुणापूर्ण बनाता है जो नौकरशाही को यांत्रिक से मानवीय बनाता है।

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    आनुपातिकता और संदर्भगत नैतिकता: विवेक आपस में टकराते नैतिक दावों को तौल सकता है — जनजातीय वन अधिकार बनाम खनन रियायत; AI तो केवल उसी निर्धारित लक्ष्य के हिसाब से काम करता है जिसके लिए उसे बनाया गया है।

प्रशासनिक निर्णयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता बनाम विवेक क्यों पूछा जा सकता है?

प्रशासनिक निर्णयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता बनाम विवेक इसलिए पूछा जा सकता है क्योंकि यह आरपीएससी २०२६ मुख्य परीक्षा के नए पाठ्यक्रम में नैतिकता, तकनीकी शासन और लोक प्रशासन को एक साथ जोड़ने वाला सीधा विषय है। आरपीएससी की ०९/०१/२०२६ वाली आधिकारिक पाठ्यक्रम सूची में २०२६ मुख्य परीक्षा के लिए योजना और मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम अलग-अलग जारी किए गए हैं।

विषय ६४ आरपीएससी २०२६ मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम में एक नई प्रविष्टि के रूप में स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध है और २०२१ तथा २०२३ दोनों में इसके अंक शून्य थे — जिससे यह २०२६ में आने की प्रबल संभावना वाला प्रश्न बन जाता है। यह विषय नैतिकता, प्रौद्योगिकी शासन और लोक प्रशासन के संगम पर स्थित है। यह परीक्षार्थी की उस क्षमता का परीक्षण करता है कि वह राज्य शक्ति के प्रयोग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों की मानवीय नैतिक निर्णय-क्षमता के विकल्प, पूरक या विरोधाभासी भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कर सके।

यह प्रश्न केवल सैद्धांतिक नहीं है। भारत सक्रिय रूप से शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर रहा है: कल्याण के लिए आधार-आधारित प्रमाणीकरण, रेलवे स्टेशनों पर चेहरा-पहचान, पूर्वानुमानित पुलिसिंग उपकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सहायक कर जाँच। आरएएस अधिकारियों को ऐसी दुनिया विरासत में मिलेगी जहाँ एल्गोरिदम महत्वपूर्ण सार्वजनिक निर्णयों को सूचित करेंगे — और कभी-कभी वे निर्णय लेंगे भी। आरपीएससी परीक्षक संभवतः ५-अंक का प्रश्न पूछेंगे जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता के योगदान और उसकी सीमाओं को समझाना होगा, या १०-अंक का प्रश्न जिसमें आलोचनात्मक नैतिक विश्लेषण माँगा जाएगा।

परीक्षा रणनीति: इस विषय को तीन दृष्टिकोणों से समझें — (क) कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्या प्रदान करती है, जैसे कुशलता, एकरूपता और पैमाना; (ख) कृत्रिम बुद्धिमत्ता में क्या कमी है, जैसे विवेक, सहानुभूति और संदर्भ देखकर नैतिक निर्णय; (ग) एक जिम्मेदार नैतिक ढाँचा कैसा दिखना चाहिए, जैसे मानव-इन-द-लूप, व्याख्येयता, जवाबदेही और आनुपातिकता।


संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह क्या है? लोक प्रशासन से संबंधित एक उदाहरण दीजिए। 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह तब होता है जब ऐतिहासिक भेदभाव-डेटा पर प्रशिक्षित AI प्रणाली विशेष समूहों के लिए अनुचित परिणाम देती है। उदाहरण: यदि कल्याण लाभार्थी-चयन एल्गोरिदम पुराने डेटा पर आधारित हो जहाँ जनजातियाँ कम गिनी गई थीं, तो वह पात्र आदिवासियों को बाहर करता रहेगा — ऐतिहासिक अन्याय को गणितीय रूप से जारी रखते हुए।

~50 शब्द • 5 अंक