उदार समाज: पारदर्शिता, मीडिया एवं नौकरशाही
मुख्य तथ्य
- भारत का सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 हर नागरिक को 30 दिनों में (जीवन/स्वतंत्रता मामलों में 48 घंटे) सार्वजनिक प्राधिकरण के अभिलेख प्राप्त करने का अधिक...
- उदार समाज में व्हिसलब्लोअर संरक्षण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है
- खुली सरकार ढाँचे (OGP की स्थापना 2011 में हुई; भारत इसका राष्ट्रीय सदस्य नहीं है) सक्रिय प्रकटीकरण को बढ़ावा देते हैं
- राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच तनाव उदार लोकतंत्रों में बार-बार उभरता है — RTI की धारा 8 के अपवाद संकुचित और न्यायिक समीक्षा योग्य होने चाहिए।
- स्वैच्छिक प्रकटीकरण (RTI 2005 की धारा 4) हर सार्वजनिक प्राधिकरण को 17 श्रेणियों की जानकारी स्वेच्छा से वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश देता है
मुख्य बिंदु
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उदार समाज चार स्तंभों पर टिका है: व्यक्तिगत स्वतंत्रता, विधि का शासन, सीमित सरकार, और बहुलवाद; राज्य नागरिकों की सेवा के लिए है, न कि इसके उलट।
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शासन में पारदर्शिता का अर्थ है कि नागरिकों को यह जानने का वैध अधिकार है कि निर्णय कैसे लिए जाते हैं, सार्वजनिक धन कैसे खर्च होता है — यह मनमानेपन और भ्रष्टाचार का प्रतिरोधक है।
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भारत का सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 हर नागरिक को 30 दिनों में (जीवन/स्वतंत्रता मामलों में 48 घंटे) सार्वजनिक प्राधिकरण के अभिलेख प्राप्त करने का अधिकार देता है; प्रतिवर्ष ~60 लाख आवेदन।
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स्वतंत्र प्रेस उदार लोकतंत्र में "चौथी संपदा" है — खोजी पत्रकारिता, भ्रष्टाचार उजागर करने और सत्ता को जवाबदेह ठहराने का कार्य करता है; RSF विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक वार्षिक माप है।
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मीडिया नैतिकता सटीकता, निष्पक्षता, स्वतंत्रता और जवाबदेही की मांग करती है; खतरे हैं — पेड न्यूज़ (संपादकीय पर कब्जा), फर्जी खबर (भ्रामक सूचना), और मीडिया का संकेंद्रण (कुछ ही हाथों में स्वामित्व, विविधता में कमी)।
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उदार समाज में नौकरशाही जवाबदेही कई माध्यमों से होती है: विधायी जाँच (प्रश्नकाल, PAC), न्यायिक समीक्षा (रिट, PIL), कार्यकारी निरीक्षण (लोकपाल, ACB), और नागरिक तंत्र (RTI, शिकायत पोर्टल)।
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उदार समाज में व्हिसलब्लोअर संरक्षण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है — व्हिसलब्लोअर संरक्षण अधिनियम 2014 को लागू नहीं किया गया है; केंद्रीय स्तर पर प्रकटीकरण जनहित प्रकटीकरण और सूचना-संरक्षक संकल्प 2004 के तहत केंद्रीय सतर्कता आयोग के माध्यम से जारी हैं। इसके बिना आंतरिक जवाबदेही ध्वस्त हो जाती है।
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खुली सरकार ढाँचे (OGP की स्थापना 2011 में हुई; भारत इसका राष्ट्रीय सदस्य नहीं है) सक्रिय प्रकटीकरण को बढ़ावा देते हैं — खुले डेटा पोर्टल, बजट पारदर्शिता और सामाजिक लेखापरीक्षण के ज़रिए नागरिकों के RTI आवेदन का इंतज़ार किए बिना।
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राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच तनाव उदार लोकतंत्रों में बार-बार उभरता है — RTI की धारा 8 के अपवाद संकुचित और न्यायिक समीक्षा योग्य होने चाहिए।
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सोशल मीडिया ने सूचना तक पहुँच को सबके लिए खोल दिया, पर इसने दुष्प्रचार के पूरे तंत्र को भी पनपने दिया — डीप फेक और एल्गोरिदम से बने सूचना-बुलबुले उदार समाज की सोच-विचार वाली लोकतांत्रिक बहस को नुकसान पहुँचाते हैं; डिजिटल साक्षरता और प्लेटफॉर्म पर निगरानी अब नई नैतिक ज़रूरतें बन गई हैं।
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स्वैच्छिक प्रकटीकरण (RTI 2005 की धारा 4) हर सार्वजनिक प्राधिकरण को 17 श्रेणियों की जानकारी स्वेच्छा से वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश देता है — राज्य और नागरिक के बीच सूचना असमानता कम करता है।
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उदार समाज में नौकरशाही को राजनीतिक तटस्थता (वेस्टमिंस्टर परंपरा) और निर्वाचित सरकार के प्रति उत्तरदायिता के बीच संतुलन बनाना होता है; योग्यता-आधारित भर्ती और सेवा नियम इस संतुलन की गारंटी देते हैं।
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RAS में उदार समाज, पारदर्शिता, मीडिया और नौकरशाही क्यों पढ़ना है?
RAS में उदार समाज, पारदर्शिता, मीडिया और नौकरशाही इसलिए पढ़ना है क्योंकि यह विषय संविधान, प्रशासनिक नैतिकता और रोज़मर्रा के शासन में जवाबदेही को एक साथ जोड़ता है। टॉपिक 60 RPSC 2026 पाठ्यक्रम में एक नया और रणनीतिक समावेश है — यह पहले के किसी परीक्षा में नहीं पूछा गया है, इसलिए 2026 में इसके पूछे जाने की उच्च संभावना है। यह टॉपिक राजनीतिक दर्शन, प्रशासनिक नैतिकता और समकालीन शासन की चुनौतियों के संगम पर स्थित है।
RPSC मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों में हर प्रश्नपत्र 200 अंक और 3 घंटे का है; इसलिए यह टॉपिक छोटा दिखते हुए भी 5 या 10 अंक के नैतिक-प्रशासनिक उत्तर में निर्णायक बन सकता है।
उदार-लोकतांत्रिक ढाँचा भारत की संवैधानिक आधारशिला है — अनुच्छेद 19 यानी वाक् स्वतंत्रता और प्रेस स्वतंत्रता, अनुच्छेद 21 यानी जीवन और स्वतंत्रता, और अनुच्छेद 12 से 35 यानी मौलिक अधिकार उदार सिद्धांतों को मूर्त रूप देते हैं। उदार समाज में प्रशासनिक नैतिकता केवल व्यक्तिगत सद्गुण के बारे में नहीं है, बल्कि संरचनात्मक जवाबदेही के बारे में है — ऐसी संस्थाओं का निर्माण जो मनमानेपन को नियंत्रित करें और यह सुनिश्चित करें कि सत्ता का प्रयोग सार्वजनिक हित में हो।
RAS अधिकारियों के लिए यह टॉपिक क्यों महत्त्वपूर्ण है: राजस्थान के राज्य अधिकारी एक ऐसे संवैधानिक ढाँचे में कार्य करते हैं जो पारदर्शिता, RTI के तहत सक्रिय प्रकटीकरण, मीडिया तक पहुँच, प्रेस ब्रीफिंग, प्रेस कॉन्फ्रेंस, सार्वजनिक जवाबदेही, मनरेगा के तहत सामाजिक अंकेक्षण और नागरिकों द्वारा RTI आवेदन की माँग करता है। उदार समाज के सिद्धांतों को समझना अधिकारियों को बेहतर पेशेवर बनाता है, क्योंकि वे नागरिक को याचक नहीं बल्कि अधिकार-धारक मानना सीखते हैं।
परीक्षा-दृष्टि से इस टॉपिक का उपयोग तीन जगह होगा। पहला, परिभाषात्मक उत्तर में — उदार समाज क्या है, पारदर्शिता क्या है, मुक्त प्रेस क्यों ज़रूरी है। दूसरा, प्रशासनिक नैतिकता में — अधिकारी सूचना छिपाए या नागरिक को उपलब्ध कराए, मीडिया को बाधा माने या साझेदार माने, गलती दबाए या स्वीकार करे। तीसरा, राजस्थान उदाहरण में — मज़दूर किसान शक्ति संगठन, जन सुनवाई, बेआवर अभियान, सामाजिक अंकेक्षण, जन सूचना पोर्टल और ई-मित्र जैसे स्थानीय उदाहरण उत्तर को सामान्य सैद्धांतिक उत्तर से अलग बनाते हैं।
इसलिए इस अध्याय को रटने वाला नहीं, जोड़ने वाला अध्याय मानें। संविधान से अधिकार मिलते हैं, पारदर्शिता से नागरिक उन्हें जाँच पाते हैं, मीडिया से सूचना सार्वजनिक बहस में आती है और जवाबदेह नौकरशाही से सेवा वितरण भरोसेमंद बनता है। यही धागा उत्तर में बार-बार दिखना चाहिए।
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अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
15Mशासन में पारदर्शिता से क्या अभिप्राय है? भारत में इसे सुनिश्चित करने के दो तंत्रों के नाम बताइए।
मॉडल उत्तर
शासन में पारदर्शिता का अर्थ है — नागरिकों को यह जानने का अधिकार कि निर्णय और सार्वजनिक धन कैसे उपयोग हुए। दो तंत्र: (1) RTI अधिनियम 2005 — 30 दिनों में सरकारी अभिलेख; वार्षिक ~60 लाख आवेदन। (2) सामाजिक अंकेक्षण — MGNREGS व्यय की समुदाय जाँच; MKSS राजस्थान द्वारा प्रवर्तित।
~50 शब्द · 5 अंक
