वृद्धि एवं विकास की अवधारणाएँ, मानव विकास सूचकांक, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण निम्नीकरण
मुख्य तथ्य
- - चालू भाव पर GDP: ₹324.11 लाख करोड़ - वास्तविक GDP वृद्धि दर: 6.4% (2024–25) - लगातार तीसरे वर्ष विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था
- - UNDP द्वारा 1990 से प्रतिवर्ष प्रकाशित — तीन आयाम: जीवन प्रत्याशा, शिक्षा (औसत + अपेक्षित स्कूली वर्ष), GNI प्रति व्यक्ति (PPP)
- सतत विकास — ब्रुंटलैंड आयोग (1987): "वर्तमान की जरूरतें पूरी करे, बिना भावी पीढ़ियों से समझौता किए"
- - 2030 तक GDP उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी (2005 स्तर से) — 2030 तक 50% संचयी विद्युत शक्ति गैर-जीवाश्म स्रोतों से
- - भारत ने अक्टूबर 2016 में अनुमोदित किया — वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2°C से काफी नीचे सीमित रखने का लक्ष्य; 1.5°C का प्रयास
मुख्य बिंदु
- 1
- आर्थिक वृद्धि GDP/GNP में मात्रात्मक बढ़ोतरी है
- आर्थिक विकास व्यापक है — संरचनात्मक बदलाव, बेहतर जीवन स्तर, मानव कल्याण
- वृद्धि विकास के लिए जरूरी पर पर्याप्त नहीं है
- 2
- चालू भाव पर GDP: ₹324.11 लाख करोड़
- वास्तविक GDP वृद्धि दर: 6.4% (2024–25)
- लगातार तीसरे वर्ष विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था
- 3
- UNDP द्वारा 1990 से प्रतिवर्ष प्रकाशित
- तीन आयाम: जीवन प्रत्याशा, शिक्षा (औसत + अपेक्षित स्कूली वर्ष), GNI प्रति व्यक्ति (PPP)
- HDI 2023 में भारत 193 में से 134वें स्थान पर (मान: 0.644) — "मध्यम मानव विकास"
- 4
सतत विकास
- ब्रुंटलैंड आयोग (1987): "वर्तमान की जरूरतें पूरी करे, बिना भावी पीढ़ियों से समझौता किए"
- भारत ने सितम्बर 2015 में 17 सतत विकास लक्ष्यों वाले एजेंडा 2030 को अपनाया
- 5
- 2030 तक GDP उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी (2005 स्तर से)
- 2030 तक 50% संचयी विद्युत शक्ति गैर-जीवाश्म स्रोतों से
- वन आवरण के जरिए 2.5–3 अरब टन CO₂ समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक
- 6
- भारत ने अक्टूबर 2016 में अनुमोदित किया
- वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2°C से काफी नीचे सीमित रखने का लक्ष्य; 1.5°C का प्रयास
- भारत 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य
- 7
- वनों की कटाई: ~1.5 लाख हेक्टेयर/वर्ष
- मृदा क्षरण: कुल भूमि क्षेत्र का 32% अवक्रमित
- भूजल ह्रास: 21 राज्यों में जल-संकट जिले
- वायु प्रदूषण: विश्व के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में
- 8
- PM मोदी द्वारा COP26 (नवम्बर 2021) में शुरू
- जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए सोच-समझकर उपभोग को बढ़ावा देने वाला वैश्विक आंदोलन
- 2022 में औपचारिक कार्यक्रम के रूप में शुरू हुआ
- 9
- अमर्त्य सेन की क्षमता दृष्टिकोण और महबूब उल हक का HDI ढांचा (1990) ने विमर्श को आय-केंद्रित से मानव-केंद्रित किया
- बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) — UNDP-OPHI द्वारा प्रकाशित
- 3 आयामों में 10 संकेतकों पर गरीबी मापता है (स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर)
- 10
- पारंपरिक GDP से संसाधन क्षरण और प्रदूषण क्षति घटाकर पर्यावरण लागतों को ध्यान में लेती है
- भारत का ENVIS (पर्यावरण सूचना प्रणाली) और NSO प्राकृतिक पूंजी लेखांकन ढांचा विकसित कर रहे हैं
- 11
- सौर क्षमता: 89.9 गीगावॉट (मार्च 2025)
- कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता: 220 गीगावॉट से अधिक (अप्रैल 2025)
- FAME इंडिया चरण-2 (2019) इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (2023): 2030 तक 5 एमएमटीपीए हरित हाइड्रोजन लक्ष्य
- 12
- 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012–17) की थीम
- वृद्धि के लाभ सभी वर्गों तक — विशेषकर गरीब, हाशिए पर और ग्रामीण लोगों तक
- नीति आयोग का SDG इंडिया सूचकांक (वार्षिक) सभी 17 SDG पर राज्यवार प्रगति ट्रैक करता है
परिचय एवं संदर्भ
आर्थिक वृद्धि, आर्थिक विकास, मानव विकास सूचकांक, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण निम्नीकरण को साथ पढ़ना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि परीक्षा में विकास को केवल आय नहीं, बल्कि जीवन-स्तर, अवसर, संसाधन-सुरक्षा और जलवायु न्याय से जोड़कर पूछा जाता है। आर्थिक वृद्धि और विकास किसी भी अर्थशास्त्र परीक्षा की आधारभूत अवधारणाएँ हैं। यद्यपि ये दोनों शब्द दैनिक भाषा में प्रायः एक-दूसरे के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं, किन्तु आर्थिक सिद्धांत में इनके अर्थ भिन्न हैं। RPSC परीक्षकों ने इस अंतर (२०२१, २ अंक) और इसके पर्यावरणीय आयाम (२०२३, राष्ट्रीय निर्धारित योगदान पर १० अंक) को विशेष रूप से परखा है।
UNDP की मानव विकास रिपोर्ट २०२५ के अनुसार २०२३ आँकड़ों पर भारत का मानव विकास सूचकांक मान ०.६८५ था और भारत १९३ देशों में १३०वें स्थान पर था। यह आँकड़ा उत्तर-लेखन में सीधे काम आता है, क्योंकि इससे साफ़ होता है कि तेज़ आर्थिक वृद्धि के बावजूद भारत अभी भी “मध्यम मानव विकास” श्रेणी में है।
विषय २२ चार परस्पर संबद्ध विषयों पर विस्तृत है:
- वृद्धि और विकास के बीच वैचारिक अंतर
- मानव विकास का मापन (मानव विकास सूचकांक और संबद्ध सूचकांक)
- भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएँ और नीति ढांचा
- पर्यावरण निम्नीकरण की समस्या
२०२६ परीक्षा के लिए यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है
भारत की आर्थिक यात्रा इस विषय को विशेष रूप से प्रासंगिक बनाती है। भारत एक साथ उच्च-वृद्धि अर्थव्यवस्था (लगभग ६–७% वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि) और UNDP द्वारा “मध्यम मानव विकास” वर्गीकृत देश है — यह दर्शाता है कि वृद्धि अकेले विकास की गारंटी नहीं देती। भारत प्रमुख उत्सर्जक (चीन और अमेरिका के बाद तीसरा) और जलवायु परिवर्तन का अग्रिम पंक्ति का शिकार दोनों है, जो बढ़ते तापमान, अनियमित मानसून और तटीय बाढ़ का सामना करता है।
इन पर प्रश्न की अपेक्षा करें:
- भारत के अपडेटेड राष्ट्रीय निर्धारित योगदान लक्ष्य
- सकल घरेलू उत्पाद और मानव विकास सूचकांक के बीच अंतर
- पेरिस समझौता और भारत की शुद्ध-शून्य प्रतिबद्धता
- हरित अर्थव्यवस्था की अवधारणाएँ
- सतत विकास लक्ष्य — विशेषकर भारत की रैंकिंग और कार्यान्वयन ढांचा
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M HDI क्या है? इसके तीन घटक और भारत की वर्तमान रैंक बताइए।
आदर्श उत्तर
मानव विकास सूचकांक (HDI), जिसे महबूब उल हक और UNDP ने 1990 में विकसित किया, तीन आयामों पर विकास मापता है: (1) स्वास्थ्य — जन्म के समय जीवन प्रत्याशा; (2) शिक्षा — औसत और अपेक्षित स्कूली वर्ष; (3) जीवन स्तर — GNI प्रति व्यक्ति (PPP)। भारत 0.644 HDI मान (2023) के साथ 193 देशों में 134वें स्थान पर है, "मध्यम मानव विकास" श्रेणी में।
~50 शब्द • 5 अंक
जो पहला बंद टॉपिक आप खोलेंगे, वह आपका रहेगा; बाकी के लिए स्टडी पैक या पूरा कोर्स चाहिए।
