स्वतंत्रता के बाद भारत: रियासतों का विलय, भाषाई पुनर्गठन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास, महिला सशक्तिकरण
मुख्य तथ्य
- स्वतंत्रता के समय भारत में 562 रियासतें थीं — ये देश के लगभग 48% क्षेत्र और 33% जनसंख्या में फैली हुई थीं
- हैदराबाद सबसे बड़ी रियासत (82,000 वर्ग मील) था और उसने विलय से इनकार किया — भारत ने 13–17 सितम्बर 1948 को ऑपरेशन पोलो (पुलिस एक्शन) चलाया
- जूनागढ़ (काठियावाड़, गुजरात) में हिंदू बहुल आबादी थी — नवाब ने सितम्बर 1947 में पाकिस्तान से विलय किया
- महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए — पाकिस्तानी कबायली आक्रमण के बाद यह निर्णय लिया गया
- फज़ल अली आयोग, 1953 के आधार पर बना — भाषाई आधार पर 14 राज्य और 6 केंद्रशासित प्रदेश बनाए — भारत के आंतरिक मानचित्र का सबसे बड़ा पुनर्रेखांकन
मुख्य बिंदु
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स्वतंत्रता के समय भारत में 562 रियासतें थीं
- ये देश के लगभग 48% क्षेत्र और 33% जनसंख्या में फैली हुई थीं
- सरदार वल्लभभाई पटेल (V.P. मेनन के साथ) ने एकीकरण का नेतृत्व किया
- अधिकांश रियासतें विलय-पत्र के ढाँचे से सितम्बर 1947 तक एकीकृत हुईं
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हैदराबाद सबसे बड़ी रियासत (82,000 वर्ग मील) था और उसने विलय से इनकार किया
- भारत ने 13–17 सितम्बर 1948 को ऑपरेशन पोलो (पुलिस एक्शन) चलाया
- निज़ाम की रज़ाकार मिलिशिया को 108 घंटे में हराया गया
- हैदराबाद भारतीय संघ में शामिल हुआ
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जूनागढ़ (काठियावाड़, गुजरात) में हिंदू बहुल आबादी थी
- नवाब ने सितम्बर 1947 में पाकिस्तान से विलय किया
- भारत ने जनमत संग्रह (99.95% भारत समर्थन) के बाद नवम्बर 1947 में कब्जा लिया
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महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए
- पाकिस्तानी कबायली आक्रमण के बाद यह निर्णय लिया गया
- भारत की श्रीनगर एयरलिफ्ट ने घाटी सुरक्षित की
- जनवरी 1948 में मामला UN को भेजा गया
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फज़ल अली आयोग, 1953 के आधार पर बना
- भाषाई आधार पर 14 राज्य और 6 केंद्रशासित प्रदेश बनाए
- भारत के आंतरिक मानचित्र का सबसे बड़ा पुनर्रेखांकन
- ब्रिटिश प्रांतों और रियासती क्षेत्रों को भाषा-आधारित राज्यों में रूपांतरित किया
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आंध्र प्रदेश भाषाई आधार पर बना पहला राज्य था
- 1 अक्टूबर 1953 को मद्रास राज्य से अलग हुआ
- पोट्टी श्रीरामुलु ने तेलुगु राज्य की माँग पर अनशन कर प्राण त्यागे
- उनकी मृत्यु ने राज्य पुनर्गठन आयोग गठन को अनिवार्य बना दिया
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प्रधानमंत्री नेहरू के नेतृत्व में तैयार; लोगों के कल्याण के लिए विज्ञान को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता
- नेहरू ने आईआईटी (खड़गपुर 1951), एम्स दिल्ली (1956), आईआईएम कलकत्ता/अहमदाबाद (1961) स्थापित किए
- परमाणु कार्यक्रम संस्थाएँ भी इसी दृष्टि के अंतर्गत बनाई गईं
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पोखरण-I (ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्ध), 18 मई 1974 — भारत परमाणु उपकरण विस्फोट करने वाला छठा देश बना
- PM वाजपेयी के नेतृत्व में पोखरण-II (ऑपरेशन शक्ति), 11–13 मई 1998 में पाँच परीक्षण हुए
- भारत परमाणु हथियार सम्पन्न राज्य घोषित हुआ
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संविधान ने अनुच्छेद 14, 15, 16 में समानता की गारंटी दी
- हिंदू कोड बिल (1955–56) — चार अधिनियमों ने महिलाओं की कानूनी स्थिति बदली
- विवाह, उत्तराधिकार और संरक्षकता में अधिकार मिले
- संसद में तीव्र विरोध के बावजूद पारित हुए
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1966 में भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं
- तीन कार्यकाल (1966–77, 1980–84) तक पद पर रहीं
- 1971 भारत-पाक युद्ध (बांग्लादेश निर्माण) में विजय का नेतृत्व किया
- 20वीं सदी की सबसे शक्तिशाली नेताओं में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त
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73वें और 74वें संवैधानिक संशोधन (1992) ने पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित कीं
- जमीनी स्तर पर 10 लाख से अधिक निर्वाचित महिलाओं को मजबूत ढाँचागत ताकत मिली
- राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण नीति (2001) और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (2015) इस दिशा के बड़े नीतिगत कदम रहे
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में 33% सीटें आरक्षित करता है
- अगली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा
- अपेक्षित कार्यान्वयन: 2026–27
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PM इंदिरा गाँधी और कृषि-वैज्ञानिक M.S. स्वामीनाथन के नेतृत्व में
- उच्च उपज वाली गेहूँ बीज (सोनोरा 64) प्रवेश किए
- गेहूँ उत्पादन 11 MT (1966) से 31 MT (1972) तक तीन गुना हुआ
- पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी UP भारत के अन्न-भंडार बने
स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी राष्ट्रीय चुनौतियाँ क्या थीं?
स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी राष्ट्रीय चुनौतियाँ थीं — रियासतों को भारतीय संघ में जोड़ना, भाषा-आधारित राज्य माँगों को सँभालना, विज्ञान-प्रौद्योगिकी की बुनियाद बनाना और महिलाओं को संवैधानिक-कानूनी बराबरी देना। आरपीएससी के आधिकारिक मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार मुख्य परीक्षा में ४ प्रश्न-पत्र होते हैं और हर प्रश्न-पत्र २०० अंक का होता है; इसलिए “स्वतंत्रता के बाद भारत” वाला यह अध्याय छोटे तथ्य नहीं, पूरे उत्तर-लेखन की रीढ़ बन सकता है।
स्वतंत्रता का विरोधाभास
१५ अगस्त १९४७ को सत्ता का हस्तांतरण भारत के लिए एक विरोधाभास लेकर आया: औपचारिक राजनीतिक संप्रभुता मिल गई, पर नए राष्ट्र का मानचित्र एक पच्चीकारी जैसा था। ब्रिटिश भारत के प्रांतों, जो प्रत्यक्ष क्राउन शासन के अधीन थे, के साथ-साथ ५६२ रियासतें भी थीं। ये रियासतें आकार, जनसंख्या, प्रशासन और विकास के स्तर में बहुत अलग-अलग थीं।
सबसे बड़ी रियासतें — हैदराबाद, मैसूर, त्रावणकोर, जोधपुर, जयपुर, बीकानेर और बड़ौदा — परिष्कृत प्रशासन रखती थीं। सबसे छोटी रियासतें केवल कुछ वर्ग मील की छोटी जागीरों जैसी थीं। मिलकर वे भारत के ४८ प्रतिशत क्षेत्र पर फैली थीं और ३३ प्रतिशत जनसंख्या का घर थीं। इसलिए समस्या केवल राजाओं को मनाने की नहीं थी; भारत के भूगोल, सुरक्षा, संचार, अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक भविष्य को एक ढाँचे में लाने की थी।
कानूनी चुनौती
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ ने रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता समाप्त कर दी। इससे वे तकनीकी रूप से संप्रभु हो गईं — भारत में शामिल होने, पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रहने की दावेदारी करने के लिए खुली स्थिति बन गई। यही स्थिति भारतीय एकता के लिए तात्कालिक अस्तित्वगत संकट थी, क्योंकि अगर बड़ी रियासतें स्वतंत्र रहतीं तो भारत का मानचित्र भीतर से टूटा हुआ दिखता।
इसे सुलझाने का कार्य सरदार वल्लभभाई पटेल, भारत के प्रथम गृह मंत्री, और उनके सिविल सेवा सहयोगी वी. पी. मेनन, राज्य मंत्रालय के सचिव, को सौंपा गया। पटेल ने राजनीतिक इच्छा-शक्ति दी और मेनन ने कानूनी-प्रशासनिक ढाँचा तैयार किया। यही जोड़ी रियासतों के एकीकरण की केंद्रीय धुरी बनी।
एक साथ अनेक चुनौतियाँ
इसी समय, नए राष्ट्र को तीन अन्य बड़े मोर्चों पर भी ध्यान देना था:
- भाषाई आकांक्षाएँ — विभिन्न जनसमूह भाषा-आधारित राज्यों की माँग कर रहे थे।
- वैज्ञानिक संस्थाएँ — औपनिवेशिक प्रौद्योगिकी-निर्भरता से मुक्ति पाना और स्वदेशी संस्थान बनाना आवश्यक था।
- लैंगिक भेदभाव — सदियों की असमानता को संविधान, कानून और नीति के स्तर पर चुनौती देनी थी, जैसा स्वतंत्रता आंदोलन ने वचन दिया था।
आरएएस उत्तर में इस परिचय को “राष्ट्र-निर्माण की चारधारी चुनौती” की तरह लिखें: भू-राजनीतिक एकीकरण, प्रशासनिक पुनर्गठन, वैज्ञानिक आधुनिकीकरण और सामाजिक न्याय। इससे उत्तर केवल घटनाओं की सूची नहीं रहता, बल्कि स्वतंत्रता के बाद राज्य-निर्माण की पूरी दिशा समझाता है।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M ऑपरेशन पोलो का भारत के एकीकरण में क्या योगदान था? रज़ाकार कौन थे?
आदर्श उत्तर
ऑपरेशन पोलो (13–17 सितम्बर 1948) हैदराबाद के निज़ाम के विरुद्ध भारत का सैन्य "पुलिस एक्शन" था, जब निज़ाम ने विलय से इनकार कर दिया। रज़ाकार — कासिम रज़वी (मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के नेतृत्व में अर्धसैनिक बल — हिंदुओं को आतंकित करते थे और एकीकरण का विरोध करते थे। जनरल जे.एन. चौधरी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने 108 घंटों में उन्हें पराजित किया। हैदराबाद का विलय हुआ, निज़ाम का शासन समाप्त हुआ और भारत की सबसे बड़ी शेष रियासत का एकीकरण पूर्ण हुआ।
~50 शब्द • 5 अंक
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