मुख्य तथ्य

  • - अनुसूचित जनजातियाँ राजस्थान की जनसंख्या का 13.48% हैं - जनगणना 2011: 92.38 लाख व्यक्ति - संख्या के आधार पर राजस्थान सभी राज्यों में 6वें स्थान पर है
  • - भील राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है — राज्य की ST जनसंख्या का 39% — भील क्षेत्र: बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, उदयपुर में केंद्रित
  • सहरिया — राजस्थान का एकमात्र विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह — सहरिया (बारां जिला) राजस्थान का एकमात्र विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह है
  • - बेणेश्वर मेला माघ पूर्णिमा (जनवरी–फरवरी), डूँगरपुर में लगता है — राजस्थान का सबसे बड़ा जनजातीय मेला — 3–5 लाख भील और गरासिया भाग लेते हैं
  • - गवरी भील जनजाति का वार्षिक लोक नाट्य है — 40 दिनों तक (अगस्त–सितंबर) प्रस्तुत — रक्षाबंधन के बाद शिव पुराण के प्रसंग अभिनीत किए जाते हैं

मुख्य बिंदु

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    • अनुसूचित जनजातियाँ राजस्थान की जनसंख्या का 13.48% हैं
    • जनगणना 2011: 92.38 लाख व्यक्ति
    • संख्या के आधार पर राजस्थान सभी राज्यों में 6वें स्थान पर है
  2. 2
    • भील राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है — राज्य की ST जनसंख्या का 39%
    • भील क्षेत्र: बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, उदयपुर में केंद्रित
    • मीणा दूसरी सबसे बड़ी जनजाति (26%) — पूर्वी राजस्थान में
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    सहरिया — राजस्थान का एकमात्र विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह

    • सहरिया (बारां जिला) राजस्थान का एकमात्र विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह है
    • यह राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे 75 समूहों में से एक है
    • पूर्व-कृषि अर्थव्यवस्था, कम साक्षरता और घटती या ठहरी हुई जनसंख्या इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं
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    • बेणेश्वर मेला माघ पूर्णिमा (जनवरी–फरवरी), डूँगरपुर में लगता है
    • राजस्थान का सबसे बड़ा जनजातीय मेला — 3–5 लाख भील और गरासिया भाग लेते हैं
    • सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर — इसे "आदिवासी कुम्भ" कहते हैं
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    • नाता प्रथा भील व मीणा जनजातियों में प्रचलित पुनर्विवाह/विवाह-विच्छेद की परम्परा है
    • महिला "नाता मूल्य" चुकाकर दूसरे पुरुष के साथ रह सकती है
    • सामुदायिक बैठक में घोषणा होती है; नाता संतान वैध मानी जाती है
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    • दापा प्रथा भील जनजाति में प्रचलित वधू-मूल्य की परम्परा है
    • वर-पक्ष वधू-पक्ष को धनराशि देता है — मुख्यधारा दहेज के विपरीत
    • गरासिया जनजाति में भी प्रचलित है
  7. 7
    • गवरी भील जनजाति का वार्षिक लोक नाट्य है — 40 दिनों तक (अगस्त–सितंबर) प्रस्तुत
    • रक्षाबंधन के बाद शिव पुराण के प्रसंग अभिनीत किए जाते हैं
    • अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की उम्मीदवार घोषित है
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    • अनुच्छेद 342 राष्ट्रपति को अनुसूचित जनजातियों की अधिसूचना का अधिकार देता है
    • पाँचवीं अनुसूची जनजाति सलाहकार परिषद (TAC) और अनुसूचित क्षेत्रों का प्रावधान करती है
    • PESA अधिनियम 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को शक्तियाँ प्रदान करता है
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    • वन भूमि पर काबिज जनजातियों को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार प्रदान करता है
    • कट-ऑफ तारीख: 13 दिसंबर 2005 से पहले का कब्जा
    • IFR: प्रति परिवार 4 हेक्टेयर तक
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    • जनजाति उपयोजना (TSP) को अब अनुसूचित जनजाति घटक (STC) कहते हैं
    • सामान्य क्षेत्रों से ST जनसंख्या के अनुपात में धनराशि अनिवार्य
    • 2024–25 में राजस्थान का TSP आवंटन: लगभग ₹18,000 करोड़
  11. 11
    • गरासिया जनजाति की छोड़ प्रथा (पत्नी-छोड़ रिवाज) और मोरम प्रथा (परीक्षण विवाह) विशिष्ट हैं
    • जनगणना 2011: राजस्थान में लगभग 3.09 लाख गरासिया
    • सिरोही, आबू रोड, पाली और उदयपुर में केंद्रित
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    • TRIFED (स्थापना 1987) आदिवासी आर्थिक सशक्तीकरण की मुख्य संस्थागत व्यवस्था है
    • वन धन विकास केंद्र (VDVKs) 2018–19 में लघु वन उपज विपणन के लिए शुरू हुए
    • राजस्थान में मार्च 2025 तक 88 VDVKs संचालित हैं
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    • बिश्नोई समुदाय (OBC, ST नहीं) 1730 ई. से खेजड़ी वृक्ष और वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक है
    • 363 बिश्नोई शहीदों का बलिदान (जोधपुर, 1730) विश्व का पहला संगठित पर्यावरण आंदोलन है
    • राजस्थान में जनजाति-पर्यावरण संबंध के लिए प्रासंगिक
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    • राजस्थान में बाँसवाड़ा और डूँगरपुर पूर्ण अनुसूचित क्षेत्र हैं
    • उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, प्रतापगढ़ और बारां में पाँचवीं अनुसूची के तहत आंशिक अनुसूचित क्षेत्र
    • सभी अनुसूचित क्षेत्रों में PESA प्रावधान लागू होते हैं

परिचय और पाठ्यक्रम

राजस्थान में जनजातियाँ और उनकी परंपराएँ अब केवल समाजशास्त्र का कल्याण-विषय नहीं हैं, बल्कि राजस्थान की इतिहास-संस्कृति विरासत के हिस्से के रूप में पढ़ी जानी चाहिए।

राजस्थान लोक सेवा आयोग के आधिकारिक मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम में सामान्य अध्ययन-I का प्रश्नपत्र २०० अंक का है।

इस विषय में क्या शामिल है

यह विषय राजस्थान के जनजातीय समुदायों को समेटता है — उनका जनसांख्यिकीय वितरण, प्रमुख समूह, पारंपरिक सांस्कृतिक प्रथाएँ, सामाजिक रीति-रिवाज, धार्मिक आस्थाएँ तथा जनजातीय कल्याण के लिए संवैधानिक/विधायी ढाँचा।

राजस्थान लोक सेवा आयोग २०२६ मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम में इसे प्रश्नपत्र एक, इकाई १ (इतिहास), भाग A के अंतर्गत रखा गया है — यह एक महत्त्वपूर्ण पुनर्वर्गीकरण है। इससे पहले जनजातीय प्रश्न लगभग पूरी तरह प्रश्नपत्र एक, इकाई तीन (समाजशास्त्र खंड) से आते थे, जैसा पिछले वर्षों के प्रश्न रिकॉर्ड (२०१६–२०२४, पाँच प्रश्न) में देखा जा सकता है। २०२६ के पाठ्यक्रम परिवर्तन से स्पष्ट है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग अब जनजातीय संस्कृति को कल्याण-नीति की बजाय राजस्थान की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के अंग के रूप में देखता है।

अभ्यर्थियों को दोनों पक्षों पर अच्छी पकड़ ज़रूरी है:

  • ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पक्ष — परंपराएँ, रीति-रिवाज, त्योहार
  • कल्याण-शासन पक्ष — संवैधानिक प्रावधान, योजनाएँ, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह

विषय-सीमा

विषय-सीमा: यह विषय राजस्थान की विशिष्ट जनजातियों और उनकी परंपराओं तक सीमित है। राष्ट्रीय जनसांख्यिकीय परिदृश्य, अखिल भारतीय जनजातीय आंदोलन और तुलनात्मक राज्य विश्लेषण केवल संदर्भ के रूप में हैं — ६० प्रतिशत से अधिक सामग्री राजस्थान-विशिष्ट होनी चाहिए।

संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद ३४२, पाँचवीं अनुसूची, पंचायत विस्तार अधिनियम) राष्ट्रीय ढाँचे के रूप में सर्वव्यापी हैं, किंतु इन्हें राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू करके देखना होगा। जनजातियों के जनसांख्यिकीय एवं भौगोलिक वितरण के लिए विषय #८९ (जनसांख्यिकीय विशेषताएँ) देखें।

पिछले वर्षों के प्रश्न पैटर्न

२०१६ के बाद के सभी ५ पिछले वर्षों के प्रश्न प्रश्न समाजशास्त्र खंड से आए हैं। इनमें परीक्षण होता है:

  • (a) जनजातीय समस्याओं की गणना
  • (b) संवैधानिक/विधायी ढाँचा
  • (c) विशिष्ट जनजातियों (गरासिया, २०२३) का सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग
  • (d) सरकारी पहलों की सूचीबद्धता

२०२६ में इतिहास इकाई से संभावित प्रश्न कल्याण नीति की अपेक्षा परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक प्रथाओं पर अधिक बल देगा — अभ्यर्थियों को इस बदलाव का अनुमान लगाकर तैयारी करनी चाहिए।

क्रॉस-रेफरेंस: जनजातीय समुदायों की लोक कला व प्रदर्शनी परंपराएँ विषय #६ (लोक परंपराएँ) से जुड़ती हैं; बाणेश्वर सहित जनजातीय मेले विषय #७ (मेले और त्योहार) से। जनजाति-आधारित भौगोलिक समूह विषय #८९ में शामिल हैं।


संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M भील जनजाति पर एक टिप्पणी लिखिए — उनकी जनसंख्या, वितरण और विशिष्ट परम्पराएँ। 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

भील राजस्थान की सबसे बड़ी अनुसूचित जनजाति है जो राज्य की ST जनसंख्या का 39% है (जनगणना 2011)। बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर और राजसमंद में केंद्रित ये राजस्थान के मूल वन-निवासी समुदाय हैं। प्रमुख परम्पराएँ: दापा प्रथा (वधू-मूल्य), नाता प्रथा (रीति पुनर्विवाह), गवरी (रक्षाबंधन के बाद 40 दिन शिव लोक-नाट्य), और गैर (होली पर डंडा नृत्य)। राणा पूंजा के नेतृत्व में भील सेना ने हल्दीघाटी (1576 ई.) में महाराणा प्रताप का साथ दिया।

~50 शब्द • 5 अंक