शहजादा मुअज्जम: 1707 ई. के मुगल उत्तराधिकार युद्ध में मेवाड़ का सहयोगी
मुख्य तथ्य
- १७०७ ई. में मेवाड़ के महाराणा अमर सिंह द्वितीय ने मुगल उत्तराधिकार युद्ध में शहजादा मुअज्जम का साथ दिया।
- मुअज्जम के समर्थन का तत्काल लाभ मेवाड़ को १७०९ ई. में पुर, माण्डल और बदनोर परगनों पर अधिकार की पुनः स्थापना के रूप में मिला।
- मेवाड़ ने पुर, माण्डल और बदनोर परगनों पर अधिकार एक लाख रुपये वार्षिक भुगतान के बदले पुनः स्थापित किया।
मुख्य बिंदु
- 1
१७०७ ई. में मेवाड़ के महाराणा अमर सिंह द्वितीय ने मुगल उत्तराधिकार युद्ध में शहजादा मुअज्जम का साथ दिया।
- 2
शहजादा मुअज्जम औरंगजेब का सबसे बड़ा जीवित पुत्र था, जिसने जाजू के मैदान में अपने भाई आजम को परास्त कर मुगल सिंहासन प्राप्त किया।
- 3
मुअज्जम बहादुरशाह प्रथम के नाम से सम्राट बना।
- 4
मुअज्जम के समर्थन का तत्काल लाभ मेवाड़ को १७०९ ई. में पुर, माण्डल और बदनोर परगनों पर अधिकार की पुनः स्थापना के रूप में मिला।
- 5
मेवाड़ ने पुर, माण्डल और बदनोर परगनों पर अधिकार एक लाख रुपये वार्षिक भुगतान के बदले पुनः स्थापित किया।
- 6
कोटा के राव रामसिंह प्रथम ने जाजू में आजम का साथ दिया और वहीं वीरगति प्राप्त की।
१७०७ ई. में मेवाड़ ने शहजादा मुअज्जम का साथ कैसे दिया और क्या लाभ मिला?
१७०७ ई. में मेवाड़ के महाराणा अमर सिंह द्वितीय ने मुगल उत्तराधिकार युद्ध में शहजादा मुअज्जम का साथ दिया, और इस समर्थन का तत्काल लाभ १७०९ ई. में पुर, माण्डल तथा बदनोर परगनों पर मेवाड़ के अधिकार की पुनः स्थापना के रूप में मिला। शहजादा मुअज्जम औरंगजेब का सबसे बड़ा जीवित पुत्र था, जिसने १७०७ ई. में जाजू के मैदान में अपने भाई आजम को परास्त कर मुगल सिंहासन पर अधिकार किया तथा बहादुरशाह प्रथम के नाम से सम्राट बना। राजस्थान लोक सेवा आयोग के प्रारंभिक पाठ्यक्रम के अनुसार सामान्य ज्ञान और सामान्य विज्ञान का प्रश्नपत्र २०० अंकों का होता है, और इसी पाठ्यक्रम में राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा और विरासत पढ़ी जाती है; इसलिए मुअज्जम, मेवाड़ और जाजू का यह प्रसंग परीक्षा-दृष्टि से भी सीधा उपयोगी है।
उत्तराधिकार संघर्ष और पक्ष
| व्यक्तित्व | पक्ष/भूमिका | प्रमुख तथ्य |
|---|---|---|
| शहजादा मुअज्जम | औरंगजेब का सबसे बड़ा जीवित पुत्र | १७०७ ई. में जाजू के मैदान में अपने भाई आजम को परास्त कर मुगल सिंहासन पर अधिकार किया तथा बहादुरशाह प्रथम के नाम से सम्राट बना। |
| आजम | मुअज्जम का भाई | १७०७ ई. में जाजू के मैदान में शहजादा मुअज्जम से परास्त हुआ। |
| महाराणा अमर सिंह द्वितीय | उत्तराधिकार के इस संघर्ष में मुअज्जम का साथ दिया | तत्काल लाभ उन्हें तब मिला जब १७०९ ई. में मेवाड़ ने एक लाख रुपये वार्षिक भुगतान के बदले पुर, माण्डल तथा बदनोर परगनों पर अपना अधिकार पुनः स्थापित कर लिया। |
| कोटा के राव रामसिंह प्रथम | जाजू में आजम का साथ दिया | जाजू में आजम का साथ देकर वीरगति प्राप्त की थी। |
मेवाड़ को तत्काल लाभ
- उत्तराधिकार के इस संघर्ष में मेवाड़ के महाराणा अमर सिंह द्वितीय ने मुअज्जम का साथ दिया। यह समर्थन केवल दरबारी निष्ठा नहीं था; मेवाड़ के लिए यह मुगल सत्ता के बदलते संतुलन में अपने हित सुरक्षित करने की व्यावहारिक राजनीतिक चाल भी थी।
- इसका तत्काल लाभ उन्हें तब मिला जब १७०९ ई. में मेवाड़ ने एक लाख रुपये वार्षिक भुगतान के बदले पुर, माण्डल तथा बदनोर परगनों पर अपना अधिकार पुनः स्थापित कर लिया। इसलिए इस प्रसंग को मुअज्जम की विजय के साथ-साथ मेवाड़ के क्षेत्रीय लाभ के रूप में भी याद रखना चाहिए।
कोटा-बूँदी प्रसंग
- दूसरी ओर, कोटा के राव रामसिंह प्रथम ने जाजू में आजम का साथ देकर वीरगति प्राप्त की थी। कोटा का पक्ष मुअज्जम के विपरीत था, इसलिए युद्ध के बाद उसकी राजनीतिक स्थिति मेवाड़ से अलग बनी।
- अतः सिंहासनारोहण के पश्चात मुअज्जम ने बूँदी-शासक बुद्धसिंह को कोटा-राज्य पर हमला करने के लिए उकसाया। इससे स्पष्ट है कि जाजू के बाद मुअज्जम ने समर्थक और विरोधी राजपूत घरानों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया।
- परन्तु बूँदी की फौजें परास्त हो गईं। यानी मुअज्जम की प्रेरणा के बावजूद कोटा पर बूँदी का दबाव सफल नहीं हुआ।
युद्ध से ठीक पूर्व मराठा गणना
- युद्ध से ठीक पूर्व आजम ने जुल्फिकार खाँ की सलाह मानकर मराठा राजकुमार शाहू को मुगल शिविर की कैद से रिहा कर दिया। यह कदम सीधे जाजू के मैदान की लड़ाई से बाहर दिखाई देता है, लेकिन इसका लक्ष्य मुअज्जम के अभियान को पीछे से कमजोर करना था।
- उद्देश्य यह था कि महाराष्ट्र में गृहयुद्ध भड़ककर मुअज्जम के उत्तरी अभियान का पिछला मोर्चा कमजोर हो जाए। इसीलिए शाहू की रिहाई को आजम की व्यापक राजनीतिक गणना के रूप में पढ़ना चाहिए, न कि केवल कैद से मुक्ति की घटना के रूप में।
एक शुरुआती टॉपिक पाने के लिए मुफ़्त साइन अप करें
जो पहला बंद टॉपिक आप खोलेंगे, वह आपका रहेगा; बाकी के लिए स्टडी पैक या पूरा कोर्स चाहिए।
