भारत के संरक्षण क्षेत्र
मुख्य तथ्य
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारत में संरक्षण क्षेत्रों की कानूनी श्रेणियाँ तय करता है।
- प्रोजेक्ट टाइगर 1973 का प्रजाति-आधारित कार्यक्रम है, जो कोर-बफर बाघ आरक्षित क्षेत्रों पर आधारित है।
- कुनमिंग-मॉन्ट्रियल 30 बाय 30 लक्ष्य ने 2030 तक के वैश्विक संरक्षण लक्ष्यों को नया रूप दे दिया है।
मुख्य बिंदु
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वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारत में संरक्षण क्षेत्रों की कानूनी श्रेणियाँ तय करता है।
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राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र कानूनी पाबंदियों और स्वामित्व के लिहाज़ से एक-दूसरे से अलग होते हैं।
- 3
रामसर का दर्जा किसी आर्द्रभूमि को दिया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय दर्जा है; इससे वह अपने-आप राष्ट्रीय उद्यान नहीं बन जाती।
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जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र यूनेस्को के मानव एवं जैवमंडल ढाँचे के अनुसार कोर, बफर और संक्रमण क्षेत्र में बँटे होते हैं।
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प्रोजेक्ट टाइगर 1973 का प्रजाति-आधारित कार्यक्रम है, जो कोर-बफर बाघ आरक्षित क्षेत्रों पर आधारित है।
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वन भूमि का अन्य उपयोग में बदलाव, पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र की अधिसूचना और प्रतिपूरक वनीकरण — ये सब इससे जुड़े नियम-नियंत्रण हैं, न कि प्राकृतिक आवास का विकल्प।
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केवलादेव और मरुस्थल राष्ट्रीय उद्यान इस विषय के दो सबसे मजबूत राजस्थान उदाहरण हैं।
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कुनमिंग-मॉन्ट्रियल 30 बाय 30 लक्ष्य ने 2030 तक के वैश्विक संरक्षण लक्ष्यों को नया रूप दे दिया है।
भारत में संरक्षण क्षेत्रों का विधिक ढाँचा कैसे बनता है?
भारत में संरक्षण क्षेत्रों का विधिक ढाँचा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, १९७२ के राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र जैसे वर्गों से बनता है, जिनके ऊपर पारिस्थितिकी के अलग-अलग टैग जोड़े जाते हैं। भारत की संरक्षण-क्षेत्र व्यवस्था पहले विधिक वर्गों पर और उसके बाद पारिस्थितिकी लेबलों पर आधारित है। पर्यावरण मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान के राष्ट्रीय वन्यजीव डेटाबेस के अनुसार भारत में कुल १०१४ संरक्षण क्षेत्र दर्ज थे।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, १९७२ के वर्ग
| संरक्षण क्षेत्र वर्ग | मुख्य बात |
|---|---|
| राष्ट्रीय उद्यान | राष्ट्रीय उद्यान में सामान्य मानवीय गतिविधि तभी हो सकती है जब मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अधिनियम के अंतर्गत अनुमति दे। |
| वन्यजीव अभयारण्य | वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, १९७२ के संरक्षण क्षेत्र वर्ग में शामिल। |
| संरक्षण आरक्षित क्षेत्र | वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, २००२ से जोड़े गए ताकि स्थापित संरक्षण क्षेत्रों के बफर, संपर्क और प्रवास गलियारे बचाए जा सकें। |
| सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र | वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, २००२ से जोड़े गए ताकि स्थापित संरक्षण क्षेत्रों के बफर, संपर्क और प्रवास गलियारे बचाए जा सकें। |
राष्ट्रीय सूची और राजस्थान संदर्भ
- भारतीय वन्यजीव संस्थान के राष्ट्रीय वन्यजीव डेटाबेस में भारत में १०६ राष्ट्रीय उद्यान दिए गए हैं, इसलिए विधिक वर्ग और वर्तमान राष्ट्रीय सूची साथ-साथ समझे जाते हैं।
- राजस्थान में यह अंतर स्पष्ट है: भरतपुर स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान राष्ट्रीय उद्यान और विश्व धरोहर आर्द्रभूमि दोनों है।
- सरिस्का और रणथंभौर के आसपास समुदाय-आधारित गलियारे महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वन्यजीव आवाजाही अधिसूचित सीमा पर नहीं रुकती।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 MCQ भारत में राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र का सीधा वैधानिक आधार कौन सा अधिनियम है?
व्याख्या
1972 का अधिनियम वन्यजीव प्रशासन द्वारा उपयोग किए जाने वाले संरक्षण-क्षेत्र वर्गों को परिभाषित और सक्षम करता है। 1980 का अधिनियम वन विचलन नियंत्रित करता है, 1986 का अधिनियम पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र जैसी पर्यावरण अधिसूचनाओं को आधार देता है, और 2002 का अधिनियम जैव विविधता संस्थाएँ तथा विरासत स्थल बनाता है।
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