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अपना जिला जानें

टोंक

नवाबी इतिहास, बनास भूगोल और बीसलपुर जलापूर्ति से जुड़ा टोंक

अंतिम सत्यापन: 2026-05-06

टोंक राजस्थान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में 7,194 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला जिला है। नवाब अमीर खां द्वारा बसाए गए आधुनिक टोंक और पूर्व रियासती पहचान के कारण यह इतिहास में अलग स्थान रखता है। परीक्षा की दृष्टि से बनास नदी, सुनहरी कोठी, अरबी-फारसी शोध परंपरा, कृषि-प्रधान कार्य संरचना और बीसलपुर-टोंक-उनियारा पेयजल परियोजना इसके प्रमुख संदर्भ हैं।

जिला एक नज़र में

स्थितिराजस्थान का उत्तर-पूर्वी भाग
रियासती पहचानराजस्थान की पूर्व रियासतों में शामिल
क्षेत्रफल2011 की जनगणना के अनुसार 7,194 वर्ग किलोमीटर
जनसंख्या2011 की जनगणना में 14,21,326 व्यक्ति
जनसंख्या घनत्व2011 की जनगणना में 198 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
लिंगानुपात2011 की जनगणना में प्रति 1,000 पुरुषों पर 952 महिलाएं
साक्षरता दर2011 की जनगणना में 61.58 प्रतिशत

जिला प्रशासन

वर्तमान पदाधिकारी — सार्वजनिक अभिलेखों से।

जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर

टीना डाबी

पुलिस अधीक्षक

राजेश कुमार मीणा

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट / अतिरिक्त कलक्टर

राम रतन सौंकरिया

जिला एवं सत्र न्यायाधीश

डॉ. सीमा अग्रवाल

लोकसभा सांसद

हरीश चंद्र मीणा

टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस2024 से

विधान सभा सदस्य

सचिन पायलट

टोंक विधानसभा क्षेत्र

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस2023 से

विधान सभा सदस्य

राजेंद्र गुर्जर

देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2024 से

इतिहास — प्राचीन → मध्यकालीन → आधुनिक

टोंक की उत्पत्ति

जनगणना की जिला पुस्तिका में उद्धृत स्थानीय अभिलेख टोंक को अकबर के समय के टोरी और टोंकरा से जोड़ते हैं।

मानसिंह की विजय

जनगणना की जिला पुस्तिका के अनुसार अकबर के शासनकाल में जयपुर के राजा मानसिंह ने टोरी और टोंकरा पर अधिकार किया।

गांवों का अनुदान

1643 ईस्वी में टोंकरा के बारह गांव भूमि-अनुदान के रूप में भोला ब्राह्मण को दिए गए।

टोंक नामकरण

जनगणना की जिला पुस्तिका में बारह गांवों के इस समूह को टोंक नाम देने का श्रेय भोला को दिया गया है।

सोलंकी जागीर

बाद में जयपुर के सवाई जयसिंह ने टोंक को भाव सिंह सोलंकी को जागीर के रूप में सौंपा।

जागीर पुनर्ग्रहण

1729 ईस्वी में टोंक की जागीर फिर से राज्य के अधीन ले ली गई।

होलकर अनुदान

1750 ईस्वी में जयपुर के महाराजा माधो सिंह ने टोंक और रामपुरा मल्हार राव होलकर को प्रदान किए।

अंग्रेजी कब्जा

1804 ईस्वी में अंग्रेजों ने टोंक और रामपुरा पर कब्जा किया और कुछ ही समय बाद टोंक जयपुर को दे दिया गया।

अमीर खां शासन

1806 ईस्वी में अमीर खां ने टोंक पर नियंत्रण स्थापित किया।

टोंक रियासत

1817 की संधि ने टोंक पर अमीर खां का नियंत्रण मान्य किया और यह क्षेत्र एक रियासत के रूप में संगठित हुआ।

कला, संस्कृति, विरासत एवं पर्यटन

पुरानी हवेलियां

राजस्थान पर्यटन के अनुसार टोंक अपनी पुरानी हवेलियों और मस्जिदों के लिए पहचाना जाता है।

विरासत स्थापत्य

टोंक की सांस्कृतिक छवि में राजपूत स्थापत्य और मुस्लिम वास्तुकला साथ-साथ दिखाई देते हैं।

राजस्थान का लखनऊ

टोंक को प्रचलित रूप से राजस्थान का लखनऊ कहा जाता है।

सुनहरी कोठी

सुनहरी कोठी को राजस्थान पर्यटन टोंक का प्रमुख आकर्षण बताता है।

स्वर्णिम हवेली

सुनहरी कोठी 19वीं सदी की स्वर्णिम हवेली है, जो नजर बाग रोड पर बड़ा कुआं के पास स्थित है।

शीश महल कला

सुनहरी कोठी का शीश महल कांचकारी, पुष्प-सज्जा और मीनाकारी से सजा हुआ है।

अरबी-फारसी संस्थान

अरबी-फारसी शोध संस्थान टोंक शहर में रसिया और अन्नपूर्णा की ऐतिहासिक पहाड़ियों के बीच स्थित है।

संस्थान स्थापना

मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान की स्थापना 4 दिसंबर 1978 को राजस्थान सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के अधीन हुई।

पांडुलिपि विरासत

यह संस्थान अरबी, फारसी, संस्कृत, उर्दू और पुरातात्विक महत्व की हस्तलिखित पांडुलिपियों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का कार्य करता है।

सुलेख दीर्घा

संस्थान की कला दीर्घा में नमदा सुलेख, डाक टिकटों का संग्रह और बाल, दाल, चावल व तिल पर बने सुलेख प्रदर्शित हैं।

भूगोल, जलवायु एवं पारिस्थितिकी

जिला निर्देशांक

टोंक जिला 75°07' से 76°19' पूर्वी देशांतर और 25°41' से 26°34' उत्तरी अक्षांश के बीच स्थित है।

जयपुर से दूरी

जनगणना पुस्तिका के अनुसार टोंक जिला राजस्थान की राजधानी जयपुर से लगभग 82 किलोमीटर दूर है।

उत्तरी सीमा

टोंक जिले की उत्तरी सीमा जयपुर जिले से लगती है।

दक्षिणी सीमा

टोंक के दक्षिण में बूंदी और भीलवाड़ा जिले सीमा बनाते हैं।

पूर्व-पश्चिम सीमा

टोंक के पश्चिम में अजमेर और पूर्व में सवाई माधोपुर जिले स्थित हैं।

जिला आकृति

जनगणना पुस्तिका टोंक जिले की आकृति को समतल और पतंगनुमा बताती है।

सामान्य ऊंचाई

टोंक जिले की सामान्य ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 264.32 मीटर मानी जाती है।

बनास विभाजन

बनास नदी टोंक जिले को दो हिस्सों में बांटती है।

दई संगम

दई नदी टोंक जिले के बीसलपुर गांव के पास बनास नदी से मिलती है।

बीसलपुर बांध

बीसलपुर बांध टोंक जिले में देवली के पास बनास नदी पर बना गुरुत्व बांध है।

अर्थव्यवस्था — क्षेत्र, उद्योग, ऊर्जा

कृषि कार्यबल

2011 की जनगणना में टोंक जिले की आजीविका का आधार खेती रहा; कामगारों में 67.7 प्रतिशत किसान या खेतिहर मजदूर थे।

किसान हिस्सेदारी

2011 में जिले के कुल कामगारों में किसानों की हिस्सेदारी 50.2 प्रतिशत दर्ज की गई।

ग्रामीण व्यवसाय

औद्योगिक प्रोफाइल टोंक में कृषि और पशुपालन को मुख्य व्यवसायों के रूप में रखती है।

खनिज संसाधन

जिले में गार्नेट, सिलिका रेत, क्वार्ट्ज और सोपस्टोन जैसे अधात्विक खनिज पर्याप्त मात्रा में बताए गए हैं।

औद्योगिक इकाइयां

2011-12 तक टोंक जिले में पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों की संख्या 8,778 दर्ज थी।

एमएसएमई रोजगार

2011-12 तक सूक्ष्म व लघु उद्यम और कारीगर इकाइयों में 30,656 लोगों को रोजगार दर्ज किया गया।

नमदा निर्यात

टोंक के निर्यात सर्वे में नमदा हस्तशिल्प का निर्यात मूल्य 3 करोड़ रुपये बताया गया है।

उद्योग अवसर

एमएसएमई औद्योगिक प्रोफाइल टोंक में चमड़ा उत्पाद, ऊनी नमदा, ऊनी कालीन, सिलिका पाउडर और क्वार्ट्ज-फेल्सपार ग्राइंडिंग को संभावित उद्योग अवसरों में गिनती है।

राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरचना

प्रशासनिक संभाग

प्रशासनिक व्यवस्था में टोंक जिला अजमेर संभाग के अंतर्गत रखा गया है।

जिला नेतृत्व

जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट को टोंक जिला प्रशासन का प्रमुख माना गया है।

उपखंड संख्या

जनगणना हैंडबुक में टोंक जिले के लिए सात उपखंड दर्ज हैं।

वैधानिक नगर

2011 की जनगणना में जिले में छह वैधानिक नगर थे: मालपुरा, देवली, निवाई, टोडारायसिंह, टोंक और उनियारा।

टोंक विधानसभा सीट

5 मई 2026 को मुद्रित 16वीं राजस्थान विधानसभा सूची में टोंक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सचिन पायलट के पास दर्ज है।

देवली-उनियारा सीट

5 मई 2026 को मुद्रित 16वीं राजस्थान विधानसभा सूची में देवली-उनियारा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा के राजेंद्र गुर्जर के पास दर्ज है।

शासन पहल एवं योजनाएँ (2025-26)

जलापूर्ति परियोजना

बीसलपुर-टोंक-उनियारा जलापूर्ति परियोजना जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की पूर्ण हो चुकी परियोजना है।

परियोजना लागत

बीसलपुर-टोंक-उनियारा जलापूर्ति परियोजना की लागत 197.62 करोड़ रुपये दर्ज है।

परियोजना आरंभ

बीसलपुर-टोंक-उनियारा जलापूर्ति परियोजना 2012 में शुरू की गई थी।

डिजाइन लक्ष्य

इस जलापूर्ति परियोजना का लक्ष्य वर्ष 2041 रखा गया है।

लाभार्थी कवरेज

यह परियोजना टोंक, देवली और उनियारा नगरों के साथ टोंक जिले के 464 ग्रामीण गांवों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है।

पर्यावरण कार्य

टोंक जिला पर्यावरण योजना में ठोस कचरा, प्लास्टिक कचरा, जैव-चिकित्सा कचरा, निर्माण और ध्वस्तीकरण कचरा तथा ई-कचरा प्रबंधन के लिए कार्य बिंदु शामिल हैं।

PYQ एक-पंक्ति (RAS / RPSC / RSSB)

किसी भी परीक्षा उपयोग से पहले सटीक विकल्पों की जाँच आधिकारिक RPSC / RSSB प्रश्न पत्रों से करें।

RSSB CET Graduation 2022

Q. बिसलपुर बांध का निर्माण किस वर्ष पूरा हुआ?

उ. 1999

स्वयं को परखें — 10 प्रश्न

ऊपर के जिला संदर्भ से क्विक सेल्फ़-टेस्ट। द्विभाषी, लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

प्रश्न 1 / 10

जनगणना 2011 में टोंक जिले का लिंगानुपात कितना था?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टोंक जिला कहां स्थित है?

टोंक उत्तर-पूर्वी राजस्थान में है और जयपुर से लगभग 82 किलोमीटर दूर है।

टोंक किस लिए जाना जाता है?

टोंक पुरानी हवेलियों, मस्जिदों और मुगलकालीन स्थापत्य धरोहरों के लिए जाना जाता है।

आधुनिक टोंक की स्थापना किसने की थी?

आधुनिक टोंक नगर की स्थापना नवाब अमीर खान से जोड़ी जाती है।

बीसलपुर बांध किस नदी पर है?

बीसलपुर बांध टोंक जिले में देवली के पास बनास नदी पर स्थित है।

मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान क्या सुरक्षित रखता है?

यह संस्थान हस्तलिखित पांडुलिपियों को सुरक्षित रखता है और अरबी, फारसी, संस्कृत तथा उर्दू सामग्री पर काम करता है।