जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर
अक्षय गोदारा
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डांग क्षेत्र, करौली रियासत, मेलों और लाल पत्थर से पहचाना जाने वाला जिला
करौली राजस्थान के उत्तर-पूर्व में स्थित जिला है, जिसका मुख्यालय कभी करौली रियासत की राजधानी भी था। जिले में डांग, पहाड़ी और मैदानी भू-भाग मिलते हैं, और चंबल नदी लगभग 84 किलोमीटर तक इसकी दक्षिण-पूर्वी सीमा को मध्य प्रदेश से अलग करती है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जबकि खनिज और लाल चिनाई पत्थर इसकी औद्योगिक पहचान में प्रमुख हैं।
| जनसंख्या | जनगणना 2011 के अनुसार 14.58 लाख लोग |
|---|---|
| क्षेत्रफल | 5,524 वर्ग किलोमीटर; क्षेत्रफल के आधार पर राजस्थान में 23वां स्थान |
| लिंगानुपात | जनगणना 2011 में प्रति 1,000 पुरुष 861 महिलाएं |
| साक्षरता दर | जनगणना 2011 में 66.2 प्रतिशत |
| गांव | 888 गांव; इनमें 851 आबाद और 37 निर्जन गांव |
| ग्रामीण-शहरी स्वरूप | जनगणना 2011 में आबादी का 85.0 प्रतिशत ग्रामीण और 15.0 प्रतिशत शहरी |
| अनुसूचित जाति/जनजाति आबादी | अनुसूचित जाति: 3.54 लाख लोग (24.31 प्रतिशत); अनुसूचित जनजाति: 3.25 लाख लोग (22.28 प्रतिशत), जनगणना 2011 |
वर्तमान पदाधिकारी — सार्वजनिक अभिलेखों से।
जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर
अक्षय गोदारा
पुलिस अधीक्षक
लोकेश सोनवाल
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट
हेमराज परिडवाल
जिला एवं सत्र न्यायाधीश
अरुण कुमार बेरीवाल
लोकसभा सांसद
भजन लाल जाटव
करौली-धौलपुर
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस2024 से
विधानसभा सदस्य
अनीता जाटव
हिण्डौन (अनुसूचित जाति)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस2023 से
विधानसभा सदस्य
दर्शन सिंह
करौली
भारतीय जनता पार्टी2023 से
विधानसभा सदस्य
हंसराज मीना
सपोटरा (अनुसूचित जनजाति)
भारतीय जनता पार्टी2023 से
विधानसभा सदस्य
घनश्याम
टोडाभीम (अनुसूचित जनजाति)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस2023 से
प्राचीन राज्य
महाभारत और पुराणकाल में आज का करौली क्षेत्र संभवतः मत्स्य राज्य, सूरसेन राज्य या दोनों के प्रभाव में रहा।
यदुवंशी शासन
करौली का मध्यकालीन इतिहास मुख्य रूप से यादव या यदुवंशी वंश से जुड़ता है, जब विजयपाल ने अपनी राजधानी मथुरा से बयाना स्थानांतरित की।
रियासत स्थापना
करौली रियासत की स्थापना 1348 ईस्वी में भगवान कृष्ण के वंशज माने जाने वाले यदुवंशी राजा अर्जुन देव ने की।
पूना संधि
15 नवंबर 1817 को हुई पूना संधि के बाद करौली ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के संरक्षण में आया।
मत्स्य संघ
17 मार्च 1948 को करौली ने धौलपुर, अलवर और भरतपुर के साथ मिलकर संयुक्त मत्स्य राज्य बनाया।
जिला गठन
सवाई माधोपुर जिले से अलग होने के बाद 19 जुलाई 1997 को करौली राजस्थान का 32वां जिला बना।
गठन अधिसूचना
करौली जिले का गठन सवाई माधोपुर जिले की करौली, हिण्डौन, नादौती, सपोटरा और टोडाभीम तहसीलों से हुआ; इसकी अधिसूचना 15 जुलाई 1997 को जारी हुई।
भूमि राजस्व
करौली राज्य में भूमि खालसा और जागीर श्रेणियों में बंटी थी; खालसा भूमि का राजस्व राज्य सीधे लेता था और जागीर भूमि का राजस्व जागीरदारों के माध्यम से वसूला जाता था।
तिमनगढ़ किला
राजा तिमनपाल ने 1048 ईस्वी में तिमनगढ़ किले की नींव रखी और 1058 ईस्वी में किले का उद्घाटन हुआ।
मंडरायल किला
अनंगपाल ने 1202 में मंडरायल किले पर अधिकार किया और 1243 तक वहीं से शासन चलाया।
मांडना चित्रकला
करौली अंचल में दीवार और फर्श पर बनने वाली लोक-चित्र परंपरा मांडना को स्थानीय रूप से चौक पूरना कहा जाता है।
कैलादेवी मेला
कैलादेवी मेला वर्ष में दो बार लगता है, जिसमें पंद्रह दिन का चैत्र मेला और अश्विन मास का नवरात्र मेला शामिल है।
महावीर जी मेला
श्री महावीर जी मेले में जिनेन्द्र रथ यात्रा निकलती है और करौली गजेटियर इसे देश के सबसे बड़े मेलों में गिनता है।
लाख शिल्प
पूर्ववर्ती करौली राज्य में लाख का काम पलंग के पायों, खिलौनों, डिब्बों और चूड़ियों तक फैला था; ये वस्तुएं राजपूताना और आसपास के क्षेत्रों में भेजी जाती थीं।
कपड़ा हस्तछपाई
करौली नक्काशीदार लकड़ी के छापों से कपड़े की हस्तछपाई तथा स्कार्फ, पगड़ी और साफे बनाने का केंद्र था।
ऊनी वस्त्र शिल्प
हिण्डौन क्षेत्र में ऊनी कपड़े का काम प्रमुख था; यहां कंबल, दरियां, कालीन, आसन, फेल्ट, भाकला और घुआइस जैसे उत्पाद बनते थे।
पांडुलिपि संग्रह
करौली के श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर ग्रंथ संग्रहालय में संस्कृत और हिंदी की 275 पांडुलिपियां तथा प्रामाणिक दस्तावेज सुरक्षित हैं।
लांगुरिया गीत
कैला देवी मेला चैत्र और आश्विन में भरता है, जहां श्रद्धालु लांगुरिया गीत गाते और नृत्य करते हैं।
तिमनगढ़ स्थापत्य
तिमनगढ़ किला करीब 9 किलोमीटर की त्रिज्या वाले क्षेत्र में फैला बताया गया है; इसके दो खंडों में त्रिपोलिया या जगनपौर और सूर्यपौर जैसे भाग शामिल हैं।
तिमनगढ़ मूर्तियां
तिमनगढ़ किले में हिंदू, बौद्ध और जैन मूर्तियां मिलती हैं; लाल, नीले, काले और सफेद पत्थरों की प्रतिमाएं भी यहां उल्लेखित हैं।
जिले की स्थिति
करौली जिला उत्तर-पूर्वी राजस्थान में 26 डिग्री 03 मिनट से 26 डिग्री 49 मिनट उत्तर अक्षांश और 76 डिग्री 35 मिनट से 77 डिग्री 26 मिनट पूर्व देशांतर के बीच स्थित है।
चंबल सीमा
चंबल नदी करौली जिले और मध्य प्रदेश के बीच दक्षिण-पूर्वी सीमा करीब 84 किलोमीटर तक बनाती है।
कृषि-जलवायु क्षेत्र
करौली जिला राजस्थान के डांग अंचल का हिस्सा है और कृषि-जलवायु क्षेत्र तृतीय-बी, बाढ़-प्रवण पूर्वी मैदानी क्षेत्र, में आता है।
भूमि क्षेत्रफल
करौली जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 5,04,302 हेक्टेयर था, जिसमें 1,86,641 हेक्टेयर भूमि खेती के अधीन थी।
भूमि रूप
करौली जिले की जमीन डांग, पहाड़ी और मैदानी हिस्सों में बंटी हुई बताई गई है।
नदी घाटियां
करौली जिला गंभीर, बनास, चंबल और पार्वती नदी घाटियों का हिस्सा है।
सड़क नेटवर्क
31 मार्च 2019 तक करौली जिले में 2,683.43 किलोमीटर सड़कें थीं और सड़क घनत्व 100 वर्ग किलोमीटर पर 48 किलोमीटर था।
पहाड़ी तहसीलें
करौली, सपोटरा और मंडरायल तहसीलें पहाड़ी क्षेत्र बताई जाती हैं, जबकि जिले का बाकी भाग सामान्यतः समतल और मैदानी है।
डांग भू-आकृति
करौली की डांग पट्टी ऊबड़-खाबड़ भू-आकृति, शिलाखंडों, बड़े पत्थरों और कटी-फटी घाटियों के लिए वर्णित है।
बनास संगम
बनास नदी सपोटरा और खंडार उपखंडों के बीच साझा सीमा बनाते हुए बड़वास गांव के पास चंबल में मिलती है।
मुख्य फसलें
करौली जिले की प्रमुख फसलों में बाजरा, तिल, ग्वार, धान, मूंगफली, ज्वार, सरसों, गेहूं, चना और जौ शामिल हैं।
कृषि कामगार
करौली की जिला अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि-प्रधान है; यहां 71.6 प्रतिशत कामगार कृषक या खेतिहर मजदूर हैं।
बाजरा उत्पादन
2017-18 में करौली जिले में बाजरा 1,30,928 हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया और उत्पादन 2,83,763 मीट्रिक टन रहा।
गेहूं उत्पादन
2017-18 में करौली जिले में गेहूं का उत्पादन 2,74,842 मीट्रिक टन दर्ज हुआ।
पशुधन आधार
पशुधन गणना 2019 के अनुसार करौली जिले में 5,18,622 भैंसें और 3,40,529 बकरियां थीं।
दुग्ध उत्पादन
2018-19 में करौली जिले का कुल दुग्ध उत्पादन करीब 5.35 लाख टन दर्ज किया गया।
खनिज संसाधन
करौली जिले को निर्माण पत्थर, सिलिका रेत, चीनी मिट्टी, सफेद मिट्टी, सोप स्टोन, बलुआ पत्थर, स्लेट पत्थर और चक्की-पत्थर जैसे खनिजों से समृद्ध बताया गया है।
लाल पत्थर उद्योग
लाल निर्माण पत्थर के लिए करौली को अग्रणी औद्योगिक केंद्र माना जाता है; यह पत्थर उत्पाद देश में प्रसिद्ध बताया गया है।
औद्योगिक क्षेत्र
राज्य सरकार ने करौली जिले में तीन औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए, जिनमें हिंडौन औद्योगिक क्षेत्र को पूर्ण विकसित बताया गया है।
उद्यम रोजगार
करौली के जिला उद्योग केंद्र के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम/उद्योग आधार की कुल 3,904 इकाइयां दर्ज थीं, जिनसे 16,024 लोगों को रोजगार मिला और निवेश लगभग 183.45 करोड़ रुपये रहा।
उद्योग वित्त
करौली में उद्योगों को बैंक ऋण योजनाओं के जरिए वित्तीय सहायता मिलती है; जिले में बैंक ऑफ बड़ौदा, करौली को अग्रणी बैंक के रूप में चिन्हित किया गया है।
व्यापार मार्ग
करौली का पुराना मंडावर-करौली मार्ग महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ता था, और हिंडौन कपास, अनाज, तिलहन, कच्ची चीनी और तंबाकू की प्रमुख मंडी के रूप में काम करता था।
प्रशासनिक उपखंड
प्रशासनिक रूप से करौली जिला छह उपखंडों में बंटा था: करौली, हिंडौन, सपोटरा, टोडाभीम, नादौती और मंडरायल।
पंचायत समितियां
पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्रामीण विकास परियोजनाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए करौली जिले को आठ पंचायत समितियों में विभाजित किया गया था।
नगरीय निकाय
करौली जिले में नगर परिषदें करौली और हिंडौन सिटी में थीं, जबकि टोडाभीम को नगरपालिका के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।
कलक्टर की भूमिका
करौली में जिला कलक्टर ही जिला मजिस्ट्रेट, जिला विकास अधिकारी और राजस्व विभाग के मुखिया की भूमिका निभाते हैं।
राजस्व प्रशासन
करौली की भू-राजस्व व्यवस्था भरतपुर संभाग के अधीन है; जिला कलक्टर कार्यालय करौली में है और इसके साथ छह उपखंड कार्यालय तथा आठ तहसीलदार कार्यालय काम करते हैं।
भूमि अभिलेख
जिले का राजस्व विभाग भूमि अभिलेखों का मुख्य केंद्र है और भू-राजस्व वसूली, नामांतरण तथा सरकारी भूमि आवंटन जैसे काम संभालता है।
पुलिस रेंज
राजस्थान पुलिस करौली को भरतपुर रेंज में रखती है; उसकी जिला सूची में हिण्डौन, कैला देवी, करौली, सपोटरा और टोडाभीम, ये पांच पुलिस वृत्त दिखते हैं।
महिला अपराध इकाई
महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की जांच के लिए करौली में विशेष जांच इकाई है, जिसके प्रभारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक होते हैं और महिला पुलिस थाना करौली इसी व्यवस्था के तहत आता है।
पुलिस बल
गजेटियर में करौली जिला पुलिस बल में एक पुलिस अधीक्षक, एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और छह उप पुलिस अधीक्षक दर्ज हैं।
नगर वार्ड
वर्ष 2019 में करौली जिले की नगरीय स्वशासन व्यवस्था में दो नगर परिषदों और एक नगर पालिका के कुल 140 वार्ड थे।
ग्राम सभा
हर पंचायत क्षेत्र के लिए ग्राम सभा होती है, जिसमें उस गांव या गांवों के समूह की मतदाता सूची में दर्ज लोग शामिल होते हैं।
सिंचाई अनुदान
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत करौली के किसानों को स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई प्रणालियों पर 50 से 70 प्रतिशत अनुदान मिला; लघु सिंचाई योजना 2016-17 में इसी योजना में समाहित हुई थी।
सूक्ष्म उद्यम सहायता
करौली में उद्योग सहायता के संदर्भ में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों के जरिए रोजगार बढ़ाने वाली ऋण-संबद्ध सब्सिडी योजना के रूप में बताया गया है।
खनन क्षेत्र कल्याण
प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना में जिला खनिज फाउंडेशन के कोष से खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और कल्याण के काम कराए जाते हैं।
जन सूचना पोर्टल
करौली गजेटियर में जन सूचना पोर्टल के बारे में दर्ज है कि उस समय 63 विभागों की 108 योजनाओं से जुड़ी 286 तरह की सार्वजनिक सूचनाएं उपलब्ध थीं।
ग्राम पंचायत योजना
करौली गजेटियर की पंचायती राज विभाग योजना सूची में ग्राम पंचायत विकास योजना भी शामिल है।
रोजगार गारंटी
2 फरवरी 2006 को जारी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की पहली अधिसूचना में करौली राजस्थान के चयनित जिलों में शामिल था।
शहरी स्वच्छता
स्वच्छ भारत मिशन शहरी के तहत टोडाभीम नगर क्षेत्र में 2,149 व्यक्तिगत शौचालय, चार सार्वजनिक शौचालय और पांच सामुदायिक शौचालय बने; इसके बाद क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया प्रक्रिया से क्षेत्र को खुले में शौच मुक्त कराया गया।
जननी एक्सप्रेस
2018-19 में करौली जिले में जननी एक्सप्रेस 104 की 13 एम्बुलेंस थीं; इनके जरिए 8,098 गर्भवती महिलाओं और 4,312 बच्चों को लाभ मिला।
साक्षरता केंद्र
2017-18 में करौली जिले में 223 साक्षरता केंद्र संचालित थे, जिनमें कुल 46,728 नवसाक्षर नामांकित थे।
मध्याह्न भोजन
करौली जिले में मध्याह्न भोजन योजना 1,416 विद्यालयों में चल रही थी और 1,34,425 विद्यार्थियों को इससे लाभ मिल रहा था।
बालिका छात्रावास
करौली के शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉकों में बालिका छात्रावास योजना का लक्ष्य कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाली 14-18 वर्ष की बालिकाएं थीं, विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और बीपीएल परिवारों से।
किसी भी परीक्षा उपयोग से पहले सटीक विकल्पों की जाँच आधिकारिक RPSC / RSSB प्रश्न पत्रों से करें।
करौली के PYQ एक-पंक्ति तथ्य शीघ्र उपलब्ध होंगे।
ऊपर के जिला संदर्भ से क्विक सेल्फ़-टेस्ट। द्विभाषी, लॉगिन की आवश्यकता नहीं।
प्रश्न 1 / 8
राजस्थान की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट सूची में करौली के लिए कौन-सा उत्पाद दर्ज है?
जिले का नाम करौली नगर से जुड़ा है, जो इसका मुख्यालय है और पहले करौली रियासत की राजधानी भी रहा।
गजेटियर के अनुसार करौली राज्य का प्राचीन नाम करकरालगिरि था, जिसे क्षेत्र के चारों ओर फैली पहाड़ियों से जोड़ा गया है।
करौली नाम को कल्याणपुरी का बदला हुआ रूप माना जाता है; यह नाम भद्रावती नदी के किनारे स्थित कल्याणराय मंदिर से जुड़ा बताया जाता है।
2011 की जनगणना में करौली में हिंदी भाषा समूह सबसे प्रमुख था: 14,50,142 निवासी, यानी जिले की आबादी का लगभग 99.4 प्रतिशत; इसी समूह में हिंदी, मारवाड़ी, राजस्थानी और ब्रजभाषा जैसी मातृभाषाएं सूचीबद्ध हैं।
करौली जिला मुख्यालय रेलमार्ग से नहीं जुड़ा था; दिल्ली-मुंबई लाइन पर हिण्डौन और श्री महावीरजी जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशन थे।
जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षक करौली पुलिस बल के कार्यकारी प्रमुख होते हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जिला मजिस्ट्रेट के साथ काम करते हैं।
2017-18 में करौली जिले में एक जिला चिकित्सालय, एक उपखंड चिकित्सालय, चार शहरी औषधालय, 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 293 उपकेंद्र दर्ज थे।
करौली जिले के 851 बसे हुए गांवों में से 692 गांवों में शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध थीं, जिनसे ग्रामीण आबादी के 96.35 प्रतिशत हिस्से को सेवा मिलती थी।
यह मंदिर 1348 ईस्वी में यदुवंशी राजा अर्जुनदेव द्वारा करौली की स्थापना से जुड़ा माना जाता है; करौली के पुराने नाम कल्याणपुरी को कल्याणराय से जोड़ा गया है।