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हनुमानगढ़

जहाँ कभी सरस्वती बहती थी और हड़प्पा का हल पहली बार मिट्टी पलटता था

अंतिम सत्यापन: 2026-05-06

हनुमानगढ़ राजस्थान के उत्तरी छोर पर मौसमी घग्घर नदी के किनारे बसा है, वही धारा जिसे विद्वान ऋग्वैदिक काल की लुप्त सरस्वती से जोड़ते हैं। श्रीगंगानगर ज़िले से अलग होकर 12 जुलाई 1994 को बना यह बीकानेर संभाग का ज़िला कालीबंगा का हड़प्पाकालीन दुर्ग, तैमूर को टक्कर देने वाला भटनेर का क़िला और गोगामेड़ी का लोकतीर्थ अपनी गोद में समेटे है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के पानी से सींचे इसके गेहूँ और कपास के खेत राजस्थान की सबसे उपजाऊ कृषि पट्टियों में गिने जाते हैं।

जिला एक नज़र में

भौगोलिक क्षेत्र9,656 वर्ग किमी
जनसंख्या (जनगणना 2011)17.75 लाख व्यक्ति
जनसंख्या घनत्व (जनगणना 2011)184 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
साक्षरता (जनगणना 2011)67.13%
लिंगानुपात (जनगणना 2011)प्रति 1000 पुरुषों पर 906 महिलाएँ
मुख्यालयहनुमानगढ़
गठन वर्ष1994 (12 जुलाई 1994 को श्रीगंगानगर से अलग करके बनाया गया)

जिला प्रशासन

वर्तमान पदाधिकारी — सार्वजनिक अभिलेखों से।

जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर

डॉ. खुशाल यादव

हनुमानगढ़ जिला

पुलिस अधीक्षक

श्री नरेन्द्र मीणा

हनुमानगढ़ जिला

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट

श्री उम्मेदी लाल मीणा

हनुमानगढ़ जिला

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश

श्री तनवीर चौधरी

हनुमानगढ़ न्यायक्षेत्र

लोक सभा सांसद

श्री कुलदीप इंदौरा

गंगानगर

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

विधायक

श्री संजीव कुमार

भादरा

भारतीय जनता पार्टी

विधायक

श्री गणेशराज बंसल

हनुमानगढ़

निर्दलीय

विधायक

श्री अमित चाचाण

नोहर

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

विधायक

श्री विनोद कुमार

पीलीबंगा (अनुसूचित जाति)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

विधायक

श्री अभिमन्यु

संगरिया

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

इतिहास — प्राचीन → मध्यकालीन → आधुनिक

हड़प्पा दुर्ग

पीलीबंगा तहसील का कालीबंगा प्रारंभिक हड़प्पा बस्ती (लगभग 3500-2500 ईसा पूर्व) और परिपक्व हड़प्पा दुर्ग (लगभग 2500-1750 ईसा पूर्व) दोनों को सहेजे है, जिससे यह मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के साथ सिंधु-सरस्वती सभ्यता के तीन आधारभूत केंद्रों में गिना जाता है।

प्राचीनतम जुता खेत

इतालवी भारतविद् लुइजी पियो टेसिटोरी ने 1917-18 में कालीबंगा के मौर्यपूर्व चरित्र को पहचाना; 1960 से 1969 के बीच बी. बी. लाल और बी. के. थापर के नेतृत्व में हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के व्यवस्थित उत्खनन ने यहाँ लगभग 2800 ईसा पूर्व के विश्व के सबसे प्राचीन जुते हुए खेत के प्रमाण उजागर किए।

भटनेर की स्थापना

स्थानीय परंपरा भटनेर के नदी-तटीय दुर्ग की स्थापना का श्रेय राजा भूपत को देती है, जिन्होंने इसे लगभग 255 ईस्वी में बसाया; तक़रीबन एक हज़ार वर्ष तक यह क़िला भाटी राजपूतों का पश्चिमी गढ़ और मुल्तान-दिल्ली व्यापार मार्ग की प्रमुख चौकी बना रहा।

तैमूर का घेरा

1398 ईस्वी में दिल्ली कूच के दौरान तैमूर की सेना ने भटनेर पर धावा बोला; राव दलजीत के नेतृत्व वाली रक्षक टुकड़ी भीषण घेराबंदी के बाद परास्त हुई—तुज़ुक-ए-तैमूरी स्वयं इस संघर्ष को अभियान की सबसे रक्तरंजित लड़ाइयों में दर्ज करता है।

1805 का पुनर्नामकरण

1805 ईस्वी में एक मंगलवार को बीकानेर के महाराजा सूरत सिंह ने भाटियों से भटनेर छीन लिया; मंगलवार हनुमान जी का दिन माना जाने से उन्होंने क़िले और आसपास की बस्ती का नाम बदलकर 'हनुमानगढ़' अर्थात् हनुमान का गढ़ रख दिया।

ज़िले का गठन

आधुनिक हनुमानगढ़ ज़िला 12 जुलाई 1994 को श्रीगंगानगर से अलग होकर राजस्थान का इकत्तीसवाँ ज़िला बना; इसका मुख्यालय ऐतिहासिक क़िलेबंद नगर हनुमानगढ़ है और प्रशासनिक देखरेख बीकानेर संभाग के अधीन है।

कला, संस्कृति, विरासत एवं पर्यटन

गोगा मेला

भाद्रपद के कृष्ण पक्ष (अगस्त-सितंबर) में तीन दिन तक चलने वाला गोगामेड़ी का गोगा मेला राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से लाखों श्रद्धालुओं को सर्पों के रक्षक लोकदेव गोगाजी की समाधि पर खींच लाता है।

गोगाजी लोकदेव

गोगाजी, जिन्हें जाहरवीर चौहान भी कहा जाता है, का जन्म लगभग 1003 ईस्वी में पड़ोसी चूरू ज़िले के डडरेवा में हुआ था; हिन्दू और मुस्लिम दोनों उन्हें पीर के रूप में पूजते हैं और यह परंपरा राजपूत वीरता को नाथ-योगी सर्प-विद्या से अनूठे ढंग से जोड़ती है।

त्रिभाषी संस्कृति

यह ज़िला बागड़ी भाषी पट्टी में आता है, जहाँ राजस्थानी (लगभग 60 प्रतिशत), पंजाबी (लगभग 18 प्रतिशत) और बागड़ी (लगभग 13 प्रतिशत) रोज़मर्रा की बोलियाँ हैं; इसी से माँड, हीर-राँझा के विरह-गीत और गुरुद्वारों के शबद-कीर्तन की मिली-जुली लोक-संगीत परंपरा फलती-फूलती है।

हड़प्पाई शिल्प विरासत

कालीबंगा से प्राप्त मिट्टी की चूड़ियाँ, अंकित मुद्राएँ और जालीदार सड़कें ज़िले को इसका नाम देती हैं—स्थानीय बोली में 'काली-बंगा' का अर्थ ही 'काली चूड़ियाँ' है—और आज भी हनुमानगढ़ के कुम्हार-कलाकार मिट्टी एवं पीतल के बर्तनों पर हड़प्पाकालीन रूपांकन उकेरते हैं।

सिख विरासत

हनुमानगढ़ की लगभग 12 प्रतिशत आबादी सिख है—श्रीगंगानगर के बाद राजस्थान में यह सबसे अधिक अनुपात है—इसलिए गुरपुरब, होला मोहल्ला और संगरिया-तिबी के लंगर वाले गुरुद्वारे यहाँ हिन्दू मंदिर परंपराओं के साथ-साथ फलते-फूलते हैं।

भूगोल, जलवायु एवं पारिस्थितिकी

सीमावर्ती ज़िला

राजस्थान के उत्तर-पूर्वी छोर पर 9,656 वर्ग किलोमीटर में फैला हनुमानगढ़ पंजाब और हरियाणा से लगभग 75 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है, जिससे यह दोनों पड़ोसी राज्यों को छूने वाला राज्य का एकमात्र ज़िला बन जाता है।

घग्घर-सरस्वती

शिवालिक की हिमपात-धाराओं से पोषित मौसमी नदी घग्घर-हाकड़ा ज़िले के बीच से लगभग 130 किलोमीटर लंबा चाप बनाती है; भू-वैज्ञानिक और पुरातत्वविद् इसके सूखे पुरापथ को वैदिक साहित्य की लुप्त सरस्वती मानते हैं।

जलोढ़ मैदान

धरातल लगभग समतल जलोढ़ मैदान है जो शिवालिक तलहटी से थार की ओर हल्का ढलान लिए हुए है; नोहर और भादरा से पश्चिम की ओर हवा से बने रेतीले टीले गहराते जाते हैं, जबकि घग्घर पट्टी ही एकमात्र उपजाऊ चिकनी-दुमट गलियारा है।

अर्ध-शुष्क जलवायु

जलवायु अर्ध-शुष्क है—जनवरी में पारा 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे और मई-जून में 47 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुँच जाता है—जबकि वार्षिक वर्षा औसतन केवल 280-300 मिलीमीटर रहती है, जो ज़्यादातर दक्षिण-पश्चिम मानसून में बरसती है।

आठ तहसीलें

ज़िले का प्रशासनिक विभाजन आठ तहसीलों—हनुमानगढ़, नोहर, भादरा, पीलीबंगा, रावतसर, तिब्बी, संगरिया और पल्लू—में किया गया है, जिनके अंतर्गत बीकानेर संभाग के तहत एक नगर परिषद और सात नगरपालिकाएँ आती हैं।

अर्थव्यवस्था — क्षेत्र, उद्योग, ऊर्जा

गेहूँ-कपास पट्टी

हनुमानगढ़ राजस्थान के अग्रणी गेहूँ और कपास उत्पादक ज़िलों में गिना जाता है; यहाँ की लगभग 75 प्रतिशत श्रमशक्ति सीधे कृषि से जुड़ी है, और मुख्य फसलों के साथ खरीफ-रबी चक्र में चावल, सरसों तथा चना भी उगाए जाते हैं।

इंदिरा गांधी नहर जीवनरेखा

सतलज-व्यास संगम पर हरिके बैराज से निकाली गई 837 किलोमीटर लंबी इंदिरा गांधी नहर परियोजना हनुमानगढ़ की कृषि भूमि के बड़े भाग को सींचती है और इसी ने कभी सूखी पशुचारी ज़मीन को भरोसेमंद गेहूँ-कपास क्षेत्र में बदल दिया।

कृषि-प्रसंस्करण केंद्र

कपास ओटाई, सरसों तेल मिलें और चावल मिलें हनुमानगढ़ शहर, संगरिया और पीलीबंगा के आसपास केंद्रित हैं; हनुमानगढ़ की कृषि उपज मंडी समिति की मंडी उत्तरी राजस्थान की सबसे बड़ी कृषि-वस्तु व्यापार मंडियों में से एक है।

शुद्ध खाद्यान्न निर्यातक

नहरी सिंचाई और सघन फसल चक्र के बल पर हनुमानगढ़ नियमित रूप से राजस्थान के उच्च प्रति व्यक्ति आय वाले ज़िलों में आता है और दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के घाटा-ज़िलों को खाद्यान्न का शुद्ध निर्यातक है।

राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरचना

पाँच विधानसभा सीटें

हनुमानगढ़ ज़िला राजस्थान विधानसभा को पाँच विधानसभा क्षेत्र देता है—संगरिया, हनुमानगढ़, पीलीबंगा (अनुसूचित जाति आरक्षित), नोहर और भादरा—जहाँ हर सीट से एक विधायक प्रथम-पास-द-पोस्ट प्रणाली से चुना जाता है।

एससी आरक्षित लोकसभा

हनुमानगढ़ की पाँचों विधानसभा सीटें श्रीगंगानगर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है; इस तरह यह ज़िला अपना लोकसभा प्रतिनिधित्व श्रीगंगानगर ज़िले के साथ मिलकर भेजता है।

त्रिस्तरीय पंचायतें

स्थानीय स्वशासन एक ज़िला परिषद, सात पंचायत समितियों और 250 से अधिक ग्राम पंचायतों के माध्यम से चलता है; इसके साथ हनुमानगढ़ में एक नगर परिषद और छोटे नगरों में सात नगरपालिकाएँ कार्यरत हैं।

शासन पहल एवं योजनाएँ (2025-26)

इंदिरा गांधी नहर सिंचाई

हनुमानगढ़ के किसान इंदिरा गांधी नहर परियोजना पर भारी निर्भर हैं—यह केंद्र-सहयोग प्राप्त सिंचाई परियोजना 1958 में शुरू हुई और 2 नवंबर 1984 को इंदिरा गांधी के नाम पर इसका पुनर्नामकरण किया गया, जिसने ज़िले के सूखे चरागाहों को नहरी कृषि भूमि में बदल दिया।

एएसआई विरासत संरक्षण

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कालीबंगा परिसर को प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1958 के तहत केंद्रीय संरक्षित स्मारक के रूप में सुरक्षित रखता है और यहाँ एक स्थल संग्रहालय भी संचालित करता है, जो ज़िले का सबसे बड़ा विरासत-पर्यटन आकर्षण है।

पीएम-किसान और एमएसपी

हनुमानगढ़ के गेहूँ, सरसों और चना उत्पादक किसान केंद्र की पीएम-किसान आय-सहायता और राज्य की एमएसपी आधारित खरीद के बड़े लाभार्थी हैं; दोनों योजनाएँ हनुमानगढ़ कृषि उपज मंडी समिति और पीलीबंगा-संगरिया स्थित भारतीय खाद्य निगम के गोदामों के ज़रिए संचालित होती हैं।

PYQ एक-पंक्ति (RAS / RPSC / RSSB)

किसी भी परीक्षा उपयोग से पहले सटीक विकल्पों की जाँच आधिकारिक RPSC / RSSB प्रश्न पत्रों से करें।

हनुमानगढ़ के PYQ एक-पंक्ति तथ्य शीघ्र उपलब्ध होंगे।

स्वयं को परखें — 10 प्रश्न

ऊपर के जिला संदर्भ से क्विक सेल्फ़-टेस्ट। द्विभाषी, लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

प्रश्न 1 / 8

हड़प्पा कालीन पुरातात्विक स्थल कालीबंगा राजस्थान के किस ज़िले में स्थित है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कालीबंगा को भारत के सबसे महत्वपूर्ण हड़प्पाई स्थलों में क्यों गिना जाता है?

पीलीबंगा तहसील के कालीबंगा से विश्व के सबसे प्राचीन जुते हुए कृषि-खेत के प्रमाण, यज्ञ-वेदिकाओं के अवशेष, ग्रिड सड़कों वाला किलाबंद निचला नगर और लगभग 3500 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व तक की मुद्राएँ मिली हैं, जिनके चलते यह सिंधु-सरस्वती सभ्यता के तीन आधारभूत केंद्रों में गिना जाता है।

भटनेर क़िले का नाम बदलकर हनुमानगढ़ कैसे रखा गया?

1805 ईस्वी में एक मंगलवार को बीकानेर के महाराजा सूरत सिंह ने भटनेर क़िले पर धावा बोलकर उसे भाटी राजपूतों से छीन लिया; मंगलवार हनुमान जी का दिन माना जाता है, इसलिए विजय के उपलक्ष्य में उन्होंने क़िले और आसपास की बस्ती का नाम बदलकर हनुमानगढ़ अर्थात् 'हनुमान का गढ़' रख दिया।

हनुमानगढ़ की अर्थव्यवस्था में इंदिरा गांधी नहर की क्या भूमिका है?

सतलज-व्यास संगम पर हरिके बैराज से निकाली गई 837 किलोमीटर लंबी इंदिरा गांधी नहर हनुमानगढ़ की कृषि भूमि के बड़े हिस्से को सींचती है; यही सबसे बड़ा कारण है कि ज़िला वर्षा-आधारित पशुचारी अर्थव्यवस्था से गेहूँ, कपास, सरसों और चने के अधिशेष उत्पादन की ओर बढ़ा और राजस्थान के अधिक प्रति व्यक्ति आय वाले ज़िलों में नियमित रूप से शामिल रहा।