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अपना जिला जानें

चित्तौड़गढ़

मेवाड़ का किला-जिला, खनिज, सीमेंट और अटल जल कवरेज

अंतिम सत्यापन: 2026-05-06

चित्तौड़गढ़ जिले का मुख्यालय चित्तौड़गढ़ शहर है। यह जिला मेवाड़ के इतिहास और चित्तौड़गढ़ दुर्ग से गहरे जुड़ा है, जिस पर अलाउद्दीन खिलजी, गुजरात के बहादुर शाह और अकबर के आक्रमण दर्ज हैं। चूना पत्थर, सीमेंट, कृषि और अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों से यहां की अर्थव्यवस्था की पहचान बनती है।

जिला एक नज़र में

जिला मुख्यालयचित्तौड़गढ़ शहर
जनगणना 2011 की आबादी15.44 लाख
जनगणना 2011 का क्षेत्रफल7,822 वर्ग किलोमीटर
जनगणना 2011 घनत्व197 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
जनगणना 2011 लिंगानुपातप्रति 1,000 पुरुषों पर 972 महिलाएं
जनगणना 2011 साक्षरता दर61.71 प्रतिशत

जिला प्रशासन

वर्तमान पदाधिकारी — सार्वजनिक अभिलेखों से।

जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर

मंजू

चित्तौड़गढ़ जिला

पुलिस अधीक्षक

मनीष त्रिपाठी

चित्तौड़गढ़ जिला

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट

प्रभा गौतम

चित्तौड़गढ़ जिला

जिला एवं सत्र न्यायाधीश

मान सिंह चुंडावत

चित्तौड़गढ़ न्यायिक क्षेत्र

लोक सभा सांसद

चंद्र प्रकाश जोशी

चित्तौड़गढ़ लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2024 से

महापौर

संदीप शर्मा

चित्तौड़गढ़ नगर परिषद

विधान सभा सदस्य

गौतम कुमार

बड़ी सादड़ी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2023 से

विधान सभा सदस्य

श्रीचन्द कृपलानी

निंबाहेड़ा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2023 से

विधान सभा सदस्य

सुरेश धाकड़

बेगूं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2023 से

विधान सभा सदस्य

अर्जुन लाल जीनगर

कपासन (अनुसूचित जाति) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2023 से

विधान सभा सदस्य

चंद्रभान सिंह चौहान

चित्तौड़गढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

निर्दलीय2023 से

इतिहास — प्राचीन → मध्यकालीन → आधुनिक

भीमलत परंपरा

चित्तौड़गढ़ की प्राचीनता स्थानीय परंपरा में महाभारत के भीम से जोड़ी जाती है, जिनसे भीमलत जलाशय के निर्माण की कथा जुड़ी है।

मेधपाट से मेवाड़

चित्तौड़गढ़ के आसपास का क्षेत्र पहले मेधपाट कहलाता था, जो आगे चलकर मेवाड़ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

मोरी शासन

जिला प्रोफाइल के अनुसार यह क्षेत्र बाद में मौर्यों या मोरी राजपूतों के अधीन आया।

मान मोरी पराजय

मान मोरी का शासन 734 ईस्वी तक बताया गया है, जब बप्पा रावल ने उसे पराजित किया।

बप्पा रावल वंश

बप्पा रावल, जिनका जन्मनाम कालभोज बताया जाता है, उस वंश के संस्थापक माने जाते हैं जिसने आगे चलकर मेवाड़ पर शासन किया।

चित्तौड़ दहेज अनुदान

औद्योगिक प्रोफाइल के अनुसार आठवीं सदी के मध्य में सोलंकी राजकुमारी के दहेज के हिस्से के रूप में बप्पा रावल को चित्तौड़ मिला।

मेवाड़ वंश शासन

आठवीं से सोलहवीं शताब्दी तक मेवाड़ पर बप्पा रावल के वंशजों का शासन रहा।

मेवाड़ क्षेत्र विस्तार

इस काल में मेवाड़ का विस्तार गुजरात से अजमेर तक माना गया है।

खिलजी आक्रमण

चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर 1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया था।

बहादुर शाह आक्रमण

1533 में गुजरात के बहादुर शाह ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर हमला किया।

अकबर दुर्ग अधिकार

मुगल सम्राट अकबर ने 1568 में चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर आक्रमण कर उसे अपने अधिकार में लिया।

जहांगीर दुर्ग वापसी

मुगल सम्राट जहांगीर के समय 1616 में चित्तौड़गढ़ दुर्ग फिर राजपूतों को सौंप दिया गया।

कला, संस्कृति, विरासत एवं पर्यटन

प्रकाश ध्वनि कार्यक्रम

चित्तौड़गढ़ दुर्ग का प्रकाश और ध्वनि कार्यक्रम दुर्ग का इतिहास, स्थापना, शासक, युद्ध और अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण को प्रस्तुत करता है।

विजय स्तम्भ निर्माण

विजय स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुंभा ने 1440 ईस्वी से 1448 ईस्वी के बीच कराया था।

विजय स्तम्भ विजय

विजय स्तम्भ मालवा और गुजरात के शासकों पर महाराणा कुंभा की विजय की स्मृति में बनाया गया।

विजय स्तम्भ मूर्तिकला

विजय स्तम्भ नौ मंजिला स्मारक है, जिस पर हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तिकला अंकित है।

कीर्ति स्तम्भ समर्पण

कीर्ति स्तम्भ प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथजी को समर्पित है।

कीर्ति स्तम्भ संरक्षण

कीर्ति स्तम्भ बारहवीं शताब्दी ईस्वी में एक समृद्ध जैन व्यापारी द्वारा बनवाया गया सात मंजिला स्तम्भ है।

महल संग्रहालय

फतह प्रकाश महल महाराणा फतह सिंह ने बनवाया था; आज यह संग्रहालय के रूप में देखा जाता है।

बस्सी काष्ठ शिल्प

फतह प्रकाश महल संग्रहालय में बस्सी गांव की लकड़ी की शिल्पकृतियां रखी गई हैं।

जनजातीय वेशभूषा प्रतिकृतियां

फतह प्रकाश महल संग्रहालय में स्थानीय जनजातीय समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा दिखाने वाली मिट्टी की प्रतिकृतियां प्रदर्शित हैं।

दुर्ग जैन मंदिर

चित्तौड़गढ़ दुर्ग की प्राचीरों के भीतर छह जैन मंदिर स्थित हैं।

सतबीस देवरी प्रतिमाएं

राजस्थान पर्यटन के अनुसार सतबीस देवरी जैन मंदिर का नाम मंदिर में बनी 27 देव प्रतिमाओं से जुड़ा है।

बस्सी कावड़ कला

बस्सी गांव पौराणिक कथाओं को उकेरने वाली लकड़ी की कावड़ कला के लिए प्रसिद्ध है।

भूगोल, जलवायु एवं पारिस्थितिकी

अक्षांश विस्तार

चित्तौड़गढ़ 24 डिग्री 13 मिनट से 25 डिग्री 51 मिनट उत्तरी अक्षांश के बीच स्थित है।

देशांतर विस्तार

चित्तौड़गढ़ 74 डिग्री 04 मिनट से 75 डिग्री 53 मिनट पूर्वी देशांतर के बीच फैला है।

उत्तरी सीमा

चित्तौड़गढ़ की उत्तरी सीमा भीलवाड़ा और बूंदी जिलों से लगती है।

पूर्वी सीमा

चित्तौड़गढ़ के पूर्व में कोटा जिला और मध्य प्रदेश स्थित हैं।

दक्षिणी सीमा

चित्तौड़गढ़ के दक्षिण में प्रतापगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा आती है।

पश्चिमी सीमा

चित्तौड़गढ़ के पश्चिम में उदयपुर और बांसवाड़ा जिले स्थित हैं।

अरावली भूभाग

जिले की स्थलाकृति अरावली शृंखला की छितरी पहाड़ियों के साथ ऊबड़-खाबड़ स्वरूप रखती है।

नदी तंत्र

चित्तौड़गढ़ की प्रमुख नदियों में चंबल, बनास, बेड़च, गंभीरी और जाखम शामिल हैं।

वार्षिक वर्षा

चित्तौड़गढ़ के लिए उल्लिखित औसत वार्षिक वर्षा 90 सेंटीमीटर है।

कृषि जलवायु क्षेत्र

चित्तौड़गढ़ जिला कृषि-पारिस्थितिक जोन चार-ए में आता है, जिसे उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान और अरावली पहाड़ी क्षेत्र माना जाता है।

वर्षा अनुमान

कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार चित्तौड़गढ़ जिले की औसत वार्षिक वर्षा 852 मिलीमीटर है।

मिट्टी प्रकार

चित्तौड़गढ़ की मिट्टियों में धूसर-भूरी दोमट और मध्यम काली मिट्टियां मिलती हैं, जिनकी बनावट मध्यम से भारी तक है।

अर्थव्यवस्था — क्षेत्र, उद्योग, ऊर्जा

खनिज संसाधन

चित्तौड़गढ़ जिले में बेराइट्स, चीनी मिट्टी, चूना पत्थर, बलुआ पत्थर और गेरू जैसे खनिज पाए जाते हैं।

चूना पत्थर उत्पादन

वर्ष 2010-11 में चित्तौड़गढ़ के लिए चूना पत्थर उत्पादन 1.02 करोड़ टन से अधिक दर्ज किया गया था।

कृषि जलवायु क्षेत्र

राजस्थान फाउंडेशन द्वारा उद्धृत कृषि विभाग के वर्गीकरण में चित्तौड़गढ़ आर्द्र दक्षिणी मैदानी कृषि-जलवायु क्षेत्र में आता है।

खरीफ फसलें

चित्तौड़गढ़ के कृषि-जलवायु क्षेत्र में खरीफ की सामान्य फसलों में ज्वार, दलहन और मक्का शामिल हैं।

रबी फसलें

चित्तौड़गढ़ के कृषि-जलवायु क्षेत्र में रबी की सामान्य फसलों में गेहूं और चना शामिल हैं।

मुख्य खरीफ फसलें

कृषि विज्ञान केंद्र चित्तौड़गढ़ में मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, ज्वार, कपास और उड़द को प्रमुख खरीफ फसलों के रूप में सूचीबद्ध करता है।

मुख्य रबी फसलें

कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार चित्तौड़गढ़ में रबी की प्रमुख फसलों में गेहूं, सरसों, चना, जौ और अफीम शामिल हैं।

औद्योगिक क्षेत्र

एमएसएमई प्रोफाइल में चित्तौड़गढ़ जिले के आठ औद्योगिक क्षेत्र दर्ज हैं, जिनमें चित्तौड़गढ़, निम्बाहेड़ा, कपासन, मानपुरा, आजोलिया का खेड़ा और सोनियाना शामिल हैं।

उद्यम इकाइयां

उद्धृत एमएसएमई प्रोफाइल के अनुसार जिले में 2,851 मौजूदा सूक्ष्म-लघु उद्यम और कारीगर इकाइयां थीं।

अधात्विक इकाइयां

उद्धृत एमएसएमई प्रोफाइल में अधात्विक इकाइयां सबसे बड़ा सूक्ष्म-लघु उद्यम वर्ग थीं, जिनकी संख्या 698 थी।

सीमेंट निर्यात

चित्तौड़गढ़ जिले के लिए सीमेंट को प्रमुख निर्यात योग्य वस्तु के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

सीमेंट उत्पादन

एमएसएमई प्रोफाइल चित्तौड़गढ़ को उच्च-ग्रेड चूना-पत्थर पट्टी के कारण राजस्थान का सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक बताती है।

राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरचना

लोकसभा सांसद

चित्तौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्र का 18वीं लोकसभा में प्रतिनिधित्व भाजपा के श्री चन्द्र प्रकाश जोशी करते हैं।

बड़ी सादड़ी विधायक

बड़ी सादड़ी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा के श्री गौतम कुमार करते हैं।

बेगूं विधायक

बेगूं विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा के डॉ. सुरेश धाकड़ करते हैं।

चित्तौड़गढ़ विधायक

चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व निर्दलीय सदस्य श्री चन्द्रभान सिंह चौहान करते हैं।

कपासन विधायक

कपासन अनुसूचित जाति विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा के श्री अर्जुन लाल जीनगर करते हैं।

निम्बाहेड़ा विधायक

निम्बाहेड़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा के श्री श्रीचंद कृपलानी करते हैं।

जिला कलेक्टर

राजकाज में चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में श्रीमती मंजू को कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

कलेक्टर रिपोर्ट अद्यतन

राजकाज ने चित्तौड़गढ़ कलेक्टर कार्यालय रिपोर्ट को 11 अप्रैल 2026 को अंतिम बार अद्यतन बताया।

शासन पहल एवं योजनाएँ (2025-26)

अटल जल दायरा

उद्धृत राजस्थान संबंधी उत्तर में अटल भूजल योजना के तहत प्रतापगढ़ या उदयपुर नहीं, केवल चित्तौड़गढ़ जिला शामिल था।

कुशल जल उपयोग

अटल भूजल योजना के तहत चित्तौड़गढ़ में लगभग 3,700 हेक्टेयर क्षेत्र को कुशल जल-उपयोग पद्धतियों के दायरे में लाया गया।

भूजल निगरानी कुएं

अटल भूजल योजना में चित्तौड़गढ़ के 700 से अधिक कुओं को भूजल-स्तर निगरानी के लिए चिह्नित किया गया।

पुनर्भरण संरचनाएं

अटल भूजल योजना के तहत चित्तौड़गढ़ में लगभग 220 कृत्रिम पुनर्भरण या जल-संरक्षण संरचनाओं की जियो-टैगिंग की गई।

पीजोमीटर जाल

अटल भूजल योजना के अंतर्गत चित्तौड़गढ़ में 31 पीजोमीटर बनाए गए थे।

वर्षामापी केंद्र

चित्तौड़गढ़ की अटल जल ग्राम पंचायतों में 40 वर्षामापी केंद्र स्थापित किए गए थे।

आपूर्ति संरचनाएं

अटल भूजल योजना के तहत चित्तौड़गढ़ में आपूर्ति-पक्ष की 337 संरचनाएं बनाई गईं या उनका नवीनीकरण किया गया।

जन आरोग्य अस्पताल

2019 के उद्धृत PIB उत्तर में चित्तौड़गढ़ जिले में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के 26 सूचीबद्ध अस्पताल थे, जिनमें 19 सरकारी और 7 निजी अस्पताल शामिल थे।

PYQ एक-पंक्ति (RAS / RPSC / RSSB)

किसी भी परीक्षा उपयोग से पहले सटीक विकल्पों की जाँच आधिकारिक RPSC / RSSB प्रश्न पत्रों से करें।

चित्तौड़गढ़ के PYQ एक-पंक्ति तथ्य शीघ्र उपलब्ध होंगे।

स्वयं को परखें — 10 प्रश्न

ऊपर के जिला संदर्भ से क्विक सेल्फ़-टेस्ट। द्विभाषी, लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

प्रश्न 1 / 10

केवीके चित्तौड़गढ़ के अनुसार जिला किस कृषि-पारिस्थितिक क्षेत्र में आता है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चित्तौड़गढ़ जिला कहां स्थित है?

यह राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है।

चित्तौड़गढ़ किले के भीतर प्रमुख पर्यटन स्मारक कौन-से हैं?

राजस्थान पर्यटन लाइट एंड साउंड शो, विजय स्तंभ, कीर्ति स्तंभ, फतेह प्रकाश महल और जैन मंदिरों को प्रमुख स्थलों के रूप में रेखांकित करता है।

सांवलिया जी मंदिर किस लिए प्रसिद्ध है?

यह चित्तौड़गढ़-उदयपुर राजमार्ग पर मंडफिया गांव में स्थित भव्य मंदिर है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं।

बस्सी गांव किस कला के लिए प्रसिद्ध है?

बस्सी गांव लकड़ी की कला, खासकर कावड़, के लिए जाना जाता है।

चित्तौड़गढ़ की खेती में कौन-सी फसलें प्रमुख हैं?

खरीफ में मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, ज्वार, कपास और उड़द प्रमुख हैं, जबकि रबी में गेहूं, सरसों, चना, जौ और अफीम शामिल हैं।

बस्सी वन्यजीव अभयारण्य में कौन-से प्रमुख वन्यजीव बताए जाते हैं?

सूचीबद्ध वन्यजीवों में चीतल, सांभर, सामान्य लोमड़ी, जंगली सूअर और तेंदुआ शामिल हैं।

रेल मार्ग से चित्तौड़गढ़ कैसे पहुंचा जा सकता है?

राजस्थान पर्यटन के अनुसार चित्तौड़गढ़ रेल से उदयपुर, जयपुर, अजमेर, रतलाम, दिल्ली, कोटा और अन्य प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा है।