जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर
हरफूल सिंह यादव
बूंदी जिला
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किलों, बावड़ियों और चंबल से जुड़ी भूगोल वाली हाड़ौती की धरती
बूँदी जिला राजस्थान के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। राव देवा हाड़ा ने 1342 में जैता मीणा से बूँदी का अधिकार लेकर बूँदी रियासत की नींव रखी। सरकारी पर्यटन सामग्री में यह जिला किलों, महलों, बावड़ियों, झीलों और उत्सवों के लिए पहचाना जाता है।
| 2011 की जनगणना में जनसंख्या | 11,10,906 |
|---|---|
| 2011 की जनगणना में स्त्री-पुरुष संरचना | 5,77,160 पुरुष और 5,33,746 महिलाएँ |
| भौगोलिक क्षेत्रफल | 5,776 वर्ग किलोमीटर |
| जिला मुख्यालय | बूँदी शहर |
| 2011 की जनगणना में साक्षरता | जिला उद्योग केंद्र की जिला प्रोफाइल में 61.52 प्रतिशत |
| 2011 की जनगणना में लिंगानुपात | जिला उद्योग केंद्र की जिला प्रोफाइल में प्रति 1,000 पुरुषों पर 925 महिलाएँ |
वर्तमान पदाधिकारी — सार्वजनिक अभिलेखों से।
जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर
हरफूल सिंह यादव
बूंदी जिला
पुलिस अधीक्षक
अवनीश कुमार शर्मा
बूंदी जिला
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट
राम किशोर मीणा
बूंदी जिला
जिला एवं सत्र न्यायाधीश
संदीप कुमार शर्मा
बूंदी न्यायिक क्षेत्र
लोक सभा सांसद
ओम बिरला
कोटा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
भारतीय जनता पार्टी2024 से
विधान सभा सदस्य
हरिमोहन शर्मा
बूंदी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस2023 से
विधान सभा सदस्य
अशोक
हिण्डोली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस2023 से
विधान सभा सदस्य
चुन्नीलाल सी.एल. प्रेमी बैरवा
कैशोरायपाटन (अनुसूचित जाति) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस2023 से
महापौर
मधु नुवाल
बूंदी
हाड़ा स्थापना
राव देवा हाड़ा ने 1342 में जैता मीणा से बूँदी का अधिकार लेकर बूँदी रियासत की स्थापना की।
हाड़ौती नामकरण
राव देवा हाड़ा ने आसपास के क्षेत्र को हाड़ौती नाम दिया, जिसे हाड़ा राजपूतों की भूमि माना गया।
नाम उत्पत्ति
जिला उद्योग केंद्र की जिला प्रोफाइल में बूँदी नाम की उत्पत्ति बूँदा का नाल नाम की सँकरी घाटी से जोड़ी गई है।
कोटा विभाजन
जहाँगीर के शासनकाल में कोटा को बूँदी से अलग कर स्वतंत्र रियासत का दर्जा दिया गया।
राजस्थान संघ
साल 1948 में राजस्थान संघ में विलय के समय पूर्व बूँदी राज्य का पूरा भूभाग एक इकाई के रूप में रखा गया।
कोटा स्वतंत्रता
राजस्थान पर्यटन के अनुसार, साल 1624 में कोटा बूँदी से अलग होकर स्वतंत्र राज्य बना।
रानी की बावड़ी
रानीजी की बावड़ी को रानी की बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है।
राजसी संरक्षण
रानीजी की बावड़ी का निर्माण साल 1699 में रानी नाथावती जी ने करवाया था।
सबसे बड़ी बावड़ी
बूँदी नगर की पचास से अधिक बावड़ियों में रानीजी की बावड़ी सबसे बड़ी मानी जाती है।
कुण्ड ज्यामिति
दाभाई कुण्ड को जेल कुण्ड भी कहा जाता है और इसकी बनावट उल्टे पिरामिड जैसी है।
लघु भित्तिचित्र
गढ़ महल की चित्रशाला लघु भित्तिचित्रों के लिए जानी जाती है।
कजली तीज
कजली तीज को राजस्थान पर्यटन बूंदी नगर का विशिष्ट उत्सव बताता है।
बूंदी उत्सव
बूंदी उत्सव कार्तिक पूर्णिमा के तीन दिन बाद मनाया जाता है।
दक्षिण-पूर्वी स्थिति
बूंदी जिला राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है।
अक्षांश विस्तार
बूंदी जिला 24 डिग्री 59 मिनट 11 सेकंड से 25 डिग्री 53 मिनट 11 सेकंड उत्तर अक्षांशों के बीच फैला है।
देशांतर विस्तार
बूंदी जिला 75 डिग्री 19 मिनट 30 सेकंड से 76 डिग्री 19 मिनट 30 सेकंड पूर्व देशांतरों के बीच स्थित है।
चंबल सीमा
चंबल नदी पूर्वी सीमा पर बूंदी और कोटा क्षेत्रों को अलग करती है।
नदी तंत्र
बूँदी जिले से होकर बहने वाली प्रमुख नदियों में चम्बल और मेज शामिल हैं।
मध्य पर्वत श्रृंखला
मध्य बूँदी पर्वत-श्रेणी जिले में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा तक फैली है।
वन्यजीव अभयारण्य
रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य 252 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और इसकी स्थापना 1982 में हुई थी।
कृषित क्षेत्र
जिला उद्योग केंद्र की प्रोफाइल में बूँदी जिले का कुल कृषित क्षेत्र 4.68 लाख हेक्टेयर दर्ज है।
प्रमुख फसलें
बूँदी जिले की प्रमुख फसलों में गेहूं, चावल, चना, सोयाबीन, रेपसीड और सरसों तथा मक्का का उल्लेख मिलता है।
सिंचित क्षेत्र
जिला उद्योग केंद्र की प्रोफाइल में बूँदी जिले का कुल सिंचित क्षेत्र 2.91 लाख हेक्टेयर दर्ज है।
चम्बल कमांड
बूँदी और केशवरायपाटन तहसीलें चम्बल कमांड क्षेत्र में आती हैं।
पत्थर खनिज
जिला उद्योग केंद्र बूँदी ने जिले में उपलब्ध खनिजों के रूप में चूना पत्थर, बलुआ पत्थर, चिनाई पत्थर, स्लेट पत्थर और लाल पत्थर सूचीबद्ध किए हैं।
सीमेंट उद्योग
एसीसी लिमिटेड की लाखेरी सीमेंट वर्क्स इकाई को सीमेंट और क्लिंकर बनाने वाले बड़े या मध्यम उद्योग के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
औद्योगिक क्षेत्र
जिला उद्योग केंद्र के सर्वेक्षण तक राजस्थान औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम ने बूँदी जिले में छह औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए थे।
विधानसभा क्षेत्र
राजस्थान विधानसभा बूँदी जिले के विधानसभा क्षेत्रों बूँदी, हिंडोली और केशवरायपाटन अनुसूचित जाति के वर्तमान सदस्यों की सूची देती है।
हिंडोली प्रतिनिधि
कांग्रेस के श्री अशोक हिंडोली विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान सदस्य के रूप में सूचीबद्ध हैं।
केशोरायपाटन प्रतिनिधि
केशोरायपाटन की अनुसूचित जाति आरक्षित विधानसभा सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के श्री चुन्नीलाल सी.एल. प्रेमी बैरवा वर्तमान सदस्य के रूप में दर्ज हैं।
बूँदी प्रतिनिधि
बूँदी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के श्री हरिमोहन शर्मा वर्तमान सदस्य के रूप में सूचीबद्ध हैं।
जिला उपखंड
जिला उद्योग केंद्र की रूपरेखा में बूँदी जिले के छह उपखंड बताए गए हैं: बूँदी, नैनवां, केशोरायपाटन, हिंडोली, लाखेरी/तालेड़ा और तालेड़ा।
निवेश प्रोत्साहन
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2014 को बूँदी के उद्यमों के लिए रियायतों और सुविधाओं वाले अध्याय में शामिल किया गया है।
बिजली शुल्क छूट
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2014 के तहत पात्र विनिर्माण उद्यमों को सात साल तक बिजली शुल्क में 50 प्रतिशत छूट दी गई थी।
मंडी शुल्क छूट
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2014 में पात्र विनिर्माण उद्यमों के लिए सात साल तक मंडी शुल्क में 50 प्रतिशत छूट भी दर्ज है।
नल जल आपूर्ति
जल जीवन मिशन के अंतर्गत बूँदी जिले के तालेड़ा ब्लॉक में नल से जलापूर्ति से जुड़े घरों का सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध है।
शहरी आवास
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 की कवरेज सूची में राजस्थान के बूँदी जिले की बूँदी नगरपालिका शामिल है।
आकांक्षी जिला कार्यक्रम
आकांक्षी जिला कार्यक्रम जनवरी 2018 में 112 अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों को अभिसरण, सहयोग और प्रतिस्पर्धा के आधार पर आगे बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था।
किसी भी परीक्षा उपयोग से पहले सटीक विकल्पों की जाँच आधिकारिक RPSC / RSSB प्रश्न पत्रों से करें।
बूंदी के PYQ एक-पंक्ति तथ्य शीघ्र उपलब्ध होंगे।
ऊपर के जिला संदर्भ से क्विक सेल्फ़-टेस्ट। द्विभाषी, लॉगिन की आवश्यकता नहीं।
प्रश्न 1 / 10
बूंदी के लिए दिए गए 2011 की जनगणना प्रोफाइल के अनुसार जिले की जनसंख्या कितनी थी?
राजस्थान पर्यटन के अनुसार बूँदी अपने किलों, महलों, बावड़ियों, झीलों और उत्सवों के लिए जानी जाती है।
बूँदी कोटा से लगभग 36 किलोमीटर दूर है।
जैत सागर झील सर्दी और बरसात में कमल के फूलों के लिए जानी जाती है।
नवल सागर झील में वरुण देव का अर्ध-जलमग्न मंदिर है।
मुख्य नदियां चंबल और मेज हैं; इनके साथ मंगली, ईस, तालेड़ा और घोड़ा पछाड़ जैसी छोटी नदियां भी बताई जाती हैं।
पूर्व बूँदी रियासत को एक इकाई के रूप में रखा गया था।