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अपना जिला जानें

भीलवाड़ा

बागोर पुरातत्व और फड़ परंपरा वाला वस्त्र नगर

अंतिम सत्यापन: 2026-05-06

भीलवाड़ा जिला अजमेर संभाग में आता है और 2011 की जनगणना में इसकी जनसंख्या 24,08,523 थी। जिले का इतिहास बागोर तक जाता है, जिसे भारत के समृद्ध पाषाण उपकरण स्थलों में गिना गया है और जिसका आरंभिक चरण 5000 ईसा पूर्व से 2800 ईसा पूर्व तक माना गया है। आज भीलवाड़ा वस्त्र नगरी के रूप में अधिक पहचाना जाता है, जबकि शाहपुरा फड़ चित्रकला का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

जिला एक नज़र में

2011 की जनगणना जनसंख्या2011 की जनगणना में जिले की जनसंख्या 24,08,523 थी।
2011 में पुरुष और महिला जनसंख्या2011 की जनगणना में 12,20,736 पुरुष और 11,87,787 महिलाएं दर्ज की गईं।
क्षेत्रफल2011 की जनगणना के क्षेत्रफल आंकड़ों के अनुसार जिला 10,455 वर्ग किलोमीटर में फैला था।
जनसंख्या घनत्व2011 में जनसंख्या घनत्व 230 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था।
लिंगानुपात2011 की जनगणना में प्रति 1,000 पुरुषों पर 973 महिलाएं थीं।
बाल लिंगानुपात2011 में 0-6 आयु वर्ग का बाल लिंगानुपात 928 था।

जिला प्रशासन

वर्तमान पदाधिकारी — सार्वजनिक अभिलेखों से।

जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर

जसमीत सिंह संधू

भीलवाड़ा जिला

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट

रणजीत सिंह

भीलवाड़ा जिला

पुलिस अधीक्षक

धर्मेन्द्र सिंह

भीलवाड़ा जिला

जिला एवं सत्र न्यायाधीश

अभय जैन

भीलवाड़ा न्यायिक क्षेत्र

लोक सभा सांसद

दामोदर अग्रवाल

भीलवाड़ा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2024 से

विधान सभा सदस्य

अशोक कुमार कोठारी

भीलवाड़ा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

निर्दलीय2023 से

विधान सभा सदस्य

जब्बर सिंह सांखला

आसींद विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2023 से

महापौर

राकेश पाठक

भीलवाड़ा नगर निगम

इतिहास — प्राचीन → मध्यकालीन → आधुनिक

बागोर पाषाण युग

बागोर की खुदाइयों से पाषाण युगीन संस्कृति के प्रमाण मिले, जिसका आरंभिक चरण 5000 ईसा पूर्व से 2800 ईसा पूर्व तक माना गया है।

बागोर पाषाण स्थल

जिला जनगणना पुस्तिका में बागोर को भारत के समृद्ध पाषाण उपकरण स्थलों में से एक बताया गया है।

नदी तल टीले

भीलवाड़ा जिले के प्रागैतिहासिक टीले कोठारी और खारी नदियों की पुरानी धाराओं पर मिलते हैं।

प्रागैतिहासिक स्थल

हुरड़ा तहसील का अगूचा, आसींद तहसील का ओजियाना और हुरड़ा प्रमुख प्रागैतिहासिक स्थलों के रूप में दर्ज हैं।

नांदसा यूप

नांदसा यूप स्तंभ में तीसरी शताब्दी ईस्वी में शष्ठिरात्र यज्ञ के आयोजन का उल्लेख मिलता है।

बिजोलिया शिलालेख

बिजोलिया का शिलालेख गुप्तकालीन अभिलेखों में महत्वपूर्ण माना गया है।

प्राचीन मंदिर

भीलवाड़ा जिले में 9वीं से 12वीं शताब्दी ईस्वी के पुराने मंदिर मिलते हैं।

मध्यकालीन मंदिर कला

बिजौलिया, तिलस्वां, धोर, मेनाल और मांडलगढ़ के मध्यकालीन मंदिर कला और स्थापत्य के महत्त्वपूर्ण उदाहरण माने जाते हैं।

भील बसावट

एक परंपरागत मान्यता के अनुसार पुराने समय में इस क्षेत्र में भीलों की प्रधान बसावट होने से इसका नाम भीलवाड़ा पड़ा।

भीलाड़ी सिक्के

एक अन्य मान्यता भीलवाड़ा नाम को वर्तमान भीलवाड़ा नगर में ढाले जाने वाले भीलाड़ी सिक्कों से जोड़ती है।

भीलाड़ी टकसाल

भीलवाड़ा नगर की भीलाड़ी टकसाल 1870 में बंद कर दी गई।

राजपूत राज्य

प्राचीन काल में भीलवाड़ा जिला गुहिल और चौहान राजपूत राज्यों के अधीन रहा।

जिला गठन

मेवाड़ राज्य, शाहपुरा ठिकाना, मांडलगढ़ और संबंधित ठिकानों के विलय के बाद 1949 में भीलवाड़ा जिला अस्तित्व में आया।

रक्षा चौकियां

मुगल आक्रमणों के समय मांडलगढ़, मांडल, पुर और सांगानेर रक्षा चौकियों के रूप में काम आते थे।

कला, संस्कृति, विरासत एवं पर्यटन

पुराने मंदिर

भीलवाड़ा जिले में 9वीं से 12वीं शताब्दी ईस्वी के पुराने मंदिरों की समृद्ध परंपरा मिलती है।

मंदिर स्थापत्य

बिजौलिया, तिलस्वां, धोर, मेनाल और मांडलगढ़ के मध्यकालीन मंदिर कला और स्थापत्य के उदाहरण के रूप में उल्लेखित हैं।

फड़ केंद्र

भीलवाड़ा का शाहपुरा फड़ चित्रकला के केंद्र के रूप में पहचाना जाता है।

लोकनायक चित्रण

फड़ चित्रकला लंबे कपड़े पर बनाई जाने वाली वह चित्र परंपरा है जिसमें लोक नायकों के प्रसंग अंकित किए जाते हैं।

हस्तनिर्मित रंग

फड़ चित्रों में प्राकृतिक और हाथ से तैयार रंगों का उपयोग किया जाता है।

भित्ति चित्रकारी

इन चित्रों के भित्ति रूप को पट्ट चित्रकारी कहा जाता है।

फड़ कलाकार

जिला जनगणना पुस्तिका इस कला के प्रसिद्ध कलाकारों में लाल जोशी और बद्री लाल जोशी के नाम देती है।

बहरूपिया स्वांग

बहरूपिया और स्वांग कला में एक ही कलाकार विशेष अवसरों पर कई वेश और भूमिकाएं निभाता है।

स्वांग कलाकार

जानकी लाल भांड बहरूपिया और स्वांग कला के विश्वस्तर पर प्रसिद्ध कलाकार के रूप में उल्लिखित हैं।

संगीत संस्था

भीलवाड़ा में संगीत कला केंद्र की स्थापना 2 अक्टूबर 1953 को हुई।

शास्त्रीय संगीत

संगीत कला केंद्र का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत का पुनरुद्धार, संरक्षण और विकास करना है।

लाख चूड़ियां

भीलवाड़ा में पारंपरिक लखारा परिवार लाख की चूड़ियां बनाते हैं।

मोजड़ी शिल्प

भीलवाड़ा में कई स्थानों पर मोजड़ी नामक कलात्मक चमड़े के जूते बनाए जाते हैं।

लकड़ी खिलौने

जहाजपुर लकड़ी के खिलौनों की शिल्पकला के लिए जाना जाता है।

स्थानीय मेले

भीलवाड़ा के प्रमुख मेलों में आसींद का सवाई भोज मेला और शाहपुरा का फूल डोल मेला शामिल हैं।

भूगोल, जलवायु एवं पारिस्थितिकी

खुले मैदान

भीलवाड़ा जिले के उत्तर और दक्षिण-पश्चिम में खुला मैदान है, जिसमें बीच-बीच में छोटी पहाड़ियां मिलती हैं।

लहरदार धरातल

भीलवाड़ा जिले के दक्षिण और उत्तर-पूर्वी भागों में लहरदार धरातल और पहाड़ियां हैं।

अरावली पर्वतमाला

अरावली पर्वतमालाएं भीलवाड़ा जिले को कई स्थानों पर काटती हुई निकलती हैं।

मांडलगढ़ पहाड़ियां

भीलवाड़ा जिले में अरावली की कई पहाड़ी पट्टियां मांडलगढ़ तहसील में आती हैं।

उपरमाल पठार

बिजोलिया-मांडलगढ़ क्षेत्र पठार पर स्थित होने के कारण उपरमाल के नाम से जाना जाता है।

दड़ागढ़ पहाड़ी

बनेड़ा गांव के पास दड़ागढ़ नामक पहाड़ी की ऊंचाई 581 मीटर दर्ज है।

गंगापुर ऊंचाई

जिला जनगणना पुस्तिका में गंगापुर के दक्षिण की 689 मीटर ऊंची पहाड़ी को सबसे ऊंची पहाड़ी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

नदी तंत्र

भीलवाड़ा जिले की प्रमुख नदियों में बनास और उसकी सहायक नदियां बेड़च, कोठारी तथा खारी शामिल हैं।

छोटी नदियां

भीलवाड़ा के लिए दर्ज अन्य छोटी नदियों में मानसी, मेनाली, चंद्रभागा, मेज, एरू और नागोटा शामिल हैं।

बनास प्रवेश

बनास नदी भीलवाड़ा तहसील के दुरिया गांव के पास जिले में प्रवेश करती है।

बनास प्रवाह

बनास पहले उत्तर और फिर उत्तर-पूर्व दिशा में जहाजपुर तहसील के पश्चिमी हिस्से के साथ बहते हुए टोंक जिले में जाती है।

प्राकृतिक झीलें

जिला जनगणना पुस्तिका में भीलवाड़ा जिले में कोई प्राकृतिक झील दर्ज नहीं है।

मानव निर्मित झीलें

नाहर सागर, उम्मेद सागर, मांडल, गुरिया, पाटन, गोवटा, नागदेपाटन, अर्जुनगढ़ और करेड़ा मानव-निर्मित झीलों के रूप में सूचीबद्ध हैं।

शुष्क जलवायु

भीलवाड़ा जिले की जलवायु शुष्क है, जहां तापमान में बड़ा उतार-चढ़ाव और वर्षा कम रहती है।

वन क्षेत्र

भीलवाड़ा जिले के वन क्षेत्र मुख्य रूप से जहाजपुर, मांडलगढ़ और बिजोलिया तहसीलों में पाए जाते हैं।

अर्थव्यवस्था — क्षेत्र, उद्योग, ऊर्जा

कृषि अर्थव्यवस्था

भीलवाड़ा जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर बताई गई है।

वस्त्र नगर

भीलवाड़ा राजस्थान के वस्त्र नगर के रूप में उभरा है।

वस्त्र पहचान

देश में भीलवाड़ा की पहचान विशेष रूप से वस्त्र नगर के रूप में है।

खनिज जिला

भीलवाड़ा जिला देश के महत्वपूर्ण खनिज जिलों में गिना जाता है।

अभ्रक खनन

भीलवाड़ा जिला अभ्रक खनन का प्रमुख केंद्र था और राजस्थान के लगभग 70 प्रतिशत अभ्रक का उत्पादन करता था।

अभ्रक भंडार

भीलवाड़ा जिले में अभ्रक का अनुमानित भंडार 6.30 लाख टन था।

खनन केंद्र

भीलवाड़ा में अभ्रक खनन केंद्रों में आसींद तहसील के भणास और प्रतापपुरा तथा भीलवाड़ा तहसील का दांता शामिल हैं।

निर्माण पत्थर

स्थानीय रूप से बलुआ कहलाने वाला निर्माण पत्थर मांडलगढ़ में खनन किया जाता है।

पत्थर पट्टियां

बिजौलिया भवन निर्माण में काम आने वाली पत्थर की पट्टियों के लिए जाना जाता है।

सोपस्टोन भंडार

भीलवाड़ा जिले में सोपस्टोन चैनपुरा, बगवासा और किशनगढ़ में डोलोमाइटिक चूना पत्थर के साथ पाया जाता है।

ग्रेनाइट भंडार

आसींद, रायपुर और मांडल तहसीलों में ग्रेनाइट के भंडार मिले हैं।

ग्रेनाइट संयंत्र

भीलवाड़ा, गंगापुर और बदनोर में ग्रेनाइट टाइल के अठारह संयंत्र दर्ज किए गए थे।

चूना पत्थर भंडार

भीलवाड़ा जिले में मांडलगढ़ के आसपास चूना पत्थर के अच्छे भंडार दर्ज हैं।

राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरचना

लोकसभा परिणाम

भीलवाड़ा लोकसभा क्षेत्र ने 2024 में भारतीय जनता पार्टी के दामोदर अग्रवाल को चुना।

अंतिम परिणाम पत्रक

2024 का प्रपत्र 20 लोकसभा के 23-भीलवाड़ा संसदीय क्षेत्र के निर्वाचन परिणाम से संबंधित है।

आसींद क्षेत्र

आसींद भीलवाड़ा जिले का विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र संख्या 177 है।

आसींद प्रतिनिधि

जबर सिंह सांखला 16वीं राजस्थान विधानसभा में आसींद का प्रतिनिधित्व भाजपा सदस्य के रूप में करते हैं।

मांडल प्रतिनिधि

मांडल का प्रतिनिधित्व 16वीं राजस्थान विधानसभा में भाजपा के उदय लाल भड़ाना करते हैं।

भीलवाड़ा प्रतिनिधि

भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व निर्दलीय सदस्य अशोक कुमार कोठारी करते हैं।

सहाड़ा प्रतिनिधि

सहाड़ा का प्रतिनिधित्व 16वीं राजस्थान विधानसभा में भाजपा के लादू लाल पितलिया करते हैं।

शाहपुरा प्रतिनिधि

शाहपुरा अनुसूचित जाति आरक्षित क्षेत्र का प्रतिनिधित्व 16वीं राजस्थान विधानसभा में भाजपा के लालाराम बैरवा करते हैं।

जहाजपुर प्रतिनिधि

जहाजपुर का प्रतिनिधित्व 16वीं राजस्थान विधानसभा में भाजपा के गोपी चंद मीणा करते हैं।

मांडलगढ़ प्रतिनिधि

मांडलगढ़ का प्रतिनिधित्व 16वीं राजस्थान विधानसभा में भाजपा के गोपाल लाल शर्मा करते हैं।

सांविधिक नगर

2011 की जिला जनगणना पुस्तिका में भीलवाड़ा जिले के सात सांविधिक नगर दर्ज हैं: आसींद, भीलवाड़ा, गंगापुर, गुलाबपुरा, जहाजपुर, मांडलगढ़ और शाहपुरा।

शासन पहल एवं योजनाएँ (2025-26)

नल जल पहुंच

जल जीवन मिशन का लक्ष्य हर ग्रामीण परिवार को कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराना है।

ग्रामीण जल मानक

जल जीवन मिशन में ग्रामीण सेवा स्तर का लक्ष्य प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर पानी है।

लागत साझेदारी

जल जीवन मिशन की परियोजना लागत में राजस्थान सरकार और भारत सरकार की भागीदारी 50:50 अनुपात में है।

चंबल पैकेज

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने जल जीवन मिशन के तहत चंबल भीलवाड़ा पैकेज-द्वितीय नामक सतही जल योजना को स्वीकृत योजनाओं में सूचीबद्ध किया है।

जलापूर्ति परियोजना

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अभिलेखों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत भीलवाड़ा जिले के लिए चंबल-भीलवाड़ा जलापूर्ति परियोजना चरण-द्वितीय दर्ज है।

PYQ एक-पंक्ति (RAS / RPSC / RSSB)

किसी भी परीक्षा उपयोग से पहले सटीक विकल्पों की जाँच आधिकारिक RPSC / RSSB प्रश्न पत्रों से करें।

RPSC कॉलेज व्याख्याता चित्रकला-1 2016

Q. राजस्थान की लोक चित्रकला विशेष रूप से किस स्थान की फड़ चित्रकला से पहचानी जाती है?

उ. शाहपुरा

RSSB स्नातक समान पात्रता परीक्षा 2022

Q. प्रश्नपत्र में किस लोकदेवता और मुख्य तीर्थ-स्थल युग्म में देव नारायण जी के साथ भीलवाड़ा का आसींद दिया गया था?

उ. देव नारायण जी - आसींद

RSSB कनिष्ठ लेखाकार 2023 प्रश्नपत्र-1

Q. मिलान वाले प्रश्न में मेजा बांध परियोजना किस जिले से संबंधित दी गई थी?

उ. भीलवाड़ा

RSSB कनिष्ठ लेखाकार 2023 प्रश्नपत्र-1

Q. मिलान प्रविष्टियों में मोरल बांध परियोजना किस जिले के साथ दी गई थी?

उ. भीलवाड़ा

स्वयं को परखें — 10 प्रश्न

ऊपर के जिला संदर्भ से क्विक सेल्फ़-टेस्ट। द्विभाषी, लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

प्रश्न 1 / 8

राजस्थान का टेक्सटाइल सिटी किस जिले को कहा जाता है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भीलवाड़ा नाम की उत्पत्ति कैसे मानी जाती है?

एक परंपरा इस नाम को पुराने भील निवास से जोड़ती है, जबकि दूसरी परंपरा इसे शहर में ढाले गए भिलाड़ी सिक्कों से संबंधित मानती है।

भीलवाड़ा सबसे अधिक किस पहचान के लिए जाना जाता है?

जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार भीलवाड़ा देश में वस्त्र नगरी के रूप में अधिक प्रसिद्ध है।

भीलवाड़ा जिले में कौन-कौन सी प्रमुख नदियां बहती हैं?

बनास, बेड़च, कोठारी और खारी को जिले की महत्वपूर्ण नदियों में सूचीबद्ध किया गया है।

क्या भीलवाड़ा जिले में प्राकृतिक झीलें हैं?

जिला जनगणना पुस्तिका में बताया गया है कि जिले में कोई प्राकृतिक झील नहीं है।

भीलवाड़ा जिले में फड़ चित्रकला का केंद्र कहां है?

जिला जनगणना पुस्तिका भीलवाड़ा के शाहपुरा को इस कला का केंद्र बताती है।

आधुनिक भीलवाड़ा जिला कब गठित हुआ?

जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार जिले का अस्तित्व 1949 में आया।