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अपना जिला जानें

ब्यावर

डिक्सन का नियोजित नगर, RTI की जन्मभूमि, राजस्थान के सीमेंट-चूनापत्थर का गढ़।

अंतिम सत्यापन: 2026-05-06

ब्यावर मध्य राजस्थान का एक नियोजित औपनिवेशिक नगर है, जो 7 अगस्त 2023 को अजमेर से अलग होकर राज्य का पचासवाँ जिला बना तथा इसमें पाली, राजसमंद और भीलवाड़ा के कुछ भाग भी शामिल किए गए। इसकी स्थापना 1836 में कर्नल चार्ल्स जॉर्ज डिक्सन ने मेर-मेरवाड़ा छावनी के मुख्यालय के रूप में की थी, और आगे चलकर यह उन्नीसवीं सदी का प्रमुख कपास व्यापार केंद्र तथा राजस्थान के सूचना के अधिकार आंदोलन की जन्मस्थली बना। आज अजमेर संभाग का यह जिला मुख्यालय NH-58 और NH-158 के सहारे फैले सीमेंट, चूना-पत्थर, फेल्सपार और संगमरमर उद्योग की पट्टी का केंद्र है।

जिला एक नज़र में

भौगोलिक क्षेत्र4,425 वर्ग किमी
जनसंख्या (जनगणना 2011, 2023 सीमाओं के अनुसार)लगभग 10.95 लाख (2023 की जिला सीमाओं के भीतर 2011 के उप-जिला आँकड़ों से पुनर्निर्मित)
लिंगानुपात (जनगणना 2011, 2023 सीमाओं के अनुसार)प्रति 1000 पुरुषों पर लगभग 977 महिलाएँ
मुख्यालयब्यावर
गठन वर्ष2023 (7 अगस्त 2023 को अजमेर, पाली, भीलवाड़ा और राजसमंद से अलग करके बनाया गया)

जिला प्रशासन

वर्तमान पदाधिकारी — सार्वजनिक अभिलेखों से।

जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर

कमल राम मीणा

पुलिस अधीक्षक

रतन सिंह

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट / अतिरिक्त कलक्टर

ब्रहमालाल जाट

जिला एवं सत्र न्यायाधीश

हारून

लोकसभा सांसद

भागीरथ चौधरी

अजमेर

भारतीय जनता पार्टी2024 से

लोकसभा सांसद

महिमा कुमारी मेवाड़

राजसमंद

भारतीय जनता पार्टी2024 से

विधायक

शंकर सिंह रावत

ब्यावर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2023 से

विधायक

वीरेंद्र सिंह

मसूदा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी2023 से

विधायक

अविनाश गहलोत

जैतारण

भारतीय जनता पार्टी2023 से

इतिहास — प्राचीन → मध्यकालीन → आधुनिक

डिक्सन की स्थापना 1836

ब्यावर की स्थापना 1 फरवरी 1836 को मेर-मेरवाड़ा के अधीक्षक कर्नल चार्ल्स जॉर्ज डिक्सन ने पुराने ब्यावर खास गाँव से सटी बंजर भूमि पर की, जिसे ब्रिटिश भारत के अधीन मेर-मेरवाड़ा क्षेत्र के प्रशासनिक एवं छावनी मुख्यालय के रूप में बसाया गया।

त्रि-संगम छावनी

यह स्थान इसलिए चुना गया क्योंकि ब्यावर जयपुर, जोधपुर और उदयपुर रियासतों के सामरिक त्रि-संगम पर स्थित था, जहाँ से अंग्रेज़ एक ही छावनी से मगरा-मेरवाड़ा के उपद्रवी पहाड़ी क्षेत्र तथा मारवाड़ और मालवा के बीच के कपास-व्यापार मार्ग पर नियंत्रण रख सकते थे।

मेर-मेरवाड़ा बटालियन

आसपास की पहाड़ियों के कठात और रावत समुदायों को नियंत्रण में लाने के लिए अंग्रेज़ों ने 1822 में मेर-मेरवाड़ा बटालियन का गठन किया, जिसमें इन्हीं समुदायों से सैनिक भर्ती कर उन्हें मार्शल रेस घोषित किया गया; डिक्सन द्वारा नगर बसाए जाने के बाद इस बटालियन का स्थायी मुख्यालय ब्यावर में बना और यह बीसवीं सदी तक ब्रिटिश सेना में सेवा देती रही।

कृष्णा मिल्स 1889

ब्यावर में 1889 में सेठ दामोदर दास राठी द्वारा स्थापित कृष्णा मिल्स राजपूताना की पहली पावरलूम सूती वस्त्र मिल थी, जिसने इस क्षेत्र में संगठित उद्योग की शुरुआत की और नगर को मारवाड़, मालवा तथा गुजरात के व्यापारियों के लिए प्रमुख कपास मंडी बना दिया।

राजस्थान में विलय

भारत की स्वतंत्रता के बाद मेर-मेरवाड़ा क्षेत्र 1949 में अजमेर-मेरवाड़ा राज्य में मिलाया गया और राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत 1 नवम्बर 1956 को राजस्थान का अंग बना, जिस पर ब्यावर नवगठित अजमेर जिले की एक तहसील के रूप में शामिल हुआ।

RTI धरना 1996

6 अप्रैल 1996 को अरुणा रॉय, निखिल डे और शंकर सिंह के नेतृत्व में मज़दूर किसान शक्ति संगठन ने ब्यावर के चांग गेट पर चालीस दिन का सार्वजनिक धरना शुरू किया, जो सूचना के अधिकार को क़ानूनी रूप देने की भारत की पहली जन-मांग थी और जिसका परिणाम 2005 के राष्ट्रीय RTI अधिनियम के रूप में सामने आया।

जिला अधिसूचना 2023

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में 7 अगस्त 2023 को ब्यावर को राजस्थान का पचासवाँ जिला अधिसूचित किया गया, जिसमें चार मूल जिलों से तहसीलें — ब्यावर, टॉडगढ़, जैतारण, रायपुर, मसूदा, विजयनगर और बदनोर — ली गईं, जिससे 187 वर्षों के नगरीय इतिहास के बाद मारवाड़-मेवाड़ की सीमा को अपना जिला मुख्यालय मिला।

कला, संस्कृति, विरासत एवं पर्यटन

बादशाह मेला

1851 से होली के अगले दिन आयोजित होने वाला बादशाह मेला उस लोककथा को जीवंत करता है जिसमें अकबर ने अपनी जान बचाने वाले व्यापारी टोडरमल अग्रवाल को ढाई दिन की प्रतीकात्मक बादशाहत भेंट की थी; पारंपरिक वेशभूषा में बादशाह और बीरबल की सवारी पूरे शहर में लाल गुलाल लुटाते निकलती है और इसमें पानी का प्रयोग नहीं किया जाता।

देवमाली श्रेष्ठ ग्राम

मसूदा तहसील का देवमाली गाँव, जो लोक देवता देवनारायण को समर्पित है, 2023 में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा भारत का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम घोषित किया गया; यहाँ लगभग शून्य अपराध दर, साम्प्रदायिक सौहार्द्र और बिना ताला लगाए केवल मिट्टी-छप्पर के घर बनाने की परंपरा के लिए यह सम्मान मिला।

देवनारायण की पड़

देवनारायण की पड़, पास के आसींद में सावई भोज के यहाँ जन्मे गुर्जर योद्धा-संत के जीवन पर आधारित पैंतालीस घंटे लम्बा गायन-महाकाव्य, भोपा गायकों द्वारा चित्रित पट के साथ प्रस्तुत किया जाता है; यह विश्व के सबसे लम्बे मौखिक महाकाव्यों में गिना जाता है और UNESCO के स्मृति-विश्व अभिलेख की शोध-सूची में दर्ज है।

टॉडगढ़ पहाड़ी विरासत

अरावली की गहराइयों में बसी टॉडगढ़ तहसील में 2005 में तेरापंथ जैन समाज द्वारा पूर्णतः काले ग्रेनाइट से बनाया गया आचार्य तुलसी का प्रज्ञा शिखर मंदिर है, और इसके साथ ही औपनिवेशिक काल के पत्थर के बंगले मेर पठार के ऊपर बोरवार के अंग्रेज़ी हिल-स्टेशन की याद दिलाते हैं।

परकोटे के दरवाज़े

ब्यावर के चांग गेट, मेवाड़ी गेट और अजमेरी गेट सीधी बाज़ार-कतारों की ग्रिड पर डिक्सन द्वारा बसाए गए परकोटायुक्त पुराने नगर को घेरते हैं, जो राजपूताना में यूरोपीय नगर-नियोजन का दुर्लभ नमूना है; नगर के केंद्र में 1840 के दशक का घंटाघर चौक — सर्राफा बाज़ार — आज भी जीवित है।

भूगोल, जलवायु एवं पारिस्थितिकी

अरावली पठारी नगर

ब्यावर जिला लगभग 26.10° उत्तर अक्षांश और 74.32° पूर्व देशांतर पर मध्य अरावली पट्टी में स्थित है; जिला मुख्यालय मेर पहाड़ियों के बीच की काठी पर लगभग 439 मीटर ऊँचाई पर है, जिससे यह मध्य राजस्थान के अपेक्षाकृत ठंडे नगरीय केंद्रों में से एक है।

खारी नदी जलविभाजक

यह जिला अरावली के जलविभाजक पर फैला है; मौसमी खारी नदी, जो बनास की सहायक है, ब्यावर के ऊपरी क्षेत्रों से निकलती है और नीचे की ओर नारायण सागर तथा खारी बाँधों को जल देती है, जिनसे पूर्वी ब्यावर और भीलवाड़ा में सिंचाई होती है।

टॉडगढ़-रावली अभयारण्य

जिले के दक्षिणी भाग में स्थित टॉडगढ़-रावली वन्यजीव अभयारण्य लगभग 495 वर्ग किलोमीटर के शुष्क पर्णपाती अरावली वन में फैला है, जहाँ तेंदुआ, स्लॉथ भालू, चौसिंगा और दुर्लभ भारतीय भेड़िया पाए जाते हैं; यह नवगठित जिले का सबसे बड़ा सतत हरित आवरण बनाता है।

बनास-लूनी विभाजक

ब्यावर के ऊपरी इलाके पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली बनास तंत्र और पश्चिम की ओर अरब सागर में गिरने वाली लूनी तंत्र के बीच जलविभाजक का काम करते हैं, जिससे यह जिला राजस्थान के दो प्रमुख महाद्वीपीय जलविभाजकों में से एक पर अवस्थित है।

क्षेत्रफल एवं जलवायु

अब ब्यावर जिले का हिस्सा बनी तहसीलों की 2011 जनगणना के अनुसार जनसंख्या लगभग 11.94 लाख और क्षेत्रफल लगभग 4,425 वर्ग किलोमीटर है; औसत वार्षिक वर्षा लगभग 50 सेंटीमीटर है जो मुख्यतः दक्षिण-पश्चिम मानसून में होती है और जलवायु अर्ध-शुष्क BSh श्रेणी की है।

अर्थव्यवस्था — क्षेत्र, उद्योग, ऊर्जा

श्री सीमेंट मुख्यालय

ब्यावर श्री सीमेंट लिमिटेड का मुख्यालय है, जिसे 1979 में बांगुर परिवार ने स्थापित किया और 1985 में बांगुर नगर, ब्यावर में उसका पहला 0.6 MTPA एकीकृत संयंत्र चालू हुआ; आज ब्यावर स्थित इसका पंजीकृत कार्यालय भारत और संयुक्त अरब अमीरात में लगभग 6.68 करोड़ टन वार्षिक समूह क्षमता का केंद्र है।

चूना-पत्थर खनिज पट्टी

यह जिला राजस्थान की प्रमुख सीमेंट-ग्रेड चूना-पत्थर पट्टी पर पड़ता है, जिसके भंडार पाली से ब्यावर की जैतारण और रायपुर तहसीलों तक फैले हैं; भारतीय खान ब्यूरो के आँकड़ों के अनुसार चूना-पत्थर, फेल्सपार और क्वार्ट्ज़ उत्पादन में राजस्थान शीर्ष तीन राज्यों में है, और ब्यावर की खानें श्री सीमेंट, वंडर सीमेंट तथा बिड़ला कॉर्पोरेशन के संयंत्रों को कच्चा माल देती हैं।

मंडी एवं मिलें

ब्यावर नगर राजस्थान की सबसे व्यस्त अनाज एवं तिलहन मंडियों में से एक है — स्थानीय कृषि उपज मंडी मारवाड़ और मेवाड़ से सरसों, चना और जौ की आवक संभालती है, और 1889 में यहाँ स्थापित कृष्णा मिल्स राजपूताना की पहली सूती वस्त्र मिल थी, जिसने कृषि-औद्योगिक व्यापार की एक लम्बी परम्परा को जन्म दिया।

NH-58 चार-लेन परियोजना

भारतमाला परियोजना के तहत NH-58 के अजमेर-ब्यावर खंड का चार-लेन विस्तार लगभग 92 किलोमीटर का है, जो 2025 में पूर्णता के निकट था और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के समानांतर होकर ब्यावर के औद्योगिक क्षेत्रों को दिल्ली-मुंबई रसद रीढ़ से जोड़ता है, जिससे सीमेंट क्लिंकर का माल-भाड़ा उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है।

राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरचना

जिला प्रशासन

ब्यावर जिला अजमेर राजस्व संभाग में आता है और जिला कलेक्टर के अधीन इसका प्रशासन सात तहसीलों — ब्यावर, टॉडगढ़, जैतारण, रायपुर, मसूदा, विजयनगर और बदनोर — के माध्यम से चलता है, जिन्हें अगस्त 2023 में जिला बनाते समय अजमेर, पाली, राजसमंद और भीलवाड़ा से लिया गया था।

विधानसभा 2023

ब्यावर विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 103) राजसमंद लोकसभा सीट का हिस्सा है; 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा के शंकर सिंह रावत ने कांग्रेस के पारस पंच जैन को 8,878 मतों से हराकर लगभग 67,623 वोट प्राप्त किए, जबकि कुल मतदान 69.82 प्रतिशत रहा।

नगर परिषद ब्यावर

नगर परिषद के रूप में उन्नत ब्यावर नगरपालिका राजस्थान की सबसे पुरानी नागरिक संस्थाओं में से एक है — ब्रिटिश मेर-मेरवाड़ा प्रशासन ने 1840 के दशक में यहाँ नगर समिति गठित की थी, और वर्तमान परिषद तेजी से शहरीकृत हो रहे जिला मुख्यालय के 60 वार्डों का प्रबंधन करती है।

शासन पहल एवं योजनाएँ (2025-26)

RTI अधिनियम 2005

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 — जिसका पहला सार्वजनिक धरना 1996 में ब्यावर में हुआ था — आज किसी भी भारतीय नागरिक को सार्वजनिक प्राधिकरणों से 30 दिन में सूचना प्राप्त करने का अधिकार देता है; राजस्थान राज्य सूचना आयोग प्रतिवर्ष हज़ारों द्वितीय अपीलों का निपटारा करता है और ब्यावर जिले के कार्यालय इसकी अनिवार्य प्रकटीकरण व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं।

सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम

मसूदा तहसील का देवमाली गाँव, जिसे केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने 2023 में भारत का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम घोषित किया, स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत ग्रामीण होमस्टे, इको-ट्रेल्स और देवनारायण विषयक व्याख्या केंद्रों के साथ उन्नत किया जा रहा है, ताकि तीर्थ एवं विरासत पर्यटन से प्राप्त राजस्व ग्रामीणों तक पहुँचे।

भारतमाला NH-58

अजमेर और ब्यावर के बीच NH-58 पर भारतमाला परियोजना का गलियारा — लगभग 92 किलोमीटर का चार-लेन ग्रीनफील्ड खंड — सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा स्वीकृत है और NHAI द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है, ताकि मध्य राजस्थान के सीमेंट एवं चूना-पत्थर केंद्रों को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के फीडर मार्गों से जोड़ा जा सके।

PYQ एक-पंक्ति (RAS / RPSC / RSSB)

किसी भी परीक्षा उपयोग से पहले सटीक विकल्पों की जाँच आधिकारिक RPSC / RSSB प्रश्न पत्रों से करें।

ब्यावर के PYQ एक-पंक्ति तथ्य शीघ्र उपलब्ध होंगे।

स्वयं को परखें — 10 प्रश्न

ऊपर के जिला संदर्भ से क्विक सेल्फ़-टेस्ट। द्विभाषी, लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

प्रश्न 1 / 8

ब्यावर को राजस्थान का पचासवाँ जिला किस तिथि को अधिसूचित किया गया?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्यावर को राजस्थान का अलग जिला कब घोषित किया गया?

ब्यावर को राजस्थान का पचासवाँ जिला 7 अगस्त 2023 को राज्य मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के तहत अधिसूचित किया गया, जिसमें 19 नए जिले बनाए गए; यह मुख्यतः अजमेर से तथा पाली, राजसमंद और भीलवाड़ा के कुछ भागों से बनाया गया और जिला मुख्यालय ब्यावर शहर में रखा गया।

ब्यावर को भारत के RTI आंदोलन की जन्मस्थली क्यों कहा जाता है?

6 अप्रैल 1996 को अरुणा रॉय, निखिल डे और शंकर सिंह के नेतृत्व में मज़दूर किसान शक्ति संगठन ने ब्यावर के चांग गेट पर सरकारी अभिलेख देखने का क़ानूनी अधिकार माँगते हुए चालीस दिन का धरना दिया; यह भारत का पारदर्शिता हेतु पहला जन-आंदोलन था और इसी से राजस्थान का 2000 का तथा राष्ट्रीय 2005 का RTI अधिनियम बना।

आज ब्यावर जिले में कौन-से प्रमुख उद्योग संचालित हैं?

ब्यावर श्री सीमेंट लिमिटेड का पंजीकृत मुख्यालय है, राजस्थान की प्रमुख सीमेंट-ग्रेड चूना-पत्थर एवं फेल्सपार पट्टी पर बसा है और 1889 की कृष्णा मिल्स से चली आ रही कपास, खनिज-पीस तथा कंक्रीट-पाइप जैसी इकाइयाँ यहाँ कार्यरत हैं; NH-58 का अजमेर-ब्यावर चार-लेन गलियारा इन समूहों को दिल्ली-मुंबई रसद रीढ़ से जोड़ता है।

ब्यावर का बादशाह मेला क्या है?

1851 से होली के अगले दिन मनाया जाने वाला बादशाह मेला एक अनोखी सवारी है, जिसमें परम्परागत वेशभूषा में बादशाह और बीरबल ब्यावर के पुराने शहर में केवल लाल गुलाल लुटाते हुए — कभी पानी नहीं — चलते हैं; यह मुग़ल बादशाह अकबर द्वारा व्यापारी टोडरमल अग्रवाल को ढाई दिन की प्रतीकात्मक बादशाहत भेंट किए जाने की किंवदंती की स्मृति है।