जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर
चिन्मयी गोपाल
अपना जिला जानें
थार-सीमा का जिला: किराडू विरासत, खनिज और तेल
बाड़मेर दक्षिण-पश्चिम राजस्थान का बड़ा मरुस्थलीय जिला है, जिसकी पहचान थार, पाकिस्तान सीमा और पुराने बाड़मेर-किराडू की विरासत से बनती है। जनगणना 2011 में इसकी आबादी 26.04 लाख और क्षेत्रफल 28,387 वर्ग किमी दर्ज हुआ; इसी आधार पर जिला जनगणना पुस्तिका में यह राजस्थान में आबादी से सातवें और क्षेत्रफल से तीसरे स्थान पर रखा गया। परीक्षा के लिए यहां कशीदाकारी, खनिज उद्योग और बाड़मेर-सांचौर पेट्रोलियम बेसिन जैसे बिंदु साथ पढ़ने योग्य हैं।
| आबादी, 2011 | 26.04 लाख लोग: 13.69 लाख पुरुष और 12.35 लाख महिलाएं। |
|---|---|
| क्षेत्रफल | 28,387 वर्ग किमी; जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार जैसलमेर और बीकानेर के बाद राजस्थान का तीसरा सबसे बड़ा जिला। |
| जनसंख्या घनत्व, 2011 | प्रति वर्ग किमी 92 व्यक्ति। |
| लिंगानुपात, 2011 | प्रति 1,000 पुरुष 902 महिलाएं; ग्रामीण लिंगानुपात 902 और शहरी 899। |
| साक्षरता, 2011 | कुल 56.53 प्रतिशत; पुरुष साक्षरता 70.86 प्रतिशत और महिला साक्षरता 40.63 प्रतिशत। |
| गांव, 2011 | 2,460 गांव; 2,452 आबाद और 8 गैर-आबाद। |
| नगर, 2011 | 2 वैधानिक नगर और 2 जनगणना नगर; कुल 4 नगर। |
| अंतरराष्ट्रीय सीमा | जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार पाकिस्तान से लगी जिला सीमा 227.5 किमी। |
| प्रशासनिक ढांचा, 2011 | 8 उपखंड और 8 पंचायत समितियां या ब्लॉक। |
| एक जिला एक उत्पाद | राजस्थान की सूची में 25 जुलाई 2025 को बाड़मेर का जिला उत्पाद कशीदाकारी दर्ज। |
| पोषण प्रोफाइल, 2019 | 2022 की जिला पोषण प्रोफाइल में बाड़मेर में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की 2019 की अनुमानित आबादी लगभग 3.98 लाख दी गई। |
वर्तमान पदाधिकारी — सार्वजनिक अभिलेखों से।
जिला मजिस्ट्रेट / कलक्टर
चिन्मयी गोपाल
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट / अतिरिक्त कलक्टर
राजेन्द्र सिंह चांदावत
पुलिस अधीक्षक
चूना राम जाट
जिला एवं सत्र न्यायाधीश
अजीताभ आचार्य
लोकसभा सांसद
उम्मेदा राम बेनीवाल
बाड़मेर
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस2024 से
विधायक
रविंद्र सिंह भाटी
शिव
निर्दलीय2023 से
विधायक
प्रियंका चौधरी
बाड़मेर
निर्दलीय
विधायक
कृष्ण कुमार के.के. विश्नोई
गुड़ामालानी
भारतीय जनता पार्टी
विधायक
अदू राम मेघवाल
चौहटन (अनुसूचित जाति)
भारतीय जनता पार्टी
जिला गठन
जोधपुर राज्य के 1949 में संयुक्त वृहत्तर राजस्थान में विलय के बाद बाड़मेर को अलग जिला बनाया गया।
बहाड़ा राव स्थापना
बाड़मेर नाम बहाड़ा राव से जुड़ा माना जाता है; उन्हें बार राव भी कहा जाता है और माना जाता है कि 13वीं सदी में उन्होंने मुख्यालय नगर बसाया था।
किराडू स्थल
जिला जनगणना पुस्तिका में हाथमा के पास स्थित किराडू को बाड़मेर से लगभग 33 किमी उत्तर-पश्चिम का ऐतिहासिक स्थल बताया गया है।
किराडू अभिलेख
किराडू के 1161 ईस्वी के एक अभिलेख में इस स्थान को किरातकूप कहा गया है और इसे कभी पंवारों की राजधानी बताया गया है।
जूना अभिलेख
जूना या जूना बाड़मेर में सबसे बड़े जैन मंदिर के 1295 ईस्वी के अभिलेख में महाराजकुल श्री सामंत सिंहदेव को बहड़ामेरा पर शासन करते हुए बताया गया है।
वीरमपुर बसावट
नगर मेवा का पुराना नाम वीरमपुर था और जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार यह 12वीं या 13वीं सदी में बसाया गया था।
मंदिर परिपथ
राजस्थान फाउंडेशन बाड़मेर में कुल 406 मंदिर दर्ज करता है और पर्यटन स्थलों में बाड़मेर किला व गढ़ मंदिर, किराडू मंदिर, रानी भटियानी मंदिर तथा श्री नाकोड़ा जैन मंदिर का नाम देता है।
किराडू अभिलेख
किराडू में पांच मंदिर हैं और जिला जनगणना पुस्तिका वहां के मंदिर-स्तंभों पर 1161 ईस्वी के अभिलेखों का उल्लेख करती है।
किराडू नक्काशी
किराडू मंदिरों की नक्काशी में रामायण, महाभारत और पुराणों की कथाएं दिखाई देती हैं।
किराडू मंदिर समूह
किराडू के पांच प्राचीन मंदिरों में चार शिव को और एक विष्णु को समर्पित है; इनमें सबसे बड़ा सोमेश्वर मंदिर है और वैष्णव मंदिर सबसे पुराना है।
बाड़मेर किला-मंदिर
बाड़मेर नगर एक चट्टानी पहाड़ी के पास बसा है, जिसकी चोटी पर पुराने किले के अवशेष और सूर्य देव बालारिख को समर्पित मंदिर है।
नाकोड़ा पार्श्वनाथ
नगर मेवा में तीन जैन मंदिर और एक विष्णु मंदिर हैं; वहां का सबसे पुराना और सबसे बड़ा मंदिर नाकोड़ा पार्श्वनाथ है।
तिलवाड़ा पशु मेला
तिलवाड़ा पशु मेला बाड़मेर जिले का एकमात्र प्रमुख पशु मेला बताया गया है और यह लूणी नदी के पाट में तिलवाड़ा में लगता है।
नाकोड़ा मेला
नगर मेवा का नाकोड़ा पार्श्वनाथ मेला हर वर्ष पोष बदी 10 को लगता है और इसमें मुख्य रूप से जैन श्रद्धालु आते हैं।
बाड़मेर विरासत स्थल
राजस्थान फाउंडेशन की बाड़मेर पर्यटन सूची में चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन मंदिर, देवका सूर्य मंदिर, बाड़मेर हस्तशिल्प, जूना किला और मंदिर, महाबार रेत टीले, सफेद अखाड़ा और विष्णु मंदिर शामिल हैं।
हस्तशिल्प क्लस्टर
एमएसएमई प्रोफाइल बाड़मेर में हैंडब्लॉक प्रिंटिंग, चमड़े की जूती, हथकरघा, कपड़ा, लकड़ी के फर्नीचर, मिट्टी के बर्तन और कपड़े पर पैचवर्क के कारीगर समूह दर्ज करता है; इनके उत्पादों में नक्काशीदार फर्नीचर, शॉल, बेडशीट, दरी, कंबल, साड़ी और स्कार्फ आते हैं।
दक्षिण-पश्चिमी स्थिति
बाड़मेर जिला दक्षिण-पश्चिम राजस्थान में 24°58' से 26°32' उत्तरी अक्षांश और 70°05' से 72°52' पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है।
जिला क्षेत्रफल
जिला जनगणना पुस्तिका में बाड़मेर का क्षेत्रफल 28,387 वर्ग किमी दिया गया और क्षेत्रफल के आधार पर इसे जैसलमेर और बीकानेर के बाद राजस्थान का तीसरा सबसे बड़ा जिला बताया गया।
अंतरराष्ट्रीय सीमा
जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार बाड़मेर की पाकिस्तान से लगी जिला सीमा 227.5 किमी लंबी थी।
थार मरुस्थल
जिला जनगणना पुस्तिका बाड़मेर के बड़े हिस्से को थार मरुस्थल का भाग बताते हुए रेत से ढका विस्तृत भू-भाग कहती है।
कृषि-जलवायु क्षेत्र
राजस्थान के शुष्क पश्चिमी मैदान आई-ए कृषि-जलवायु क्षेत्र में बाड़मेर को जोधपुर, फलोदी और बालोतरा के साथ रखा गया है।
कार्यबल प्रोफाइल
जनगणना 2011 की जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार बाड़मेर का कुल कार्यबल 12.02 लाख था, जिसमें 7.41 लाख मुख्य श्रमिक और 4.61 लाख सीमांत श्रमिक शामिल थे।
कृषि उद्योग
राजस्थान फाउंडेशन ने बाड़मेर में आटा मिल, दाल मिल, इसबगोल प्रसंस्करण और ग्वार बीज प्रसंस्करण को कृषि-आधारित औद्योगिक अवसरों के रूप में पहचाना है।
खनिज उद्योग
राजस्थान फाउंडेशन के अनुसार बाड़मेर में जिप्सम फाइबर बोर्ड, बेंटोनाइट ग्राइंडिंग, सक्रिय ब्लीचिंग अर्थ, सैंड-लाइम ईंट, सोडियम सिलिकेट, स्टोन क्रशिंग, ग्रेनाइट कटिंग-पॉलिशिंग-टाइल्स और नमक इकाइयां खनिज-आधारित औद्योगिक अवसर हैं।
मांग आधारित उद्योग
राजस्थान फाउंडेशन ने पानी के पंप, लौह ढलाई, एसीसी पाइप और फिटिंग, कृषि उपकरण, पशु आहार, सीमेंट उत्पाद, रंगाई-छपाई, हथकरघा, सिलाई, कन्फेक्शनरी वस्तुएं, रेफ्रिजरेशन और टिन कंटेनर को बाड़मेर के मांग-आधारित उद्योगों में गिनाया है।
खनिज संसाधन
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की औद्योगिक प्रोफाइल के अनुसार बाड़मेर में जिप्सम, सेलेनाइट, बेंटोनाइट, फुलर्स अर्थ, रंग-बिरंगी मिट्टी, लिग्नाइट, सिलिशियस अर्थ, वर्मीक्यूलाइट, सिलिका सैंड, ज्वालामुखीय राख और ग्रेनाइट जैसे औद्योगिक महत्व के अधात्विक खनिज मिलते हैं।
जिप्सम उत्पादन
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की प्रोफाइल बताती है कि बाड़मेर में जिप्सम पांच खदानों से निकाला जा रहा था, उत्पादन 10 लाख टन था और यह राजस्थान के कुल जिप्सम उत्पादन का लगभग 12 प्रतिशत था।
बेंटोनाइट भंडार
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की प्रोफाइल में हाथी सिंह की ढाणी, अकली, थुम्बली, हरवेचा, शिव, सोनारी, बिसाला, भड़का और महाबार के पास बेंटोनाइट खनन का उल्लेख है; भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने इसके भंडार 4 करोड़ टन आंके थे।
लिग्नाइट क्षेत्र
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की प्रोफाइल के अनुसार बाड़मेर का लिग्नाइट क्षेत्र बाड़मेर शहर से करीब 18 किलोमीटर उत्तर में कपूरड़ी और बधका गांव के बीच है; बिजली उत्पादन में उपयोगी इस खनिज के कुल भंडार 34.435 करोड़ टन बताए गए हैं।
पचपदरा नमक
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की प्रोफाइल के अनुसार बाड़मेर की पचपदरा तहसील में पचपदरा नमक खदानें लगभग 52 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नमक उत्पादन करती हैं; चौहटन, शिव और सिवाना तहसीलों में अन्य नमक-क्षेत्र संभावनाएं भी देखी जा रही थीं।
खेती क्षेत्र
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की प्रोफाइल में बाड़मेर का कुल खेती क्षेत्र 28.17 लाख हेक्टेयर और दोहरी फसल वाला क्षेत्र 98,262 हेक्टेयर बताया गया है; मुख्य फसलें गेहूं, ग्वार, तिल, मोठ, मूंग, बाजरा और इसबगोल हैं।
ओडीओपी कशीदाकारी
25 जुलाई 2025 की स्थिति में राजस्थान की एक जिला एक उत्पाद सूची में बाड़मेर का जिला उत्पाद कशीदाकारी दर्ज था।
फसल पैटर्न
बाड़मेर को कवर करने वाले शुष्क पश्चिमी मैदानी क्षेत्र आई-ए में बाजरा, मोठ और तिल प्रमुख खरीफ फसलें हैं, जबकि गेहूं, सरसों और जीरा प्रमुख रबी फसलें हैं।
पेट्रोलियम बेसिन
बाड़मेर-सांचौर पेट्रोलियम बेसिन बाड़मेर, जालौर के हिस्से और बालोतरा जिलों में फैला है।
प्राकृतिक गैस
बाड़मेर से शुद्ध प्राकृतिक गैस उत्पादन प्रतिदिन लगभग 19 से 22 लाख मानक घन मीटर बताया गया है।
कच्चा तेल उत्पादन
2025-26 में दिसंबर तक केयर्न इंडिया लिमिटेड ने बाड़मेर-सांचौर बेसिन से 22.51 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का उत्पादन किया।
एमएसएमई इकाइयां
एमएसएमई औद्योगिक प्रोफाइल में बाड़मेर में 2,925 पंजीकृत एमएसएमई इकाइयां और इन इकाइयों में 16,946 रोजगार दर्ज हैं।
कारीगर इकाइयां
एमएसएमई औद्योगिक प्रोफाइल के अनुसार बाड़मेर में 4,516 पंजीकृत कारीगर इकाइयां थीं; इनमें 17,332 रोजगार और 3,913.59 लाख रुपये निवेश दर्ज था।
जोधपुर संभाग
2011 की जिला जनगणना पुस्तिका की प्रशासनिक व्यवस्था में बाड़मेर जिला जोधपुर संभाग के छह जिलों में शामिल था।
प्रशासनिक उपखंड
2011 की प्रशासनिक व्यवस्था में बाड़मेर जिले में 8 उपखंड सूचीबद्ध थे।
पंचायत समितियां
पंचायती राज और ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए बाड़मेर जिला 8 पंचायत समितियों या ब्लॉकों में बांटा गया था।
ग्राम पंचायतें
बाड़मेर जिले की 2011 पंचायत समिति तालिका में 385 ग्राम पंचायतें सूचीबद्ध थीं।
पीएमएफएमई ओडीओपी विस्तार
पीएमएफएमई योजना में ओडीओपी पद्धति से कच्चे माल की खरीद, साझा सेवाओं और उत्पाद विपणन को बड़े पैमाने पर व्यवस्थित किया जाता है।
मूल्य श्रृंखला सहायता
पीएमएफएमई के तहत ओडीओपी, मूल्य-श्रृंखला विकास और सहायक ढांचे के समन्वय की मुख्य रूपरेखा देता है।
सूक्ष्म इकाई सहायता
पीएमएफएमई में ओडीओपी उत्पाद बनाने वाली मौजूदा व्यक्तिगत सूक्ष्म इकाइयों को पूंजी निवेश सहायता में प्राथमिकता दी जाती है।
बाजरा मिशन
2025-26 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत बाजरा के लिए राजस्थान के 28 जिलों में बाड़मेर भी शामिल था।
धन-धान्य योजना
आकांक्षी कृषि जिलों के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में राजस्थान से चुने गए जिलों में बाड़मेर भी था।
किसी भी परीक्षा उपयोग से पहले सटीक विकल्पों की जाँच आधिकारिक RPSC / RSSB प्रश्न पत्रों से करें।
बाड़मेर के PYQ एक-पंक्ति तथ्य शीघ्र उपलब्ध होंगे।
ऊपर के जिला संदर्भ से क्विक सेल्फ़-टेस्ट। द्विभाषी, लॉगिन की आवश्यकता नहीं।
प्रश्न 1 / 10
जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार १९४९ की किस घटना के बाद बाड़मेर अलग जिला बना?
बाड़मेर नाम को बाहड़ा राव, जिन्हें बार राव भी कहा जाता है, से जोड़ा जाता है; माना जाता है कि उन्होंने 13वीं शताब्दी में मुख्यालय नगर बसाया।
जिला जनगणना पुस्तिका में बाड़मेर का क्षेत्रफल 28,387 वर्ग किलोमीटर दिया गया और इसे जैसलमेर व बीकानेर के बाद राजस्थान का तीसरा सबसे बड़ा जिला बताया गया।
किराडू के 1161 ईस्वी के अभिलेख में इस स्थान का नाम किरातकूप बताया गया है और यह भी लिखा है कि यह कभी पंवारों की राजधानी रहा था।
तिलवाड़ा पशु मेला बाड़मेर जिले का एकमात्र प्रमुख पशु मेला बताया गया है; यह लूणी नदी के पाट में तिलवाड़ा में लगता है।
25-07-2025 तक राजस्थान की ओडीओपी सूची में बाड़मेर का जिला उत्पाद कशीदाकारी दर्ज था।
बाड़मेर-सांचौर पेट्रोलियम बेसिन बाड़मेर, जालोर के एक हिस्से और बालोतरा जिले के हिस्से तक फैला है।