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बांसवाड़ा

वागड़ में माही बांध से पहचाना जाने वाला, बड़ी अनुसूचित जनजाति आबादी वाला जिला

अंतिम सत्यापन: 2026-05-05

राजस्थान की दक्षिणी सीमा पर वागड़ अंचल में बसा बांसवाड़ा माही नदी तंत्र से आकार लेता है। माही बांध यहां की प्रमुख पहचान है, और माही में अनेक द्वीपों के कारण जनगणना पुस्तिका इसे सौ द्वीपों का शहर बताती है। 2011 में जिले की 76.38 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति थी, जबकि कृषि के साथ संगमरमर, सूत और दूसरे उद्योग भी स्थानीय अर्थव्यवस्था में दिखाई देते हैं।

जिला एक नज़र में

क्षेत्रफल, 20114,522 वर्ग किमी
जनसंख्या, 201117,97,485 लोग: 9,07,754 पुरुष और 8,89,731 महिलाएं।
ग्रामीण-शहरी विभाजन, 201116,69,864 ग्रामीण निवासी और 1,27,621 शहरी निवासी।
जनसंख्या घनत्व, 2011398 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
साक्षरता, 20118,29,343 साक्षर; कुल साक्षरता दर 56.33 प्रतिशत।
अनुसूचित जनजाति हिस्सा, 201113,72,999 अनुसूचित जनजाति निवासी, यानी जिले की आबादी का 76.38 प्रतिशत।
माही बांध की भूमिकाबहुउद्देशीय परियोजना: जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई सहयोग और बाढ़ नियंत्रण में मदद।

इतिहास — प्राचीन → मध्यकालीन → आधुनिक

वागड़ स्थापना

सामंत सिंह को वागड़ राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है; बताया जाता है कि उन्होंने लगभग 1176 ईस्वी में इस क्षेत्र पर अधिकार किया।

सारवणिया सिक्का भंडार

बांसवाड़ा जिले के सारवणिया गांव से 181 से 353 ईस्वी के चांदी के सिक्कों का भंडार मिला था।

परमार राजधानी

परमारों ने वागड़ पर शासन किया और उनकी राजधानी उत्थुनक थी, जिसे आज के अर्थूणा से जोड़ा जाता है।

जगमाल सिंह राज्यारोहण

जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार भील सरदार बांसिया को जगमाल सिंह ने पराजित कर मार दिया; जगमाल सिंह बांसवाड़ा रियासत के पहले महारावल बने।

प्रजा मंडल

1945 में बांसवाड़ा में प्रजा मंडल बना, जिसने शासक के अधीन जिम्मेदार शासन और प्रशासनिक सुधारों की मांग उठाई।

वृहद राजस्थान विलय

1949 में बांसवाड़ा राज्य और कुशलगढ़ ठिकाना वृहद राजस्थान संघ में शामिल हुए; इसी चरण में बांसवाड़ा अलग जिला बना।

कला, संस्कृति, विरासत एवं पर्यटन

तलवाड़ा पत्थर कला

तलवाड़ा का मूर्तिकला क्लस्टर स्टोन आर्ट सोमपुरा सोसायटी के माध्यम से पत्थर की कलात्मक मूर्तियां बनाता है; रिपोर्ट में 61 चालू इकाइयां और 61 लोगों का रोजगार दर्ज है।

मार्बल शिल्प क्लस्टर

बांसवाड़ा में मार्बल उत्पादों का संभावित क्लस्टर टाइलों और स्लैबों से जुड़ा है; इसमें 52 चालू इकाइयां, 569 रोजगार और संयंत्र-मशीनरी में औसत 1,372 लाख रुपये निवेश दर्ज है।

आदिवासी मेला संस्कृति

जिला जनगणना पुस्तिका बांसवाड़ा की आदिवासी मेला परंपरा को पास के डूंगरपुर के बाणेश्वर मेले से जोड़ती है; अर्थूणा हनुमानजी के शनिवार मेलों और होली मेले में भील नृत्य-गायन का उल्लेख भी करती है।

बाणेश्वर मेला

परंपरागत आदिवासी मेलों के लिए बांसवाड़ा के लोग पास के डूंगरपुर के बाणेश्वर मेले में जाते हैं, जहां डूंगरपुर, उदयपुर, बांसवाड़ा और राजस्थान के अन्य हिस्सों से लोग जुटते हैं।

होली भील नृत्य

होली मेले में भील समुदाय पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा और आभूषण पहनकर बड़े पेड़ के चारों ओर चक्कर लगाते हुए नाचता-गाता है।

भील संगीत

बांसवाड़ा में भील संगीत परंपरा के वाद्यों में बांसुरी, ढोल, थाली, मंजीरा, ढोलक, मृदंग, तबला, हारमोनियम और सारंगी गिने गए हैं।

त्योहार कैलेंडर

बांसवाड़ा जिले के प्रमुख त्योहारों में शीतला अष्टमी, नवरात्र, गणगौर, आखा तीज, रक्षा बंधन, दशहरा और दीपावली शामिल हैं।

भूगोल, जलवायु एवं पारिस्थितिकी

दक्षिणी स्थिति

बांसवाड़ा जिला राजस्थान की दक्षिणी सीमा पर है और लगभग 23°11' से 23°56' उत्तरी अक्षांश तथा 73°58' से 74°49' पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है।

अंतरराज्यीय सीमाएं

बांसवाड़ा के उत्तर-पूर्व में प्रतापगढ़, पूर्व में मध्य प्रदेश का रतलाम, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में डूंगरपुर, दक्षिण-पूर्व में मध्य प्रदेश का झाबुआ और दक्षिण तथा दक्षिण-पश्चिम में गुजरात का दाहोद जिला लगता है।

ऊबड़-खाबड़ भूभाग

जिला जनगणना पुस्तिका बांसवाड़ा की भौतिक बनावट को ऊबड़-खाबड़ बताती है; शहर के पश्चिम में छोटी पहाड़ियां और पूर्वी भाग में सपाट शिखर वाली दक्कन ट्रैप पहाड़ियां मिलती हैं।

माही नदी तंत्र

माही नदी मध्य प्रदेश से निकलकर राजस्थान के वागड़ अंचल से गुजरात की ओर बहती है और अंत में अरब सागर में मिलती है; बांसवाड़ा के पास माही बांध भी इसी नदी तंत्र का प्रमुख स्थान है।

सागौन वन

बांसवाड़ा के वन मुख्यतः अरावली ढलानों और लहरदार भूभाग पर सागौन-प्रधान शुष्क पर्णपाती वन हैं, जबकि मैदानी भागों से वनावरण काफी घट चुका है।

अर्थव्यवस्था — क्षेत्र, उद्योग, ऊर्जा

औद्योगिक क्षेत्र

राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम ने बांसवाड़ा में पीपलवा, ठिकरिया, कुशलगढ़, परतापुर और घाटोल पांच औद्योगिक क्षेत्र दर्ज किए; ठिकरिया में 226.00 हेक्टेयर विकसित क्षेत्र और 255 चालू इकाइयां, जबकि पीपलवा में 118.27 हेक्टेयर विकसित क्षेत्र और 109 चालू इकाइयां थीं।

औद्योगिक सारांश

बांसवाड़ा के औद्योगिक सार में कुल 3,958 औद्योगिक इकाइयां, 8 पंजीकृत मध्यम और बड़े उद्योग, लघु उद्योगों में 11,651 कामगार तथा बड़े और मध्यम उद्योगों में 16,179 कामगार दर्ज हैं।

उद्यम संरचना

जिले के सूक्ष्म और लघु उद्यमों में लकड़ी उत्पाद श्रेणी की 1,109 इकाइयों से 2,030 रोजगार जुड़े थे, जबकि आधारभूत धातु उद्योग की 392 इकाइयों में 2,740 रोजगार दर्ज थे।

बड़े उद्योग

31 मार्च 2016 की बड़े उद्योगों की सूची में बांसवाड़ा में वस्त्र, सीमेंट, मार्बल फर्श सामग्री और आसवनी उत्पादों की चालू इकाइयां दर्ज थीं।

निर्यात उत्पाद

बांसवाड़ा के प्रमुख निर्यात योग्य उत्पादों में सूत, मार्बल स्लैब और टाइलें दर्ज की गई हैं।

जिला आय

2024-25 के लिए बांसवाड़ा का अनंतिम सकल जिला घरेलू उत्पाद चालू मूल्यों पर 28,897 करोड़ रुपये और 2011-12 के स्थिर मूल्यों पर 14,868 करोड़ रुपये बताया गया; प्रति व्यक्ति आय क्रमशः 1,20,686 रुपये और 61,034 रुपये रही।

उद्यम समूह

जिला जनगणना पुस्तिका की क्लस्टर तालिका में तलवाड़ा की मूर्ति कला में 65 उद्यम और 65 कर्मचारी, मालीखेड़ा के बांस कार्य में 325 उद्यम और 325 कर्मचारी, तथा बांसवाड़ा के टाइल और स्लैब क्लस्टर में 52 उद्यम और 570 कर्मचारी दर्ज हैं।

खनिज भंडार

जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार बांसवाड़ा राजस्थान का ऐसा जिला था जहां ग्रेफाइट और मैंगनीज के उल्लेखनीय भंडार मिलते थे; बांसवाड़ा से घाटोल के बीच लगभग 35 किलोमीटर तक ग्रेफाइटयुक्त पट्टियां फैली हैं।

कृषि भूमि

2010-11 की भूमि उपयोग तालिका में बांसवाड़ा की खेती योग्य भूमि 2,99,405 हेक्टेयर, सकल बोया गया क्षेत्र 3,32,192 हेक्टेयर, शुद्ध बोया गया क्षेत्र 2,25,704 हेक्टेयर और सकल सिंचित क्षेत्र 99,309 हेक्टेयर दर्ज था।

प्रमुख फसलें

2010-11 की फसल तालिका में मक्का 1,44,715 हेक्टेयर में बोई गई और उसका उत्पादन 2,98,984 टन रहा, जबकि गेहूं 86,052 हेक्टेयर में बोया गया और उत्पादन 1,76,322 टन दर्ज हुआ।

औद्योगिक प्रोफाइल

जिला जनगणना पुस्तिका बांसवाड़ा को दक्षिणी राजस्थान का मुख्यतः जनजातीय और औद्योगिक रूप से पिछड़ा जिला बताती है; 2010-11 में यहां धागा, कपड़ा और संगमरमर से जुड़े उद्योग संचालित थे।

औद्योगिक समूह

बांसवाड़ा के सूचीबद्ध औद्योगिक समूहों में तलवाड़ा का मूर्ति-कला समूह 65 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के साथ, मालिकेड़ा का बांस समूह 325 उद्यमों के साथ और बांसवाड़ा का टाइल-स्लैब समूह 52 उद्यमों के साथ दर्ज था।

उद्यम ज्ञापन

बांसवाड़ा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के उद्यमी ज्ञापन 2007-08 में 281, 2008-09 में 248, 2009-10 में 245 और 2010-11 में 257 दर्ज हुए।

व्यापार आयात

बांसवाड़ा के व्यापार विवरण में आयातित वस्तुओं के रूप में धातु, दवाइयां, चीनी और तेल दर्ज हैं।

राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरचना

जिला प्रशासन

2011 की जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार बांसवाड़ा उदयपुर संभाग के छह जिलों में शामिल था; जिला प्रशासन का प्रमुख जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट था।

प्रशासनिक उपखंड

2011 की जिला जनगणना पुस्तिका बांसवाड़ा में 5 उपखंड दर्ज करती है; प्रत्येक उपखंड का प्रभारी उपखंड अधिकारी या मजिस्ट्रेट था।

घाटोल विधायक

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में घाटोल विधानसभा क्षेत्र संख्या 162 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था; कांग्रेस के नानालाल निनामा कुल 88,335 मत पाकर विजयी रहे।

गढ़ी विधायक

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में गढ़ी विधानसभा क्षेत्र संख्या 163 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था; भाजपा के कैलाश चंद्र मीणा कुल 87,607 मत पाकर जीते।

बांसवाड़ा विधायक

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र संख्या 164 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था; कांग्रेस के अर्जुन सिंह बामनिया कुल 93,017 मत पाकर जीते।

बागीदौरा विधायक

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र संख्या 165 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था; कांग्रेस के महेंद्रजीत सिंह मालवीय कुल 1,01,742 मत पाकर जीते।

कुशलगढ़ विधायक

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र संख्या 166 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था; कांग्रेस की रमिला खड़िया कुल 97,480 मत पाकर जीतीं।

लोकसभा मतदाता

लोकसभा चुनाव 2024 के विस्तृत परिणामों में संसदीय क्षेत्र संख्या 20 बांसवाड़ा के कुल मतदाता 22,00,607 दर्ज थे।

लोकसभा विजेता

लोकसभा चुनाव 2024 में बांसवाड़ा सीट से भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत कुल 8,20,831 मत पाकर विजयी रहे।

दूसरे स्थान के मत

लोकसभा चुनाव 2024 में बांसवाड़ा सीट पर भाजपा के महेंद्रजीत सिंह मालवीय को कुल 5,73,777 मत मिले।

शासन पहल एवं योजनाएँ (2025-26)

ओडीओपी निर्यात योजना

राजस्थान में एक जिला एक उत्पाद पहल के तहत निर्यात-योग्य उत्पादों और सेवाओं की पहचान, जिला निर्यात कार्य-योजनाओं की तैयारी तथा जिला और राज्य-स्तरीय निर्यात संवर्धन समितियों के गठन पर जोर दिया गया है।

शहरी अवसंरचना

बाँसवाड़ा में आरयूआईडीपी के तृतीय चरण के जलनिकासी कार्य पूर्ण बताए गए हैं, जबकि चतुर्थ चरण की पहली किश्त में शहर को सीवरेज और जलापूर्ति कार्यों वाले नगरों में शामिल किया गया है।

माही बिजली परियोजना

माही जल-विद्युत परियोजना के अंतर्गत बाँसवाड़ा जिले के तीन बिजलीघरों ने 2010-11 में 1 लाख 40 हजार 965 किलोवाट उत्पादन दर्ज किया, और 2011 के अंत तक 1,370 गाँव विद्युतीकृत हो चुके थे।

माही सिंचाई परियोजना

माही बजाज सागर परियोजना के तहत बाँसवाड़ा में माही नदी पर अलग-अलग बाँध और नहरें विकसित की गईं।

PYQ एक-पंक्ति (RAS / RPSC / RSSB)

किसी भी परीक्षा उपयोग से पहले सटीक विकल्पों की जाँच आधिकारिक RPSC / RSSB प्रश्न पत्रों से करें।

बांसवाड़ा के PYQ एक-पंक्ति तथ्य शीघ्र उपलब्ध होंगे।

स्वयं को परखें — 10 प्रश्न

ऊपर के जिला संदर्भ से क्विक सेल्फ़-टेस्ट। द्विभाषी, लॉगिन की आवश्यकता नहीं।

प्रश्न 1 / 10

२०११ की जिला जनगणना पुस्तिका के प्रशासनिक विवरण में ग्रामीण विकास के लिए बांसवाड़ा जिला कितनी पंचायत समितियों में बांटा गया था?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांसवाड़ा का नाम कैसे पड़ा?

जिले का नाम बांसवाड़ा नगर से जुड़ा है। एक परंपरा इसे भील मुखिया बांसिया या वासना से जोड़ती है, जबकि दूसरी परंपरा इस इलाके में बांस की अधिकता से नाम पड़ना बताती है।

माही बांध और कागदी पिकअप बांसवाड़ा में किसलिए जाने जाते हैं?

माही बांध और कागदी पिकअप को सुंदर फव्वारा उद्यान वाले देखने योग्य स्थलों के रूप में बताया गया है।

बांसवाड़ा जिले के अर्थूना की खास पहचान क्या है?

अर्थूना सबसे पुराने हनुमानजी मंदिर के लिए उल्लेखित है, जहां हर शनिवार मेला लगता है।

बांसवाड़ा जिले का कौन-सा धार्मिक स्थल प्रमुख माना गया है?

धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के मंदिरों में त्रिपुरा सुंदरी मंदिर को प्रसिद्ध बताया गया है; इसी विवरण में जिले में कई चर्च होने का भी उल्लेख है।