RAS प्रश्न
पश्चिमी विक्षोभ जो उत्तर भारत में शीतकालीन वर्षा लाते हैं, कहाँ से उत्पन्न होते हैं?
सही उत्तर: (D) भूमध्य सागर क्षेत्र।
उत्तर भारत में शीतकालीन वर्षा लाने वाले पश्चिमी विक्षोभ बहिरुष्णकटिबंधीय चक्रवात के रूप में भूमध्य सागर क्षेत्र में उत्पन्न होते हैं।
व्याख्या
पश्चिमी विक्षोभ बहिरुष्णकटिबंधीय चक्रवात हैं, जो भूमध्य सागर क्षेत्र में बनते हैं और पूर्व की ओर बढ़ते हुए ईरान, अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुँचते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार ये मानसून से अलग मौसम प्रणालियाँ हैं। इन्हें पश्चिमी पवनें आगे बढ़ाती हैं और ये वायुमंडल की ऊपरी परतों में नमी लेकर आती हैं। हिमालयी क्षेत्र में पहुँचने पर यही नमी वर्षा या हिमपात के रूप में गिरती है। इसी कारण पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर जैसे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में शीत और वसंत ऋतु के आरंभ में होने वाली वर्षा पश्चिमी विक्षोभों से आती है, न कि ग्रीष्मकालीन मानसून से। यह वर्षा गेहूँ जैसी रबी फ़सलों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन फ़सलों को ठंडे मौसम में नमी की ज़रूरत होती है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) प्रशांत महासागर का संबंध एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) से है, जबकि पश्चिमी विक्षोभ बहिरुष्णकटिबंधीय चक्रवात हैं, जो भूमध्य सागर क्षेत्र में उत्पन्न होकर पूर्व की ओर भारत तक पहुँचते हैं।
- (B) बंगाल की खाड़ी का संबंध उत्तर-पूर्वी मानसून से है, जबकि पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी पवनों से चलने वाली गैर-मानसूनी प्रणालियाँ हैं, जिनकी उत्पत्ति भूमध्य सागर क्षेत्र में होती है।
- (C) अरब सागर दक्षिण-पश्चिम मानसून को नमी देता है, जबकि पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर क्षेत्र में बहिरुष्णकटिबंधीय चक्रवात के रूप में उत्पन्न होते हैं।
अवधारणा
यह प्रश्न भारत की जलवायु में मानसून से अलग होने वाली शीतकालीन वर्षा की संकल्पना को परखता है। RAS में पश्चिमी विक्षोभों से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं, क्योंकि इनके भूमध्य सागर क्षेत्र में बनने और पश्चिमी पवनों के साथ पूर्व की ओर बढ़ने का संबंध हिमालयी वर्षा तथा उत्तर-पश्चिम भारत की रबी कृषि से है।
