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संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
प्रश्न 1 (5 अंक — 50 शब्द): Hawthorne प्रयोग क्या हैं? उनके प्रमुख निष्कर्ष क्या थे?
आदर्श उत्तर:
Hawthorne प्रयोग (Elton Mayo, 1927–32) Western Electric के Hawthorne संयंत्र, शिकागो में किए गए। प्रकाश-व्यवस्था, विश्राम-अवधि और समूह-गतिशीलता पर अध्ययनों ने दर्शाया कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारक — भौतिक परिस्थितियाँ नहीं — श्रमिक उत्पादकता को मुख्य रूप से प्रेरित करते हैं। मुख्य निष्कर्ष: (1) अनौपचारिक समूह उत्पादन मानक निर्धारित करते हैं; (2) कर्मचारी अपनत्व-भावना और पहचान से प्रेरित होते हैं; (3) हॉथोर्न प्रभाव — जब कर्मचारी देखे और सराहे जाते हैं तब बेहतर प्रदर्शन करते हैं; (4) मनोबल, अकेला वेतन नहीं, उत्पादन निर्धारित करता है।
प्रश्न 2 (5 अंक — 50 शब्द): Douglas McGregor के सिद्धांत X और सिद्धांत Y के बीच अंतर करें। लोक प्रशासन के लिए कौन-सा अधिक उपयुक्त है?
आदर्श उत्तर:
सिद्धांत X (McGregor, 1960): कर्मचारी आलसी हैं, काम से नापसंद, जिम्मेदारी से बचते हैं और उन्हें बाह्य दबाव और कड़े नियंत्रण की आवश्यकता है — निरंकुश प्रबंधन शैली। सिद्धांत Y: कर्मचारी स्वयं-प्रेरित, जिम्मेदारी चाहते हैं, रचनात्मक हैं और सहभागी प्रबंधन में फलते-फूलते हैं। लोक प्रशासन के लिए सिद्धांत Y अधिक उपयुक्त है: लोकतांत्रिक शासन के लिए ऐसे प्रेरित, जिम्मेदार सिविल सेवकों की आवश्यकता है जो नागरिकों की सेवा स्वेच्छा से करें, भय से नहीं। सिद्धांत Y सहभागी नीति-निर्माण, सामाजिक अंकेक्षण और नागरिक-केंद्रित सेवाओं का आधार है।
प्रश्न 3 (5 अंक — 50 शब्द): लोक प्रशासन में पारिस्थितिकीय उपागम क्या है? Riggs के प्रिज़मैटिक मॉडल की व्याख्या करें।
आदर्श उत्तर:
पारिस्थितिकीय उपागम (Fred Riggs, लोक प्रशासन की पारिस्थितिकी, 1961) मानता है कि PA का अध्ययन उसके सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पर्यावरण से अलग नहीं किया जा सकता। Riggs ने समाजों को एक स्पेक्ट्रम पर रखा: Agraria (fused — एक संरचना सब कुछ करती है); Industria (diffracted — विशेषीकृत आधुनिक एजेंसियाँ); प्रिज़मैटिक (मध्यवर्ती — विकासशील देश)। प्रिज़मैटिक समाजों (Sala मॉडल) में, आधुनिक संस्थाएँ परंपरागत व्यवहारों के साथ सह-अस्तित्व में रहती हैं, जिससे औपचारिकता (नियमों और व्यवहार के बीच अंतराल), विविधता और बहु-आदर्शवाद उत्पन्न होते हैं। भारत एक क्लासिक प्रिज़मैटिक समाज है।
प्रश्न 4 (10 अंक — 150 शब्द): संगठनों के संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक सिद्धांत की आलोचनात्मक समीक्षा करें। Merton की 'नौकरशाही की अकार्यात्मकताएँ' की अवधारणा भारतीय प्रशासन को समझने में किस प्रकार सहायक है?
आदर्श उत्तर:
संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक सिद्धांत संगठनों को ऐसे सामाजिक तंत्र के रूप में देखता है जिन्हें जीवित रहने के लिए कुछ कार्य करने होते हैं। Talcott Parsons (AGIL ढाँचा) ने तर्क दिया कि प्रत्येक तंत्र को चाहिए: (A) अनुकूलन — वित्त मंत्रालय आर्थिक चक्रों के अनुकूल होते हैं; (G) लक्ष्य प्राप्ति — नीति आयोग/योजना आयोग राष्ट्रीय लक्ष्य परिभाषित करते हैं; (I) एकीकरण — Cabinet Secretariat मंत्रालयों का समन्वय करता है; (L) Latency (सांस्कृतिक प्रतिरूप) बनाए रखना — LBSNAA IAS मूल्यों और परंपराओं को संरक्षित रखता है।
सिद्धांत की शक्ति उसके समग्र, परस्पर-निर्भर दृष्टिकोण में है। हालाँकि इसकी आलोचना होती है: (i) रूढ़िवादी पूर्वाग्रह — यह बताता है कि तंत्र क्यों बने रहते हैं, लेकिन क्यों बदलते हैं, नहीं; (ii) संघर्ष की उपेक्षा — सहमति को स्वाभाविक मानता है, संगठनों के भीतर शक्ति-संघर्ष को नजरअंदाज करता है; (iii) चक्रीय तर्क — संरचना इसलिए है क्योंकि प्रकार्यात्मक है, पर हम कैसे निर्धारित करें कि क्या प्रकार्यात्मक है?
Robert K. Merton की अकार्यात्मकताएँ भारत के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं। लक्ष्य-विस्थापन — IAS अधिकारी प्रक्रिया-अनुपालन पर ध्यान देते हैं, विकास परिणामों पर नहीं; MGNREGS कार्ड वितरण वास्तविक रोजगार-सृजन से अधिक महत्त्वपूर्ण बन जाता है। प्रशिक्षित अक्षमता — नियमित प्रक्रियाओं में प्रशिक्षित सिविल सेवक संकटों का सामना नहीं कर पाते (COVID प्रतिक्रिया ने कठोर प्रक्रियात्मक सोच उजागर की)। अति-अनुपालन — जिला कलेक्टर आपात स्थितियों में भी विवेकाधीन अधिकारों का उपयोग करने से हिचकिचाते हैं, लेखा-परीक्षा की आशंका से। औपचारिकता — राजस्थान के सार्वजनिक शिकायत पोर्टल शिकायतें स्वीकार करते हैं, पर अनुवर्ती कार्रवाई नहीं होती।
Merton का ढाँचा एक निदान-उपकरण प्रदान करता है: भारतीय प्रशासनिक सुधार (ARC सिफारिशें, DARPG सुधार) अनिवार्य रूप से परिणाम-अभिमुखता, प्रक्रिया-सरलीकरण और विवेकाधीन क्षमता निर्माण के माध्यम से नौकरशाही अकार्यात्मकताओं को कम करने के प्रयास हैं।
प्रश्न 5 (5 अंक — 50 शब्द): सीमित तार्किकता क्या है? Herbert Simon का निर्णय-निर्माण सिद्धांत शास्त्रीय प्रशासन के दृष्टिकोण को किस प्रकार चुनौती देता है?
आदर्श उत्तर:
Herbert Simon (Nobel 1978) ने प्रशासनिक व्यवहार (1947) में तर्क दिया कि प्रशासक पूरी तरह तार्किक नहीं हो सकते — उनकी सीमित तार्किकता होती है: अपूर्ण सूचना, समय का दबाव और सीमित अनुभूति। अनुकूलन की बजाय वे पर्याप्त-संतोषजनक विकल्प चुनना करते हैं (पहला पर्याप्त-अच्छा विकल्प चुनते हैं)। इसने शास्त्रीय दृष्टिकोण को चुनौती दी: (1) POSDCORB का "एकमात्र सर्वोत्तम तरीका" अपूर्ण सूचना में असंभव है; (2) संगठन मशीनें नहीं बल्कि मानव-निर्णय तंत्र हैं; (3) प्रशासन अनिवार्य रूप से अनिश्चितता में चयन के बारे में है, यांत्रिक निष्पादन नहीं।
