94. हालिया संवैधानिक विकास, न्यायिक निर्णय, संवैधानिक नैतिकता, परिवर्तनकारी संविधानवाद — पूर्ण नोट्स
Recent Constitutional Developments, Judicial Pronouncements, Constitutional Morality, Transformative Constitutionalismपूरा पढ़ने के लिए मुफ़्त में साइन अप करें
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मूल मुख्य बिंदु
- 1
- संवैधानिक नैतिकता — डॉ. अम्बेडकर द्वारा संविधान सभा में प्रयुक्त अवधारणा
- लोकप्रिय (बहुसंख्यक) नैतिकता के विरुद्ध संवैधानिक मूल्यों की प्राथमिकता
- नवतेज सिंह जोहर (2018) और सबरीमाला (2018) में न्यायालय ने इसे लागू किया
- 2
- परिवर्तनकारी संविधानवाद — संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का साधन है
- भारतीय संविधान ने समता, गरिमा और बंधुत्व के माध्यम से पदानुक्रमित समाज बदलने का लक्ष्य रखा
- न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ इसके प्रमुख न्यायिक प्रवर्तक माने जाते हैं
- 3
- SC ने IPC की धारा 377 को असंवैधानिक माना (सर्वसम्मति से)
- अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन
- यौन अभिविन्यास अनुच्छेद 15 के तहत संरक्षित आधार है
- 4
- SC ने धारा 497 IPC (व्यभिचार कानून) को असंवैधानिक माना
- महिला को पति की संपत्ति मानने वाला औपनिवेशिक कानून
- अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन
- 5
- SC ने 3:2 से तत्काल तीन तलाक को असंवैधानिक माना
- संसद ने मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 पारित किया
- 3 वर्ष कारावास का प्रावधान
- 6
- 9 न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से गोपनीयता का अधिकार मौलिक अधिकार माना (अनुच्छेद 21)
- M.P. Sharma (1954) और Kharak Singh (1963) को पलटा
- डेटा संरक्षण, आधार, और निगरानी पर व्यापक प्रभाव
- 7
- 4:1 बहुमत से 10–50 वर्ष की महिलाओं का मंदिर प्रवेश प्रतिबंध असंवैधानिक (अनुच्छेद 14, 15, 17, 25)
- Justice Indu Malhotra ने असहमति जताई
- 2019 में 9-न्यायाधीश पीठ को संदर्भित
- 8
- SC ने 3:2 बहुमत से EWS 10% आरक्षण (103वाँ संशोधन) को मूल ढाँचे का उल्लंघन नहीं माना
- आर्थिक मानदंड एक वैध वर्गीकरण है
- दो असहमत न्यायाधीशों ने 50% सीमा का उल्लंघन माना
- 9
- 5 न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से 2019 की निष्प्रभावी कार्रवाई को वैध माना
- J&K का भारत में पूर्ण विलय; अनुच्छेद 370 अस्थायी प्रावधान था
- सितम्बर 2024 तक चुनाव का निर्देश
- 10
- रोहित वेमुला (2016) और संवैधानिक पहचान: संवैधानिक आदर्शों (अनुच्छेद 15, 17, 21) और वास्तविकता के बीच खाई
- जाति-आधारित भेदभाव और शैक्षणिक संस्थाओं में उत्पीड़न पर बहस तेज हुई
- 11
- अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से पीड़ित गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता
- नियम मार्च 2024 में अधिसूचित
- अनुच्छेद 14 उल्लंघन की याचिकाएं SC में लंबित
- 12
- नई आपराधिक विधि त्रयी (2023): BNS, BNSS, BSA ने IPC, CrPC और साक्ष्य अधिनियम को प्रतिस्थापित किया
- 1 जुलाई 2024 से लागू; आतंकवाद, संगठित अपराध और परीक्षण समयसीमा पर प्रावधान
संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M संवैधानिक नैतिकता क्या है? हाल के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे कैसे लागू किया है?
आदर्श उत्तर
Constitutional morality, डॉ. अंबेडकर द्वारा प्रतिपादित अवधारणा, का अर्थ है लोकप्रिय (बहुसंख्यकवादी) मानदंडों के स्थान पर संवैधानिक मूल्यों — लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, व्यक्तिगत अधिकारों, संस्थागत प्रक्रियाओं — का पालन। Supreme Court ने इसे Navtej Singh Johar (2018) में सहमति से समलैंगिकता को अपराध-मुक्त करने में, और Sabarimala (2018) में धार्मिक प्रथा के बावजूद महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने में लागू किया। Constitutional morality अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों के अतिक्रमण से बचाती है।
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