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इतिहास

मुख्य बिंदु

धार्मिक आस्थाएँ, संत, लोक देवता

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 1 / 15 PYQ-शैली 53 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

मुख्य बिंदु

  1. पंचपीर राजस्थान के पाँच प्रमुख लोक देवता हैं: पाबूजी, गोगाजी, रामदेवजी, तेजाजी और हड़बूजी। इनमें से प्रत्येक की पूजा फड़ नामक चित्रपट पर आधारित मौखिक महाकाव्य परंपरा के माध्यम से की जाती है, जिसे भोपा-भोपी लोक पुजारी गाकर सुनाते हैं।

  2. रामदेव पीर का जन्म लगभग 1405 CE में रुणिचा (रामदेवरा, जैसलमेर जिला) में हुआ; वे एकमात्र ऐसे लोक देवता हैं जिन्हें हिंदू और मुसलमान दोनों "रामसा पीर" के रूप में पूजते हैं। रामदेवरा में उनका वार्षिक मेला (भाद्रपद शुक्ल 2–11) लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

  3. दादू दयाल (1544–1603 CE), दादू पंथ के संस्थापक, का जन्म अहमदाबाद में हुआ और बाद में वे नागौर जिले के नरैना में बस गए। उनकी लगभग 5,000 पदों वाली रचना दादू वाणी इस पंथ का आधार-ग्रंथ बनी।

  4. राजस्थान में निर्गुण भक्ति का प्रतिनिधित्व दादू दयाल, रज्जब और सुंदरदास ने किया। इन सभी ने मूर्ति पूजा, जाति-पदानुक्रम और कर्मकांड का खंडन किया, जो कबीर की व्यापक निर्गुण परंपरा के अनुरूप था।

  5. मीराबाई (लगभग 1498–1547 CE), नागौर की मेड़ता की राजकुमारी, राजस्थान की सर्वप्रमुख सगुण भक्ति संत थीं, जो कृष्ण की अनन्य भक्त थीं। ब्रज भाषा, राजस्थानी और गुजराती में उनके लगभग 1,300 भजन मिलते हैं।

  6. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (1141–1236 CE) ने लगभग 1193 CE में अजमेर में चिश्ती सूफी सिलसिले की स्थापना की। अजमेर दरगाह दक्षिण एशिया का सर्वाधिक देखा जाने वाला सूफी तीर्थ है और उर्स (रजब 1–6) के दौरान लगभग 1.5 लाख श्रद्धालु यहाँ आते हैं।

  7. भारतीय वैदिक दर्शन के छह आस्तिक दर्शन हैं — न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा और वेदांत। ये सभी वेदों के प्रामाण्य को स्वीकार करते हैं, जबकि प्रस्थान त्रयी से अभिप्राय उपनिषद, भगवद्गीता और ब्रह्मसूत्र से है।

  8. राजस्थान में जैन धर्म का सर्वाधिक प्रमुख प्रतिनिधित्व माउंट आबू के दिलवाड़ा मंदिर और पाली जिले के रणकपुर मंदिर द्वारा होता है। किसी भी भारतीय राज्य की तुलना में जैन जनसंख्या का सर्वाधिक अनुपात (लगभग 1.2%) राजस्थान में है।

  9. चरणदासी संप्रदाय की स्थापना अलवर के डेहरा गाँव के चरण दास (1703–1782 CE) ने की, जिसने दो प्रसिद्ध महिला संतों — सहजो बाई और दया बाई — को जन्म दिया। RPSC मुख्य परीक्षा 2024 में इन दोनों महिला संतों पर सीधा प्रश्न पूछा गया था।

  10. बीकानेर के देशनोक की करणी माता राजपूतों, विशेषकर चारणों की कुलदेवी हैं। उनका मंदिर अपने पवित्र चूहों तथा बीकानेर राजपरिवार और राव बीका द्वारा 1488 CE में बीकानेर राज्य की स्थापना से जुड़े संबंध के लिए प्रसिद्ध है।

  11. चूरू जिले के डडरेवा के गोगाजी (लगभग 900 CE) की पूजा नाग देवता के रूप में होती है और मुसलमान उन्हें "ज़ाहिर पीर" के रूप में भी मानते हैं। भाद्रपद शुक्ल 9 को लगने वाला गोगामेड़ी मेला हनुमानगढ़ जिले की एक प्रमुख तीर्थयात्रा है।

  12. सुहरावर्दी सूफी सिलसिला, जिसकी स्थापना शिहाबुद्दीन सुहरावर्दी (1145–1234 CE) ने की, का राजस्थान में प्रतिनिधित्व हमीदुद्दीन नागौरी (1192–1274 CE) ने किया। इसमें तपश्चर्या और शरीयत के कठोर पालन पर बल दिया जाता था।

  13. नागौर के तेजाजी (लगभग 928–960 CE) गौरक्षक और नाग देवता दोनों रूपों में पूजे जाते हैं, विशेषकर जाट समुदाय में उनकी गहरी मान्यता है। उनके प्रमुख मेले नागौर के परबतसर और अजमेर जिले के बांगड़ में लगते हैं।

  14. फलौदी के कोलू के पाबूजी (लगभग 1239–1276 CE) को ऊँट देवता और पशुधन के रक्षक के रूप में माना जाता था, विशेषकर रेबारी और नायक समुदायों द्वारा। उनका महाकाव्य पाबूजी री फड़ भोपा पुजारियों द्वारा रातभर गाया-बजाया जाता है।

  15. राम नवमी 2026 के राष्ट्रीय उत्सव में राजस्थान भर के मंदिरों ने भागीदारी की, जिनमें जयपुर का गोविंद देव जी, नाथद्वारा का श्रीनाथजी और पुष्कर शामिल थे — जो समकालीन राजस्थान में सगुण वैष्णव भक्ति और राज्य-शासन के परस्पर संबंध को दर्शाता है।