मुख्य बिंदु

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    संवैधानिक निकायों का आधार सीधे संविधान के अनुच्छेदों में होता है; सांविधिक निकाय संसद या राज्य विधानमंडल के बनाए अधिनियम से बनते हैं।

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    अनुच्छेद 324 - निर्वाचन आयोग की शक्तियां निर्वाचक नामावली और चुनावों पर अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण देती हैं।

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    नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक, वित्त आयोग, लोक सेवा आयोग और वस्तु एवं सेवा कर परिषद अलग-अलग नियुक्ति और प्रतिवेदन ढांचे वाले अनुच्छेद-आधारित संस्थान हैं।

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    संविधान (इकसठवां संशोधन) अधिनियम, 1988 ने अनुच्छेद 326 में मतदान आयु 21 से 18 वर्ष कर दी।

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    संविधान (तिहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992 और संविधान (चौहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992 ने स्थानीय चुनाव और स्थानीय वित्त निकाय बनाए।

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    केंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग और लोकपाल सांविधिक निकाय हैं; उनकी शक्ति मूल अधिनियम से तय होती है।

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    अधिकरण और नियुक्ति संबंधी वाद बताते हैं कि स्वतंत्रता, पुनरावलोकन और संरचना भी स्थापना जितनी महत्वपूर्ण हैं।

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    राजस्थान में राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग और RPSC इस विषय को स्थानीय आधार देते हैं।

निकाय-प्रकार और अधिकार का स्रोत

संवैधानिक निकाय वह है जिसका कार्यालय, नियुक्ति मार्ग या मूल कार्य संविधान में ही दिया गया हो। सांविधिक निकाय किसी अधिनियम से बनता है और उस अधिनियम में संशोधन से बदला जा सकता है, बशर्ते संवैधानिक सीमाएं न टूटें। अनुच्छेद 324 का निर्वाचन आयोग, अनुच्छेद 148 का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक, अनुच्छेद 280 का वित्त आयोग, अनुच्छेद 315 से 323 के लोक सेवा आयोग, अनुच्छेद 243K के राज्य निर्वाचन आयोग और अनुच्छेद 279A की वस्तु एवं सेवा कर परिषद संवैधानिक संस्थाएं हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकपाल और अनेक अधिकरण सांविधिक संस्थाएं हैं। फर्क प्रतिष्ठा का नहीं, कानूनी स्रोत, हटाने की सुरक्षा, प्रतिवेदन-रेखा और न्यायिक पुनरावलोकन का है। राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग और राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग इसी भेद को राज्य स्तर पर दिखाते हैं। निर्माण-स्रोत संशोधन की सीमा भी तय करता है। संसद साधारण अधिनियम से नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक या अनुच्छेद 324 को समाप्त नहीं कर सकती, पर संवैधानिक सीमाओं के भीतर केंद्रीय सूचना आयोग के लिए सूचना अधिनियम या केंद्रीय सतर्कता आयोग के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम बदल सकती है। प्रतिवेदन भी अलग होता है: नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक रिपोर्ट विधानमंडलों के सामने रखी जाती है, वित्त आयोग की अनुशंसाएं राष्ट्रपति को जाती हैं और सांविधिक आयोग अपने अधिनियम में दिए कार्यपालिका मार्ग से प्रतिवेदन भेजते हैं। अनुच्छेद-जड़ मुकदमेबाजी का स्तर भी बदलती है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक हटाने या निर्वाचन आयोग नियंत्रण की गड़बड़ी संवैधानिक प्रश्न बनती है, जबकि केंद्रीय सूचना आयोग नियुक्ति या केंद्रीय सतर्कता आयोग प्रक्रिया की गड़बड़ी पहले मूल अधिनियम की व्याख्या से शुरू होती है।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 MCQ संसद और राज्य विधानमंडल चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण को केंद्रीय आयोग में रखने वाला संवैधानिक प्रावधान कौन-सा है?
  1. A अनुच्छेद 324 सही उत्तर
  2. B अनुच्छेद 280
  3. C अनुच्छेद 315
  4. D अनुच्छेद 243Y

व्याख्या

अनुच्छेद 324 संसद, राज्य विधानमंडलों तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों पर नियंत्रण का संवैधानिक वाक्यांश देता है। अनुच्छेद 280 वित्त आयोग से जुड़ा है। अनुच्छेद 315 लोक सेवा आयोगों से जुड़ा है। अनुच्छेद 243Y नगरपालिकाओं की वित्तीय समीक्षा को राज्य वित्त आयोग से जोड़ता है।