स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0
**उद्देश्य:** दीर्घकालिक घरेलू वेंचर कैपिटल जुटाकर भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति देना। **बजट:** 10,000 करोड़ रुपये का कोष। **प्रमुख विशेषताएं:** - SEBI-पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) में निवेश, जो स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं - डीप-टेक (AI, रोबोटिक्स, स्पेसटेक), तकनीक-संचालित विनिर्माण और प्रारंभिक विकास चरण के स्टार्टअप्स पर ध्यान - प्रमुख शहरों से परे निवेश को प्रोत्साहित करना - FoF 1.0 पर आधारित जिसने 145 AIFs में 10,000 करोड़ रुपये प्रतिबद्ध किए **लाभार्थी:** डीप-टेक स्टार्टअप, नवोन्मेषी विनिर्माण कंपनियां, शुरुआती चरण के संस्थापक। **कार्यान्वयन एजेंसी:** उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT)। **स्वीकृत:** 14 फरवरी, 2026 को कैबिनेट अनुमोदन।
- स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 — 10,000 करोड़ रुपये का कोष, SEBI-पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (AIF) में निवेश जो बदले में स्टार्टअप में निवेश करते हैं
- डीप-टेक (AI, रोबोटिक्स, स्पेसटेक), प्रौद्योगिकी-संचालित विनिर्माण और प्रारंभिक-विकास चरण के स्टार्टअप पर केंद्रित
- देशव्यापी नवाचार के लिए प्रमुख महानगरों से परे निवेश को प्रोत्साहित करता है
- FoF 1.0 पर आधारित जिसने 145 AIF में 10,000 करोड़ रुपये प्रतिबद्ध किए — 1,370+ स्टार्टअप को वित्तपोषित
- कार्यान्वयन एजेंसी: उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT)
- 16 फरवरी 2026 को कैबिनेट स्वीकृति प्राप्त
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य दीर्घकालिक घरेलू वेंचर कैपिटल जुटाकर भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति देना है। यह नवाचार और शुरुआती विकास चरण के उद्यमों से जुड़ा है।
इस योजना का कोष कितना है?
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 के लिए 10,000 करोड़ रुपये का कोष बताया गया है। यह घरेलू वेंचर कैपिटल को बढ़ावा देने से जुड़ा है।
यह योजना किस तरह निवेश करती है?
योजना SEBI-पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों में निवेश करती है, जो आगे स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं। इसका ध्यान बड़े शहरों से परे निवेश को प्रोत्साहित करने पर भी है।
योजना किन क्षेत्रों पर ध्यान देती है?
योजना डीप-टेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, स्पेसटेक, तकनीक-संचालित विनिर्माण और प्रारंभिक विकास चरण के स्टार्टअप्स पर ध्यान देती है।
इस योजना को कब स्वीकृति मिली?
इस योजना को 14 फरवरी 2026 को कैबिनेट अनुमोदन मिला। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग नोडल विभाग है और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक प्रारंभिक कार्यान्वयन एजेंसी है।
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