भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कार निर्माण को बढ़ावा देने की योजना (SPMEPCI)
भारी उद्योग मंत्रालय ने 2 जून 2025 को SPMEPCI योजना के विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए ताकि वैश्विक EV निर्माताओं को भारत में आकर्षित किया जा सके। मुख्य बिंदु: • योजना अधिसूचित: 15 मार्च 2024; दिशानिर्देश: 2 जून 2025 • न्यूनतम निवेश: ₹4,150 करोड़ (3 वर्ष में) • CBU इलेक्ट्रिक 4-व्हीलर पर 15% रियायती सीमा शुल्क (5 वर्ष) • आयातित EV का न्यूनतम CIF मूल्य: USD 35,000 • पात्रता: वैश्विक ऑटो समूह राजस्व >= ₹10,000 करोड़ • आवेदन पोर्टल: 24 जून 2025 से खुला • मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को समर्थन
- SPMEPCI योजना 15 मार्च 2024 को अधिसूचित, 2 जून 2025 को विस्तृत दिशानिर्देश — वैश्विक EV निर्माताओं को भारत में आकर्षित करने हेतु।
- 3 वर्षों में न्यूनतम ₹4,150 करोड़ निवेश प्रतिबद्धता; CBU इलेक्ट्रिक 4-व्हीलर पर 5 वर्षों के लिए घटाकर 15% सीमा शुल्क।
- आयातित EV का न्यूनतम CIF मूल्य: USD 35,000; पात्रता हेतु वैश्विक ऑटो समूह राजस्व ₹10,000 करोड़ या अधिक।
- पात्र निर्माताओं के लिए वैश्विक स्थायी संपत्ति निवेश ₹3,000 करोड़ या अधिक आवश्यक।
- आवेदन पोर्टल 24 जून 2025 को spmepci.heavyindustries.gov.in पर खोला गया — घरेलू मूल्य संवर्धन हेतु अनिवार्य मील के पत्थर।
- मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत उद्देश्यों का समर्थन; भारी उद्योग मंत्रालय कार्यान्वयन मंत्रालय है।
इलेक्ट्रिक यात्री कार निर्माण योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को भारत में आकर्षित करना है, ताकि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को समर्थन मिल सके।
इस योजना के दिशानिर्देश कब जारी हुए?
भारी उद्योग मंत्रालय ने इस योजना के विस्तृत दिशानिर्देश 2 जून 2025 को जारी किए। योजना 15 मार्च 2024 को अधिसूचित बताई गई है।
योजना में न्यूनतम निवेश शर्त क्या है?
योजना में 3 वर्ष के भीतर ₹4,150 करोड़ के न्यूनतम निवेश की शर्त दी गई है। यह शर्त भारत में निर्माण आकर्षित करने से जुड़ी है।
सीमा शुल्क से जुड़ी प्रमुख रियायत क्या है?
योजना में इलेक्ट्रिक 4-व्हीलर पर 5 वर्ष के लिए 15% रियायती सीमा शुल्क का उल्लेख है। यह आयातित वाहनों से जुड़ी शर्तों के साथ है।
आवेदन पोर्टल कब खुला?
इस योजना का आवेदन पोर्टल 24 जून 2025 से खुला बताया गया है। पात्रता में वैश्विक ऑटो समूह राजस्व ₹10,000 करोड़ या उससे अधिक बताया गया है।
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