पुनर्गठित स्टैंड अप इंडिया योजना
- **उद्देश्य**: बैंक ऋणों के माध्यम से ग्रीनफील्ड उद्यमों को सुविधा प्रदान कर महिलाओं, SC और ST समुदायों में उद्यमिता को बढ़ावा देना - **मुख्य विशेषताएं**: ऋण सीमा दोगुनी होकर ₹2 करोड़ (₹1 करोड़ से); ऑनलाइन उद्यमिता कौशल निर्माण घटक जोड़ा गया - **लाभार्थी**: 5 लाख SC/ST पहली बार महिला उद्यमी; विनिर्माण, सेवा, व्यापार और कृषि-संबद्ध क्षेत्र - **पात्रता**: गैर-व्यक्तिगत उद्यमों में SC/ST या महिला उद्यमियों द्वारा कम से कम 51% हिस्सेदारी - **प्रदर्शन**: 2016 के शुभारंभ से ~2.75 लाख लाभार्थियों को ₹62,807 करोड़ से अधिक स्वीकृत - **पुनः शुभारंभ**: नीति आयोग की समीक्षा के बाद सितंबर 2025 में पुनर्गठित संस्करण पुनः शुरू
- पुनर्गठित स्टैंड अप इंडिया योजना — महिलाओं, SC और ST समुदायों के बीच ग्रीनफील्ड उद्यमों के लिए बैंक ऋण के माध्यम से उद्यमिता को बढ़ावा
- ऋण सीमा 1 करोड़ रुपये से दोगुनी कर 2 करोड़ रुपये की गई; पुनर्गठित संस्करण में ऑनलाइन उद्यमिता कौशल-निर्माण घटक जोड़ा गया
- लाभार्थी: विनिर्माण, सेवा, व्यापार और कृषि-संबद्ध क्षेत्रों में 5 लाख SC/ST प्रथम-बार महिला उद्यमी
- पात्रता: गैर-व्यक्तिगत उद्यमों में SC/ST या महिला उद्यमियों की कम से कम 51% शेयरधारिता
- 2016 में लॉन्च होने के बाद से प्रदर्शन: लगभग 2.75 लाख लाभार्थियों को 62,807 करोड़ रुपये से अधिक मंजूर
- सितंबर 2025 में पुनर्गठित संस्करण के पुनः शुभारंभ का आधिकारिक स्रोत नहीं मिला।
पुनर्गठित स्टैंड अप इंडिया योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य बैंक ऋणों के माध्यम से ग्रीनफील्ड उद्यमों को सुविधा देकर महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों में उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
इस योजना में ऋण सीमा में क्या बदलाव हुआ है?
पुनर्गठित योजना में ऋण सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹2 करोड़ कर दी गई है। साथ ही ऑनलाइन उद्यमिता कौशल निर्माण घटक भी जोड़ा गया है।
इस योजना के प्रमुख लाभार्थी कौन हैं?
संदर्भ के अनुसार योजना 5 लाख पहली बार महिला उद्यमियों को लक्षित करती है। इसमें विनिर्माण, सेवा, व्यापार और कृषि-संबद्ध क्षेत्र शामिल हैं।
गैर-व्यक्तिगत उद्यमों के लिए पात्रता क्या है?
गैर-व्यक्तिगत उद्यमों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या महिला उद्यमियों की कम से कम 51% हिस्सेदारी होनी चाहिए।
पुनर्गठित संस्करण कब शुरू किया गया?
नीति आयोग की समीक्षा के बाद इस योजना का पुनर्गठित संस्करण सितंबर 2025 में फिर शुरू किया गया। इसका संबंध वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग से है।
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