बायोफार्मा शक्ति - ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा उन्नति की रणनीति
**उद्देश्य:** जैविक और बायोसिमिलर के घरेलू उत्पादन के लिए पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर भारत को वैश्विक जैव-विनिर्माण केंद्र बनाना। **बजट:** 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये। **प्रमुख घटक:** - 3 नए राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPERs) + 7 मौजूदा NIPERs का उन्नयन - भारत भर में 1,000+ मान्यता प्राप्त नैदानिक परीक्षण स्थल - वैश्विक-मानक अनुमोदन समयसीमा के लिए CDSCO को मजबूत करना - उन्नत जैव-विनिर्माण सुविधाओं में निवेश को उत्प्रेरित करना - कैंसर, मधुमेह, ऑटोइम्यून विकारों के लिए अगली पीढ़ी की चिकित्सीय क्षमताएं विकसित करना **लाभार्थी:** बायोफार्मा उद्योग, किफायती जैविक दवाओं की आवश्यकता वाले रोगी, चिकित्सा शोधकर्ता। **घोषणा:** केंद्रीय बजट 2026-27 (1 फरवरी, 2026)।
- बायोफार्मा शक्ति — भारत को बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के लिए वैश्विक बायोमैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने हेतु 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का बजट
- 3 नए राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) की स्थापना और 7 मौजूदा NIPER का उन्नयन
- पूरे भारत में 1,000+ मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइटों के नेटवर्क की योजना
- वैश्विक मानक अनुमोदन समयसीमा के लिए समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा संवर्ग के साथ CDSCO को मजबूत बनाना
- कैंसर, मधुमेह और ऑटोइम्यून विकारों के लिए अगली पीढ़ी की चिकित्सीय क्षमताओं का विकास
- केंद्रीय बजट 2026-27 (1 फरवरी 2026) में घोषित; बायोफार्मा उद्योग, रोगियों, शोधकर्ताओं और फार्मास्युटिकल शिक्षा छात्रों को लाभ
बायोफार्मा शक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस पहल का उद्देश्य जैविक और बायोसिमिलर दवाओं के घरेलू उत्पादन के लिए पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर भारत को वैश्विक जैव-विनिर्माण केंद्र बनाना है।
बायोफार्मा शक्ति का बजट कितना है?
संदर्भ के अनुसार बायोफार्मा शक्ति के लिए 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का बजट बताया गया है।
इसमें फार्मास्युटिकल शिक्षा से जुड़े कौन से कदम हैं?
योजना में 3 नए राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थान बनाने तथा 7 मौजूदा संस्थानों के उन्नयन का उल्लेख है।
नैदानिक परीक्षण के लिए क्या व्यवस्था बताई गई है?
भारत भर में 1,000+ मान्यता प्राप्त नैदानिक परीक्षण स्थलों का नेटवर्क बनाने का प्रावधान बताया गया है, जिससे स्वास्थ्य नवाचार को समर्थन मिलेगा।
किन रोग क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है?
कैंसर, मधुमेह और ऑटोइम्यून विकारों के लिए अगली पीढ़ी की चिकित्सीय क्षमताएं विकसित करना इस पहल के प्रमुख घटकों में शामिल है।
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