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मुख्य बिंदु
लेखा परीक्षा किसी संस्था के वित्तीय अभिलेखों, विवरणों, संचालन और प्रक्रियाओं की व्यवस्थित तथा स्वतंत्र जाँच है। इससे तय किया जाता है कि वे सटीक, निष्पक्ष और लागू कानूनों एवं मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। यह शब्द लैटिन 'ऑडिरे' अर्थात सुनना से निकला है; पुराने समय में खातों को सत्यापन के लिए जोर से पढ़कर सुनाया जाता था।
लेखा परीक्षा के प्राथमिक उद्देश्य (एसए-200, आईसीएआई के अनुसार): (क) त्रुटियों का पता लगाना एवं उन्हें रोकना (अनजाने में हुई गलतियाँ); (ख) धोखाधड़ी का पता लगाना एवं उसे रोकना (जानबूझकर किया गया गलत प्रस्तुतिकरण); (ग) राय अभिव्यक्त करना कि वित्तीय विवरण लागू वित्तीय रिपोर्टिंग ढाँचे के अनुसार सत्य और निष्पक्ष चित्र प्रस्तुत करते हैं।
लेखा परीक्षा कार्यक्रम: यह लेखा परीक्षक द्वारा तैयार की गई विस्तृत लिखित योजना है। इसमें बताया जाता है कि क्या जाँचना है, कैसे जाँचना है, किसके द्वारा और कब तक। इसमें प्रक्रियाओं की सूची, नियंत्रणों के परीक्षण, मूलभूत परीक्षण और समय-सारणी शामिल रहती है। यह लेखा परीक्षा दल के लिए निर्देश पुस्तिका तथा किए गए कार्य का अभिलेख दोनों का काम करता है।
परीक्षक की प्रकृति के आधार पर लेखा परीक्षा के प्रकार: (क) सांविधिक लेखा परीक्षा — कानून द्वारा अनिवार्य; कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत कंपनियों के लिए स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट इसे करता है; (ख) आंतरिक लेखा परीक्षा — कर्मचारियों या आंतरिक दल द्वारा निरंतर जाँच; (ग) सरकारी लेखा परीक्षा — कैग या आंतरिक सरकारी लेखा परीक्षकों द्वारा; (घ) कर लेखा परीक्षा — आयकर अधिनियम की धारा 44एबी के अंतर्गत ₹1 करोड़ से अधिक कारोबार पर।
सामाजिक लेखा परीक्षा: इसमें समुदाय या कोई तृतीय पक्ष जाँचता है कि सरकारी योजना या कार्यक्रम ने अपने सामाजिक उद्देश्य पूरे किए या नहीं — सही लाभार्थियों तक पहुँचना, धन का उचित उपयोग और समुदाय की संतुष्टि। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत यह अनिवार्य है। ग्राम सभा अपने गाँव के सभी कार्यों की सामाजिक लेखा परीक्षा करती है।
निष्पादन लेखा परीक्षा (मूल्य के बदले प्रतिफल लेखा परीक्षा): इसमें देखा जाता है कि सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता यानी तीन ई के साथ हुआ या नहीं। यह वित्तीय अनुपालन से आगे जाकर परिणामों की जाँच करती है — क्या कार्यक्रम ने अपने अपेक्षित परिणाम प्राप्त किए? केंद्र और राज्य सरकारों के कार्यक्रमों पर भारत का कैग ऐसी लेखा परीक्षा करता है।
दक्षता लेखा परीक्षा: इसका ध्यान इस बात पर रहता है कि संसाधन या निवेश न्यूनतम अपव्यय के साथ निर्गम में बदल रहे हैं या नहीं — समान निर्गम के लिए कम निवेश, अथवा समान निवेश से अधिक निर्गम। यह निष्पादन लेखा परीक्षा का एक घटक है। सरकारी गतिविधियों में यह निवेश-निर्गम अनुपात मापती है।
भारत में सरकारी लेखा परीक्षा — कैग: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक** अनुच्छेद 148 के अंतर्गत संवैधानिक प्राधिकरण हैं। वे सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्था माने जाते हैं। कैग संघ सरकार, राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों और संचित निधि से अनुदान पाने वाले प्राधिकरणों के खातों की जाँच करता है। कैग की रिपोर्टें संसद या राज्य विधानमंडल के समक्ष रखी जाती हैं।
निष्पादन बजटिंग: यह बजटीय आवंटन को विशिष्ट भौतिक लक्ष्यों और परिणामों से जोड़ती है। प्रत्येक योजना में निवेश (धन), निर्गम (भौतिक उपलब्धियाँ) और परिणाम (लाभार्थियों पर प्रभाव) स्पष्ट किए जाते हैं। भारत में प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिश पर यह 1968-69 से शुरू हुई। केंद्र सरकार ने 2005-06 से परिणाम बजट अपनाया।
शून्य आधार बजटिंग: इसमें प्रत्येक विभाग हर बजट चक्र में शून्य से प्रत्येक व्यय मद को उचित ठहराता है। पिछले वर्ष के बजट का स्वतः विस्तार नहीं माना जाता। पीटर पायर ने अमेरिका की टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स कंपनी में 1969 में इसे शुरू किया। भारत में राजस्थान ने 1987 में और केंद्र सरकार ने आंशिक रूप से इसे अपनाया। यह “वृद्धिशील बजटिंग” की जड़ता को कम करती है।
लेखा परीक्षा रिपोर्ट और कैग के प्रमुख दस्तावेज: (क) संघ सरकार वित्त लेखा — राजस्व और पूँजीगत प्राप्तियों/व्यय का वार्षिक लेखा; (ख) विनियोग लेखा — संसदीय स्वीकृति के मुकाबले वास्तविक व्यय; (ग) नागरिक/रक्षा/रेलवे पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट — विभाग-विशिष्ट रिपोर्ट; (घ) सार्वजनिक उपक्रमों पर रिपोर्ट।
आंतरिक नियंत्रण और लेखा परीक्षा: आंतरिक लेखा परीक्षा आंतरिक नियंत्रणों की पर्याप्तता जाँचती है — कर्तव्यों का पृथक्करण, प्राधिकार प्रक्रियाएँ, संपत्तियों की भौतिक सुरक्षा और मिलान की नियमित व्यवस्था। आंतरिक लेखा परीक्षक संस्थान आंतरिक लेखा परीक्षा को स्वतंत्र, वस्तुपरक आश्वासन और परामर्श गतिविधि मानता है, जिसका उद्देश्य संगठन के संचालन में मूल्य जोड़ना और सुधार लाना है।
