डीजीसीए ने जेवर स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को एरोड्रम लाइसेंस प्रदान किया; वाईआईएपीएल को वाणिज्यिक परिचालन की मंज़ूरी
डीजीसीए ने 6 मार्च 2026 को जेवर स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए वाईआईएपीएल को एरोड्रम लाइसेंस प्रदान किया, जिससे ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे को पब्लिक यूज़ श्रेणी के तहत वाणिज्यिक परिचालन की मंज़ूरी मिल गई।
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RAS के लिए मुख्य बिंदु
- डीजीसीए ने 6 मार्च 2026 को जेवर स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) को एरोड्रम लाइसेंस प्रदान किया
- वाईआईएपीएल ज़्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी है और उत्तर प्रदेश सरकार तथा भारत सरकार के साथ पीपीपी मॉडल के तहत हवाई अड्डे का विकास कर रही है
- हवाई अड्डे को सभी मौसमों में संचालन हेतु पब्लिक यूज़ श्रेणी के तहत लाइसेंस मिला; रनवे अभिविन्यास 10/28, आयाम 3,900 मीटर गुणा 45 मीटर, आईएलएस और एजीएल से सुसज्जित, 24x7 परिचालन सक्षम
- पहले चरण में क्षमता: प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्री; पूर्ण विकास पर अंतिम क्षमता: प्रतिवर्ष 7 करोड़ यात्री
- वाणिज्यिक परिचालन के लिए बीसीएएस से एरोड्रम सुरक्षा कार्यक्रम की मंज़ूरी लंबित; इंडिगो, आकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस को लॉन्च कैरियर के रूप में पुष्टि
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने 6 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (एनआईए) के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) को एरोड्रम लाइसेंस प्रदान किया। वाईआईएपीएल ज़्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है और इसने उत्तर प्रदेश सरकार तथा भारत सरकार के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत इस हवाई अड्डे का विकास किया है। हवाई अड्डे को सभी मौसमों में संचालन के लिए पब्लिक यूज़ श्रेणी के तहत लाइसेंस मिला है और इसमें 10/28 अभिविन्यास तथा 3,900 मीटर गुणा 45 मीटर के आयाम वाला रनवे है, जो इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और एरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग (एजीएल) प्रणाली से सुसज्जित है तथा 24x7 परिचालन सक्षम बनाता है। पहले चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल के साथ एनआईए प्रतिवर्ष लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। चारों विकास चरण पूरे होने पर हवाई अड्डा प्रतिवर्ष 7 करोड़ यात्रियों तक को संभाल सकेगा, जिससे यह देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों में से एक बन जाएगा। नागर विमानन मंत्री के. रामामोहन नायडू ने कहा कि यह लाइसेंस राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में विमानन अवसंरचना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी को मज़बूत करेगा। वाणिज्यिक उड़ानें आरंभ होने से पहले हवाई अड्डे को ब्यूरो ऑफ़ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) से अपने एरोड्रम सुरक्षा कार्यक्रम (एएसपी) की मंज़ूरी भी प्राप्त करनी होगी। इंडिगो, आकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस की लॉन्च एयरलाइंस के रूप में पुष्टि हो चुकी है तथा एएसपी मंज़ूरी के 45 दिनों के भीतर निर्धारित परिचालन शुरू होने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1 नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालक कौन है?
यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल), जो ज़्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी है, इसका संचालक है। इसने उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ पीपीपी मॉडल के तहत हवाई अड्डे का विकास किया है।
2 हवाई अड्डे की क्षमता कितनी है?
पहले चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल के साथ एनआईए प्रतिवर्ष लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभाल सकता है। चारों विकास चरण पूरे होने पर क्षमता बढ़कर प्रतिवर्ष 7 करोड़ यात्री हो जाएगी।
3 वाणिज्यिक उड़ानें शुरू होने से पहले कौन-सी मंज़ूरियाँ अभी लंबित हैं?
हवाई अड्डे को वाणिज्यिक परिचालन शुरू करने से पहले ब्यूरो ऑफ़ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) से एरोड्रम सुरक्षा कार्यक्रम (एएसपी) की मंज़ूरी प्राप्त करनी होगी।
4 एरोड्रम लाइसेंस किस नियम के तहत प्रदान किया गया?
एरोड्रम लाइसेंस डीजीसीए द्वारा एयरक्राफ्ट नियमों के लाइसेंसिंग ढाँचे के तहत, सभी मौसमों में संचालन हेतु पब्लिक यूज़ श्रेणी के तहत प्रदान किया गया।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण
RAS मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
प्रश्न: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में विमानन बुनियादी ढांचे के लिए जेवर स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को डीजीसीए द्वारा एरोड्रम लाइसेंस देने के महत्व का आकलन करें।
उत्तर (50 शब्द):
डीजीसीए ने 6 मार्च 2026 को ज़्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी से विकसित वाईआईएपीएल के ग्रीनफील्ड नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को लाइसेंस दिया। पहले चरण में आईएलएस युक्त 3,900 मीटर रनवे चौबीसों घंटे परिचालन और 1.2 करोड़ वार्षिक यात्री क्षमता प्रदान करता है, जो चार चरणों में 7 करोड़ तक विस्तारयोग्य है। इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस प्रारंभिक वाहक हैं।
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