विश्व श्रवण दिवस 2026: WHO ने 20वीं वर्षगांठ 'समुदायों से कक्षाओं तक: सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल' थीम के साथ मनाई
3 मार्च 2026 को मनाए गए विश्व श्रवण दिवस 2026 ने WHO की थीम 'समुदायों से कक्षाओं तक: सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल' के साथ 20वीं वर्षगांठ मनाई, यह उजागर करते हुए कि विश्व में 3.4 करोड़ बच्चों को श्रवण हानि है और 60% मामले रोकथाम योग्य हैं।
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RAS के लिए मुख्य बिंदु
- विश्व श्रवण दिवस प्रत्येक वर्ष 3 मार्च को मनाया जाता है; 2026 की थीम थी 'समुदायों से कक्षाओं तक: सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल'।
- इसने WHO पहल की 20वीं वर्षगांठ चिह्नित की।
- विश्व में 3.4 करोड़ बच्चों को अक्षम करने वाली श्रवण हानि है; 60% मामले रोकथाम योग्य हैं।
- WHO का अनुमान है कि 2050 तक 2.5 अरब लोग श्रवण हानि के साथ जियेंगे।
- भारत का राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम (NPPCD) राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत श्रवण स्वास्थ्य को संबोधित करता है।
- इस दिन नवजात श्रवण जांच जैसे प्रारंभिक पहचान और हस्तक्षेप की वकालत की जाती है।
3 मार्च 2026 को विश्व श्रवण दिवस (WHD) मनाया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नेतृत्व में इस वार्षिक वैश्विक जागरूकता आयोजन की 20वीं वर्षगांठ है। 2026 की थीम है 'समुदायों से कक्षाओं तक: सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल', जो दो प्राथमिकताओं पर केंद्रित है: बचपन में होने वाली रोकथाम योग्य श्रवण हानि की रोकथाम और श्रवण हानि वाले बच्चों की शीघ्र पहचान व उचित देखभाल सुनिश्चित करना।
WHO के अनुसार विश्व में 3.4 करोड़ से अधिक बच्चे अक्षमकारी श्रवण हानि से पीड़ित हैं, और बचपन की 60% से अधिक श्रवण हानि को समय पर टीकाकरण, सुरक्षित प्रसव पद्धतियों और ओटोटॉक्सिक दवाओं से बचाव जैसे हस्तक्षेपों से रोका जा सकता है। भारत में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत बधिरता की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPPCD) कार्यरत है। नवजात शिशु श्रवण जांच और विद्यालय स्तरीय ऑडियोलॉजिकल सेवाओं के माध्यम से शीघ्र पहचान भारत के स्वास्थ्य ढांचे में एक महत्वपूर्ण कमी है, विशेष रूप से ग्रामीण राजस्थान में जहां विशेषज्ञ पहुंच सीमित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1 विश्व श्रवण दिवस कब मनाया जाता है और 2026 की थीम क्या थी?
विश्व श्रवण दिवस प्रत्येक वर्ष 3 मार्च को मनाया जाता है। 2026 की थीम 'समुदायों से कक्षाओं तक: सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल' थी, जो WHO पहल की 20वीं वर्षगाँठ को चिह्नित करती है और बच्चों के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप तथा श्रवण देखभाल तक पहुँच पर केंद्रित है।
2 विश्व में कितने बच्चे अक्षम करने वाली श्रवण हानि से पीड़ित हैं और कितने प्रतिशत मामले रोकथाम योग्य हैं?
विश्व श्रवण दिवस 2026 पर WHO के आंकड़ों के अनुसार विश्व में 3.4 करोड़ से अधिक बच्चे अक्षम करने वाली श्रवण हानि से पीड़ित हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से 60% मामले टीकाकरण, सुरक्षित श्रवण पद्धतियों, प्रारंभिक जाँच और समय पर चिकित्सा देखभाल जैसे उपायों से रोके जा सकते हैं।
3 2050 तक वैश्विक श्रवण हानि के बारे में WHO का क्या अनुमान है?
WHO का अनुमान है कि 2050 तक विश्व में लगभग 2.5 अरब लोग किसी न किसी हद तक श्रवण हानि के साथ जियेंगे, जो इसे एक बड़ी वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनाती है। यह अनुमान निवारक उपायों, प्रारंभिक पहचान और सस्ती श्रवण देखभाल प्रणालियों की तत्कालता को रेखांकित करता है।
4 भारत का राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम (NPPCD) क्या है?
राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम (NPPCD) राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत श्रवण स्वास्थ्य को संबोधित करने वाला भारत का सरकारी कार्यक्रम है। यह श्रवण दोष की प्रारंभिक पहचान, श्रवण यंत्रों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण पर केंद्रित है।
5 नवजात श्रवण जाँच क्यों महत्वपूर्ण है और यह विश्व श्रवण दिवस की वकालत से कैसे जुड़ती है?
नवजात श्रवण जाँच जन्म के समय श्रवण हानि की प्रारंभिक पहचान सक्षम करती है, जिससे समय पर हस्तक्षेप होता है जो वाणी और विकासात्मक देरी रोक सकता है। WHO और विश्व श्रवण दिवस के पैरोकार जोर देते हैं कि जीवन के पहले कुछ महीनों में प्रारंभिक पहचान बच्चों के सामान्य भाषा विकास के लिए महत्वपूर्ण है — जो 2026 की थीम का केंद्र है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण
RAS मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
प्रश्न: विश्व श्रवण दिवस 2026 के महत्व और ग्रामीण क्षेत्रों में बाल श्रवण हानि से निपटने में भारत की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
3 मार्च 2026 को विश्व श्रवण दिवस ने बच्चों के लिए श्रवण देखभाल विषय के साथ 20वीं वर्षगाँठ मनाई। विश्वभर में 3.4 करोड़ से अधिक बच्चे अक्षम श्रवण हानि से पीड़ित हैं और 60 प्रतिशत मामले रोके जा सकते हैं। भारत का एनपीपीसीडी श्रवण विकारों को संबोधित करता है किंतु ग्रामीण राजस्थान में नवजात जाँच और ऑडियोलॉजिकल सेवाएँ अपर्याप्त हैं।
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