भारतीय खगोलविदों ने JWST से अलकनंदा की खोज: दूसरी सबसे दूर ज्ञात सर्पिल आकाशगंगा
भारतीय खगोलविदों ने JWST डेटा से अलकनंदा खोजी: दूसरी सबसे दूर सर्पिल आकाशगंगा।
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RAS के लिए मुख्य बिंदु
- भारतीय खगोलविदों ने जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन (JWST) के आंकड़ों से अलकनंदा नामक प्राचीन सर्पिल आकाशगंगा की पहचान की।
- यह आकाशगंगा लगभग z = 4.05 रेडशिफ्ट पर देखी गई, जब ब्रह्मांड महाविस्फोट के करीब 1.5 अरब वर्ष बाद की अवस्था में था।
- यह खोज बताती है कि शुरुआती ब्रह्मांड में बड़े सर्पिल चक्र और आकाशगंगाएं अपेक्षा से पहले बन चुकी थीं।
भारतीय खगोलविदों ने जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन (JWST) के आंकड़ों का उपयोग करके अलकनंदा की पहचान की, जो शुरुआती ब्रह्मांड की एक अत्यंत दूरस्थ सर्पिल आकाशगंगा है। इसे लगभग z = 4.05 रेडशिफ्ट पर देखा गया, यानी महाविस्फोट के लगभग 1.5 अरब वर्ष बाद। यह खोज प्रारंभिक ब्रह्मांड में आकाशगंगा निर्माण की समझ को आगे बढ़ाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1 अलकनंदा क्या है?
अलकनंदा जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन के सर्वेक्षण आंकड़ों में पहचानी गई एक बड़ी संभावित दो-भुजा वाली सर्पिल आकाशगंगा है, जिसका फोटोमितीय रेडशिफ्ट लगभग 4.05 है।
2 इस खोज की रिपोर्ट किसने दी?
एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स के शोधपत्र में यह खोज राष्ट्रीय रेडियो खगोलभौतिकी केंद्र, टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान की राशि जैन और योगेश वडाडेकर ने रिपोर्ट की।
3 यह खोज महत्वपूर्ण क्यों है?
लगभग z = 4 पर सर्पिल आकाशगंगा की पहचान बताती है कि महाविस्फोट के करीब 1.5 अरब वर्ष बाद ही बड़े चक्र और सर्पिल आकाशगंगाएं बन चुकी थीं।
4 इस निष्कर्ष को किन प्रेक्षणों ने समर्थन दिया?
अध्ययन में जेम्स वेब और हबल अंतरिक्ष दूरबीन के फिल्टर मापन का उपयोग किया गया और आकृति-विज्ञान विश्लेषण में दो सममित सर्पिल भुजाएं दिखाई गईं।
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