भारतीय खगोलविदों ने जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन के आंकड़ों से अलकनंदा नामक सर्पिल आकाशगंगा की पहचान की है। इसे अब तक ज्ञात दूसरी सबसे दूर स्थित सर्पिल आकाशगंगा बताया गया है। अलकनंदा को लगभग z = 4.05 रेडशिफ्ट पर देखा गया, जिसका अर्थ है कि यह महाविस्फोट के करीब 1.5 अरब वर्ष बाद के ब्रह्मांड से जुड़ी तस्वीर देती है। परीक्षा की दृष्टि से यह खोज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खगोल विज्ञान और स्टैटिक सामान्य ज्ञान के उन हिस्सों से जुड़ती है जहां रेडशिफ्ट, दूरबीनों की भूमिका, आकाशगंगा निर्माण और शुरुआती ब्रह्मांड जैसे विषय पूछे जा सकते हैं।

इस खोज का महत्व इसलिए है कि सर्पिल आकाशगंगाओं में व्यवस्थित चक्र और भुजाएं होती हैं। शुरुआती ब्रह्मांड में ऐसी संरचना की पहचान यह संकेत देती है कि बड़े चक्र और सर्पिल आकाशगंगाएं अपेक्षा से पहले विकसित हो चुकी थीं। इसलिए यह तथ्य केवल एक नई आकाशगंगा के नाम तक सीमित नहीं है; यह ब्रह्मांडीय विकास के कालक्रम को समझने में भी मदद करता है।

खगोल विज्ञान और खगोलभौतिकी के अंतरराष्ट्रीय जर्नल में रिपोर्ट किए गए अध्ययन से जुड़े नाम राशि जैन और योगेश वडाडेकर हैं, जो राष्ट्रीय रेडियो खगोलभौतिकी केंद्र, टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान से जुड़े हैं। अध्ययन में जेम्स वेब के व्यापक और मीडियम-बैंड सर्वेक्षणों सहित जेम्स वेब और हबल अंतरिक्ष दूरबीन के फिल्टर मापन का उपयोग हुआ तथा आकृति-विज्ञान विश्लेषण में दो सममित सर्पिल भुजाओं का संकेत मिला। प्रारंभिक परीक्षा में अलकनंदा, रेडशिफ्ट और जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन से सीधे तथ्य पूछे जा सकते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में विज्ञान आधारित प्रेक्षणों से ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास की समझ कैसे बदलती है, इस पर संक्षिप्त विश्लेषण उपयोगी रहेगा।