राजस्थान सरकार द्वारा बांसवाड़ा जिले में विकसित की जा रही अपर हाई लेवल कैनाल (UHLC) परियोजना को केवल सिंचाई योजना नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग का मॉडल और "मेगा वाटर ग्रिड" कहा जा रहा है। करीब 2,500 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना में लगभग 102 किलोमीटर मुख्य नहर, 22.5 किलोमीटर सुरंगें एवं कट-एंड-कवर संरचनाएं तथा 5,000 किलोमीटर भूमिगत एचडीपीई पाइपलाइन नेटवर्क शामिल है। वागड़ का इलाका पहाड़ियों और घाटियों से भरा होने के कारण पारंपरिक नहर बनाना कठिन था, इसलिए पहाड़ों के भीतर सुरंगें बनाई जा रही हैं, जबकि घाटियों और नदी-नालों के ऊपर से पानी ले जाने के लिए एक्वाडक्ट तैयार किए जा रहे हैं। परियोजना में साइफन, सुपर पैसेज, रेगुलेटर, रोड ब्रिज सहित करीब 230 बड़ी इंजीनियरिंग संरचनाएं बन रही हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत स्मार्ट सिंचाई व्यवस्था है, जिसमें SCADA तकनीक के ज़रिए पूरे सिस्टम की निगरानी कर ज़रूरत के अनुसार पानी छोड़ा जाएगा। योजना के तहत करीब 200 डिग्गियां बनाई जा रही हैं, जिनके माध्यम से पानी पहले भंडारण तक और फिर खेतों तक पहुंचेगा। हर 1.25 से 1.50 हेक्टेयर पर हाइड्रेंट प्वाइंट बनाए जाएंगे, ताकि किसान सीधे सिंचाई कर सकें। पूरा होने पर बांसवाड़ा जिले के 338 गांवों की करीब 42 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सालभर सिंचाई जल मिलेगा और लगभग 3.5 लाख लोग लाभान्वित होंगे। फिलहाल करीब 42 किलोमीटर नहर नेटवर्क पर काम चल रहा है।
वागड़ मेगा वाटर ग्रिड: राजस्थान की 2,500 करोड़ रुपये की अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना इंजीनियरिंग का कमाल
बांसवाड़ा में राजस्थान की 2,500 करोड़ रुपये की अपर हाई लेवल कैनाल (UHLC) परियोजना एक "मेगा वाटर ग्रिड" है, जिसमें 102 किमी नहर, 22.5 किमी सुरंगें और 5,000 किमी एचडीपीई पाइपलाइन शामिल है। यह 338 गांवों की करीब 42 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करेगी और लगभग 3.5 लाख लोगों को लाभ देगी।
मुख्य तथ्य
- बांसवाड़ा जिले की UHLC परियोजना राजस्थान सरकार द्वारा करीब 2,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित की जा रही है।
- नेटवर्क: लगभग 102 किमी मुख्य नहर, 22.5 किमी सुरंगें एवं कट-एंड-कवर संरचनाएं और 5,000 किमी भूमिगत एचडीपीई पाइपलाइन।
- पूरा होने पर बांसवाड़ा के 338 गांवों की करीब 42 हजार हेक्टेयर भूमि को सालभर सिंचाई मिलेगी और लगभग 3.5 लाख लोग लाभान्वित होंगे।
- SCADA तकनीक से सिस्टम की निगरानी; करीब 200 डिग्गियां और लगभग 230 बड़ी इंजीनियरिंग संरचनाएं बनाई जा रही हैं।
- हर 1.25 से 1.50 हेक्टेयर पर हाइड्रेंट प्वाइंट; फिलहाल करीब 42 किमी नहर नेटवर्क पर काम चल रहा है।
- पहाड़ों के भीतर सुरंगें और घाटियों पर एक्वाडक्ट इसे वागड़ क्षेत्र की सबसे अनोखी सिंचाई परियोजनाओं में से एक बनाते हैं।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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बांसवाड़ा की अपर हाई लेवल कैनाल (UHLC) परियोजना के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. इसे राजस्थान सरकार द्वारा करीब 2,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा है।\n2. इसके नेटवर्क में लगभग 102 किमी मुख्य नहर और 22.5 किमी सुरंगें शामिल हैं।\n3. पूरा होने पर यह बांसवाड़ा जिले के 338 गांवों की करीब 42 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करेगी।\nऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
तीनों कथन सही हैं। UHLC परियोजना राजस्थान सरकार द्वारा करीब 2,500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही है, इसके नेटवर्क में लगभग 102 किमी नहर और 22.5 किमी सुरंगें शामिल हैं, तथा पूरा होने पर यह बांसवाड़ा जिले के 338 गांवों की करीब 42 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करेगी।
स्रोत: अमर उजाला
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अपर हाई लेवल कैनाल (UHLC) परियोजना क्या है?
यह राजस्थान सरकार द्वारा बांसवाड़ा जिले में विकसित की जा रही करीब 2,500 करोड़ रुपये की मेगा वाटर ग्रिड है, जिसमें 102 किमी नहर, 22.5 किमी सुरंगें और 5,000 किमी एचडीपीई पाइपलाइन नेटवर्क शामिल है।
परियोजना से कितने गांव और कितना क्षेत्र लाभान्वित होगा?
पूरा होने पर यह बांसवाड़ा के 338 गांवों की करीब 42 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सालभर सिंचाई जल देगी और लगभग 3.5 लाख लोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।
परियोजना की निगरानी के लिए कौन सी तकनीक उपयोग होगी?
पूरे सिस्टम की निगरानी और ज़रूरत के अनुसार पानी छोड़ने के लिए SCADA तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिसके साथ करीब 200 डिग्गियां और लगभग 230 बड़ी इंजीनियरिंग संरचनाएं बनाई जा रही हैं।
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