एनआईटी रायपुर और जीएमडीसी ने क्रिटिकल मिनरल्स और खनन अनुसंधान के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
एनआईटी रायपुर और जीएमआरआईसीएस (जीएमडीसी के अधीन निकाय) ने भूविज्ञान, खनन, खनिज अन्वेषण और क्रिटिकल मिनरल्स अनुसंधान में सहयोग हेतु पाँच वर्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिसमें गुजरात के अंबाजी ताँबा-सीसा-जस्ता निक्षेपों और छत्तीसगढ़ के खनिज-समृद्ध क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
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RAS के लिए मुख्य बिंदु
- एनआईटी रायपुर और जीएमआरआईसीएस (जीएमडीसी के अधीन निकाय) ने भूविज्ञान, खनन, खनिज अन्वेषण और क्रिटिकल मिनरल्स अनुसंधान में सहयोग हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
- हस्ताक्षर प्रो. एन. वी. रमना राव (निदेशक, एनआईटी रायपुर) और डॉ. डी. के. सिन्हा (सीईओ, जीएमआरआईसीएस/जीएमडीसी, अहमदाबाद) ने किए।
- यह एमओयू आरंभिक रूप से पाँच वर्ष के लिए वैध है और परस्पर सहमति से बढ़ाया जा सकता है।
- क्रिटिकल मिनरल्स अनुसंधान भारत सरकार की खनिज संसाधन रणनीति के अंतर्गत राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
- अनुसंधान क्षेत्रों में गुजरात के अंबाजी ताँबा-सीसा-जस्ता निक्षेप और छत्तीसगढ़ के खनिज-समृद्ध क्षेत्र शामिल हैं।
- एनआईटी रायपुर के डॉ. नीरज विश्वकर्मा और डॉ. डी. सी. झारिया नोडल समन्वयक हैं; यह सहयोग एनईपी 2020 के अनुरूप है।
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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जीएमडीसी) के अधीन कार्यरत अनुसंधान एवं परामर्श निकाय गुजरात मिनरल रिसर्च एंड इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी सोसायटी (जीएमआरआईसीएस) ने बुधवार को भूविज्ञान, खनन, खनिज अन्वेषण और क्रिटिकल मिनरल्स अनुसंधान में सहयोग सुदृढ़ करने हेतु एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू पर एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रो. एन. वी. रमना राव और जीएमआरआईसीएस/जीएमडीसी, अहमदाबाद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. डी. के. सिन्हा ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता आरंभिक रूप से पाँच वर्ष की अवधि के लिए वैध रहेगा और दोनों संस्थानों की परस्पर सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है। इस साझेदारी के अंतर्गत दोनों संस्थान पृथ्वी विज्ञान, भूवैज्ञानिक एवं भूभौतिकीय सर्वेक्षण, खनिज अन्वेषण, खनन अभियांत्रिकी, खनिज लाभकारीकरण, विश्लेषणात्मक रसायन और प्रबंधन अध्ययन में संयुक्त रूप से अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएँगे। इससे संकाय सदस्यों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को औद्योगिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और क्षेत्र-आधारित अध्ययन के अवसर प्राप्त होंगे। एक प्रमुख केंद्र-बिंदु क्रिटिकल मिनरल्स पर अनुसंधान है, जो भारत सरकार की खनिज संसाधन रणनीति के अंतर्गत राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है। संस्थान गुजरात के अंबाजी ताँबा-सीसा-जस्ता निक्षेपों तथा छत्तीसगढ़ और देश के अन्य खनिज-समृद्ध क्षेत्रों सहित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निक्षेपों में अनुसंधान एवं विकास के अवसर तलाशेंगे। एनआईटी रायपुर के डॉ. नीरज विश्वकर्मा और डॉ. डी. सी. झारिया को नोडल समन्वयक नियुक्त किया गया है।
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समसामयिकी पैक देखेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1 किन दो संस्थानों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए?
एनआईटी रायपुर और गुजरात मिनरल रिसर्च एंड इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी सोसायटी (जीएमआरआईसीएस), जो गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जीएमडीसी) के अधीन एक निकाय है।
2 यह एमओयू कितने समय के लिए वैध है?
यह आरंभिक रूप से पाँच वर्ष की अवधि के लिए वैध है और दोनों संस्थानों की परस्पर सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है।
3 इस सहयोग का प्रमुख केंद्र-बिंदु क्या है?
क्रिटिकल मिनरल्स पर अनुसंधान, जो भारत सरकार की खनिज संसाधन रणनीति के अंतर्गत राष्ट्रीय प्राथमिकता है, जिसमें गुजरात के अंबाजी ताँबा-सीसा-जस्ता निक्षेप और छत्तीसगढ़ के खनिज-समृद्ध क्षेत्र शामिल हैं।
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