भारत सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को आर्थिक सुधारों की अपनी 2025 वर्ष-अंत समीक्षा जारी की। इसमें तीन व्यापक उद्देश्यों पर बल दिया गया — नागरिकों के लिए जीवन को आसान बनाना, उद्यमों के लिए कारोबार को आसान बनाना और क्षेत्रों तथा प्रदेशों में समावेशी विकास सुनिश्चित करना। समीक्षा बताती है कि अब जोर नियामक ढांचे बढ़ाने से हटकर मापनीय परिणाम देने पर है, जिसमें सरलीकरण और अनुपालन बोझ में कमी बार-बार उभरने वाले विषय हैं। प्रत्यक्ष कराधान एक प्रमुख सुधार क्षेत्र रहा — केंद्रीय बजट 2025-26 से लाई गई नई व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय आयकर से मुक्त है, और मानक कटौती के बाद वेतनभोगी करदाताओं के लिए प्रभावी छूट बढ़कर 12.75 लाख रुपये हो जाती है। इस बदलाव का उद्देश्य मध्यम वर्ग के परिवारों की खर्च योग्य आय बढ़ाना है। श्रम सुधारों के मोर्चे पर सरकार ने चार श्रम संहिताओं — मज़दूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा कार्य-स्थिति संहिता 2020 — को 21 नवंबर 2025 से प्रभावी रूप से लागू किया, जिससे 29 मौजूदा श्रम कानून एक आधुनिक ढांचे में समेकित हुए। विकसित भारत रोज़गार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 के ज़रिए ग्रामीण रोज़गार मॉडल बदला गया। यह मनरेगा की जगह एक वैधानिक ढांचा लागू करता है, जो आजीविका सुरक्षा बढ़ाता है और रोज़गार को सामुदायिक विकास से जोड़ता है। अप्रत्यक्ष कराधान को नेक्स्ट जेन GST 2.0 के ज़रिए तर्कसंगत बनाया गया। इसने दर संरचना को मुख्यतः 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो प्रमुख स्लैबों में पुनर्गठित किया, जिससे व्यवसायों के लिए अनुपालन आसान हुआ और राजस्व स्थिरता भी बनी रही। कुल मिलाकर, ये सुधार विकसित भारत 2047 दृष्टि के अनुरूप परिणाम-आधारित शासन की ओर बदलाव का संकेत देते हैं।