राजस्थान की सिंचाई एवं बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
मुख्य तथ्य
- राजस्थान की सिंचाई जल-स्थानांतरण पर आधारित है: इंदिरा गांधी नहर, चंबल बैराज, माही-जाखम जलाशय, नर्मदा नहर और भूजल साथ चलते हैं।
- इंदिरा गांधी नहर राजस्थान नहर के रूप में शुरू हुई, 31 मार्च 1958 को उद्घाटित हुई और चरण-1 में हरिके बैराज से 204 किमी फीडर है।
- दक्षिणी राजस्थान में माही बजाज सागर और जाखम सिंचाई, जनजातीय क्षेत्रों की जल-आपूर्ति और जलविद्युत से जुड़े प्रमुख जलाशय हैं।
- बीसलपुर, जवाई और राजीव गांधी लिफ्ट नहर दिखाते हैं कि सिंचाई ढांचा पेयजल ढांचे में भी बदलता है।
- कुएँ और नलकूप शुद्ध सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा स्रोत हैं, इसलिए नहर विस्तार और भूजल शासन को साथ समझना पड़ता है।
मुख्य बिंदु
- 1
राजस्थान की सिंचाई जल-स्थानांतरण पर आधारित है: इंदिरा गांधी नहर, चंबल बैराज, माही-जाखम जलाशय, नर्मदा नहर और भूजल साथ चलते हैं।
- 2
इंदिरा गांधी नहर राजस्थान नहर के रूप में शुरू हुई, 31 मार्च 1958 को उद्घाटित हुई और चरण-1 में हरिके बैराज से 204 किमी फीडर है।
- 3
दक्षिणी राजस्थान में माही बजाज सागर और जाखम सिंचाई, जनजातीय क्षेत्रों की जल-आपूर्ति और जलविद्युत से जुड़े प्रमुख जलाशय हैं।
- 4
बीसलपुर, जवाई और राजीव गांधी लिफ्ट नहर दिखाते हैं कि सिंचाई ढांचा पेयजल ढांचे में भी बदलता है।
- 5
कुएँ और नलकूप शुद्ध सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा स्रोत हैं, इसलिए नहर विस्तार और भूजल शासन को साथ समझना पड़ता है।
- 6
पीकेसी-ईआरसीपी और यमुना समझौता दिखाते हैं कि राजस्थान अब अलग-अलग बांधों के बजाय एक नदी-घाटी से दूसरी और एक राज्य से दूसरे राज्य तक पानी पहुँचाने वाली व्यवस्थाओं की ओर बढ़ रहा है।
PYQ दोहराव
यह टॉपिक 2024, 2023, 2021, 2018, 2016... में पूछा गया है। पहले नोट दोहराएँ, फिर जुड़े प्रश्न खोलें।
आगे पढ़ें
राजस्थान की सिंचाई व्यवस्था किन जल-स्रोतों पर टिकी है?
राजस्थान की सिंचाई व्यवस्था भूजल, बाहर से लाए गए नदी-जल, बड़े जलाशयों और स्थानीय संचयन के मेल पर टिकी है, क्योंकि राज्य का सिंचाई मानचित्र जल-अभाव से बनता है, किसी एक बड़े स्थायी नदी-स्रोत से नहीं। राजस्थान कृषि सांख्यिकी 2020-21 के अनुसार राज्य का कुल शुद्ध सिंचित क्षेत्र 87.78 लाख हेक्टेयर था।
क्षेत्रीय सिंचाई व्यवस्था का आधार
| क्षेत्र | जल-स्रोत/परियोजना | भूमिका |
|---|---|---|
| पश्चिमी मरुस्थल | रावी-व्यास प्रणाली का पानी इंदिरा गांधी नहर परियोजना से | जल को मरुस्थलीय क्षेत्र तक पहुँचाना |
| हाड़ौती | चंबल का नियंत्रित पानी कोटा बैराज प्रणाली से | नियंत्रित नहर सिंचाई |
| दक्षिणी भाग | माही और जाखम भंडारण | भंडारण-आधारित सिंचाई |
| पूर्वी पट्टी | संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी कड़ी | दूसरी नदी-घाटियों से पानी लाने की नई दिशा |
परियोजनाओं के स्रोत और मुख्य स्थल जिले की सीमा से बाहर क्यों हो सकते हैं
- इंदिरा गांधी नहर हरिके बैराज से शुरू होती है।
- नर्मदा नहर सांचोर के सिलू गाँव के पास प्रवेश करती है।
- शेखावाटी के लिए यमुना जल पर हथिनीकुंड/ताजेवाला संदर्भ में चर्चा होती है।
स्रोत-वार शुद्ध सिंचित क्षेत्र, 2020-21
| स्रोत | शुद्ध सिंचित क्षेत्र |
|---|---|
| कुएँ और नलकूप | 6409749 हेक्टेयर |
| नहरें | 2145125 हेक्टेयर |
| तालाब | 47051 हेक्टेयर |
| अन्य स्रोत | 176196 हेक्टेयर |
- भूजल अब भी खेती का दैनिक आधार है।
- नहरें और जलाशय चुने हुए क्षेत्रों में खेती से जुड़े जोखिमों का स्वरूप बदलते हैं।
पेयजल भूगोल का जुड़ाव
| संरचना | पेयजल भूमिका |
|---|---|
| बीसलपुर | अजमेर और जयपुर क्षेत्र के हिस्सों को सहारा देता है |
| जवाई | पाली-जोधपुर आपूर्ति में महत्त्वपूर्ण है |
| राजीव गांधी लिफ्ट नहर | इंदिरा गांधी नहर से जुड़े जल को जोधपुर की ओर ले जाती है |
इस ढांचे का असर कमांड क्षेत्र, शहरों की जल-आपूर्ति, भूजल पर दबाव और जिलों के बीच पानी के समान बँटवारे—चारों पर पड़ता है।
सतही जल पहुँचने के चरण
1. हेडवर्क या जलाशय
2. मुख्य नहर
3. शाखा नहर
4. वितरिका
5. जल-मार्ग
6. खेत-स्तर पर प्रयोग
- जहाँ भूमि नहर-स्तर से ऊपर होती है, वहाँ पंपिंग स्टेशन और दबाव प्रणाली भूगोल का हिस्सा बन जाते हैं।
- समतल और कमजोर निकास वाले क्षेत्रों में नहर सिंचाई जलभराव और लवणता भी ला सकती है।
- इसलिए नहर-लाइनिंग, खेत-निकास और भूजल उपयोग को साथ प्रबंधित करना पड़ता है।
किसी परियोजना को समझने के पाँच तथ्य
- स्रोत नदी
- हेडवर्क
- कमांड जिले
- कमीशनिंग या समझौते का साल
- उसका पैमाना बताने वाली संख्या
पूरा नोट खोलें
यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।
9 और खंड पूरे नोट में हैं
स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
1MCQ204 किमी फीडर हरिके बैराज से शुरू होकर रावी-व्यास जल को थार कमांड की ओर ले जाता है। इससे कौन-सी परियोजना पहचानी जाती है?
व्याख्या
इंदिरा गांधी नहर परियोजना हरिके फीडर और रावी-व्यास आवंटन वाली मूल परियोजना है। इसके चरण-1 में 204 किमी फीडर और उत्तर-पश्चिमी राजस्थान का मरुस्थलीय कमांड आता है। नर्मदा नहर गुजरात से सांचोर के पास प्रवेश करती है। राजीव गांधी लिफ्ट नहर इंदिरा गांधी नहर से जुड़ी उठाई गई पेयजल वाहक है, मूल नहर नहीं। पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना चंबल-बनास जल-स्थानांतरण से जुड़ी है।
~50 शब्द · 1 अंक
