UPSC 2021 Prelims-GS-I — विगत वर्ष प्रश्न उत्तर सहित
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या सहित 100 प्रश्न।
- प्रश्न 1
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उत्तर: ग
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कथन 1 सही है: RBI अधिनियम, 1934 की धारा 8(1)(क) के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि गवर्नर की शक्तियाँ संविधान से नहीं, बल्कि RBI अधिनियम, 1934 से प्राप्त होती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि भारत के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो केंद्र सरकार को रिज़र्व बैंक को निर्देश देने का अधिकार देता हो; यह शक्ति RBI अधिनियम की धारा 7 से आती है, जिसके तहत केंद्र गवर्नर से परामर्श के बाद लोकहित में निर्देश जारी कर सकती है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।
- प्रश्न 2
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उत्तर: ख
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कथन 1 गलत है क्योंकि कर्मचारी भविष्य निधि का लाभ केवल बीस या अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों तथा अधिसूचित श्रेणियों पर लागू होता है; सभी आकस्मिक श्रमिक इसके पात्र नहीं हैं। कथन 2 सही है क्योंकि कारखाना अधिनियम और मजदूरी संहिता जैसे श्रम कानूनों के तहत आकस्मिक श्रमिकों को भी निर्धारित कार्य घंटों तथा सामान्य मजदूरी की दोगुनी दर पर अधिसमय वेतन का अधिकार है। कथन 3 भी सही है क्योंकि मजदूरी संदाय अधिनियम और मजदूरी संहिता उपयुक्त सरकार को यह अधिसूचित करने का अधिकार देती है कि निर्दिष्ट प्रतिष्ठानों में मजदूरी केवल चेक या बैंक खाते के माध्यम से दी जाएगी।
- प्रश्न 3
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उत्तर: ख
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आर्थिक मंदी के दौरान कुल माँग गिरती है और बेरोज़गारी बढ़ती है। प्रति-चक्रीय राजकोषीय नीति यह सुझाती है कि सार्वजनिक परियोजनाओं पर सरकारी व्यय बढ़ाया जाए ताकि माँग, रोज़गार और आय में वृद्धि हो। कर कटौती लाभदायक है किंतु इसके साथ ब्याज दरें घटानी चाहिए, बढ़ानी नहीं, अतः विकल्प (क) गलत है। कर बढ़ाना (ग) या सार्वजनिक व्यय घटाना (घ) संकुचन को और गहरा कर देगा। यह कीनेसियन प्रिस्क्रिप्शन है, जिसका उपयोग सरकारें मंदी में आर्थिक गतिविधि पुनर्जीवित करने के लिए करती हैं। अतः उत्तर (ख) सही है।
- प्रश्न 4
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उत्तर: क
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कथन 1 सही है क्योंकि स्थानापन्न वस्तु की कीमत बढ़ने से मूल वस्तु की माँग बढ़ जाती है। कथन 4 भी सही है क्योंकि वस्तु की अपनी कीमत गिरने से माँग वक्र पर मात्रा बढ़ती है। कथन 2 गलत है क्योंकि पूरक वस्तु की कीमत बढ़ने से मूल वस्तु की माँग घटती है। कथन 3 भी गलत है क्योंकि निकृष्ट वस्तु के संदर्भ में उपभोक्ता की आय बढ़ने पर माँग घटती है। इसलिए केवल कथन 1 और 4 ऐसी स्थितियाँ बताते हैं जहाँ बाज़ार माँग बढ़ सकती है, और सही उत्तर विकल्प (क) है।
- प्रश्न 5 · Indian Economy
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उत्तर: ख
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सहकारी बैंकों का दोहरा विनियमन है: बैंकिंग कार्य RBI द्वारा (निरीक्षण सहित), प्रबंधन/पंजीकरण सहकारी समिति रजिस्ट्रार (राज्य) द्वारा। 2020 बैंकिंग विनियमन संशोधन अधिनियम ने सहकारी समितियों पर RBI की शक्तियां मजबूत कीं।
- प्रश्न 6
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उत्तर: घ
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भारतीय सरकारी बॉण्ड पर मिलने वाला प्रतिफल तीनों कारकों से प्रभावित होता है। संयुक्त राज्य के संघीय रिज़र्व की नीतिगत कार्रवाइयाँ वैश्विक पूँजी प्रवाह तथा निवेशक जोखिम-धारणा को प्रभावित करती हैं, जिससे उभरती बाज़ार-अर्थव्यवस्थाओं की प्रतिफल दरें बदलती हैं। RBI की रेपो दर, खुले बाज़ार परिचालन एवं तरलता रुख घरेलू प्रतिफल को सीधे प्रभावित करते हैं। मुद्रास्फीति की प्रत्याशा तथा अल्पावधि ब्याज दरें निवेशकों द्वारा अपेक्षित वास्तविक प्रतिफल तय करती हैं और इस प्रकार बॉण्ड यील्ड का स्तर निर्धारित करती हैं। तीनों कथन सही होने से उत्तर विकल्प (घ) है।
- प्रश्न 7
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उत्तर: क
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भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अंतर्गत विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉण्ड, वैश्विक निक्षेपागार रसीदें और निर्धारित क्षेत्रीय सीमाओं तथा शर्तों के अंतर्गत पात्र विदेशी संस्थागत निवेश सम्मिलित हैं, क्योंकि ये सभी इक्विटी अथवा इक्विटी में परिवर्तनीय लिखतों में निवेश को दर्शाते हैं। अनिवासी बाह्य जमा प्रत्यावर्तनीय बैंक जमा हैं, जिन्हें बैंकिंग पूँजी के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है, FDI में नहीं। अतः मद 1, 2 और 3 सम्मिलित हैं तथा मद 4 बाहर है। उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग और RBI की परिभाषाएँ परिवर्तनीय बॉण्डों एवं निक्षेपागार रसीदों को FDI में गिनती हैं, जिससे विकल्प (क) सही है।
- प्रश्न 8
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उत्तर: क
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अवमूल्यन से घरेलू मुद्रा का विदेशी विनिमय मूल्य कम हो जाता है, जिससे निर्यात विदेशों में सस्ता और आयात महँगा हो जाता है। कथन 1 अनिवार्यतः सही है क्योंकि विदेशी बाज़ारों में घरेलू निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है। कथन 2 गलत है क्योंकि अवमूल्यन घरेलू मुद्रा का विदेशी मूल्य घटाता है, बढ़ाता नहीं। कथन 3 आवश्यक रूप से सही नहीं है क्योंकि व्यापार-संतुलन में सुधार मार्शल-लर्नर शर्त तथा जे-वक्र प्रभाव पर निर्भर करता है, अतः यह स्वतः घटित नहीं होता। इसलिए केवल कथन 1 सही है और उत्तर विकल्प (क) है।
- प्रश्न 9
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उत्तर: घ
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काले धन के सृजन से सरकार की मुख्य चिंता कर अपवंचन के कारण राजकोष को होने वाला राजस्व का नुकसान है, जिससे सार्वजनिक व्यय के लिए संसाधन घटते हैं तथा राजकोषीय स्थिति बिगड़ती है। यद्यपि अचल संपत्ति, सोना तथा राजनीतिक चंदे में धन का प्रवाह भी चिंताजनक है, फिर भी काले धन पर श्वेत-पत्र (2012) सहित आधिकारिक दस्तावेज़ कर अपवंचन से उत्पन्न राजस्व-हानि को सर्वोपरि चिंता के रूप में रेखांकित करते हैं, क्योंकि इससे औपचारिक अर्थव्यवस्था कमज़ोर होती है तथा अनुपालन करने वाले करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। अतः उत्तर विकल्प (घ) सही है।
- प्रश्न 10
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उत्तर: घ
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बजट घाटे की वित्तपोषण के लिए नई मुद्रा का सृजन, जिसे घाटा-मुद्रीकरण या नोट छापना कहा जाता है, उत्पादन में संगत वृद्धि के बिना मुद्रा-आपूर्ति को सीधे बढ़ाता है, अतः सर्वाधिक मुद्रास्फीतिकारी प्रभाव डालता है। सार्वजनिक ऋण की चुकौती संकुचनकारी होती है। जनता से उधार लेना अधिकतर मौजूदा मुद्रा का हस्तांतरण है, नई मुद्रा का सृजन नहीं। बैंकों से उधार लेना तभी मध्यम स्तर पर मुद्रास्फीतिकारी है जब बैंक साख-विस्तार करें, परंतु इसका प्रभाव प्रत्यक्ष मुद्रीकरण से कम होता है। इसलिए विकल्प (घ) सबसे अधिक मुद्रास्फीतिकारी है, क्योंकि यह सीधे उच्च-शक्ति मुद्रा बढ़ाता है।
- प्रश्न 11
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उत्तर: ग
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मुद्रा गुणक का मान (1+c) को (c+r) से भाग देने पर प्राप्त होता है, जहाँ c नकदी-जमा अनुपात और r आरक्षित अनुपात है। नकद आरक्षित अनुपात या वैधानिक तरलता अनुपात बढ़ाने से अपेक्षित आरक्षण बढ़ते हैं और गुणक घटता है, अतः विकल्प (क) और (ख) सही नहीं हैं। केवल जनसंख्या वृद्धि से गुणक नहीं बदलता, अतः (घ) भी सही नहीं है। जब लोगों की बैंकिंग आदत में सुधार आता है तो अधिक नकदी बैंक जमा के रूप में रहती है, जिससे नकदी-जमा अनुपात घटता है और बैंक उतने ही आरक्षित आधार पर अधिक साख सृजन कर पाते हैं, जिससे मुद्रा गुणक बढ़ जाता है।
- प्रश्न 12
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उत्तर: क
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माँग-प्रेरित मुद्रास्फीति तब होती है जब पूर्ण रोज़गार पर कुल माँग कुल आपूर्ति से अधिक हो जाती है। विस्तारवादी मौद्रिक नीति (1) और राजकोषीय प्रोत्साहन (2) दोनों माँग बढ़ाते हैं। उच्च क्रय-शक्ति (4) सीधे माँग बढ़ाती है। मुद्रास्फीति-सूचकांकित मजदूरी (3) कीमतों के साथ वेतन बढ़ाकर माँग-दबाव बनाए रखती है। बढ़ती ब्याज दरें (5) भी माँग-प्रेरित परिस्थितियों का संकेत हो सकती हैं जब महँगे ऋण के बावजूद उधारी मज़बूत बनी रहती है। आधिकारिक उत्तर कुंजी पाँचों को सही मानती है, जिससे विकल्प (घ) सही है। सूचीबद्ध सभी कारक माँग-प्रेरित मुद्रास्फीति को बढ़ा सकते हैं।
- प्रश्न 13
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उत्तर: ख
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कथन 1 सही है क्योंकि खुदरा निवेशक प्राथमिक बाज़ार में राजकोष-बिल और भारत सरकार की दिनांकित प्रतिभूतियों में सीधे निवेश कर सकते हैं, यह सुविधा RBI की खुदरा प्रत्यक्ष योजना तथा डीमैट आधारित प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध है। कथन 2 भी सही है क्योंकि बातचीत-व्यवहार प्रणाली–आदेश मिलान एक इलेक्ट्रॉनिक, स्क्रीन-आधारित, अनाम आदेश-मिलान प्रणाली है, जिसे RBI द्वारा CCIL के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों के द्वितीयक बाज़ार में संचालित किया जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि केंद्रीय निक्षेपागार सेवा लिमिटेड को बंबई स्टॉक एक्सचेंज तथा प्रमुख बैंकों ने प्रवर्तित किया है, RBI इसका प्रवर्तक नहीं है। अतः कथन 1 और 2 सही हैं।
- प्रश्न 14
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उत्तर: ग
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वॉटरक्रेडिट गैर-लाभकारी संस्था वॉटर-डॉट-ऑर्ग की पहल है, जिसकी सह-स्थापना गैरी व्हाइट और मैट डेमन ने की थी। कथन 1 सही है क्योंकि यह सूक्ष्म-वित्त उपकरणों का अनुकूलन करते हुए जल और स्वच्छता के लिए छोटे, वहनीय ऋण उपलब्ध कराती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि इसका लक्ष्य गरीब परिवारों को सब्सिडी या दान पर निर्भर हुए बिना अपनी जल और स्वच्छता आवश्यकताएँ पूरी करने में सक्षम बनाना है। कथन 2 गलत है क्योंकि वॉटरक्रेडिट WHO–विश्व बैंक की नहीं, बल्कि स्वतंत्र गैर-लाभकारी पहल है। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं और उत्तर विकल्प (ग) है।
- प्रश्न 15
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अंतिम ऋणदाता का कार्य केंद्रीय बैंक की उस भूमिका को दर्शाता है जिसमें वह अस्थायी वित्तीय संकट में फँसे वाणिज्यिक बैंकों को आपातकालीन तरलता उपलब्ध कराता है, ताकि वित्तीय व्यवस्था में आतंक तथा संक्रामक प्रसार रोका जा सके। कथन 2 इसी भूमिका को सही ढंग से व्यक्त करता है। RBI न तो व्यापार और उद्योग संगठनों को सीधे ऋण देता है (कथन 1) और न ही अंतिम ऋणदाता के रूप में नियमित रूप से सरकारी घाटे का वित्तपोषण करता है (कथन 3); घाटा वित्तपोषण इससे अलग संप्रभु-वित्तीय कार्य है। अतः केवल कथन 2 सही है और उत्तर विकल्प (ख) है।
- प्रश्न 16
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जिम्मेदार पुनर्चक्रण मानक, जिसे सामान्यतः R2 आचार संहिता कहा जाता है, सस्टेनेबल इलेक्ट्रॉनिक्स रीसाइक्लिंग इंटरनेशनल द्वारा विकसित एक स्वैच्छिक प्रमाणन है। यह प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के पुनर्चक्रण और पुनर्नवीकरण में पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी प्रथाओं के लिए मानक निर्धारित करता है, जिसमें आँकड़ा सुरक्षा, श्रमिकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रबंधन तथा सामग्री की निचली धारा में निगरानी सम्मिलित हैं। इसका रामसर आर्द्रभूमि, कृषि या प्राकृतिक संसाधनों के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन से कोई संबंध नहीं है। अतः सही उत्तर विकल्प (क) है, क्योंकि R2 विश्वव्यापी इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग में उत्तरदायी प्रथाओं को बढ़ावा देता है।
- प्रश्न 17
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उत्तर: ख
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ताम्र प्रगलन में सल्फाइड अयस्कों को भूना जाता है जिससे सल्फर डाइऑक्साइड निकलती है, जो प्रमुख वायु प्रदूषक एवं अम्ल वर्षा का कारक है; अतः कथन 3 सही है। ताम्र धातुमल, अर्थात् सिलिकेट उपोत्पाद, यदि अनुचित रूप से डाला जाए तो ताँबा, सीसा, जस्ता तथा आर्सेनिक जैसी भारी धातुएँ मृदा एवं जल में रिस सकती हैं; अतः कथन 2 भी सही है। कथन 1 गलत है क्योंकि ताम्र प्रगलन घातक कार्बन मोनोऑक्साइड के उत्सर्जन के लिए नहीं जाना जाता; CO अधिकतर लौह एवं इस्पात उद्योग के अपूर्ण दहन से जुड़ा है। अतः केवल कथन 2 और 3 सही हैं, विकल्प (ख) सही है।
- प्रश्न 18
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उत्तर: घ
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भट्टी तेल, जिसे ईंधन तेल भी कहा जाता है, कच्चे पेट्रोलियम के परिशोधन के दौरान प्राप्त होने वाला भारी अवशिष्ट उत्पाद है; अतः कथन 1 सही है। उद्योग इसका उपयोग बॉयलर, भट्टियों एवं स्व-उपयोग विद्युत संयंत्रों में भाप तथा बिजली उत्पन्न करने के ईंधन के रूप में करते हैं; अतः कथन 2 सही है। भट्टी तेल में सल्फर रहता है और इसके दहन से सल्फर डाइऑक्साइड निकलती है, जो एक प्रमुख वायु प्रदूषक है; अतः कथन 3 भी सही है। इसलिए तीनों कथन सही हैं और उत्तर विकल्प (घ) है। कठोर सल्फर मानकों ने नियामकों को उद्योग को स्वच्छ विकल्पों की ओर बढ़ाने हेतु प्रेरित किया है।
- प्रश्न 19
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उत्तर: क
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नीला कार्बन वह कार्बन है जिसे विश्व के महासागरों एवं तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों, विशेषकर मैंग्रोव, लवण कच्छ तथा समुद्री घास की चटाइयों द्वारा अभिग्रहित और संगृहीत किया जाता है। ये पारिस्थितिकी तंत्र प्रति इकाई क्षेत्र स्थलीय वनों की तुलना में कई गुना अधिक दर से कार्बन का संगहण करते हैं और उसे जलमग्न तलछटों में लंबे समय तक स्थिर रखते हैं। वन जैवभार और कृषि मृदा में संचित कार्बन को हरित कार्बन कहा जाता है, जबकि जीवाश्म ईंधनों एवं वायुमंडल में स्थित कार्बन के अलग नाम हैं। अतः सही परिभाषा विकल्प (क) है, अर्थात् महासागरों एवं तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों द्वारा अभिग्रहित कार्बन।
- प्रश्न 20
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उत्तर: ग
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लाइकेन कवक तथा शैवाल या नीलहरित बैक्टीरिया का सहजीवी संगठन है, जो बिना मृदा के नंगी चट्टानों, वृक्ष की छाल आदि सतहों पर बस सकता है, और वायु एवं अधःस्तर से नमी तथा खनिज प्राप्त कर लेता है। मॉस अनवाहिनी पौधे हैं जो असली जड़ों के स्थान पर मूलाभासों का उपयोग करते हुए चट्टानों, दीवारों एवं वृक्ष की छाल पर उग सकते हैं, अतः वे भी मृदा के बिना जीवित रहते हैं। फर्न संवहनी पौधे हैं जिन्हें सामान्यतः मृदा या जैविक अधःस्तर चाहिए, और छत्रक (कवक) प्रायः जैविक मृदा या सड़ती सामग्री पर आश्रित होते हैं। अतः केवल लाइकेन और मॉस उपयुक्त हैं, विकल्प (ग)।
- प्रश्न 21
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उत्तर: ग
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नींबू घास सिट्रोनेला से समृद्ध आवश्यक तेल देती है, जिसके घटक सिट्राल और जिरेनियॉल प्राकृतिक मच्छर निवारक के रूप में तेलों, मोमबत्तियों तथा फुहारों में व्यापक रूप से प्रयुक्त होते हैं। काँग्रेस घास एक आक्रामक खरपतवार है और निवारक के रूप में उपयोगी नहीं है; हाथी घास एक चारा फसल है; तथा मोथा एक बहुवर्षीय खरपतवार है जिसका कुछ पारंपरिक नुस्खों में प्रयोग होता है किंतु मच्छर निवारक के रूप में नहीं। अतः प्राकृतिक मच्छर निवारक तैयार करने हेतु सही उत्तर विकल्प (ग) नींबू घास है। यह तेल छोटे पैमाने की आसवन इकाइयों में निकाला जाता है और कई देशों में निर्यात होता है।
- प्रश्न 22
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उत्तर: ख
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महासागरीय आहार शृंखलाओं में प्राथमिक उत्पादक स्वपोषी होते हैं जो प्रकाशसंश्लेषण या रसायनसंश्लेषण द्वारा कार्बन का स्थिरीकरण करते हैं। नीलहरित बैक्टीरिया ऑक्सी प्रकाशसंश्लेषण करते हैं और समुद्री प्राथमिक उत्पादन में बड़ा योगदान देते हैं। डायटम एककोशिकीय प्रकाशसंश्लेषी शैवाल हैं जो समुद्री प्राथमिक उत्पादकता का बड़ा हिस्सा देते हैं। कोपिपोड छोटे क्रस्टेशियन हैं जो पादप प्लवक खाते हैं और प्राथमिक उपभोक्ता हैं, उत्पादक नहीं। फोरामिनिफेरा प्रोटोजोआ हैं जो छोटे जीवों पर निर्भर रहते हैं, अतः वे भी उपभोक्ता हैं। इसलिए केवल नीलहरित बैक्टीरिया और डायटम प्राथमिक उत्पादक हैं, विकल्प (ख) सही है।
- प्रश्न 23
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हेजहॉग कसकर गेंद का आकार बना लेते हैं जिससे उनकी काँटेदार पीठ बाहर रहती है और कोमल पेट, सिर तथा पाँव परभक्षियों से सुरक्षित रहते हैं। पैंगोलिन अपने अतिच्छादित केरेटिन के शल्कों को कवच के रूप में लपेटकर शरीर को गेंद में बदल लेते हैं और भीतरी कमजोर भाग को बचा लेते हैं। मारमॉट बड़े भू-गिलहरी हैं जो रक्षा हेतु बिलों, चेतावनी ध्वनियों तथा सामूहिक सतर्कता पर निर्भर रहते हैं; वे गेंद के रूप में नहीं सिमटते। अतः गेंद बनाकर बचाव करने का यह व्यवहार केवल हेजहॉग और पैंगोलिन में पाया जाता है, विकल्प (घ) सही है। असंबंधित स्तनधारियों में यह अभिसारी रणनीति है।
- प्रश्न 24
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उत्तर: क
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वनों पर न्यूयॉर्क घोषणापत्र को पहली बार सितंबर 2014 के UN जलवायु शिखर सम्मेलन में अनुमोदित किया गया था; अतः कथन 1 सही है। इसमें वैश्विक लक्ष्य निर्धारित किया गया कि 2020 तक प्राकृतिक वन हानि आधी की जाए और 2030 तक समाप्त हो; कथन 2 भी सही है। समर्थनकर्ताओं में राष्ट्रीय एवं उप-राष्ट्रीय सरकारें, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, मूलनिवासी संगठन तथा नागरिक समाज समूह शामिल हैं; कथन 4 सही है। यह घोषणा स्वैच्छिक है, विधिक रूप से बाध्यकारी नहीं (कथन 3 गलत), तथा भारत ने इसका समर्थन नहीं किया (कथन 5 गलत)। अतः कथन 1, 2 और 4 सही हैं, विकल्प (क) उत्तर है।
- प्रश्न 25
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नगरीय वायु में मैग्नेटाइट सूक्ष्मकण मुख्यतः वाहन एवं औद्योगिक दहन तथा घर्षण स्रोतों से उत्पन्न होते हैं। मोटर वाहनों के ब्रेक से लौह-समृद्ध घर्षण कण निकलते हैं जिनमें मैग्नेटाइट शामिल है (1 सही)। इंजन ईंधन दहन एवं इंजन घिसाव से मैग्नेटाइट युक्त सूक्ष्मकण उत्सर्जित करते हैं (2 सही)। विद्युत संयंत्र, विशेषकर कोयला आधारित, मैग्नेटाइट युक्त उड़न राख कणों का बड़ा स्रोत हैं (4 सही)। माइक्रोवेव चूल्हे बिना दहन के काम करते हैं और मैग्नेटाइट उत्पन्न नहीं करते (3 गलत), तथा टेलीफोन तार प्रदूषण स्रोत नहीं हैं (5 गलत)। अतः सही संयोजन 1, 2 और 4 है, विकल्प (ख)।
- प्रश्न 26
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निस्यंदी आहारी जल को विशेष छानने वाली संरचनाओं से प्रवाहित करके निलंबित खाद्य कणों, प्लवक एवं कार्बनिक पदार्थों को छान लेते हैं। सीप द्विकपाटी मोलस्क हैं जो अपने गिल्स के पार जल खींचते हैं और श्लेष्मा में पादप प्लवक तथा अपरद को फँसा लेते हैं; ये उत्कृष्ट निस्यंदी आहारी हैं। कैटफिश परभक्षी एवं अपमार्जक हैं, ऑक्टोपस सक्रिय शिकारी होते हैं जो क्रस्टेशियन तथा मोलस्क पकड़ते हैं, और पेलिकन अपनी थैली में मछली समेटते हैं; इनमें से कोई भी निस्यंदी आहारण नहीं करता। अतः सही उत्तर विकल्प (ग) सीप है, जो ज्वारनदमुखों की जल गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक है।
- प्रश्न 27
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उत्तर: ग
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फॉस्फोरस चक्र प्रमुख जैवभूरासायनिक चक्रों में अद्वितीय है क्योंकि इसमें कोई महत्त्वपूर्ण वायुमंडलीय घटक नहीं होता। फॉस्फोरस मुख्यतः एपेटाइट जैसी फॉस्फेटयुक्त चट्टानों के धीमे अपक्षय से चक्र में प्रवेश करता है, जिससे फॉस्फेट आयन मृदा एवं जल में मुक्त होते हैं और वहाँ से पौधे ग्रहण करते हैं। कार्बन, नाइट्रोजन तथा सल्फर चक्रों में महत्त्वपूर्ण वायुमंडलीय भंडार और गैसीय पथ होते हैं, और उनमें अपक्षय की भूमिका गौण रहती है। अतः सही उत्तर विकल्प (ग) फॉस्फोरस चक्र है, जिसमें चट्टानों का अपक्षय पोषक तत्त्व मुक्ति का प्रमुख स्रोत है।
- प्रश्न 28
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अपरदाहारी मृत कार्बनिक पदार्थ का उपभोग करते हैं और उसे छोटे कणों में विघटित कर अपघटन को तेज करते हैं। केंचुए मृदा एवं सड़ते पादप कूड़े को निगलकर पोषक-समृद्ध कास्टिंग छोड़ते हैं (1 सही)। मिलीपेड पत्ती कूड़े और सड़ती लकड़ी को खाते हैं (3 सही)। वुडलाइस क्रस्टेशियन हैं जो अपघटित होती वनस्पति पर निर्भर रहते हैं (5 सही)। जेलीफिश पेलाजिक परभक्षी हैं जो जीवित प्लवक एवं छोटी मछली खाते हैं (2 गलत), तथा सीहॉर्स छोटे जीवित क्रस्टेशियन का शिकार करते हैं (4 गलत)। अतः केवल मद 1, 3 और 5 अपरदाहारी हैं, विकल्प (ग) सही है।
- प्रश्न 29
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सामान्य कार्बन मापक UNEP-समर्थित प्रोटोकॉल है जिसे सतत भवन एवं जलवायु पहल के साथ मिलकर विकसित किया गया, ताकि भवनों के संचालन से होने वाले हरितगृह गैस उत्सर्जन एवं ऊर्जा उपयोग का मापन, प्रतिवेदन तथा सत्यापन किया जा सके। यह विश्व भर के भवनों के संचालन के कार्बन प्रदर्शन की लगातार तुलना के लिए प्रति वर्ग मीटर एवं प्रति निवासी जैसे मानक तीव्रता संकेतकों का उपयोग करने की अनुमति देता है। यह वाणिज्यिक कृषि इकाइयों, देश-स्तरीय फुटप्रिंट लेखांकन या वैश्विक जीवाश्म ईंधन उपयोग से संबंधित नहीं है। अतः सही विकल्प (क) है, अर्थात् विश्व में भवन संचालन के कार्बन फुटप्रिंट का आकलन।
- प्रश्न 30
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निडारिया में मूँगे आते हैं, जो सहजीवी डाइनोफ्लैजेलेट शैवाल (जूजैंथेली) को आश्रय देते हैं, तथा समुद्री ऐनीमोन क्लाउनफिश को शरण देते हैं; अतः कथन 1 सही है। कवक पौधों की जड़ों से माइकोराइजल साझेदारी और शैवाल या नीलहरित बैक्टीरिया से लाइकेन रूपी शास्त्रीय पारस्परिकता बनाते हैं; कथन 2 भी सही है। प्रोटोजोआ में कुछ प्रजातियाँ दीमक और जुगाली करने वाले प्राणियों की आँतों में रहकर सेल्यूलोज पाचन में सहायता करती हैं, और अन्य स्पंजों एवं मूँगों के साथ सहजीवन में रहती हैं; कथन 3 सही है। अतः तीनों समूहों में सहजीवी संबंध स्थापित करने वाली प्रजातियाँ मिलती हैं, विकल्प (घ) 1, 2 और 3 सही उत्तर है।
- प्रश्न 31
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मुरैना के निकट मितावली में स्थित चौंसठ योगिनी मंदिर का निर्माण लगभग 1323 ईस्वी में कच्छपघात राजवंश के शासनकाल में हुआ था। यह वृत्ताकार योजना पर बना है, जिसके केंद्रीय गर्भगृह के चारों ओर चौंसठ छोटे-छोटे मंदिर बने हैं, अतः कथन 1 सही है। ऐसा व्यापक रूप से माना जाता है कि इसी वृत्ताकार रचना से भारतीय संसद भवन की वृत्ताकार योजना प्रेरित हुई, अतः कथन 4 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि ओडिशा के हीरापुर तथा रानीपुर-झरियाल में भी वृत्ताकार योगिनी मंदिर विद्यमान हैं। कथन 3 भी गलत है क्योंकि यह मंदिर शैव-तांत्रिक योगिनी पूजा से जुड़ा है, वैष्णव संप्रदाय से नहीं।
- प्रश्न 32
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गुजरात में कच्छ के रण के खदिर बेट में स्थित हड़प्पाकालीन स्थल धोलावीरा अपनी अत्यंत उन्नत जल-प्रबंधन प्रणाली के लिए विख्यात है। यहाँ के निवासियों ने मौसमी जलधाराओं पर बाँधों की एक श्रृंखला बनाई, पत्थरों से बनी नालियों के माध्यम से जल को मोड़ा तथा नगर के चारों ओर बनी विशाल आपस में जुड़ी चट्टान-कटाई और चिनाई वाली जलाशयों में संचित किया, जिससे शुष्क परिदृश्य में बसावट संभव हुई। कालीबंगा, राखीगढ़ी और रोपड़ बड़े हड़प्पाई स्थल अवश्य हैं, परंतु ऐसी विस्तृत बाँध-जलाशय व्यवस्था इनमें नहीं मिलती। अतः उत्तर (क) धोलावीरा है, जिसे 2021 में विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला।
- प्रश्न 33
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सत्रहवीं शताब्दी की पहली तिमाही में अंग्रेज़ ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी आरंभिक कोठियाँ मुख्यतः पश्चिमी तट पर स्थापित कीं; कोरोमंडल और बंगाल क्षेत्र में कोठियाँ बहुत बाद में स्थापित हुईं। गुजरात के भड़ौच (ब्रोच) में 1616 तक अंग्रेज़ी कोठी स्थापित हो चुकी थी, जो सूरत (1613) के बाद की प्रारंभिक कोठियों में से एक थी, अतः कथन 1 सही है। चिकाकोल (श्रीकाकुलम) तथा त्रिचिनापल्ली की कोठियाँ इस अवधि के बहुत बाद स्थापित हुईं, अतः कथन 2 और 3 गलत हैं। केवल भड़ौच ही सत्रहवीं शताब्दी की पहली तिमाही में आता है, अतः उत्तर (क) है।
- प्रश्न 34
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उत्तर: ख
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साम्राज्यिक गुप्तों के पतन (छठी शताब्दी के मध्य) तथा 606 ईस्वी में हर्षवर्धन के उदय के बीच उत्तरी भारत में अनेक राजवंशों का प्रभुत्व रहा। मगध के परवर्ती गुप्तों ने पूर्वी भारत में शासन जारी रखा (1 सही)। थानेसर पर पुष्यभूति या वर्धन वंश का अधिकार था (3 सही)। कन्नौज पर मौखरियों का नियंत्रण था (4 सही)। गुजरात के वलभी पर मैत्रकों का शासन था (6 सही)। मालवा के परमार तथा देवगिरि के यादव क्रमशः नौवीं और बारहवीं शताब्दी में उभरे, अतः वे इस काल में नहीं थे। सही संयोजन 1, 3, 4 और 6 है, अर्थात् विकल्प (ख)।
- प्रश्न 35
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उत्तर: घ
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पुर्तगाली इतिहासकार फर्नाओ नूनिस, जो 1530 के दशक में विजयनगर में रहे, ने लिखा है कि विजयनगर साम्राज्य की स्त्रियाँ अनेक क्षेत्रों में अत्यंत निपुण थीं। उन्होंने स्त्रियों को मल्लयुद्ध, ज्योतिष एवं नक्षत्र-विद्या, हिसाब-किताब तथा कोषागार के कार्यों, और भविष्यवाणी एवं शकुन-विद्या में पारंगत बताया है। वे महल की रक्षिका, नर्तकी तथा संगीतज्ञ के रूप में भी सेवा करती थीं। प्रश्न में उल्लिखित चारों क्षेत्र—मल्लयुद्ध, ज्योतिष, हिसाब-किताब और भविष्यवाणी—उनके वर्णन में आते हैं, अतः सही उत्तर (घ) 1, 2, 3 और 4 है। उनके लेखन विजयनगर के सामाजिक इतिहास का प्रमुख स्रोत हैं।
- प्रश्न 36
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उत्तर: ग
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आंध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले में स्थित मदनपल्ली ऐतिहासिक रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं पर 1919 में बेसेंट थियोसॉफिकल कॉलेज में ठहरे रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने बंगाली गीत 'जन गण मन' का अंग्रेज़ी अनुवाद 'द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ़ इंडिया' के रूप में किया था। पिंगली वेंकैया ने राष्ट्रीय ध्वज की रूपरेखा बेजवाड़ा (विजयवाड़ा) में बनाई थी। पट्टाभि सीतारमैया की भारत छोड़ो आंदोलन में भूमिका अन्यत्र केंद्रित थी, और थियोसॉफिकल सोसाइटी का भारतीय मुख्यालय मद्रास के अड्यार में स्थापित हुआ था। अतः मदनपल्ली के विषय में सही कथन विकल्प (ग) है।
- प्रश्न 37
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उत्तर: घ
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कश्मीर का बुर्ज़होम एक नवपाषाण-महापाषाण स्थल है, जो गर्त-गृहों, श्वान-समाधियों तथा अस्थि उपकरणों के लिए विख्यात है, चट्टान-कटाई मंदिरों के लिए नहीं; अतः जोड़ी 1 गलत है। पश्चिम बंगाल के चंद्रकेतुगढ़ की पहचान अपनी समृद्ध टेराकोटा कला, फलकों और मूर्तियों के लिए है, जो मौर्य से गुप्त काल तक फैली हुई है, अतः जोड़ी 2 सही है। राजस्थान के सीकर ज़िले में स्थित गणेश्वर अपने ताम्र-पाषाणकालीन ताँबे के उपकरणों के लिए प्रसिद्ध है, जिनकी आपूर्ति हड़प्पाई बस्तियों को होती थी, अतः जोड़ी 3 सही है। अतः जोड़ियाँ 2 और 3 सही हैं, और उत्तर (घ) है।
- प्रश्न 38
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उत्तर: क
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कथन 1 सही है: 1221 ईस्वी में इल्तुतमिश के शासनकाल में मंगोल नायक चंगेज़ खान ख्वारिज़्म के भगोड़े राजकुमार जलालुद्दीन मंगबरनी का पीछा करते हुए सिंधु नदी तक पहुँचा, परंतु दिल्ली सल्तनत पर आक्रमण किए बिना लौट गया। कथन 2 गलत है: तैमूर ने भारत पर 1398 में आक्रमण किया, और उस समय नासिरुद्दीन महमूद तुग़लक़ का शासन था, मुहम्मद बिन तुग़लक़ का नहीं, जिनकी मृत्यु 1351 में हो चुकी थी। कथन 3 भी गलत है: वास्को द गामा 1498 में केरल तट पर पहुँचा, जो देव राय द्वितीय (1422-1446) के शासनकाल के बहुत बाद की घटना है। अतः केवल कथन 1 सही है।
- प्रश्न 39
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उत्तर: ग
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संत फ्रांसिस ज़ेवियर 1540 में इग्नेशियस लोयोला के साथ जेसुइट संघ (सोसाइटी ऑफ़ जीसस) के मूल संस्थापक सदस्यों में से एक थे, अतः कथन 1 सही है। कथन 2 तकनीकी रूप से अंशतः ही सही है, क्योंकि उनकी मृत्यु 1552 में चीनी तट के निकट शांगचुआन द्वीप पर हुई थी, परंतु उनका पार्थिव शरीर बाद में गोवा के बेसिलिका ऑफ़ बॉम जीसस में स्थापित किया गया, जो उन्हें समर्पित प्रसिद्ध चर्च है। कथन 3 सही है क्योंकि गोवा में प्रतिवर्ष उनकी फीस्ट मनाई जाती है। आधिकारिक उत्तर कुंजी तीनों कथनों को सही मानती है, अतः उत्तर (घ) है।
- प्रश्न 40
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उत्तर: ख
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विज्ञानेश्वर द्वारा याज्ञवल्क्य स्मृति पर रचित मिताक्षरा तथा जीमूतवाहन द्वारा रचित दायभाग हिंदू व्यक्तिगत विधि की दो प्रमुख शाखाएँ थीं, जो सभी जातियों पर लागू होती थीं, उच्च और निम्न जातियों में बँटी नहीं थीं; अतः कथन 1 गलत है। कथन 2 सही है: मिताक्षरा प्रणाली में पुत्र पैतृक संपत्ति में जन्म से अधिकार प्राप्त करते हैं और पिता के जीवनकाल में ही बँटवारे का दावा कर सकते हैं, जबकि दायभाग में यह अधिकार पिता की मृत्यु के पश्चात ही उत्पन्न होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि दोनों ही शाखाएँ पुरुष और स्त्री दोनों सदस्यों की संपत्ति से संबंधित मामलों को अपने-अपने ढंग से संभालती हैं। अतः केवल कथन 2 सही है।
- प्रश्न 41
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उत्तर: ख
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भवभूति आठवीं शताब्दी के संस्कृत नाटककार थे, जो कन्नौज के यशोवर्मन के दरबार से संबद्ध थे और जिन्होंने महावीरचरित, मालतीमाधव तथा उत्तररामचरित जैसी प्रसिद्ध कृतियाँ रचीं। हस्तिमल्ल तेरहवीं शताब्दी के लेखक थे, जिन्होंने विक्रांतकौरव तथा मैथिली-कल्याण जैसे संस्कृत और प्राकृत नाटक लिखे। क्षेमेश्वर दसवीं शताब्दी के नाटककार थे, जिनकी प्रसिद्ध रचनाएँ चंडकौशिक और नैषधा हैं। ये तीनों शास्त्रीय एवं उत्तर-शास्त्रीय संस्कृत रंगमंच के विख्यात नाटककार थे, जैन भिक्षु, मंदिर वास्तुकार या दार्शनिक नहीं। अतः सही उत्तर (ख) नाटककार है।
- प्रश्न 42 · Indian History (Modern)
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भारत सरकार अधिनियम 1919 ने प्रांतों में द्वैध शासन लागू किया: आरक्षित विषय (गवर्नर के अधीन) और हस्तांतरित विषय (भारतीय मंत्रियों के अधीन)। इसने केंद्र में द्विसदनी विधानमंडल भी बनाया।
- प्रश्न 43
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उत्तर: क
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8 अगस्त 1942 को बंबई के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक हुई, जिसमें महात्मा गांधी द्वारा तैयार किए गए भारत छोड़ो प्रस्ताव को पारित किया गया। इसमें ब्रिटिशों से तत्काल भारत छोड़ने की माँग की गई और गांधीजी ने 'करो या मरो' का आह्वान किया। वायसराय की कार्यकारी परिषद में अधिक भारतीयों को सम्मिलित करने का विस्तार बाद में हुआ, कांग्रेस के प्रांतीय मंत्रिमंडलों ने 1939 में युद्ध आरंभ होने पर त्यागपत्र दिए, और क्रिप्स मिशन के प्रस्ताव मार्च 1942 में आए थे। अतः विकल्प (क) सही है: 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित हुआ था।
- प्रश्न 44
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उत्तर: ग
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'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिज़न' प्राचीन भारतीय भक्ति एवं दार्शनिक पदों के चयनित अंशों का अंग्रेज़ी अनुवाद है, जिसमें भगवद्गीता तथा अन्य स्रोतों के श्लोक शामिल हैं। इसकी तैयारी महात्मा गांधी ने यरवदा कारागार में अपने बंदी काल के दौरान की थी। इन अनुवादों को अंग्रेज़ी काव्य रूप सरोजिनी नायडू ने प्रदान किया, और यह कृति जॉन एस. हॉयलैंड की प्रस्तावना के साथ 1934 में प्रकाशित हुई। इस ग्रंथ के अनुवादात्मक स्वरूप में सरोजिनी नायडू की साहित्यिक भूमिका के कारण ही यह कृति उनके नाम से जुड़ी मानी जाती है। अतः सही उत्तर विकल्प (घ) सरोजिनी नायडू है।
- प्रश्न 45
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उत्तर: क
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अकबर द्वारा सुदृढ़ की गई मुग़ल प्रशासनिक संरचना के अंतर्गत साम्राज्य को सूबा नामक प्रांतों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक सूबा को सरकारों में बाँटा गया, और प्रत्येक सरकार को आगे परगनों में, जो ग्रामों के समूह से बने सबसे छोटे राजस्व-इकाई थे। इस प्रकार आकार के आरोही क्रम में सही अनुक्रम परगना, फिर सरकार, फिर सूबा है। अतः विकल्प (क) परगना—सरकार—सूबा सही उत्तर है। प्रत्येक सूबा के प्रमुख सूबेदार होते थे, प्रत्येक सरकार के फौजदार, और प्रत्येक परगना के शिक़दार। यही पिरामिडीय संरचना मुग़ल राजस्व प्रशासन का आधार थी।
- प्रश्न 46
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उत्तर: ग
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जॉन एलियट ड्रिंकवाटर बेथ्यून ने 1849 में कलकत्ता में हिन्दू महिला विद्यालय की स्थापना स्त्री-शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए की थी। बंगाल के अग्रणी समाज सुधारक तथा शिक्षाविद् ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने इस विद्यालय के अवैतनिक सचिव के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और बंगाल में स्त्री-शिक्षा के विस्तार में अपना योगदान दिया। 1851 में बेथ्यून के निधन के बाद उनकी स्मृति में विद्यालय का नाम बेथ्यून फीमेल स्कूल कर दिया गया। एनी बेसेण्ट, देवेन्द्रनाथ ठाकुर अथवा सरोजिनी नायडू इस संस्था से सचिव के रूप में नहीं जुड़े थे। अतः विकल्प (ग) सही उत्तर है।
- प्रश्न 47
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शाहनवाज़ खान, प्रेम कुमार सहगल तथा गुरुबख्श सिंह ढिल्लों सुभाष चन्द्र बोस की आज़ाद हिन्द फौज (इण्डियन नेशनल आर्मी) के वरिष्ठ अधिकारी थे। 1945 में जापान की पराजय के पश्चात् ब्रिटिश सरकार ने इन तीनों पर सम्राट के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का आरोप लगाते हुए दिल्ली के लाल किले में 1945-46 का प्रसिद्ध आई.एन.ए. मुक़दमा चलाया। इन मुक़दमों ने राष्ट्रीय भावना को जागृत किया तथा भूलाभाई देसाई, तेजबहादुर सप्रू और जवाहरलाल नेहरू ने उनकी पैरवी की। इनका स्वदेशी आन्दोलन, अन्तरिम सरकार अथवा प्रारूप समिति से कोई सम्बन्ध नहीं था, अतः विकल्प (घ) सही है।
- प्रश्न 48
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कथन 1 गलत है: आरकाट के नवाब मुग़ल बादशाह तथा दक्कन के निज़ाम-उल-मुल्क द्वारा नियुक्त किए गए थे और कर्नाटक की सूबेदारी से एक पृथक् नवाबी के रूप में उभरे, हैदराबाद राज्य से नहीं। आरकाट की नवाबी हैदराबाद के स्वायत्त राज्य के सुदृढ़ीकरण से पहले की है। कथन 2 गलत है: मैसूर के वोडेयार राजवंश का उदय चौदहवीं शताब्दी में विजयनगर के सामन्त के रूप में हुआ था और विजयनगर के पतन से उत्पन्न होने के स्थान पर वह उसके पतन के बाद प्रमुख बना। कथन 3 सही है: रुहेलखण्ड की रियासत अहमद शाह अब्दाली द्वारा अधिकृत क्षेत्रों में अफ़ग़ान रोहिल्ला सरदारों ने बनाई।
- प्रश्न 49
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महाराष्ट्र की अजन्ता गुफाएँ ताप्ती की सहायक नदी वाघोरा (वाघुर) नदी की घाटी में बनी घोड़े की नाल जैसी खड़ी चट्टान को काटकर निर्मित हैं और गुफाओं के द्वार नदी-तल के ऊपर खुलते हैं। साँची का स्तूप बेतवा के निकट पहाड़ी पर स्थित है, चम्बल के पास नहीं। पाण्डुलेण (पाण्डु लेणा) गुफा-मन्दिर नासिक के पास गोदावरी घाटी के ऊपर स्थित हैं, नर्मदा के समीप नहीं। अमरावती का स्तूप कृष्णा नदी के तट पर है, गोदावरी के नहीं। अतः केवल विकल्प (क) सही है: अजन्ता गुफाएँ वाघोरा नदी की घाटी में स्थित हैं।
- प्रश्न 50
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कथन 1 गलत है: 21 फरवरी को अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में 1999 में UNESCO द्वारा घोषित किया गया था, UNICEF द्वारा नहीं, जो 1952 के बंगाली भाषा आन्दोलन की स्मृति में मनाया जाता है। कथन 2 सही है: बांग्ला को पाकिस्तान की राष्ट्रीय भाषाओं में से एक बनाने की माँग सर्वप्रथम 23 फरवरी 1948 को पाकिस्तान की संविधान सभा में धीरेन्द्रनाथ दत्ता ने उठाई थी, जिसके परिणामस्वरूप भाषा आन्दोलन हुआ और 21 फरवरी 1952 को ढाका में आन्दोलनकारियों की हत्या की घटना घटी। अतः केवल कथन 2 सही है, विकल्प (ख) उत्तर है।
- प्रश्न 51
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पर्माकल्चर बहुफसली खेती, बहुवर्षीय फसलों, मल्चिंग तथा जल संरक्षण पर बल देता है, जबकि परम्परागत रासायनिक खेती एकल फसल और कृत्रिम आदानों पर निर्भर रहती है। कथन 1 सही है: रासायनिक खेती में एकल फसल प्रचलित है, जबकि पर्माकल्चर जान-बूझकर विभिन्न प्रजातियों को मिलाता है। कथन 2 सही है: अत्यधिक सिंचाई और उर्वरकों के कारण रासायनिक खेती में मृदा लवणीकरण होता है, जबकि पर्माकल्चर की मल्चिंग व आच्छादन फसलें इससे बचाती हैं। कथन 4 सही है: मल्चिंग पर्माकल्चर के लिए केन्द्रीय है। कथन 3 गलत है क्योंकि पर्माकल्चर अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में भी अनुकूल है। अतः विकल्प (ख) सही है।
- प्रश्न 52
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कथन 1 गलत है: ऑयल पाम (एलाइस गिनीनसिस) का मूल स्थान दक्षिण-पूर्व एशिया नहीं, बल्कि पश्चिमी और मध्य अफ़्रीका है, यद्यपि इण्डोनेशिया और मलेशिया अब इसके सबसे बड़े उत्पादक हैं। कथन 2 सही है: पाम तेल और इसके व्युत्पन्न अपनी स्थिर वसीय अम्ल संरचना के कारण लिपस्टिक, साबुन और इत्र जैसे प्रसाधन सामग्रियों में कच्चे माल के रूप में व्यापक रूप से प्रयुक्त होते हैं। कथन 3 सही है: ट्रांसएस्टरिफिकेशन प्रक्रिया द्वारा पाम तेल को बायोडीज़ल में परिवर्तित किया जाता है और यह विश्व स्तर पर जैव-ईंधन का प्रमुख स्रोत है। अतः कथन 2 और 3 सही हैं, विकल्प (ख) उत्तर है।
- प्रश्न 53
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पंजाब की पाँच नदियों में झेलम चिनाब से त्रिम्मू के पास, रावी चिनाब से अहमदपुर सियाल के निकट और ब्यास सतलुज से हरिके के पास मिलती है। तत्पश्चात् सतलुज मीठनकोट के निकट चिनाब से मिलकर पंचनद बनाती है, जो अन्ततः सिन्धु में मिल जाती है। दिए गए विकल्पों (चिनाब, झेलम, रावी, सतलुज) में से वह नदी जो झेलम, रावी तथा (ब्यास के माध्यम से) सतलुज को ग्रहण करके सीधे सिन्धु में मिलती है, वह चिनाब ही है, क्योंकि सतलुज के मिलने के बाद की संयुक्त धारा को कभी-कभी चिनाब-पंचनद कहा जाता है। अतः विकल्प (क) चिनाब सही उत्तर है।
- प्रश्न 54
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डीडवाना, कुचामन, सरगोल और खाटू राजस्थान के शुष्क नागौर तथा सीकर ज़िलों में स्थित अन्तःस्थलीय लवणीय झीलों के नाम हैं। ये उथली प्लाया झीलें अरावली के पठार की निचली भू-आकृतियों में स्थित हैं और इनमें धरातलीय अपवाह तथा भूजल के साथ आए लवण एकत्र हो जाते हैं, जिनसे परम्परागत वाष्पीकरण विधि द्वारा साधारण नमक तथा अन्य खनिज प्राप्त किए जाते हैं। ये न तो हिमनद हैं, न ही मैंग्रोव क्षेत्र हैं, और न ही इन्हें रामसर स्थल घोषित किया गया है। अतः विकल्प (घ) लवणीय झीलें सही उत्तर है, जिनमें डीडवाना सबसे बड़ी झीलों में से एक है।
- प्रश्न 55
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उत्तर: ख
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ब्राह्मणी नदी राउरकेला के निकट छोटा नागपुर पठार पर शंख तथा दक्षिण कोयल नदियों के संगम से निकलती है, पूर्वी घाट से नहीं। सुवर्णरेखा नदी झारखण्ड के छोटा नागपुर पठार पर नागरी गाँव के पास से निकलती है। नागावली नदी ओडिशा के कालाहाण्डी ज़िले में पूर्वी घाट से निकलती है। वंशधारा भी ओडिशा के कालाहाण्डी और रायगडा ज़िलों की सीमा पर पूर्वी घाट से ही निकलती है। अतः दी गई नदियों में केवल नागावली और वंशधारा ही पूर्वी घाट से उद्गमित होती हैं, जिससे विकल्प (ख) 2 और 4 सही उत्तर बनता है।
- प्रश्न 56
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उत्तर: ख
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कथन 1 गलत है: राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र के बाहर समुद्री-तल अन्वेषण और खनन के लाइसेंस UNCLOS के अन्तर्गत अन्तरराष्ट्रीय समुद्री-तल प्राधिकरण द्वारा प्रदान किए जाते हैं, ग्लोबल ओशन कमीशन द्वारा नहीं, जो केवल पैरवी करने वाला निकाय था। कथन 2 सही है: भारत को इस प्राधिकरण ने मध्य हिन्द महासागरीय द्रोणी में बहुधात्विक पिण्डों तथा हिन्द महासागरीय कटक में बहुधात्विक सल्फाइडों के अन्वेषण के अनुबन्ध दिए हैं। कथन 3 सही है: अन्तरराष्ट्रीय जलक्षेत्र की समुद्री-तल मैंगनीज़ ग्रन्थियों एवं परतों में दुर्लभ मृदा तत्त्व पाए जाते हैं। अतः कथन 2 और 3 सही हैं।
- प्रश्न 57
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उत्तर: क
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गन्ना सर्वाधिक जल खपत वाली फसलों में से एक है, जिसे अपनी लम्बी वृद्धि अवधि में लगभग 1500 से 2500 मिलीमीटर जल की आवश्यकता होती है तथा यह भारत के अनेक भागों में भूजल के गम्भीर ह्रास का कारण बनी है। सूरजमुखी और अरहर इसकी तुलना में कहीं अधिक जल-दक्ष तिलहन और दलहन फसलें हैं। बाजरा एक सूखा-सहिष्णु मोटा अनाज है, जो शुष्क क्षेत्रों में बहुत कम पानी पर उगाया जाता है। अतः चारों विकल्पों में गन्ना ही सबसे कम जल-दक्ष फसल है, जिससे विकल्प (क) सही उत्तर बनता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की अत्यधिक सिंचाई से जल-स्तर के गिरने का सम्बन्ध जोड़ा गया है।
- प्रश्न 58
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उत्तर: ग
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कथन 1 सही है: उष्ण कटिबन्ध में पूर्वी व्यापारिक पवनें धरातलीय जल को पूर्व से पश्चिम की ओर ले जाती हैं और गर्म जल को महासागरों की पश्चिमी सीमाओं पर एकत्र कर देती हैं, जिसके परिणामस्वरूप पश्चिमी भाग अपेक्षाकृत गर्म रहते हैं, जैसा कि पश्चिमी प्रशान्त ऊष्ण पूल में देखा जाता है। कथन 2 सही है: शीतोष्ण अक्षांशों में प्रचलित पछुआ पवनें धरातलीय जल को पश्चिम से पूर्व की ओर ढकेलती हैं, जिससे महासागरों के पूर्वी भाग गर्म रहते हैं, उदाहरणस्वरूप पश्चिमी यूरोप के तट पर गल्फ स्ट्रीम-उत्तरी अटलांटिक अपवाह की गर्म धारा तथा उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट की ठण्डी कैलिफोर्निया धारा। अतः दोनों कथन सही हैं, विकल्प (ग) उत्तर है।
- प्रश्न 59
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कथन 1 सही है: भारत का जलवायु-स्मार्ट गाँव दृष्टिकोण जलवायु परिवर्तन, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा सम्बन्धी CGIAR शोध कार्यक्रम (CCAFS) के नेतृत्व वाली एक पहल का अंग है, जिसे भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् तथा अन्य संस्थानों के साथ साझेदारी में लागू किया जा रहा है। कथन 3 सही है: हैदराबाद के निकट पाटनचेरू में स्थित ICRISAT पन्द्रह CGIAR शोध केन्द्रों में से एक है तथा शुष्क-भूमि कृषि पर केन्द्रित है। कथन 2 गलत माना गया है: CGIAR सिस्टम संगठन का मुख्यालय फ़्रांस के मोंट्पेलिएर में स्थित है, परन्तु उत्तर-कुंजी के अनुसार इसे गलत माना गया है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।
- प्रश्न 60
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यह विवरण उष्णकटिबन्धीय वर्षा-वन का है। ऐसे वनों में गर्म व आर्द्र दशाएँ पत्तियों के अवशेषों के अपघटन को इतना तीव्र कर देती हैं कि भूतल लगभग नंगा रहता है। ऊँची सघन वितान-छत भूतल पर वनस्पति को सीमित कर देती है; इसके स्थान पर पौधे लताओं के रूप में वितान तक पहुँचते हैं अथवा वृक्षों की शाखाओं पर अधिपादप के रूप में उगते हैं। शंकुधारी एवं शुष्क पतझड़ी वनों में अपघटन धीमा होता है तथा अवशेष संचित होते हैं, जबकि मैंग्रोव वनों में श्वसन-मूलों के साथ विशिष्ट लवण-सहिष्णु वनस्पति पाई जाती है। अतः यह विवरण उष्णकटिबन्धीय वर्षा-वन का है, विकल्प (घ) सही उत्तर है।
- प्रश्न 61
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सवाना वन और मरुस्थल के बीच का संक्रमणीय परिमंडल है। बार-बार लगने वाली प्राकृतिक एवं मानवजनित आग (2) पेड़ों के पौधों को जला देती है जबकि घास शीघ्र पुनः उग आती है। बड़े चरने तथा पत्ते खाने वाले शाकाहारी (3) नवोद्भिद वृक्षों को खाकर वनस्पति का पुनरुत्थान रोक देते हैं। वर्ष भर असमान रूप से बंटी मौसमी वर्षा (4) तथा लंबे शुष्क काल अग्निसहिष्णु घासों के पक्ष में होते हैं। बिल खोदने वाले जंतु, दीमक तथा मृदा गुण प्रमुख कारक नहीं हैं। अतः 2, 3 और 4 सही हैं और विकल्प (ग) उत्तर है।
- प्रश्न 62
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पृथ्वी पर मीठे जल का वितरण बहुत असमान है। लगभग 68.7 प्रतिशत मीठा जल हिमनदों तथा ध्रुवीय हिम-शीर्षों में बंद है, लगभग 30.1 प्रतिशत भूजल के रूप में है, और मात्र 0.3 प्रतिशत ही नदियों एवं झीलों में पाया जाता है। इसलिए कथन 1 गलत है क्योंकि नदियों और झीलों के जल की मात्रा भूजल से कहीं कम है। कथन 2 सही है क्योंकि ध्रुवीय हिम-शीर्ष और हिमनद भूजल से अधिक मीठा जल धारण करते हैं। अतः केवल कथन 2 सही है, विकल्प (ख)। पृथ्वी का अधिकांश मीठा जल मानव-उपयोग हेतु सीधे उपलब्ध नहीं है।
- प्रश्न 63
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कथन 1 गलत है क्योंकि सहजन (मोरिंगा) मोरिंगेसी कुल का है, फलीदार कुल का नहीं, अतः यह दलहनी वृक्ष नहीं है। कथन 2 गलत है क्योंकि इमली का पेड़ मूलतः उष्णकटिबंधीय अफ्रीका, विशेषकर सूडान का स्थानिक है, यद्यपि दक्षिण एशिया में अब प्राकृतिकीकृत है। कथन 3 सही है: भारत में अधिकांश इमली लघु वन उपज के रूप में संग्रहीत होती है। कथन 4 सही है: भारत इमली तथा सहजन के बीज निर्यात करता है। कथन 5 भी सही है: सहजन और इमली के बीजों के तेल से जैव डीज़ल बनाया जा सकता है। अतः 3, 4 और 5 सही हैं, विकल्प (ख)।
- प्रश्न 64
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काली कपासी मृदा, जिसे रेगुर भी कहते हैं, मॉन्टमोरिलोनाइट जैसी मृत्तिका खनिजों से समृद्ध होती है तथा उच्च लौह एवं मैग्नीशियम तत्व के कारण गहरी काली होती है। यह मृदा दक्कन ट्रैप के बेसाल्टी लावा प्रवाहों के यथास्थान अपक्षयण से बनी है, जो दरार-प्रकार की ज्वालामुखीय चट्टानें हैं और उत्तर क्रीटैशियस से प्रारंभिक इओसीन काल में निक्षेपित हुईं। उच्च मृत्तिका अंश इसे प्रबल नमी-धारण क्षमता तथा स्व-मल्चिंग गुण देता है, जो कपास की खेती के लिए उपयुक्त है। यह भूरी वन मृदा, ग्रेनाइट, शिस्ट, शेल या चूना-पत्थर से नहीं बनी है। अतः विकल्प (ख) सही है।
- प्रश्न 65
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पुनर्योगज वाहक टीके लक्ष्य रोगाणु के प्रतिजन को कोडित करने वाले आनुवंशिक पदार्थ को किसी हानिरहित वाहक जीव के जीनोम में सम्मिलित करके पहुँचाते हैं। कथन 1 सही है क्योंकि ऐसे टीकों का निर्माण आनुवंशिक अभियांत्रिकी तकनीकों द्वारा प्रतिजन जीन को वाहक में जोड़कर किया जाता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि क्षीणीकृत साल्मोनेला जैसे जीवाणु तथा एडिनोवायरस या रूपांतरित वैक्सीनिया अंकारा जैसे विषाणु—दोनों वाहकों के रूप में नियमित प्रयोग होते हैं। अनेक कोविड-19 टीके पुनर्योगज विषाणु-वाहक टीके हैं। अतः दोनों कथन सही हैं और विकल्प (ग) उत्तर है।
- प्रश्न 66
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उत्तर: ग
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कथन 1 सही है: माइटोकॉन्ड्रियल प्रतिस्थापन चिकित्सा में जनक के अंडाणु या युग्मनज के केंद्रक को स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रिया वाले दानकर्ता के अंडाणु में स्थानांतरित किया जाता है, अतः यह निषेचन से पहले (मातृ स्पिंडल स्थानांतरण) या निषेचन के बाद (पूर्व-केंद्रक स्थानांतरण) दोनों समय की जा सकती है, जिससे माइटोकॉन्ड्रियल रोगों का संचरण रोका जा सके। कथन 2 भी सही है: माइटोकॉन्ड्रिया लगभग पूर्णतः माता से अंडाणु के कोशिकाद्रव्य द्वारा वंशागत होते हैं, जबकि शुक्राणु के पैतृक माइटोकॉन्ड्रिया निषेचन के बाद नष्ट हो जाते हैं। अतः दोनों कथन सही, विकल्प (ग)।
- प्रश्न 67
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उत्तर: ख
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बोलगार्ड I तथा बोलगार्ड II मॉन्सेंटो द्वारा विकसित आनुवंशिक रूप से रूपांतरित कपास की प्रौद्योगिकियाँ हैं, जिनमें मृदा-जीवाणु बैसिलस थ्यूरिंजिएन्सिस (बीटी) के कीटनाशी प्रोटीन को व्यक्त किया जाता है। बोलगार्ड I में एक बीटी जीन (Cry1Ac) समाविष्ट है जो अमेरिकन बॉलवर्म से प्रतिरक्षा देता है, जबकि बोलगार्ड II में एक अतिरिक्त जीन (Cry2Ab) जोड़ा गया है, जो विभिन्न लीपिडॉप्टेरा कीटों के विरुद्ध व्यापक रक्षा देकर प्रतिरोध-विकास में विलंब करता है। ये क्लोनी प्रवर्धन, पादप वृद्धि-नियामक या जैव उर्वरक से संबंधित नहीं हैं। अतः विकल्प (ख), आनुवंशिक रूप से रूपांतरित फसली पादपों का विकास, सही उत्तर है।
- प्रश्न 68
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उत्तर: ग
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प्रेशर कुकर के अंदर जल 100 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर उबलता है क्योंकि भीतर की भाप का दाब वायुमंडलीय दाब से ऊँचा रखा जाता है। यह दाब इस बात पर निर्भर करता है कि भाप कितनी आसानी से बाहर निकल सकती है, जिसे ढक्कन में बने छेद का क्षेत्रफल (1) तथा भाप को रोके रखने वाले लदे वाल्व या ढक्कन का भार (3) नियंत्रित करते हैं। ज्वाला का तापमान (2) केवल जल को गरम होने की दर प्रभावित करता है; स्थायी अवस्था में पकाने का तापमान कार्यकारी दाब से ही तय होता है। अतः 1 और 3 महत्वपूर्ण हैं, विकल्प (ग) सही है।
- प्रश्न 69
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उत्तर: क
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जीवाणुओं को कोशिका-रहित संश्लेषित पोषक माध्यमों जैसे न्यूट्रिएंट अगर तथा शोरबा में संवर्धित किया जा सकता है। यीस्ट तथा फफूँदियों सहित अनेक कवक भी सबॉराड डेक्सट्रोज अगर जैसे कृत्रिम माध्यमों पर पनप सकते हैं। परंतु विषाणु बाध्यकारी अंतःकोशिकीय परजीवी होते हैं और प्रतिकृति के लिए जीवित परपोषी कोशिकाओं की आवश्यकता रखते हैं; वे कोशिका-रहित संश्लेषित माध्यम में नहीं बढ़ सकते और इसके स्थान पर कोशिका-संवर्धन, भ्रूणित अंडे या प्रयोगशाला पशुओं की आवश्यकता पड़ती है। अतः केवल जीवाणु एवं कवक ही कृत्रिम माध्यम में संवर्धित हो सकते हैं, विषाणु नहीं। सही उत्तर विकल्प (क), केवल 1 और 2 है।
- प्रश्न 70
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उत्तर: ख
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कथन 1 गलत है: एडिनोवायरस के जीनोम द्वि-रज्जुक डीएनए होते हैं, जबकि एचआईवी जैसे रेट्रोवायरस के जीनोम एक-रज्जुक आरएनए होते हैं जिन्हें विपरीत-अनुलेखन द्वारा डीएनए में परिवर्तित किया जाता है। कथन में यह वर्णन उल्टा है। कथन 2 सही है: सामान्य ज़ुकाम कभी-कभी अन्य श्वसन विषाणुओं के साथ-साथ एडिनोवायरस से भी होता है, और एड्स एचआईवी रेट्रोवायरस से होता है। अतः केवल कथन 2 सही है, विकल्प (ख)। एडिनोवायरस का व्यापक उपयोग अब आधुनिक टीका मंचों में वाहक के रूप में भी किया जा रहा है।
- प्रश्न 71
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उत्तर: क
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जल किसी भी अन्य सामान्य द्रव की तुलना में अधिक पदार्थों को घोल सकता है क्योंकि उसका अणु ध्रुवीय होता है। ऑक्सीजन हाइड्रोजन की अपेक्षा अधिक विद्युत-ऋणात्मक है, अतः जल के अणु में ऑक्सीजन के समीप आंशिक ऋण-आवेश तथा हाइड्रोजनों के समीप आंशिक धन-आवेश रहता है, जिससे यह द्विध्रुवीय बनता है। यह द्विध्रुवीयता जल को धन तथा ऋण आयनों को घेरने और अनेक ध्रुवीय अणुओं के साथ हाइड्रोजन-बंध बनाने की क्षमता देती है। उच्च विशिष्ट ऊष्मा या ऊष्मा-चालकता विलायक-शक्ति का कारण नहीं है, और हाइड्रोजन का ऑक्साइड होना भी स्वयं घुलनशीलता प्रदान नहीं करता। अतः विकल्प (क) सही है।
- प्रश्न 72
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उत्तर: ग
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कथन 1 गलत है: सोडियम-वाष्प लैंप वस्तुतः सभी दिशाओं में लगभग 360 अंश तक प्रकाश देते हैं, और बिना आवरण के एलईडी चिप भी विस्तृत प्रकीर्णन करते हैं; एलईडी सामान्यतः अपनी पैकेजिंग के कारण ही दिशात्मक होते हैं, स्वाभाविक रूप से नहीं। कथन 2 गलत है: एलईडी पथ-दीप का जीवन-काल (प्रायः 50,000 घंटे या अधिक) सोडियम-वाष्प लैंपों से कहीं अधिक होता है। कथन 3 सही है: निम्न-दाब सोडियम लैंप लगभग एक-वर्णीय पीला प्रकाश देते हैं, जबकि एलईडी विस्तृत वर्णक्रम तथा उच्च वर्ण-प्रदर्शन सूचकांक देकर रंग-संबंधी लाभ प्रदान करते हैं। अतः केवल कथन 3 सही है।
- प्रश्न 73
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उत्तर: घ
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ACE2 का पूरा नाम एंजियोटेंसिन-कन्वर्टिंग एंजाइम 2 है, जो फेफड़ों, आंतों, गुर्दे तथा रक्त-वाहिनियों की कोशिकाओं की सतह पर पाया जाने वाला एक झिल्ली-बंध एंजाइम है। यह विषाणु-रोग के संदर्भ में इसलिए चर्चित हुआ क्योंकि कोविड-19 के कारक SARS-CoV-2 कोरोना विषाणु अपने स्पाइक प्रोटीन के माध्यम से इसी ACE2 ग्राही से जुड़कर मानव कोशिकाओं में प्रवेश करता है। ACE2 का आनुवंशिक रूप से रूपांतरित पादपों, उपग्रह नौचालन प्रणाली या वन्यजीव रेडियो-कॉलर से कोई संबंध नहीं है। अतः विकल्प (घ), विषाणु-जन्य रोगों का प्रसार, ही सही संदर्भ है जिसमें ACE2 शब्द चर्चा में आता है।
- प्रश्न 74
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उत्तर: ख
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बिस्फेनॉल ए अर्थात बीपीए वह प्रमुख एकलक है जिसका प्रयोग फॉस्जीन के साथ मिलकर पॉलीकार्बोनेट प्लास्टिक बनाने में होता है; यह प्लास्टिक अपनी मजबूती, प्रकाशीय पारदर्शिता तथा ऊष्मा-सहिष्णुता के कारण जल की बोतलों, खाद्य-पात्रों, चश्मों तथा इलेक्ट्रॉनिक आवरणों में उपयोग होता है। बीपीए का उपयोग खाद्य डिब्बों की भीतरी एपॉक्सी राल परतों में भी होता है। यह न्यून-घनत्व पॉलीइथिलीन, पॉलीइथिलीन टेरेफ्थैलेट या पॉलीविनाइल क्लोराइड का अंगभूत नहीं है क्योंकि वे क्रमशः एथिलीन, टेरेफ्थैलिक अम्ल एवं एथिलीन ग्लाइकॉल तथा विनाइल क्लोराइड से बनते हैं। अंतःस्रावी विघटन के कारण बीपीए-मुक्त विकल्प प्रचलित हुए हैं। विकल्प (ख) सही है।
- प्रश्न 75
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उत्तर: घ
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ट्राइक्लोसन एक संश्लेषित विस्तृत-प्रभावी जीवाणुरोधी एवं कवकरोधी रसायन है, जिसका विभिन्न व्यक्तिगत-देखभाल उत्पादों में व्यापक उपयोग होता रहा है, जैसे कि टूथपेस्ट, माउथवॉश, जीवाणुरोधी साबुन, गंधनाशक, शैम्पू तथा प्रसाधन-सामग्री। उच्च मात्रा में दीर्घकालिक संपर्क से अंतःस्रावी विघटन, सूक्ष्मजीव-प्रतिरोध तथा जलीय जीवों पर विषाक्तता की चिंताएँ उठी हैं। इसका प्रयोग खाद्य-परिरक्षक, फल-पकाने वाले पदार्थ अथवा पुनः प्रयुक्त प्लास्टिक पात्रों के संरचनात्मक घटक के रूप में नहीं होता। अतः दिए गए विकल्पों में से ट्राइक्लोसन प्रसाधन-सामग्री में पाया जाना सर्वाधिक संभाव्य है, विकल्प (घ) सही है। अनेक नियामकों ने इसके उपभोक्ता उत्पादों में उपयोग पर प्रतिबंध लगाए हैं।
- प्रश्न 76
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उत्तर: घ
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एक प्रकाश-वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश निर्वात में एक वर्ष में तय करता है, जो लगभग 9.46 खरब किलोमीटर के बराबर है। यह इकाई इसलिए सार्थक है क्योंकि निर्वात में प्रकाश की चाल एक मौलिक भौतिक नियतांक है, जो सभी पर्यवेक्षकों के लिए तथा हर समय और स्थान पर समान रहती है। तारकीय पिंडों के बीच की दूरियाँ आकाशगंगाओं की गति के कारण बदलती रहती हैं, गुरुत्व बदलता है, और द्रव्यमान की उपस्थिति में प्रकाश मुड़ भी जाता है। इसलिए विकल्प (क), (ख) और (ग) सही कारण नहीं हैं। खगोलीय दूरियाँ प्रकाश-वर्षों में मापने का मूल कारण यही है कि प्रकाश की चाल सदैव समान रहती है, अतः विकल्प (घ) सही है।
- प्रश्न 77
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उत्तर: क
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कथन 1 सही है: ब्रिटिश संसद संप्रभु है और किसी भी विषय पर बिना न्यायिक अंकुश के विधि बना सकती है, जबकि भारतीय संसद को लिखित संविधान द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर ही विधि बनाने का अधिकार है तथा वह न्यायिक पुनरीक्षण और मूल ढाँचा सिद्धांत के अधीन है। कथन 2 सही है: संसद के किसी अधिनियम या संविधान संशोधन की संवैधानिकता से जुड़े प्रश्नों का निर्णय अनुच्छेद 145(3) के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय की कम-से-कम पाँच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ करती है। अतः दोनों कथन सही हैं और विकल्प (ग) उत्तर है। यही भारतीय और ब्रिटिश संसदीय प्रणालियों का एक मूल अंतर है।
- प्रश्न 78
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उत्तर: ग
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कथन 1 सही है: एन. गोपालस्वामी अयंगर समिति ने अपनी 1949 की रिपोर्ट में सुझाव दिया कि एक मंत्री और एक सचिव विशेष रूप से प्रशासनिक सुधारों के विषय को आगे बढ़ाने और उसे प्रोत्साहित करने के लिए नियुक्त किए जाएँ। कथन 2 सही है: 1966 में मोरारजी देसाई और बाद में के. हनुमंतैया की अध्यक्षता में गठित प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों पर 1970 में कार्मिक विभाग स्थापित किया गया तथा उसे सीधे प्रधानमंत्री के प्रभार में रखा गया। बाद में यह विभाग कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के रूप में विकसित हुआ। अतः दोनों कथन सही हैं और विकल्प (ग) सही उत्तर है।
- प्रश्न 79
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उत्तर: ग
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वर्ष 2017 के ऐतिहासिक न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ निर्णय में उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से यह व्यवस्था दी कि निजता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न अंग है तथा भाग तीन में प्रदत्त स्वतंत्रताओं का भी हिस्सा है। अनुच्छेद 15 भेदभाव के निषेध से, अनुच्छेद 19 विशिष्ट स्वतंत्रताओं से और अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक तथा शैक्षिक अधिकारों से संबंधित है। इसलिए सही उत्तर विकल्प (ग) अनुच्छेद 21 है, जिसके अंतर्गत निजता का अधिकार संरक्षित है।
- प्रश्न 80
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उत्तर: ख
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कथन 1 गलत है: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 33(7) में संशोधन के बाद किसी भी चुनाव, जिसमें लोकसभा चुनाव भी शामिल है, में कोई अभ्यर्थी अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों से ही चुनाव लड़ सकता है। कथन 2 सही है: 1991 के लोकसभा चुनाव में देवीलाल ने तीन निर्वाचन क्षेत्रों रोहतक, सीकर तथा फिरोजपुर से चुनाव लड़ा था; इसके बाद 1996 में संशोधन कर इस संख्या को दो तक सीमित कर दिया गया। कथन 3 गलत है: ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके तहत विजयी अभ्यर्थी की पार्टी को परिणामी उपचुनावों की लागत वहन करनी पड़े। अतः केवल कथन 2 सही है।
- प्रश्न 81
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उत्तर: क
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कथन 1 गलत है: 'राइट टू द सिटी' अब तक विश्व स्तर पर सहमत मानवाधिकार नहीं है जिसकी निगरानी UN-Habitat प्रत्येक देश की प्रतिबद्धताओं के विरुद्ध करता हो; यह एक मानक संकल्पना है जिसे नई शहरी कार्यसूची जैसे दस्तावेज़ों में शामिल किया गया है, परंतु इसकी कोई बाध्यकारी निगरानी व्यवस्था नहीं है। कथन 2 सही है: यह अधिकार शहर को एक सामूहिक स्थान के रूप में देखता है तथा हर निवासी को शासन में भाग लेने एवं सार्वजनिक स्थलों को पुनः अर्जित करने और गढ़ने का हक देता है। कथन 3 सही है: इसके अनुसार राज्य अनधिकृत बस्तियों को बुनियादी सेवाओं और सार्वजनिक सुविधाओं से वंचित नहीं कर सकता। अतः कथन 2 और 3 सही हैं।
- प्रश्न 82
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उत्तर: ख
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कथन 1 गलत है: न्यायिक हिरासत में अभियुक्त संबंधित मजिस्ट्रेट की अभिरक्षा में होता है और उसे जेल में रखा जाता है, न कि पुलिस लॉकअप में; इसके विपरीत पुलिस हिरासत में अभियुक्त को थाने में रखा जाता है। कथन 2 सही है: एक बार जब अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में सौंप दिया जाता है, तो जाँच अधिकारी न्यायालय की विशिष्ट अनुमति के बिना उससे पूछताछ नहीं कर सकता; न्यायालय आगे की पूछताछ की आवश्यकता का मूल्यांकन करने के बाद ही अनुमति देता है। अतः केवल कथन 2 सही है और विकल्प (ख) उत्तर है। पुलिस हिरासत और न्यायिक हिरासत का यह भेद भारतीय दंड प्रक्रिया का मूल आधार है।
- प्रश्न 83
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उत्तर: ख
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कथन 1 गलत है: पैरोल पर्याप्त आधार बनने पर भी अधिकार का विषय नहीं बनती; यह एक विवेकाधीन उपचार है जिसे सक्षम प्राधिकारी कैदी के आचरण, अपराध की गंभीरता, पिछले रिकॉर्ड तथा दुरुपयोग की संभावना के आधार पर युक्तियुक्त कारणों से दे या अस्वीकार कर सकता है। कथन 2 सही है: संविधान की सातवीं अनुसूची में जेल राज्य का विषय है, इसलिए विभिन्न राज्य सरकारों ने पैरोल देने, उसकी शर्तें तय करने तथा उसे रद्द करने को विनियमित करने के लिए अपने-अपने कैदी-रिहाई पैरोल नियम बनाए हुए हैं। अतः केवल कथन 2 सही है और विकल्प (ख) उत्तर है।
- प्रश्न 84
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उत्तर: घ
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अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006, जिसे सामान्यतः वन अधिकार अधिनियम कहा जाता है, आदिवासी समुदायों तथा परंपरागत वन निवासियों के वन-अधिकारों को मान्यता देता है और उनमें निहित करता है। यद्यपि वनों का सामान्य प्रशासन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय देखता है, परंतु इस अधिनियम के क्रियान्वयन का दायित्व केंद्र पर जनजातीय कार्य मंत्रालय को सौंपा गया है, जो दावों की निगरानी, अधिकारों के निपटान तथा राज्यों की क्षमता वर्धन के लिए नोडल मंत्रालय की भूमिका निभाता है। इसलिए सही उत्तर विकल्प (घ) जनजातीय कार्य मंत्रालय है।
- प्रश्न 85
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उत्तर: क
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संविधान का अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समानता तथा विधियों के समान संरक्षण की गारंटी देता है और राज्य के कार्यों में मनमानी का निषेध करता है। उच्चतम न्यायालय ने ई.पी. रोयप्पा, मेनका गांधी और शायरा बानो जैसे मामलों में लगातार यह व्यवस्था दी है कि कोई भी ऐसी विधि जो विधि के लागू होने में कार्यपालिका या प्रशासनिक प्राधिकारी को दिशाहीन, अनियंत्रित और मनमाना विवेकाधिकार प्रदान करती है, वह असंवैधानिक है, क्योंकि मनमानी समानता के सिद्धांत के विपरीत है। अनुच्छेद 28 धार्मिक शिक्षा से, अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों से तथा अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता से संबंधित है। अतः विकल्प (क) अनुच्छेद 14 सही उत्तर है।
- प्रश्न 86
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उत्तर: क
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संघीय व्यवस्था की मूल विशेषता यह है कि शासन के दो स्तर—संघ और राज्य—मौजूद हों और दोनों संविधान से अपनी शक्ति प्राप्त करते हों तथा संघ की संस्थाओं में राज्यों का प्रतिनिधित्व हो। संघीय विधायिका में घटक इकाइयों यानी राज्यों से चुने गए प्रतिनिधियों का होना इसी द्विस्तरीय ढाँचे को दर्शाता है, क्योंकि लोकसभा राज्यवार निर्वाचन क्षेत्रों के माध्यम से जनता का प्रतिनिधित्व करती है और राज्यसभा संघीय सदन के रूप में राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता, बहुदलीय मंत्रिमंडल और मौलिक अधिकारों का न्यायालय द्वारा प्रवर्तन सामान्य लोकतांत्रिक विशेषताएँ हैं, विशेष रूप से संघीय नहीं। अतः विकल्प (ख) ही आवश्यक संघीय लक्षण है।
- प्रश्न 87
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उत्तर: क
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राजनीति शास्त्र में राज्य के चार पारंपरिक तत्व माने जाते हैं—जनसंख्या, निश्चित भूभाग, सरकार तथा संप्रभुता अर्थात बाह्य नियंत्रण से स्वतंत्रता। विकल्प (क) इन चारों तत्वों को समेटता है: व्यक्तियों का समुदाय (जनसंख्या), जो स्थायी रूप से एक निश्चित भूभाग पर निवास करता है (भूभाग), जो बाह्य नियंत्रण से स्वतंत्र है (संप्रभुता) तथा जिसके पास संगठित सरकार है (सरकार)। शेष विकल्प या तो संप्रभुता का उल्लेख नहीं करते, या साझी संस्कृति पर बल देकर राज्य को राष्ट्र से मिला देते हैं, या केवल आंतरिक व्यवस्थाओं तक सीमित रह जाते हैं। इसलिए राज्य की सर्वोत्तम परिभाषा विकल्प (क) में दी गई है।
- प्रश्न 88
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उत्तर: ग
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कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 128 के अंतर्गत भारत के मुख्य न्यायाधीश किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से उच्चतम न्यायालय में बैठने और उसके न्यायाधीश के रूप में कार्य करने का अनुरोध तभी कर सकते हैं जब उस न्यायाधीश की पूर्व सहमति हो और साथ ही राष्ट्रपति की पूर्व सहमति भी प्राप्त की गई हो; केवल राष्ट्रपति की अनुमति पर्याप्त नहीं है। कथन 2 गलत है: उच्चतम न्यायालय अनुच्छेद 137 से व्यापक पुनरीक्षण अधिकारिता प्राप्त करता है, जबकि उच्च न्यायालय की पुनरीक्षण शक्ति अनुच्छेद 226 तथा सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत सीमित दायरे में ही प्रयोग की जाती है, उच्चतम न्यायालय जैसी नहीं। अतः दोनों कथन पूरी तरह सही नहीं हैं और विकल्प (घ) सही उत्तर है।
- प्रश्न 89
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उत्तर: क
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कथन 1 सही है: भारत में पूरे देश के लिए एकल नागरिकता और एकल अधिवास की व्यवस्था है, यहाँ कुछ अन्य संघीय देशों की तरह अलग-अलग राज्य-नागरिकता नहीं है। कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार राष्ट्रपति बनने के लिए केवल यही आवश्यक है कि व्यक्ति भारत का नागरिक हो और लोकसभा का सदस्य चुने जाने के लिए अर्ह हो; जन्म से नागरिक होने की शर्त नहीं रखी गई है, अतः देशीयकरण द्वारा नागरिक बना व्यक्ति भी पात्र है। कथन 3 गलत है: नागरिकता अधिनियम 1955 निर्दिष्ट परिस्थितियों में नागरिकता की समाप्ति और वंचन का प्रावधान करता है। अतः केवल कथन 1 सही है।
- प्रश्न 90
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उत्तर: घ
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उदार लोकतंत्र में स्वतंत्रता की सर्वोत्तम सुरक्षा तभी सुनिश्चित होती है जब राज्य की शक्ति विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका जैसे स्पष्ट अंगों के बीच विभाजित हो और प्रत्येक अंग दूसरे पर अंकुश के रूप में कार्य करे, ताकि सत्ता के दुरुपयोग को रोका जा सके। मॉन्टेस्क्यू द्वारा प्रतिपादित शक्ति-पृथक्करण का सिद्धांत इसी व्यवस्था का मूल आधार है। प्रतिबद्ध न्यायपालिका को आमतौर पर शंका की दृष्टि से देखा जाता है क्योंकि यह न्यायिक स्वतंत्रता को कमज़ोर करती है; शक्ति का केंद्रीकरण स्वतंत्रता के विपरीत है; और केवल निर्वाचित सरकार होने मात्र से सत्ता एकत्रित होकर निरंकुश भी हो सकती है। अतः विकल्प (घ) शक्ति-पृथक्करण ही स्वतंत्रता का सर्वोत्तम संरक्षक है।
- प्रश्न 91
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उत्तर: ख
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संविधान का अनुच्छेद 39, जो भाग चार में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों का अंग है, राज्य को निर्देश देता है कि समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार वितरित हो कि सामूहिक हित की पूर्ति हो, तथा आर्थिक प्रणाली के संचालन से धन और उत्पादन के साधनों का संकेन्द्रण सामान्य अहित में न हो। इसलिए धन का संकेन्द्रण मूल अधिकारों, समता के अधिकार या स्वतन्त्रता के अधिकार का उल्लंघन न होकर, सीधे तौर पर भाग चार में निहित नीति निर्देशक तत्वों का उल्लंघन माना जाएगा। अतः विकल्प (ख) सही है।
- प्रश्न 92
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उत्तर: ख
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सम्पत्ति का अधिकार मूलतः अनुच्छेद 19(1)(च) तथा अनुच्छेद 31 के अधीन एक मूल अधिकार था। संविधान के चवालीसवें संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इसे मूल अधिकारों की सूची से हटाकर भाग बारह में नये अध्याय चार के अन्तर्गत अनुच्छेद 300क के रूप में रखा गया, जो उपबन्धित करता है कि किसी भी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी सम्पत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। यह केवल नागरिकों ही नहीं, बल्कि किसी भी व्यक्ति की रक्षा करता है और संवैधानिक विधिक अधिकार है, मूल अधिकार नहीं। अतः विकल्प (ख) ठीक स्थिति का वर्णन करता है।
- प्रश्न 93
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उत्तर: ख
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जब 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ, तब प्रस्तावना में भारत को केवल एक प्रभुत्व-सम्पन्न लोकतान्त्रिक गणराज्य घोषित किया गया था। समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्द बहुत बाद में आपातकाल के दौरान संविधान के बयालीसवें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में जोड़े गये। इसलिए 26 जनवरी 1950 को भारत की संवैधानिक स्थिति केवल एक प्रभुत्व-सम्पन्न लोकतान्त्रिक गणराज्य की थी, न कि प्रभुत्व-सम्पन्न पंथनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणराज्य या प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणराज्य की। अतः विकल्प (ख) उस तिथि की संवैधानिक स्थिति का सटीक वर्णन है।
- प्रश्न 94
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उत्तर: घ
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संवैधानिक शासन का अर्थ है ऐसी सरकार जिसकी शक्तियाँ किसी लिखित या अलिखित संविधान की शर्तों से सीमित हों। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि सत्ता का प्रयोग करने वाले लोग विधिक सीमाओं के अधीन होते हैं, जिन्हें न्यायपालिका जैसी संस्थाओं के माध्यम से लागू किया जा सकता है; संवैधानिक मानदण्ड, शक्तियों का पृथक्करण और व्यक्तिगत अधिकार मनमाने आचरण को रोकते हैं। यह संघीय व्यवस्था का पर्यायवाची नहीं है, और न ही इसका निर्धारण इस आधार पर होता है कि राज्याध्यक्ष की शक्तियाँ नाममात्र की हैं या वास्तविक। अतः सही परिभाषा विकल्प (घ) है, अर्थात् ऐसी सरकार जो संविधान की शर्तों से सीमित हो।
- प्रश्न 95
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हलबी, हो और कुई भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाने वाली जनजातीय भाषाएँ हैं। हलबी एक भारोपीय भाषा है जिसका प्रयोग छत्तीसगढ़, ओडिशा और निकटवर्ती क्षेत्रों की जनजातियाँ करती हैं। हो एक मुण्डा (आस्ट्रोएशियाटिक) भाषा है जो मुख्यतः झारखण्ड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के हो समुदाय द्वारा बोली जाती है। कुई एक द्रविड़ भाषा है जो मुख्य रूप से ओडिशा की कोंध जनजाति बोलती है। ये नृत्य रूप, वाद्ययन्त्र या प्रागैतिहासिक गुफा चित्र नहीं हैं। अतः विकल्प (घ), अर्थात् जनजातीय भाषाएँ, इन शब्दों की सही पहचान है।
- प्रश्न 96
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उत्तर: घ
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प्रश्न पूछता है कि कौन-से कथन सही नहीं हैं। कथन एक गलत है: भारत रत्न और पद्म पुरस्कार अनुच्छेद 18(1) के अर्थ में उपाधि नहीं हैं; उच्चतम न्यायालय ने बालाजी राघवन बनाम भारत संघ (1996) में इन्हें मात्र अलंकरण माना और कहा कि ये अनुच्छेद 18 का उल्लंघन नहीं करते। कथन दो को आधिकारिक उत्तर कुंजी सही मानती है क्योंकि 1954 में स्थापित पद्म पुरस्कार 1977-1980 तथा 1992-1997 के बीच कुछ समय के लिए स्थगित रहे थे। कथन तीन गलत है: भारत रत्न एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों तक सीमित है, पाँच नहीं। अतः कथन एक और तीन सही नहीं हैं, विकल्प (ग)।
- प्रश्न 97
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व्याख्या जल्द उपलब्ध होगी।
- प्रश्न 98
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व्याख्या जल्द उपलब्ध होगी।
- प्रश्न 99
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उत्तर: ख
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कथन एक गलत है: टोक्यो 2020 ओलम्पिक खेलों, अर्थात् बत्तीसवें ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक खेलों, का आधिकारिक आदर्श वाक्य यूनाइटेड बाय इमोशन था, ए न्यू वर्ल्ड नहीं। कथन दो भी गलत है: यद्यपि टोक्यो 2020 के कार्यक्रम में स्पोर्ट क्लाइम्बिंग, सर्फिंग, स्केटबोर्डिंग और कराटे जोड़े गये और बेसबॉल/सॉफ्टबॉल को पुनः शामिल किया गया, परन्तु कथन में दी गयी पाँचों खेल विधाओं का संयोजन ठीक उसी रूप में टोक्यो 2020 के कार्यक्रम से मेल नहीं खाता। अतः न तो कथन एक सही है और न ही कथन दो, जिससे विकल्प (घ) ही सही उत्तर है।
- प्रश्न 100
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उत्तर: घ
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कथन एक गलत है: ICC विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप 2019-21 के फाइनलिस्ट केवल जीते गये मैचों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध अंकों में से अर्जित अंकों के प्रतिशत के आधार पर तय किये गये थे। कथन दो भी गलत है: न्यूज़ीलैंड ऑस्ट्रेलिया से ऊपर रहा और भारत दूसरा फाइनलिस्ट था; न्यूज़ीलैंड का स्थान इंग्लैंड पर अधिक मैच जीतने के कारण नहीं, बल्कि अंकों के प्रतिशत और निरन्तर प्रदर्शन के कारण निर्धारित हुआ। अतः न तो कथन एक सही है और न ही कथन दो, जिससे विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल अर्हता हेतु सही उत्तर विकल्प (घ) है।
