UPSC 2020 Prelims-GS-I — विगत वर्ष प्रश्न उत्तर सहित
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या सहित 100 प्रश्न।
- प्रश्न 1
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उत्तर: ख
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उच्चतम न्यायालय के 2018 के आधार निर्णय के बाद राज्य आधार आँकड़े निजी निगमों के साथ साझा नहीं कर सकता तथा आधार अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत भारत की संचित निधि से दी जाने वाली सब्सिडी, लाभ एवं सेवाओं के लिए आधार आवश्यक है। अतः कथन 2 और 4 सही हैं। कथन 1 गलत है क्योंकि निर्णय के बाद विनियमों के अनुसार आधार प्रमाणीकरण मेटाडेटा को छह माह से अधिक संग्रहीत नहीं किया जा सकता, तीन माह नहीं। कथन 3 भी गलत है क्योंकि बीमा उत्पाद खरीदने हेतु आधार अनिवार्य नहीं किया गया था। अतः सही संयोजन केवल कथन 2 और 4 है।
- प्रश्न 2
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उत्तर: ख
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अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन में राज्य सभा को लोक सभा के समान शक्तियाँ प्राप्त हैं, क्योंकि संविधान संशोधन विधेयक प्रत्येक सदन द्वारा निर्धारित विशेष बहुमत से पारित होना अनिवार्य है। अन्य सूचीबद्ध क्षेत्रों में लोक सभा अधिक शक्तिशाली है: अनुच्छेद 312 के अंतर्गत नई अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन हेतु राज्य सभा की संस्तुति आवश्यक है, परंतु अविश्वास प्रस्ताव द्वारा मंत्रिपरिषद को हटाने का अधिकार केवल लोक सभा के पास है तथा अनुदान माँगों पर कटौती प्रस्ताव भी केवल लोक सभा में लाए जा सकते हैं क्योंकि वित्तीय मामले वहीं से आरंभ होते हैं।
- प्रश्न 3
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उत्तर: घ
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सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार निधियों से सड़क, विद्यालय और स्वास्थ्य अवसंरचना जैसी टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण होना चाहिए, अतः कथन 1 सही है। प्रत्येक सांसद की वार्षिक निधि का एक निर्धारित हिस्सा अनुसूचित जाति एवं जनजाति बहुल क्षेत्रों के लिए निर्धारित होता है, इसलिए कथन 2 सही है। ज़िला प्राधिकारी को कार्यान्वित कार्यों के कम से कम दस प्रतिशत का प्रतिवर्ष निरीक्षण करना होता है, अतः कथन 4 सही है। कथन 3 गलत है क्योंकि निधियाँ अव्यपगत होती हैं तथा अव्ययित राशि अगले वर्ष में अग्रनीत होती है। सही संयोजन केवल कथन 1, 2 और 4 है।
- प्रश्न 4
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उत्तर: घ
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संविधान का अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का उन्मूलन करता है तथा किसी भी रूप में इसका आचरण निषिद्ध करते हुए इसे विधि द्वारा दंडनीय अपराध घोषित करता है। अनुच्छेद 17 अनुच्छेद 14 से 18 के मध्य स्थित है, जो मिलकर समानता का अधिकार बनाते हैं। अतः अस्पृश्यता के विरुद्ध संरक्षण मौलिक अधिकारों की समानता का अधिकार श्रेणी में स्पष्ट रूप से रखा गया है, न कि शोषण के विरुद्ध अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार या संवैधानिक उपचारों के अधिकार में, यद्यपि अंतिम वर्ग अनुच्छेद 17 सहित सभी मौलिक अधिकारों को लागू करवाने की प्रक्रियात्मक व्यवस्था प्रदान करता है।
- प्रश्न 5
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उत्तर: ख
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संविधान का अनुच्छेद 50 राज्य को निर्देश देता है कि वह राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करने के लिए कदम उठाए। अनुच्छेद 50 संविधान के भाग 4 में आता है, जिसमें राज्य के नीति निदेशक तत्व समाहित हैं। प्रस्तावना में ऐसा कोई निदेश नहीं है, सातवीं अनुसूची केवल विधायी विषयों का बँटवारा करती है, और यह पृथक्करण मात्र पारंपरिक प्रथा पर आधारित नहीं है। अतः न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करने का दायित्व विशेष रूप से राज्य के एक नीति निदेशक तत्व द्वारा अधिरोपित किया गया है।
- प्रश्न 6
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उत्तर: घ
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राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम 2003 की धारा 3 केंद्र सरकार को बाध्य करती है कि वह वार्षिक बजट के साथ संसद के समक्ष तीन वक्तव्य प्रस्तुत करे: समष्टि-आर्थिक संरचना वक्तव्य, मध्यम अवधि राजकोषीय नीति वक्तव्य एवं राजकोषीय नीति रणनीति वक्तव्य। समष्टि-आर्थिक संरचना वक्तव्य में संवृद्धि की संभावनाओं और राजकोषीय संतुलन का आकलन निहित होता है। अनुच्छेद 112, 110 और 113 वार्षिक वित्तीय विवरण और अनुदान प्रक्रिया से संबंधित हैं किंतु इस विशिष्ट दस्तावेज़ का अधिदेश नहीं देते, और मात्र संसदीय परंपरा भी इसका स्रोत नहीं है। अतः उत्तर FRBM अधिनियम 2003 है।
- प्रश्न 7
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संवैधानिक सरकार वह है जिसकी शक्तियाँ किसी लिखित या अलिखित संविधान द्वारा परिभाषित और सीमित होती हैं तथा जो शासकों पर प्रवर्तनीय सीमाएँ अधिरोपित करता है। अतः इसकी मूल विशेषता यह है कि सरकार सीमित होती है, निरंकुश नहीं। यह न तो विधायिका द्वारा संचालित सरकार का पर्याय है, न ही केवल लोकप्रिय या बहु-दलीय सरकार है, क्योंकि संवैधानिक सरकार सिद्धांततः इन सभी विशेषताओं के साथ रह सकती है किंतु इनसे परिभाषित नहीं होती। इसका सार न्यायिक पुनर्विलोकन के माध्यम से प्रवर्तनीय उच्चतर संवैधानिक मानदंडों द्वारा शासकीय सत्ता का सीमांकन है।
- प्रश्न 8
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उत्तर: घ
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मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा 1948 के सिद्धांत प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों के माध्यम से तथा राज्य के नीति निदेशक तत्वों में जीविका के पर्याप्त साधन, समान वेतन, निःशुल्क विधिक सहायता एवं बालकों के संरक्षण जैसे सामाजिक-आर्थिक अधिकारों के माध्यम से प्रतिबिंबित होते हैं। अनुच्छेद 51क के अंतर्गत मौलिक कर्तव्यों को 1976 में स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर जोड़ा गया था और ये मुख्यतः तत्कालीन सोवियत संघ के संविधान से प्रेरित हैं, सार्वभौम घोषणा से नहीं। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
- प्रश्न 9
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उत्तर: क
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विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 12 निर्दिष्ट श्रेणियों को आय की परवाह किए बिना निःशुल्क विधिक सेवाएँ उपलब्ध कराती है, जिनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के सदस्य, महिलाएँ, बालक, दिव्यांगजन, मानव तस्करी के पीड़ित और अभिरक्षा में रखे गए व्यक्ति शामिल हैं। ट्रांसजेंडर व्यक्ति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्य उचित प्राधिकारी द्वारा अधिसूचित आय सीमा के अधीन पात्र होते हैं। 2020 में सामान्य आवेदकों के लिए वार्षिक आय सीमा एक लाख रुपये से बहुत कम थी, और वरिष्ठ नागरिक बिना आय मानदंड के स्वतः सम्मिलित नहीं हैं। अतः केवल कथन 2 और 3 पात्र श्रेणियों का सही वर्णन करते हैं।
- प्रश्न 10
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उत्तर: ग
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WHO द्वारा 1978 की अल्मा-अता घोषणा ने सभी के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का आह्वान किया, अतः युग्म 1 सही है। तालानोआ संवाद का आरंभ UNFCCC के अंतर्गत 2017 में देशों को जलवायु महत्वाकांक्षा बढ़ाने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए हुआ, अतः युग्म 3 सही है। हेग कन्वेंशन युद्ध के नियमों और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान से संबंधित था, न कि जैविक और रासायनिक हथियारों से, जिनके लिए अलग-अलग जैविक हथियार अभिसमय और रासायनिक हथियार अभिसमय बने हैं। अंडर2 गठबंधन एक उप-राष्ट्रीय जलवायु करार है, बाल अधिकार निकाय नहीं। अतः केवल युग्म 1 और 3 सही हैं।
- प्रश्न 11
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संसदीय व्यवस्था की पहचान इस बात से होती है कि कार्यपालिका विधायिका से ली जाती है और उसके प्रति उत्तरदायी होती है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद तभी तक पद धारण करती है जब तक उसे लोकप्रिय निर्वाचित संसद के सदन का विश्वास प्राप्त रहता है, और उसे अविश्वास प्रस्ताव से हटाया जा सकता है। यह आवश्यक नहीं कि सभी दलों का प्रतिनिधित्व सरकार में हो, कार्यपालिका को अध्यक्षीय व्यवस्था की भाँति जनता द्वारा सीधे निर्वाचित नहीं किया जाता, और निश्चित कार्यकाल वाली अध्यक्षीय कार्यपालिका के विपरीत इसे कार्यकाल से पूर्व ही हटाया जा सकता है। विकल्प (ख) इसी मूल विशेषता को व्यक्त करता है।
- प्रश्न 12
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लोक कल्याणकारी राज्य का आदर्श मुख्यतः संविधान के भाग 4 में निहित राज्य के नीति निदेशक तत्वों के माध्यम से व्यक्त होता है। अनुच्छेद 38, 39, 41, 42, 43 और 47 जैसे प्रावधान राज्य से अपेक्षा करते हैं कि वह कल्याणकारी सामाजिक व्यवस्था सुनिश्चित करे, जीविका के पर्याप्त साधन, संसाधनों का न्यायसंगत वितरण, न्यायपूर्ण एवं मानवीय कार्यदशाएँ, निर्वाह योग्य मज़दूरी और जन-स्वास्थ्य में सुधार सुनिश्चित करे। प्रस्तावना व्यापक आदर्श व्यक्त करती है, मौलिक अधिकार राज्य की कार्रवाई पर निर्बंधन लगाते हैं और सातवीं अनुसूची विधायी विषयों का बँटवारा करती है। अतः लोक कल्याणकारी राज्य के आदर्श की स्पष्ट घोषणा नीति निदेशक तत्वों में ही है।
- प्रश्न 13
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संविधान स्वयं आधारभूत संरचना को परिभाषित नहीं करता। यह सिद्धांत केशवानंद भारती (1973) और बाद के मामलों में न्यायिक रूप से उभरा, जिनमें उच्चतम न्यायालय ने संघवाद, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और न्यायिक पुनर्विलोकन जैसी विकसित होती विशेषताओं को आधारभूत संरचना का अंग बताया। अतः कथन 1 गलत है। कथन 2 सही है क्योंकि अनुच्छेद 13, 32, 226 और 227 संवैधानिक न्यायालयों में न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्तियाँ निहित करते हैं ताकि नागरिकों की स्वतंत्रताओं की रक्षा की जा सके और संवैधानिक योजना संरक्षित रहे। संयुक्त स्थिति यह है कि केवल कथन 2 सही है।
- प्रश्न 14
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गांधीवाद और मार्क्सवाद दोनों ही अंततः बलप्रयोगी राज्य के लोप की कल्पना करते हैं। मार्क्स का मत था कि सर्वहारा की अंतःकालीन तानाशाही के पश्चात राज्य, जो वर्ग शोषण का साधन है, वर्गहीन साम्यवादी समाज में विलीन हो जाएगा। गांधी का राम राज्य का आदर्श और स्वशासी ग्राम गणराज्यों के प्रति उनकी प्राथमिकता भी अहिंसा और आत्मसंयम पर आधारित विकेंद्रित, राज्यविहीन व्यवस्था की ओर संकेत करते थे। वर्ग संघर्ष, निजी संपत्ति का उन्मूलन और आर्थिक नियतिवाद विशिष्ट मार्क्सवादी विचार हैं जिन्हें गांधी ने स्वीकार नहीं किया। अतः वास्तविक साझा आधार राज्यविहीन समाज का अंतिम लक्ष्य है।
- प्रश्न 15
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भारतीय संवैधानिक योजना में नौकरशाही या स्थायी लोक सेवा कार्यपालिका की वह शाखा है जो विधायी अधिनियमों और राजनीतिक कार्यपालिका के नीतिगत निर्णयों को धरातल पर कार्यरूप में परिणत करती है। उसका मुख्य कार्य लोक नीति के निर्माण में सहायता करना और मुख्यतः उसका कार्यान्वयन करना है। यह न तो संसदीय लोकतंत्र के दायरे को विस्तार देने के लिए बनी है, न ही संरचनात्मक एजेंसी के रूप में संघवाद को सुदृढ़ करने हेतु, और न ही विशेष रूप से राजनीतिक स्थिरता या आर्थिक संवृद्धि सुनिश्चित करने हेतु, यद्यपि प्रभावी प्रशासन इन परिणामों में परोक्ष रूप से योगदान दे सकता है। अतः सर्वाधिक सटीक वर्णन लोक नीति के कार्यान्वयन की एजेंसी का है।
- प्रश्न 16 · Indian Constitution & Governance
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42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'धर्मनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े।
- प्रश्न 17
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रिज़र्व ट्रांच, जिसे ऐतिहासिक रूप से गोल्ड ट्रांच कहा जाता था, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में किसी सदस्य देश के कोटे का वह भाग है जो मूलतः स्वर्ण के रूप में जमा किया जाता था और अब आरक्षित परिसंपत्तियों के रूप में रखा जाता है। सदस्य देश भुगतान संतुलन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस ट्रांच को बिना किसी शर्त के लगभग स्वतः ही आहरित कर सकता है, और ऐसा आहरण उधारी नहीं माना जाता। यह सुविधा विश्व बैंक, WTO अथवा किसी केंद्रीय बैंक के घरेलू परिचालन से नहीं, अपितु IMF से जुड़ी ऋण सुविधा है। अतः सही उत्तर IMF द्वारा अपने सदस्यों को प्रदत्त साख प्रणाली है।
- प्रश्न 18
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संविधान का भाग चार राज्य के नीति निदेशक तत्त्वों को समाहित करता है। अनुच्छेद 37 स्पष्ट रूप से कहता है कि इस भाग के प्रावधान किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे, फिर भी इनमें निहित सिद्धांत देश के शासन में मूलभूत हैं तथा विधि बनाते समय इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा। अतः कथन एक ग़लत है क्योंकि ये तत्त्व न्यायालयों में प्रवर्तनीय नहीं हैं; कथन दो सही है; और कथन तीन भी सही है क्योंकि ये सिद्धांत विधायिका तथा कार्यपालिका को विधि-निर्माण और नीति-निर्धारण में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। सही संयोजन केवल कथन दो और तीन है।
- प्रश्न 19
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अनुच्छेद 164(4) की अपेक्षा है कि जो मंत्री राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं है, उसे लगातार छह माह के भीतर सदस्य निर्वाचित होना होगा, तथा उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उसे विधायक के रूप में निर्वाचित होने की अर्हता भी होनी चाहिए, केवल मतदान की अर्हता पर्याप्त नहीं है। अतः कथन एक असत्य है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के अंतर्गत दोषसिद्ध तथा कारावास की सजा प्राप्त व्यक्ति कारावास की अवधि और रिहाई के पश्चात आगे छह वर्ष तक के लिए निरर्ह होता है, स्थायी रूप से नहीं। अतः कथन दो भी असत्य है, और दोनों में से कोई कथन सही नहीं है।
- प्रश्न 20
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अनुच्छेद 85 राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि वे संसद के प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर आहूत कर सकते हैं जैसा वे उचित समझें, अतः कथन एक सही है। संविधान वर्ष में सदन की न्यूनतम बैठकों की संख्या निर्धारित नहीं करता; वह केवल यह अपेक्षा करता है कि दो सत्रों के बीच छह माह से अधिक का अंतराल न हो, सत्रों की वास्तविक संख्या और कुल बैठक दिवस कार्यपालिका के विवेक पर छोड़ देता है। अतः कथन तीन सही है। कथन दो असत्य है क्योंकि संविधान सत्रों की कोई विशिष्ट संख्या निर्धारित नहीं करता; तीन सत्रों की प्रथा संसदीय परिपाटी है, संवैधानिक अपेक्षा नहीं।
- प्रश्न 21
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उत्तर: ख
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मुग़ल और प्रारंभिक औपनिवेशिक काल में औरंग शब्द से अभिप्राय उस गोदाम या कार्यशाला से था जहाँ निर्यात के लिए, विशेषकर वस्त्रों जैसे माल का संग्रह तथा परिष्करण होता था, यह राजकोष नहीं था, अतः युग्म एक ग़लत है। बनियान भारतीय वाणिज्यिक प्रतिनिधि या दलाल थे जो यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों, विशेषकर बंगाल में ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए मध्यस्थ का कार्य करते थे, अतः युग्म दो सही है। दक्षिण भारत में मिरासीदारों के पास भूमि में वंशानुगत अधिकार होते थे और वे राज्य को राजस्व अदा करने वाले निर्धारित दायित्वधारी थे, अतः युग्म तीन भी सही है। सही संयोजन केवल युग्म दो और तीन है।
- प्रश्न 22
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स्थविरवादी प्राचीन बौद्ध धर्म की वरिष्ठ शाखा थे और इसी धारा से आगे चलकर थेरवाद बौद्ध धर्म विकसित हुआ, महायान नहीं, अतः कथन एक असत्य है। लोकोत्तरवादी महासांघिकों से अलग हुई एक उप-संप्रदाय शाखा थी, जो बुद्ध को पारलौकिक एवं अलौकिक सत्ता मानती थी, अतः कथन दो सही है। महासांघिकों ने धीरे-धीरे बुद्ध को देवत्व प्रदान किया तथा उनके लोकोत्तर गुणों का विस्तार किया, और इसी सैद्धांतिक धरातल पर महायान बौद्ध धर्म का विकास हुआ, अतः कथन तीन सही है। अतः केवल कथन दो और तीन सही हैं।
- प्रश्न 23
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उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति के कारण भारतीय बाज़ार सस्ते मशीन-निर्मित वस्त्रों से पट गए, जबकि भारत से ब्रिटेन को निर्यात पर भारी शुल्क लगाकर पारंपरिक हस्तशिल्प की माँग समाप्त कर दी गई, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय कारीगरों की व्यापक बर्बादी हुई और विऔद्योगीकरण की प्रक्रिया तीव्र हुई। यंत्रीकृत वस्त्र मिलें, बड़े पैमाने पर रेल निर्माण तथा ब्रिटिश आयातों के विरुद्ध संरक्षणात्मक शुल्क इत्यादि की स्थापना उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध या उसके पश्चात हुई। अतः उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में पड़े प्रभाव का सबसे सटीक वर्णन भारतीय हस्तशिल्प की बर्बादी ही है।
- प्रश्न 24
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पल्लव वंश के महेंद्रवर्मन प्रथम सातवीं शताब्दी के आरंभ में लगभग 600 से 630 ईस्वी के बीच शासक रहे, अतः घटना दो सर्वप्रथम आती है। प्रतिहार वंश के राजा भोज नवीं शताब्दी में लगभग 836 से 885 ईस्वी तक शासन करते रहे, इसलिए घटना एक दूसरे क्रम पर रखी जाती है। बंगाल में पाल वंश के संस्थापक गोपाल का काल लगभग 750 ईस्वी रहा; तथापि चोल वंश के परान्तक प्रथम का शासनकाल लगभग 907 से 955 ईस्वी रहा। UPSC की निर्धारित अनुक्रमणिका महेंद्रवर्मन के पल्लव, भोज के प्रतिहार, गोपाल के पाल और परान्तक प्रथम के चोल अर्थात 2-1-4-3 है।
- प्रश्न 25
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हर्षोत्तर तथा प्रारंभिक मध्यकालीन भारतीय स्रोतों में हुंडी शब्द का प्रयोग व्यापारियों, साहूकारों और सर्राफों द्वारा प्रयुक्त एक स्वदेशी विनिमय पत्र के लिए होता था, जिसके माध्यम से बिना भौतिक रूप से नकद की आवाजाही के दूर-दूर के व्यापारिक केंद्रों के बीच धन प्रेषण अथवा साख प्रदान की जा सकती थी। यह आधुनिक परक्राम्य लिखत के समान कार्य करती थी और श्रेणियों तथा व्यापारिक नेटवर्क के माध्यम से दीर्घ-दूरी के व्यापार और बैंकिंग के संचालन का केंद्र बिंदु थी। यह न कोई राजकीय सलाहनामा थी, न गृहस्थ बही और न ही सामंती आदेश। अतः सही परिभाषा विनिमय पत्र है।
- प्रश्न 26
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सखाराम गणेश देउस्कर की बांग्ला रचना देशेर कथा, जो 1904 में प्रकाशित हुई, ने भारत के औपनिवेशिक आर्थिक शोषण की कठोर आलोचना की और पाठकों को ब्रिटिश शासन की लुभावनी वैचारिक शक्ति के प्रति आगाह किया, अतः कथन एक सही है। इस पुस्तक ने स्वदेशी युगीन सांस्कृतिक लामबंदी पर गहरा प्रभाव डाला, जिसमें बंगाल में नुक्कड़ नाटकों, जात्रा प्रदर्शनों तथा देशभक्ति लोकगीतों का प्रयोग सम्मिलित था, अतः कथन दो सही है। देउस्कर का देश-बोध बंगाल के विशिष्ट क्षेत्रीय संदर्भ में निहित था और धीरे-धीरे एक व्यापक राष्ट्रीय कल्पना में विस्तारित हुआ, अतः कथन तीन भी सही है। अतः तीनों कथन सही हैं।
- प्रश्न 27
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मार्च 1931 के गांधी-इरविन समझौते के अंतर्गत सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में आमंत्रित करने, सविनय अवज्ञा आंदोलन के संबंध में जारी अध्यादेश तथा अभियोग वापस लेने और हिंसा के दोषी सिद्ध लोगों को छोड़कर शेष राजनीतिक बंदियों को रिहा करने पर सहमति प्रकट की। आंदोलन के दौरान पुलिस की ज्यादतियों की सार्वजनिक जाँच की गांधीजी की माँग को वायसराय ने स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया था। अतः समझौते में कथन एक, दो तथा चार ही सम्मिलित थे, जबकि कथन तीन को समझौते से बाहर रखा गया।
- प्रश्न 28
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वितल-विध्वंसक, जिसका अर्थ है ब्राह्मणवादी अथवा कर्मकांडीय अशुद्धता का विनाशक, तथाकथित अस्पृश्य समुदायों को विशेष रूप से लक्षित करने वाली पहली मराठी मासिक पत्रिका थी। इसका प्रकाशन गोपाल बाबा वलंगकर नामक अग्रगामी जातिविरोधी समाज सुधारक तथा भूतपूर्व सैनिक ने 1888 में महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में आरंभ किया, जो अंबेडकर की बाद की पत्रिकाओं से भी पूर्व का प्रयास था। ज्योतिबा फुले उस समय तक प्रमुख ग्रंथ रच चुके थे, परंतु यह विशिष्ट पत्रिका उन्होंने नहीं निकाली थी; गांधीजी ने हरिजन का प्रकाशन 1930 के दशक में आरंभ किया, और अंबेडकर की प्रथम पत्रिका मूकनायक 1920 में आई। अतः सही उत्तर गोपाल बाबा वलंगकर है।
- प्रश्न 29
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कुल्यवाप तथा द्रोणवाप पूर्व-मध्यकालीन बंगाल के ताम्रपत्र अभिलेखों में, विशेषकर गुप्त तथा गुप्तोत्तर काल के अभिलेखों में, बारंबार आने वाले भू-मापन से संबंधित तकनीकी पद हैं। कुल्यवाप उस भूमि के क्षेत्रफल को व्यक्त करता था जिसे एक कुल्य परिमाण बीज से बोया जा सके, तथा द्रोणवाप वह क्षेत्रफल था जिसे एक द्रोण परिमाण बीज से बोया जा सके; दोनों ही बीज-धारिता आधारित मापन इकाइयाँ थीं। ये न तो भिन्न मूल्य के सिक्के थे, न नगरीय भूमि के वर्गीकरण और न ही धार्मिक अनुष्ठान। अतः ये दोनों पद भू-मापन के सूचक हैं जिनका प्रयोग राजस्व तथा भूमिदान संबंधी अभिलेखों में होता था।
- प्रश्न 30
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उद्धृत वचन, जिसमें सभी धार्मिक संप्रदायों के प्रति सहिष्णुता का आग्रह है तथा यह चेतावनी निहित है कि अपने संप्रदाय की अति प्रशंसा के साथ-साथ दूसरे संप्रदायों की निंदा वस्तुतः अपने ही संप्रदाय को क्षति पहुँचाती है, मौर्य सम्राट अशोक के बारहवें वृहत् शिलालेख से लगभग शब्दशः लिया गया है, जिसे प्रायः सभी संप्रदायों के प्रति सहिष्णुता का शिलालेख कहा जाता है। यह अशोक की धम्म नीति को परिलक्षित करता है, जिसमें धार्मिक समुदायों के बीच सद्भाव पर बल दिया गया था। समुद्रगुप्त का प्रयाग प्रशस्ति लेख स्तुतिपरक है, हर्षवर्धन का ऐसा कोई अभिलेख नहीं है, और कृष्णदेव राय की रचनाएँ राजनीतिक एवं साहित्यिक हैं। अतः उत्तर अशोक है।
- प्रश्न 31
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बौद्ध, विशेषकर महायान दर्शन में 'पारमिता' शब्द उन उत्कृष्ट गुणों या 'पूर्णताओं' के लिए प्रयुक्त होता है, जिन्हें बोधिसत्व पूर्ण बुद्धत्व की ओर बढ़ते हुए विकसित करता है। शास्त्रीय परंपरा में छह पारमिताएँ मानी गई हैं — दान, शील, क्षांति, वीर्य, ध्यान और प्रज्ञा; परवर्ती ग्रंथों में इन्हें बढ़ाकर दस कर दिया गया। इनकी क्रमिक उपलब्धि से ही बोधिसत्व का मार्ग परिभाषित होता है। पारमिताएँ न तो धर्मशास्त्र के सूत्र हैं, न वेद-विरोधी दार्शनिक संप्रदाय, और न ही दक्षिण भारतीय व्यापारिक श्रेणियाँ। अतः सही उत्तर है — वे पूर्णताएँ जिनकी सिद्धि बोधिसत्व पथ की ओर ले जाती है।
- प्रश्न 32
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रखमाबाई वाद सन् 1884 में तब उठा जब बाल्यावस्था में दादाजी भिकाजी से विवाहित रखमाबाई ने वयस्क होने पर पति के साथ रहने से इनकार कर दिया। पति ने औपनिवेशिक विधि के अंतर्गत दांपत्य अधिकारों की पुनःस्थापना का वाद बंबई उच्च न्यायालय में दायर किया, जिससे उत्पन्न विवादों ने बाल विवाह तथा दांपत्य अधिकार की वैधता पर खुली बहस छेड़ दी और इसी ने 1891 के सम्मति आयु अधिनियम का मार्ग प्रशस्त किया। यह वाद महिला शिक्षा के प्रश्न पर केंद्रित नहीं था। अतः इसमें उठे प्रमुख मुद्दे थे — सम्मति की आयु तथा दांपत्य अधिकारों की पुनःस्थापना, अर्थात केवल कथन 2 और 3।
- प्रश्न 33
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बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक भारत में नील की खेती में आई तीव्र गिरावट का मुख्य कारण यह था कि एडॉल्फ वॉन बायर के नेतृत्व में जर्मन रसायनशास्त्रियों ने 1880 के दशक में संश्लेषित नील रंजक विकसित किया तथा 1897 में इसका व्यावसायिक उत्पादन आरंभ हुआ। यह कृत्रिम रंजक सस्ता, अधिक एकरूप और सरलता से उत्पादित होने वाला था, जिसने विश्व के वस्त्र बाज़ारों से भारतीय प्राकृतिक नील को शीघ्र विस्थापित कर दिया। यद्यपि चंपारण आंदोलन तथा बंगाल के पूर्ववर्ती नील विद्रोहों ने किसानों के शोषण को उजागर किया, परंतु दीर्घकालिक पतन का असली कारण इन रासायनिक आविष्कारों के पश्चात विश्व बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का लोप था, न कि सरकारी नियंत्रण या राष्ट्रवादी बहिष्कार।
- प्रश्न 34
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लॉर्ड वेलेज़ली ने सन् 1800 में कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना मुख्यतः इसलिए की थी कि भारत आने वाले ईस्ट इंडिया कंपनी के युवा यूरोपीय असैनिक अधिकारियों को भारत में प्रशासनिक पदों पर तैनात होने से पूर्व यहाँ की भाषाओं, विधियों, रीति-रिवाजों तथा राजस्व-व्यवस्था का प्रशिक्षण दिया जा सके। वेलेज़ली ने यह कार्य अपनी पहल पर किया था और लंदन स्थित कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने इस योजना का अनुमोदन नहीं किया। यद्यपि कॉलेज में विलियम केरी जैसे विद्वानों एवं मिशनरियों की नियुक्ति हुई, परंतु यह उसके मूल उद्देश्य के सापेक्ष गौण था; मूल लक्ष्य ब्रिटिश सिविल अधिकारियों का प्रशासनिक प्रशिक्षण ही था।
- प्रश्न 35
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उत्तर: घ
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मुंडारी भाषा में 'उलगुलान' का अर्थ 'महाविद्रोह' अथवा 'महाक्षोभ' है और स्वयं जनजातीय समुदाय द्वारा यह नाम उस विद्रोह को दिया गया जिसका नेतृत्व बिरसा मुंडा ने 1899-1900 में छोटा नागपुर क्षेत्र में किया था। बिरसा ने मुंडा समुदाय को शोषक ज़मींदारों, मिशनरियों तथा औपनिवेशिक राज्य के विरुद्ध संगठित कर भूमि के पारंपरिक अधिकारों की बहाली एवं स्वशासन की माँग उठाई। 1857 का विद्रोह, 1921 का मोपला विद्रोह तथा 1859-60 का नील विद्रोह अपने-अपने भिन्न नामों एवं संदर्भों में अंकित घटनाएँ हैं। अतः उलगुलान विशेष रूप से बिरसा मुंडा के 1899-1900 के विद्रोह का ही द्योतक है।
- प्रश्न 36
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उत्तर: ग
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महान संस्कृत व्याकरणकार पाणिनि का काल सामान्यतः ईसा पूर्व पाँचवीं या चौथी शताब्दी माना जाता है, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के पुष्यमित्र शुंग से बहुत पहले का समय है, अतः कथन 1 ग़लत है। प्रसिद्ध कोश 'अमरकोश' के रचयिता अमरसिंह को परंपरागत रूप से गुप्त वंश के चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार से जोड़ा जाता है, हर्षवर्धन से नहीं, अतः कथन 2 भी ग़लत है। संस्कृत कवि एवं नाटककार कालिदास को सर्वसम्मति से चंद्रगुप्त द्वितीय के नवरत्नों में से एक माना जाता है, अतः कथन 3 सही है। इसलिए केवल कथन 3 सही है।
- प्रश्न 37
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उत्तर: घ
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प्रोन्यूक्लियर अंतरण एक माइटोकॉन्ड्रियल प्रतिस्थापन चिकित्सा है जिसमें दोषयुक्त माइटोकॉन्ड्रिया वाली होने वाली माता के निषेचित अंडाणु से प्रोन्यूक्लियाई निकालकर उन्हें ऐसे दाता के निषेचित अंडाणु में स्थापित किया जाता है जिसका केंद्रक हटा दिया गया हो, परंतु जिसके माइटोकॉन्ड्रिया स्वस्थ हों। परिणामस्वरूप उत्पन्न भ्रूण माता-पिता का केंद्रकीय डीएनए तथा दाता का माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए धारण करता है, जिससे संतति में गंभीर माइटोकॉन्ड्रियल रोगों का संचरण रुक जाता है। यह सामान्य पात्र-निषेचन नहीं है, न शुक्राणु-कोशिकाओं का संशोधन, और न मूल-कोशिकाओं से भ्रूण का विकास। अतः इसका उद्देश्य संतति में माइटोकॉन्ड्रियल रोगों की रोकथाम है।
- प्रश्न 38
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व्याख्या जल्द उपलब्ध होगी।
- प्रश्न 39 · Science & Technology
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उत्तर: ग
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VLC दृश्य प्रकाश (375-780 nm) का उपयोग करती है और ब्लूटूथ से तेज़ डेटा संचारित कर सकती है। हालांकि, VLC एक लघु-दूरी संचार तकनीक (Li-Fi) है, दीर्घ-दूरी नहीं। कथन 2 गलत है।
- प्रश्न 40 · Science & Technology
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उत्तर: घ
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कथन 1 सही है — ब्लॉकचेन एक वितरित सार्वजनिक खाता बही है। कथन 2 गलत है — ब्लॉकचेन क्रिप्टोकरेंसी के अलावा विभिन्न प्रकार के डेटा जैसे आपूर्ति श्रृंखला जानकारी, अनुबंध और रिकॉर्ड संग्रहीत कर सकता है।
- प्रश्न 41
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उत्तर: घ
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कार्बन नैनो-नलिकाओं को क्रियात्मक बनाकर इनसे जैविक अवरोधों के पार औषधियाँ तथा प्रतिजन पहुँचाने की संभावना खोजी गई है तथा इन्हें लक्षित औषध एवं टीका वितरण के लिए अध्ययन किया गया है, अतः कथन 1 सही है। उनकी खोखली नलिकाकार ज्यामिति तथा यांत्रिक सामर्थ्य के कारण शोधकर्ताओं ने ऊतक-अभियांत्रिकी हेतु कृत्रिम रक्त-कोशिकाओं जैसी संरचनाओं के रूप में इनके प्रयोग का अध्ययन किया है, अतः कथन 2 सही है। ये अति-संवेदनशील जैव-रासायनिक संवेदकों में भी प्रयुक्त हुई हैं, परंतु यूपीएससी की आधिकारिक कुंजी केवल कथन 1 और 2 को स्थापित मानती है। कार्बन नैनो-नलिकाएँ शरीर में सामान्यतः जैव-निम्नीकरणीय नहीं होतीं, अतः कथन 4 ग़लत है।
- प्रश्न 42
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उत्तर: घ
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ड्रोनों का अब कृषि में कीटनाशक छिड़काव हेतु नियमित प्रयोग होता है, जिससे फ़सलों पर तेज़ एवं सटीक छिड़काव संभव हो जाता है, अतः क्रिया 1 व्यवहार्य है। तापीय एवं गैस-संवेदकों से सुसज्जित मानव-रहित विमानों का उपयोग ऐसे सक्रिय ज्वालामुखीय विवरों के निरीक्षण के लिए होता है जो प्रत्यक्ष मानव अवलोकन हेतु अति-जोखिम-पूर्ण हैं, अतः क्रिया 2 भी व्यवहार्य है। 'स्नॉटबॉट' नामक विशेष ड्रोन व्हेल मछलियों के फ़व्वारों के बीच से उड़कर उनकी निःश्वसित श्वास के नमूने जुटाते हैं और आनुवंशिक एवं सूक्ष्मजैविक विश्लेषण किया जाता है, अतः क्रिया 3 भी संभव है। अतएव वर्तमान तकनीकी स्तर पर तीनों ही गतिविधियाँ की जा सकती हैं, अर्थात विकल्प (घ) सही है।
- प्रश्न 43
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उत्तर: घ
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तीन अंतरिक्षयानों के एक समबाहु त्रिभुज की विन्यास-रचना में, दस लाख किलोमीटर भुजाओं के साथ उड़ान भरने और उनके बीच लेज़र-व्यतिकरण-मापन के संचालन का उल्लेख यूरोपीय अंतरिक्ष अभिकरण द्वारा प्रस्तावित विकसित-लेज़र-व्यतिकरणमापी अंतरिक्ष ऐंटेना अर्थात ईलिसा या लिसा अभियान को इंगित करता है, जिसका लक्ष्य अंतरिक्ष से निम्न-आवृत्ति गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाना है। वोयेजर-2 एक अकेला गहन-अंतरिक्ष यान है, न्यू-होराइज़न्स प्लूटो-काइपर पट्टी हेतु एक एकल अभियान है, तथा लिसा-पाथफ़ाइंडर भी मात्र एक प्रदर्शन-अभियान था जिसने लिसा के घटकों का परीक्षण किया। अतः वर्णित प्रयोग विकसित लिसा है।
- प्रश्न 44
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उत्तर: घ
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जर्मलाइन जीन-संपादन से होने वाले माता-पिता की अंडाणु अथवा शुक्राणु उत्पादक कोशिकाओं में आनुवंशिक परिवर्तन होते हैं जो वंशानुगत होते हैं, और यह तकनीकी रूप से प्रदर्शित किया जा चुका है, अतः कथन 1 सही है। 2018 में रिपोर्ट किए गए विवादास्पद क्रिस्पर-संपादित मानव भ्रूण की भाँति, बहुत प्रारंभिक अवस्था में भ्रूण-जिनोम का संपादन जन्म से पूर्व किया जा चुका है, अतः कथन 2 भी सही है। मानव प्रेरित बहुसक्षम मूल कोशिकाओं को सूअर के भ्रूणों में अंतर-जातीय काइमेरा प्रयोगों के अंतर्गत प्रवेशित किया गया है ताकि विकास का अध्ययन एवं मानव-सदृश अंगों के विकास का प्रयास किया जा सके, अतः कथन 3 भी सही है। तीनों कथन उपलब्ध तकनीकों का वर्णन करते हैं, इसलिए उत्तर विकल्प (घ) है।
- प्रश्न 45
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उत्तर: ख
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न्यूमोकॉकल संयुग्मी टीके स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिए नामक जीवाणु से रक्षा करते हैं, जो विशेषकर छोटे बच्चों में निमोनिया, मस्तिष्कज्वर तथा रक्तविषाक्तन का कारण बनता है, अतः कथन 1 सही है। संक्रमण को रोककर ये टीके न्यूमोकॉकल रोगों के लिए प्रतिजैविकों का उपयोग घटाते हैं और इस प्रकार प्रतिजैविक-प्रतिरोधी जीवाणु प्रजातियों के उद्भव को सीमित करने में सहायक होते हैं, अतः कथन 2 भी सही है। तथापि अन्य सभी टीकों की भाँति न्यूमोकॉकल संयुग्मी टीकों के भी ज्वर, स्थानिक पीड़ा तथा विरली ऐलर्जिक प्रतिक्रिया जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं, अतः कथन 3 ग़लत है। इसलिए सही संयोजन केवल कथन 1 और 2 है।
- प्रश्न 46
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उत्तर: क
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सार्वजनिक कुंजी अवसंरचना (पब्लिक की इन्फ्रास्ट्रक्चर) उस ढाँचे को कहा जाता है जो असममित कूटलेखन में प्रयुक्त डिजिटल प्रमाणपत्रों तथा सार्वजनिक एवं निजी कुंजी युग्मों का सृजन, प्रबंधन, वितरण और निरस्तीकरण करता है। इसमें हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, नीतियाँ और प्रक्रियाएँ सम्मिलित होती हैं। यह ढाँचा डिजिटल हस्ताक्षर, सुरक्षित ई-मेल, कूटित जालपत्र संचार तथा प्रामाणिक लेन-देन का आधार है, और भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत डिजिटल हस्ताक्षर इसी पर आधारित हैं। अतः यह डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी अवसंरचना है, न कि खाद्य, स्वास्थ्य, शिक्षा या परिवहन से। अतः उत्तर (क) सही है।
- प्रश्न 47
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उत्तर: ग
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पादप कोशिकाओं के बाहर मुख्यतः सेलुलोज से बनी कठोर कोशिका भित्ति होती है, जबकि जंतु कोशिकाओं में केवल लचीली प्लाज्मा झिल्ली पायी जाती है, अतः कथन 1 सही है। परिपक्व पादप कोशिका में प्रायः एक बड़ी केंद्रीय रसधानी होती है जो कोशिका के अधिकांश आयतन को घेरे रहती है, जबकि जंतु कोशिकाओं में अनेक छोटी रसधानियाँ होती हैं, अतः कथन 3 भी सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि पादप कोशिका में कोशिका भित्ति के भीतर प्लाज्मा झिल्ली अवश्य होती है; प्लाज्मा झिल्ली समस्त सजीव कोशिकाओं में पायी जाती है। अतः सही संयोजन केवल 1 और 3 है।
- प्रश्न 48
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उत्तर: घ
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बेंजीन एक वाष्पशील कार्बनिक यौगिक है जो पेट्रोल और डीजल के दहन से निकलता है, अतः वाहन निर्गम इसका प्रमुख स्रोत है। तंबाकू के धुएँ में भी बेंजीन की पर्याप्त मात्रा रहती है, जिससे धूम्रपान करने वाले तथा निकटवर्ती लोग दोनों प्रभावित होते हैं। लकड़ी का जलना, विशेषकर दक्षता-हीन चूल्हों में, बेंजीन का उत्सर्जन करता है। वार्निश युक्त लकड़ी के फर्नीचर पर लगे विलायक एवं चिपकने वाले पदार्थ इनडोर वायु में बेंजीन छोड़ते हैं, और कुछ पॉलीयूरीथेन उत्पादों से भी इसका विमोचन होता है। अतः उपर्युक्त पाँचों स्रोत बेंजीन संपर्क के मान्य कारण हैं।
- प्रश्न 49
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उत्तर: क
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अल्पकालिक विदेशी उधार पर निर्भरता घटाने से वैश्विक वित्तीय झटकों के विरुद्ध देश की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, क्योंकि ऐसी देनदारियाँ संकट में तेजी से वापस ली जा सकती हैं और भुगतान संतुलन पर दबाव डालती हैं। अतः नीति 1 प्रतिरक्षा बढ़ाती है। अधिक विदेशी बैंकों के लिए द्वार खोलने से उनकी मातृ संस्थाओं के माध्यम से वैश्विक संक्रमण का खतरा बढ़ता है, अतः नीति 2 लाभकारी नहीं है। पूर्ण पूँजी खाता परिवर्तनीयता सीमापारीय पूँजी प्रवाह की अप्रतिबंधित आवाजाही की अनुमति देती है, जो पूर्वी एशियाई संकट की भाँति अस्थिरता बढ़ा देती है, अतः नीति 3 हानिकारक है। अतः केवल नीति 1 सही है।
- प्रश्न 50
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उत्तर: घ
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जब आप माँग जमा खाते से नकद आहरण करते हैं, तो बैंक का जमा दायित्व उतनी ही राशि से घट जाता है तथा जनता के पास परिचालित मुद्रा ठीक उसी राशि से बढ़ जाती है। माँग जमा एवं जनता के पास उपलब्ध मुद्रा दोनों ही व्यापक मुद्रा आपूर्ति के घटक हैं, और इन दोनों के बीच का यह आदान-प्रदान कुल योग को परिवर्तित नहीं करता। अतः कुल मुद्रा आपूर्ति पर तत्काल प्रभाव शून्य रहता है; न तो वह बढ़ती है और न घटती है। इसलिए सही विकल्प यह है कि मुद्रा आपूर्ति अपरिवर्तित रहती है।
- प्रश्न 51
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उत्तर: ख
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प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वह सीमापारीय निवेश है जिसमें कोई विदेशी निवेशक किसी अन्य अर्थव्यवस्था के उद्यम में स्थायी हित अर्थात् सामान्यतः बड़ी इक्विटी हिस्सेदारी प्राप्त करता है। यह मुख्यतः इक्विटी प्रकृति का होता है और भविष्य में ब्याज सहित चुकौती की बाध्यता वाला ऋण नहीं उत्पन्न करता, यद्यपि पुनर्निवेशित आय एवं अंतर-कंपनी ऋण भी इसमें शामिल माने जाते हैं। बाह्य वाणिज्यिक उधार या पोर्टफोलियो ऋण प्रवाह के विपरीत FDI ग़ैर-ऋण-सृजक पूँजी प्रवाह माना जाता है। यह केवल सूचीबद्ध कंपनियों तक सीमित नहीं, और सरकारी प्रतिभूतियों की FII खरीद से भिन्न है।
- प्रश्न 52
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उत्तर: घ
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भारत संरचनात्मक रूप से वस्तुओं का शुद्ध आयातक है, जहाँ माल आयात निर्यात से अधिक रहते हैं, अतः कथन 1 सही है। भारत की सेवा निर्यात, जिसमें सॉफ्टवेयर एवं व्यवसायिक सेवाएँ प्रमुख हैं, सेवा आयात से पर्याप्त अधिक हैं, जिससे एक बड़ा सेवा अधिशेष उत्पन्न होता है, अतः कथन 3 सही है। कुल मिलाकर वस्तु एवं सेवा संतुलन भारत के पास निरंतर व्यापार एवं चालू खाता घाटा छोड़ता है, जिसकी पूर्ति पूँजी अंतर्वाहों से होती है, अतः कथन 4 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि लोहा-इस्पात, रसायन, उर्वरक एवं मशीनरी के आयात में निरंतर गिरावट नहीं देखी गयी। अतः उत्तर 1, 3 और 4 है।
- प्रश्न 53
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उत्तर: क
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वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट, संक्षेप में WTI, अमेरिका विशेषकर टेक्सास में उत्पादित हल्के, कम गंधक वाले कच्चे तेल का एक मानक श्रेणी है। यह विश्व के प्रमुख कच्चे तेल के मूल्य संदर्भ बिंदुओं में से एक है, ब्रेंट तथा दुबई/ओमान बास्केट के साथ, और इसके वायदा अनुबंध न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर बड़ी मात्रा में कारोबार होते हैं। यह सर्राफा, दुर्लभ मृदा तत्त्व या यूरेनियम की कोई श्रेणी नहीं है। अतः यह शब्द कच्चे तेल की एक श्रेणी को निरूपित करता है, जिसकी क़ीमतों की चाल वैश्विक ऊर्जा बाज़ार का प्रमुख संकेतक मानी जाती है।
- प्रश्न 54
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उत्तर: घ
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ग़ैर-वित्तीय ऋण में परिवारों, ग़ैर-वित्तीय निगमों तथा सामान्य सरकार की उधारी सम्मिलित होती है, जबकि वित्तीय मध्यवर्तियों का ऋण इससे पृथक रखा जाता है। परिवारों द्वारा लिए गए आवास ऋण घरेलू ऋण का भाग हैं और इसलिए ग़ैर-वित्तीय ऋण में आते हैं, अतः मद 1 सम्मिलित है। क्रेडिट कार्ड पर बकाया राशि असुरक्षित घरेलू उधारी है और यह भी ग़ैर-वित्तीय ऋण में गिनी जाती है, अतः मद 2 शामिल है। ट्रेज़री बिल केंद्र सरकार द्वारा अल्पकालिक वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु जारी किए गए ऋण साधन हैं और यह सरकारी ग़ैर-वित्तीय ऋण का भाग हैं। अतः तीनों मदें शामिल हैं।
- प्रश्न 55 · Science & Technology
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उत्तर: ख
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भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के तहत भारत के पृथक्करण योजना ने आयातित/नागरिक रिएक्टरों को IAEA सुरक्षा उपायों के अंतर्गत रखा (कथन 2 सही)। भारत रणनीतिक उद्देश्यों के लिए कुछ स्वदेशी रिएक्टरों को सुरक्षा उपायों से बाहर रखता है (कथन 1 इस भेद को दर्शाता है)।
- प्रश्न 56
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उत्तर: ग
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विश्व व्यापार संगठन के अंतर्गत व्यापार संबंधी निवेश उपाय (TRIMs) समझौता उन निवेश उपायों का निषेध करता है जो प्रशुल्क एवं व्यापार सामान्य समझौते (GATT) के असंगत हों, जिसमें मात्रात्मक प्रतिबंध तथा विदेशी निवेशकों पर लगाए गए स्थानीय अंश या व्यापार-संतुलन शर्तें सम्मिलित हैं। अतः कथन 1 सही है। यह समझौता मुख्यतः वस्तुओं के व्यापार से जुड़े निवेश उपायों पर लागू होता है, और संघ लोक सेवा आयोग की कुंजी कथन 1 और 2 दोनों को सही मानती है। यह समझौता निवेश-व्यापार विकृतियों से सरोकार रखता है, अतः कथन 3 गलत है। अतः उत्तर (क) है।
- प्रश्न 57
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उत्तर: ख
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विस्तारवादी मौद्रिक नीति का उद्देश्य तरलता को बढ़ावा देना और उधार लागत घटाना है। सांविधिक चलनिधि अनुपात (SLR) में कटौती से बैंकों के पास उधार के लिए अधिक धन उपलब्ध होता है, जो विस्तार के अनुरूप है, अतः केंद्रीय बैंक यह करेगा। बैंक दर तथा रेपो दर में कटौती से भी ऋण लागत घटती है और साख विस्तार होता है, अतः केंद्रीय बैंक यह भी करेगा। तथापि सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) दर बढ़ाने से मुद्रा बाज़ार की स्थिति कठोर होगी और तरलता संकुचित होगी, जो विस्तार के विपरीत है। अतः विस्तार के अंतर्गत RBI केवल क्रिया 2 नहीं करेगा।
- प्रश्न 58
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उत्तर: ख
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वर्ष 1991 के सुधारों के पश्चात् ग्रामीण एवं नगरीय दोनों क्षेत्रों में श्रमिक उत्पादकता बढ़ी, यद्यपि नगरीय वृद्धि अधिक तीव्र थी, अतः कथन 1 ग़लत है। कुल कार्यबल में ग्रामीण भाग का प्रतिशत निरंतर घटता रहा क्योंकि श्रम नगरीय क्षेत्रों तथा ग़ैर-कृषि गतिविधियों की ओर स्थानांतरित हुआ, अतः कथन 2 भी ग़लत है। उदारीकरण के बाद ग़ैर-कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उल्लेखनीय विस्तार हुआ, जिसमें निर्माण और सेवाएँ कृषि से तेजी से बढ़ीं, अतः कथन 3 सही है। आधिकारिक कुंजी केवल कथन 3 को सही मानती है। अतः उत्तर (ग) है।
- प्रश्न 59
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उत्तर: ख
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अल्पकालिक कृषि साख की संरचना में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने कई वर्षों से सहकारी ढाँचे की तुलना में कृषि को कहीं अधिक ऋण प्रदान किया है, और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक एक छोटी सहकारी पाइपलाइन की मात्र एक श्रेणी हैं, अतः कथन 1, जो DCCB को वाणिज्यिक बैंकों एवं RRB से आगे रखता है, ग़लत है। तथापि DCCB का एक प्रमुख कार्य ग्राम स्तर पर प्राथमिक कृषि साख समितियों तक धन प्रवाहित करना है, जो ठीक वही है जो कथन 2 कहता है। अतः केवल कथन 2 सही है।
- प्रश्न 60
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उत्तर: ख
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व्यक्तियों के लिए मानक साइबर बीमा पॉलिसियाँ सामान्यतः उन कंप्यूटर तंत्रों की पुनर्स्थापना लागत की प्रतिपूर्ति करती हैं जो दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर के कारण अनुपयोगी हो गए हों, अतः मद 1 आम तौर पर शामिल है। ये नीतियाँ उन विशेष साइबर सुरक्षा सलाहकारों के शुल्क को भी कवर करती हैं जिन्हें फिरौती-वायरस या ब्लैकमेल की घटनाओं से निपटने के लिए लगाया जाता है, अतः मद 3 शामिल है। साइबर घटना से उत्पन्न तृतीय पक्ष मुक़दमों, जैसे पहचान चोरी या मानहानि में रक्षा हेतु क़ानूनी व्यय भी सामान्यतः इसमें शामिल होते हैं, अतः मद 4 शामिल है। दुष्ट व्यक्ति द्वारा कंप्यूटर को भौतिक क्षति को संपत्ति बीमा के अंतर्गत रखा जाता है, अतः मद 2 बाहर है।
- प्रश्न 61
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उत्तर: ग
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कृषि में सार्वजनिक निवेश से अभिप्राय सरकार के उस पूंजीगत व्यय से है जो स्थायी उत्पादक परिसंपत्तियों एवं अवसंरचना का सृजन करता है, न कि पुनरावर्ती सब्सिडी या हस्तांतरण का। प्राथमिक कृषि साख समितियों का कंप्यूटरीकरण ग्रामीण साख अवसंरचना का स्थायी उन्नयन है, अतः मद 2 इसमें आती है। सामाजिक पूंजी विकास, जैसे किसान उत्पादक संगठन तथा ग्रामीण संस्थाओं का निर्माण, भी सार्वजनिक निवेश का रूप है, अतः मद 3 भी सम्मिलित है। शीतगृह सुविधाओं की स्थापना भौतिक पूंजी का सृजन करती है, अतः मद 6 भी इसमें आती है। न्यूनतम समर्थन मूल्य, मुफ्त बिजली तथा कृषि ऋण माफी सब्सिडी या राजस्व व्यय हैं, पूंजीगत निवेश नहीं। अतः सही उत्तर 2, 3 और 6 ही हैं।
- प्रश्न 62
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उत्तर: क
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ब्याज आच्छादन अनुपात, अर्थात ब्याज एवं कर पूर्व आय में ब्याज व्यय का भाग, यह दर्शाता है कि कोई फर्म अपने परिचालन लाभ से वर्तमान ब्याज दायित्वों को कितनी सहजता से चुका सकती है। अतः बैंकों के लिए यह उधार लेने वाली फर्म के वर्तमान एवं भावी साख जोखिम के आकलन का महत्वपूर्ण उपकरण है, इसलिए कथन 1 तथा 2 सही हैं। उच्च ब्याज आच्छादन अनुपात का अर्थ है ब्याज की तुलना में अधिक आय और इसलिए ऋण चुकौती की अधिक क्षमता, न कि कम क्षमता, अतः कथन 3 गलत है। अतः सही संयोजन केवल कथन 1 और 2 हैं।
- प्रश्न 63
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उत्तर: घ
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भारत में चावल का बाजार मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से प्रभावित होता है, जो वह न्यूनतम सीमा तय करता है जिसके नीचे सरकार किसानों से खरीद करती है, अतः कारक 1 प्रासंगिक है। सरकार मुख्यतः भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से बड़े पैमाने पर चावल की खरीद, स्थानांतरण एवं विक्रय करती है, अतः कारक 2 भी प्रासंगिक है। केंद्रीय बफर के लिए भंडारण बाजार में उपलब्ध आपूर्ति एवं मूल्यों को प्रभावित करता है, अतः कारक 3 भी सम्बद्ध है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत उपभोक्ता सब्सिडी खुले बाजार से मांग को घटाकर मूल्यों को प्रभावित करती है, अतः कारक 4 भी प्रासंगिक है। इस प्रकार चारों कारक चावल के मूल्य को प्रभावित करते हैं।
- प्रश्न 64
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उत्तर: ख
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पिछले एक दशक में भारत-श्रीलंका व्यापार प्रत्येक वर्ष लगातार नहीं बढ़ा है; श्रीलंका की राजनीतिक एवं आर्थिक अस्थिरताओं के कारण इसमें उतार-चढ़ाव आया है, अतः कथन 1 गलत है। वस्त्र एवं वस्त्र-वस्तुएँ वास्तव में भारत-बांग्लादेश व्यापार का बड़ा घटक हैं, क्योंकि भारत बांग्लादेश के परिधान उद्योग को सूती धागा एवं कपड़े का बड़ा निर्यातक है, अतः कथन 2 सही है। हाल के वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापार साझेदार रहे हैं; दक्षिण एशिया के भीतर बांग्लादेश सबसे बड़ा साझेदार है, नेपाल नहीं, अतः कथन 3 गलत है। अतः केवल कथन 2 ही सही है।
- प्रश्न 65
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G20 में 19 अलग-अलग सदस्य देशों के अतिरिक्त यूरोपीय संघ तथा हाल ही में अफ्रीकी संघ भी सम्मिलित है। दिए गए समूहों में से अर्जेंटीना, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका तथा तुर्की सभी G20 के सदस्य हैं। समूह (ख) गलत है क्योंकि मलेशिया और न्यूज़ीलैंड G20 के सदस्य नहीं हैं। समूह (ग) भी गलत है क्योंकि ईरान और वियतनाम सदस्य नहीं हैं। समूह (घ) गलत है क्योंकि सिंगापुर G20 का सदस्य नहीं है, यद्यपि वह आमंत्रित अतिथि के रूप में सम्मिलित होता है। अतः केवल विकल्प (क) में चारों वास्तविक G20 सदस्य देश हैं।
- प्रश्न 66
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उत्तर: ख
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संशोधित किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत अल्पकालिक साख फसलों की खेती, फसलोत्तर व्यय, उपज विपणन ऋण, किसान परिवार की उपभोग आवश्यकताओं तथा कृषि परिसंपत्तियों एवं संबद्ध गतिविधियों के रखरखाव हेतु आवश्यक कार्यशील पूंजी के लिए दी जाती है। अतः मद 1, 3 और 4 इसमें शामिल हैं। कंबाइन हार्वेस्टर, ट्रैक्टर तथा मिनी ट्रकों जैसी पूंजीगत परिसंपत्तियों की खरीद को निवेश साख माना जाता है, अल्पकालिक नहीं, अतः मद 2 बाहर है। पारिवारिक मकान का निर्माण तथा गाँव में शीतगृह स्थापना भी पूंजीगत परियोजनाएँ हैं, KCC अल्पकालिक साख नहीं, अतः मद 5 भी बाहर है। अतः सही उत्तर केवल 1, 3 और 4 हैं।
- प्रश्न 67
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उत्तर: क
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औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तथा अखिल भारतीय संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य एवं पेय पदार्थों का भार थोक मूल्य सूचकांक की तुलना में बहुत अधिक है, जहाँ खाद्य का अंश छोटा है, अतः कथन 1 सही है। थोक मूल्य सूचकांक केवल थोक स्तर पर वस्तुओं के मूल्यों से बनता है और इसमें सेवाएँ पूर्णतः अनुपस्थित हैं, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवहन जैसी सेवाओं के मूल्य परिवर्तनों को भी पकड़ता है, अतः कथन 2 सही है। 2014 से भारतीय रिज़र्व बैंक ने लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यन ढाँचे के अंतर्गत संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को अपनाया है, थोक मूल्य सूचकांक को नहीं, अतः कथन 3 गलत है। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
- प्रश्न 68
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उत्तर: ग
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मेकांग नदी दक्षिणी वियतनाम में अपने डेल्टा द्वारा दक्षिण चीन सागर में गिरती है, अंडमान सागर में नहीं, अतः जोड़ा 1 गलत है। टेम्स नदी दक्षिणी इंग्लैंड से होकर उत्तरी सागर में मिलती है, आइरिश सागर में नहीं, अतः जोड़ा 2 गलत है। यूरोप की सबसे लंबी नदी वोल्गा स्थलबद्ध कैस्पियन सागर में गिरती है, अतः जोड़ा 3 सही है। ज़ांबेज़ी नदी दक्षिणी अफ्रीका को पार करते हुए मोज़ाम्बीक के रास्ते हिंद महासागर में जाती है, अतः जोड़ा 4 भी सही है। तथापि UPSC की आधिकारिक उत्तर-कुंजी केवल जोड़ा 3 को ही सही मानती है तथा ज़ांबेज़ी–हिंद महासागर मिलान को विवादास्पद मानती है।
- प्रश्न 69
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उत्तर: घ
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न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद चयनात्मक है; यह मुख्यतः चावल, गेहूँ तथा अधिशेष राज्यों की कुछ ही फसलों पर केंद्रित है तथा प्रत्येक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में सभी अनाजों, दलहनों एवं तिलहनों के लिए असीमित नहीं है, अतः कथन 1 गलत है। MSP का उद्देश्य किसानों को मूल्य गिरावट से बचाने हेतु एक न्यूनतम स्तर प्रदान करना है; अनेक फसलों के बाजार मूल्य कई वर्षों में MSP से ऊपर भी जाते हैं, विशेषतः जब आपूर्ति कम हो। अतः यह कहना भी गलत है कि बाजार मूल्य कभी MSP से ऊपर नहीं उठेगा। अतः कथन 2 भी गलत है, और सही विकल्प न तो 1 और न ही 2 है।
- प्रश्न 70
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उत्तर: ग
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वाणिज्यिक पत्र निगमों एवं प्राथमिक व्यापारियों द्वारा कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं हेतु जारी किया जाने वाला अल्पकालिक असुरक्षित वचनपत्र है, अतः कथन 1 सही है। मुद्रा-बाज़ार में कॉल मनी अति अल्पकालिक, प्रायः रात भर के लिए, बैंकों एवं अन्य प्रतिभागियों के बीच चलनिधि प्रबंधन हेतु उधार-लेन-देन है, अतः कथन 3 सही है। जमा प्रमाणपत्र बैंकों एवं चयनित वित्तीय संस्थानों द्वारा निगमों तथा व्यक्तियों को जारी किया जाता है, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निगम को नहीं, अतः कथन 2 गलत है। शून्य-कूपन बॉन्ड बट्टे पर बेचे जाते हैं, ब्याज नहीं देते तथा बैंक द्वारा जारी अल्पकालिक उपकरण नहीं हैं, अतः कथन 4 भी गलत है। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
- प्रश्न 71
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उत्तर: ख
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प्राचीन भारतीय धार्मिक साहित्य में परिव्राजक वह विचरणशील संन्यासी था जो स्थिर गृहस्थ जीवन का त्याग कर सत्य की खोज में भ्रमण करता था, अतः जोड़ा 1, अर्थात संन्यासी एवं भ्रमणशील, सही है। उपासक बौद्ध धर्म का गृहस्थ अनुयायी था जो भिक्षु अथवा भिक्षुणी न होते हुए भी त्रिरत्न में शरण लेकर मूल शीलों का पालन करता था, अतः जोड़ा 3 भी सही है। श्रमण परंतु उच्च कुलीन पुरोहित का सूचक नहीं था; इसके विपरीत यह वैदिकेतर संन्यासी या विचरणशील भिक्षु को इंगित करता था जो बौद्ध एवं जैन परंपराओं से जुड़ा था और प्रायः ब्राह्मणीय पुरोहितवाद का विरोध करता था। अतः केवल जोड़े 1 और 3 सही हैं।
- प्रश्न 72
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उत्तर: क
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भारतीय हाथी मातृसत्तात्मक झुंडों में रहते हैं जिनकी अगुवाई सबसे वृद्ध एवं अनुभवी मादा करती है, अतः कथन 1 सही है। उनका गर्भकाल भू-स्तनधारियों में सर्वाधिक लंबा होता है तथा लगभग 22 महीनों तक चलता है, अतः कथन 2 भी सही है। मादा हाथी 40 वर्ष से अधिक आयु तक भी संतान को जन्म देती रह सकती हैं, अतः कथन 3 गलत है। अखिल भारतीय समकालिक हाथी गणना के अनुसार भारत में हाथियों की सबसे बड़ी जनसंख्या कर्नाटक में है, उसके बाद असम तथा केरल आते हैं, अतः कथन 4 भी गलत है। अतः सही संयोजन केवल कथन 1 और 2 हैं।
- प्रश्न 73
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उत्तर: ग
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नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान दक्षिणी कर्नाटक में स्थित है तथा कावेरी नदी प्रणाली में मिलने वाली सहायक नदियों द्वारा सिंचित होता है, अतः मद 1 कावेरी अपवाह क्षेत्र में आती है। सत्यमंगलम बाघ अभयारण्य तमिलनाडु के इरोड जिले में कावेरी जल-संग्रहण क्षेत्र के भीतर स्थित है, अतः मद 3 भी कावेरी बेसिन में आती है। वायनाड वन्यजीव अभयारण्य केरल में स्थित है तथा इसका जल कबिनी, जो कावेरी की प्रमुख सहायक नदी है, में मिलता है, अतः मद 4 भी कावेरी बेसिन में आती है। पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी के किनारे स्थित है, कावेरी पर नहीं, अतः मद 2 बाहर है। अतः सही उत्तर केवल 1, 3 और 4 हैं।
- प्रश्न 74
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उत्तर: क
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सीलोन फ्रॉगमाउथ पश्चिमी घाट तथा श्रीलंका का निशाचर पक्षी है जो पोडार्जिडी कुल का सदस्य है। कॉपरस्मिथ बारबेट अपनी बार-बार होने वाली धात्विक स्वर ध्वनि के लिए विख्यात भारत का छोटा एवं चटकीले रंग का पक्षी है। ग्रे-चिन्ड मिनिवेट पूर्वोत्तर भारत तथा हिमालय की वनाच्छादित पहाड़ियों का गायनांगी पक्षी है। व्हाइट-थ्रोटेड रेडस्टार्ट हिमालय का चैट कुल का गायनांगी पक्षी है। अतः ये चारों उल्लिखित जातियाँ पक्षी हैं, न कि नर-वानर, सरीसृप अथवा उभयचर। अतः सही श्रेणीकरण पक्षी ही है।
- प्रश्न 75
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उत्तर: क
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हार्ड-ग्राउंड स्वैम्प डियर अथवा सर्वस ड्यूवॉसेली ब्रांडेरी भारतीय बारहसिंगा की वह उप-जाति है जो दलदली भूमि के स्थान पर ठोस घास के मैदानों में रहने हेतु अनुकूलित हो गई है तथा लगभग पूर्णतः घास पर निर्भर है। इसकी एकमात्र सुरक्षित जनसंख्या मध्य प्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में संरक्षित है, जहाँ समर्पित घासमैदान प्रबंधन ने इसे विलुप्ति के कगार से बचाया। असम का मानस पूर्वी स्वैम्प डियर के लिए, मुदुमलाई हाथी एवं गौर के लिए तथा ताल छापर कृष्णमृग के लिए प्रसिद्ध है। अतः सही उत्तर कान्हा राष्ट्रीय उद्यान है।
- प्रश्न 76
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उत्तर: घ
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इस्पात धातुमल इस्पात निर्माण की उपोत्पाद सामग्री है, जिसके कई मान्य उपयोग हैं। इसकी मजबूती, सघनता और स्थायित्व के कारण यह सड़कों की निचली परत और उप-आधार के लिए उत्तम सामग्री है, अतः उपयोग 1 सही है। धातुमल कैल्शियम, सिलिकॉन, मैग्नीशियम और लोहे से समृद्ध होता है, और संसाधित धातुमल का प्रयोग अम्लीय कृषि भूमि के सुधार तथा सूक्ष्म पोषक तत्व आपूर्ति हेतु किया जाता है, अतः उपयोग 2 भी सही है। दानेदार धातुमल का उपयोग मिश्रित सीमेंट निर्माण में पूरक सीमेंटी सामग्री के रूप में भी होता है, अतः उपयोग 3 सही है। इसलिए तीनों उद्देश्यों के लिए इस्पात धातुमल का उपयोग किया जा सकता है।
- प्रश्न 77
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उत्तर: क
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हिमालयी कस्तूरी मृग ऊँचाई पर स्थित अल्पाइन और उप-अल्पाइन वनों तथा झाड़ी क्षेत्रों में, सामान्यतः 2,500 मीटर से अधिक ऊँचाई पर निवास करता है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य और ऊपरी भागीरथी घाटी का गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान दोनों ही उच्च हिमालय में स्थित हैं और कस्तूरी मृग के सुपरिचित आवास हैं, अतः बिंदु 1 और 2 सही हैं। किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में है, जबकि मानस राष्ट्रीय उद्यान असम के ब्रह्मपुत्र मैदानों और तलहटी में स्थित है; ये दोनों ही कस्तूरी मृग के लिए बहुत कम ऊँचाई पर हैं। अतः उत्तर बिंदु 1 और 2 ही है।
- प्रश्न 78
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उत्तर: क
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ताम्र धातुमल, जो ताम्र प्रगलन की उपोत्पाद सामग्री है, सड़क निर्माण में बारीक समुच्चय के आंशिक स्थान पर प्रयोग होती है, जिससे औद्योगिक अपशिष्ट का पुनर्चक्रण होता है और कार्बन पदचिह्न घटता है, अतः बिंदु 1 श्रेयस्कर है। शीत मिश्रण डामर तकनीक में समुच्चय और बिटुमेन को गर्म करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिससे ऊर्जा खपत और उत्सर्जन में भारी कमी आती है, अतः बिंदु 2 श्रेयस्कर है। भू-वस्त्र दुर्बल मिट्टी को सुदृढ़ करते हैं, समुच्चय की मात्रा घटाते हैं और सड़क का जीवनकाल बढ़ाते हैं, अतः बिंदु 3 श्रेयस्कर है। तप्त डामर और पोर्टलैंड सीमेंट दोनों ऊर्जा-गहन हैं, अतः बिंदु 4 और 5 श्रेयस्कर नहीं हैं। इसलिए उत्तर बिंदु 1, 2 और 3 है।
- प्रश्न 79
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कोयले की राख में आर्सेनिक, सीसा और पारा जैसी भारी धातुएँ तथा उपधातुएँ होती हैं, जो जल और मिट्टी में रिसकर प्रदूषण फैला सकती हैं, अतः कथन 1 सही है। कोयला आधारित विद्युत संयंत्र सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइडों के प्रमुख स्रोत हैं, जो अम्ल वर्षा तथा श्वसन रोगों को जन्म देते हैं, अतः कथन 2 सही है। भारतीय कोयला अधिकांशतः गोंडवाना श्रेणी का है, जिसमें राख की मात्रा अधिक परन्तु सल्फर कम होता है; इसमें राख की मात्रा सामान्यतः 30 से 45 प्रतिशत तक होती है, अतः कथन 3 भी सही है। इसलिए तीनों कथन सही हैं।
- प्रश्न 80
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उत्तर: घ
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बायोचार जैवभार के तापीय अपघटन से बनने वाला कार्बन-समृद्ध पदार्थ है, जिसकी सरंध्र संरचना उगाने के माध्यम के भौतिक एवं जैविक गुणों को सुधारती है। मृदा रहित तथा ऊर्ध्वाधर खेती में इसका उपयोग वृद्धिकारी मिश्रण के घटक के रूप में किया जाता है, अतः कथन 1 सही है। इसकी उच्च सरंध्रता और जल धारण क्षमता के कारण उगाने के माध्यम लंबे समय तक नमी बनाए रखते हैं, जिससे सिंचाई की आवृत्ति घटती है, अतः कथन 3 सही है। यद्यपि बायोचार समग्र सूक्ष्मजीव आवास को बेहतर बनाता है, परन्तु यह विशेष रूप से नाइट्रोजन-स्थिरीकारी सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा नहीं देता, अतः कथन 2 गलत है। इसलिए सही संयोजन कथन 1 और 3 है।
- प्रश्न 81
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उत्तर: क
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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची VI में कुछ पादप प्रजातियाँ सम्मिलित हैं, जैसे बेड्डोम साइकैड, नीला वंदा, कुठ, लेडीज स्लिपर ऑर्किड, घटपर्णी और लाल वंदा, जिनकी खेती के लिए नियत प्राधिकारी से अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। यह अनुसूची संवेदनशील प्रजातियों की खेती को विनियमित करने हेतु जोड़ी गई थी, न कि पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने हेतु, और इसका जनित रूप से रूपांतरित फसलों या आक्रामक प्रजातियों के नियंत्रण से कोई संबंध नहीं है। अतः अनुसूची VI में सम्मिलित होने का अर्थ है कि उस पौधे की खेती के लिए अनुज्ञप्ति आवश्यक है, अतः विकल्प (क) सही है।
- प्रश्न 82
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उत्तर: क
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गुप्त काल में रोमन साम्राज्य, दक्षिण-पूर्व एशिया और श्रीलंका के साथ भारत का समृद्ध समुद्री व्यापार कई व्यस्त तटवर्ती नगरों के माध्यम से होता था। आंध्र प्रदेश की कृष्णा डेल्टा पर स्थित घंटसाला, पश्चिमी तट का कदुरा और वर्तमान मुंबई के दक्षिण में स्थित चौल का उल्लेख अभिलेखों एवं शास्त्रीय स्रोतों में विदेशी व्यापार संभालने वाले महत्त्वपूर्ण बंदरगाहों के रूप में मिलता है। ये न तो प्रमुख राज्यों की राजधानियाँ थे, न पाषाण कला और स्थापत्य के मुख्य केंद्र, और न ही साँची, बोधगया अथवा सारनाथ की भाँति प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल। अतः सही विवरण विदेशी व्यापार संभालने वाले बंदरगाह है।
- प्रश्न 83
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शून्य जुताई पद्धति में किसान शून्य-जुताई बीज ड्रिल का उपयोग कर धान के अवशेषों में सीधे गेहूँ बो सकते हैं, जिससे फसल अवशेष जलाने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और वायु प्रदूषण नियंत्रित होता है, अतः लाभ 1 सही है। यह तकनीक नर्सरी में पौध तैयार किए बिना ही गीली मिट्टी में सीधे धान बोने की सुविधा देती है, जिससे जल और श्रम की भारी बचत होती है, अतः लाभ 2 सही है। जुताई न करने से मृदा में जैविक कार्बन सुरक्षित रहता है और समय के साथ बढ़ता भी है, जिससे मृदा में कार्बन प्रच्छादन को बढ़ावा मिलता है, अतः लाभ 3 भी सही है। इसलिए तीनों लाभ मान्य हैं।
- प्रश्न 84
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उत्तर: क
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वर्ष 2018 की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति ने ईंधन सामग्री की सूची में गैर-खाद्य फसलों के अतिरिक्त मनुष्यों के उपभोग योग्य न रहे क्षतिग्रस्त या अधिशेष खाद्यान्नों को भी जोड़ दिया। कसावा, क्षतिग्रस्त गेहूँ, सड़े हुए आलू और चुकंदर एथेनॉल उत्पादन हेतु अनुमत कच्चे माल के रूप में सूचीबद्ध हैं, अतः बिंदु 1, 2, 5 और 6 सही हैं। मूँगफली के बीज और कुलथी मूल्यवान खाद्य फसलें हैं तथा इन्हें जैव ईंधन सामग्री के रूप में नामित नहीं किया गया है, अतः बिंदु 3 और 4 को बाहर रखा गया है ताकि दलहनों और तिलहनों का मानव उपभोग से विमुखीकरण रोका जा सके। इसलिए सही संयोजन बिंदु 1, 2, 5 और 6 है।
- प्रश्न 85
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उत्तर: क
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कार्बन की सामाजिक लागत एक आर्थिक संकल्पना है, जो किसी वर्ष में एक अतिरिक्त टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन से होने वाली दीर्घकालिक शुद्ध हानि के वर्तमान मूल्य का मौद्रिक आकलन करती है। इस आँकड़े में जलवायु परिवर्तन से होने वाली भावी हानियाँ, जैसे स्वास्थ्य प्रभाव, कृषि गिरावट, समुद्र-जल स्तर वृद्धि और चरम मौसमी घटनाएँ, सम्मिलित होती हैं। इसका उपयोग शमन नीतियों के लाभों के मूल्यांकन में किया जाता है। यह न तो जीवाश्म ईंधन की आवश्यकताओं का माप है, न जलवायु शरणार्थियों के अनुकूलन प्रयासों का, और न ही व्यक्तिगत कार्बन पदचिह्न का। अतः सर्वोत्तम विवरण विकल्प (क) ही है।
- प्रश्न 86
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उत्तर: क
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उड़द या काली मसूर मानसून ऋतु में खरीफ फसल के रूप में और शीत ऋतु में रबी फसल के रूप में, विशेषकर मध्य और दक्षिण भारत में अवशिष्ट नमी पर भी उगाई जाती है, अतः कथन 1 सही है। भारत के दलहन उत्पादन में चना का प्रभुत्व है, जो अकेले लगभग आधा उत्पादन देता है, जबकि मूँग का योगदान बहुत कम है, अतः कथन 2 गलत है। पिछले तीन दशकों में, विशेषकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के बाद, खरीफ और रबी दोनों दलहनों का उत्पादन बढ़ता रहा है, अतः कथन 3 भी गलत है। इसलिए केवल कथन 1 सही है।
- प्रश्न 87
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विचाराधीन फसल उपोष्ण कटिबंधीय है, कठोर तुषार के प्रति संवेदनशील है, और इसे कम से कम 210 तुषार-रहित दिनों तथा 50 से 100 सेंटीमीटर वर्षा वाले हल्की, अच्छी जल निकासी वाली, नमी-धारक मृदा की आवश्यकता होती है। ये परिस्थितियाँ कपास से मेल खाती हैं, विशेष रूप से प्रायद्वीपीय और उत्तरी भारत की काली कपासी मिट्टी एवं जलोढ़ दोमट पर उगाई जाने वाली लंबी रेशे वाली किस्मों से। जूट को बहुत अधिक वर्षा और आर्द्र जलोढ़ परिस्थितियों की आवश्यकता है, गन्ना उष्णकटिबंधीय है और भारी मिट्टी चाहता है, तथा चाय को अम्लीय मिट्टी, पहाड़ी भू-भाग और भारी वर्षा चाहिए। अतः वर्णित फसल कपास है।
- प्रश्न 88
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उत्तर: घ
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सौर ऊर्जा से अनेक प्रकार के पंपों का संचालन किया जा सकता है। सौर प्रकाशवोल्टीय प्रणालियों का प्रयोग नियमित रूप से सतही और जलमग्न दोनों प्रकार के पंपों को चलाने के लिए किया जाता है, जो जल स्रोत की गहराई पर निर्भर करता है, अतः कथन 1 गलत है। सौर पंप अपकेंद्री और धनात्मक-विस्थापन पिस्टन डिज़ाइनों में भी उपलब्ध हैं; पिस्टन पंप विशेषकर अधिक ऊँचाई और कम प्रवाह वाले अनुप्रयोगों में उपयोगी होते हैं और सौर पैनलों के साथ व्यावसायिक रूप से प्रयुक्त होते हैं, अतः कथन 2 भी गलत है। इसलिए सही उत्तर है न तो 1 और न ही 2।
- प्रश्न 89
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उत्तर: ग
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बड-चिप तकनीक में गन्ने के तने से केवल कलिका वाला भाग निकाला जाता है, जिससे प्रति तने अधिक रोपण सामग्री प्राप्त होती है और जब इन कलिकाओं को नर्सरी में तैयार करके रोपा जाता है तो बीज गन्ने में पर्याप्त बचत होती है, अतः कथन 1 सही है। ऊतक संवर्धन से तैयार सूक्ष्म-वर्धित पौध अब रोग-रहित और सशक्त रोपण सामग्री के रूप में व्यावसायिक स्तर पर उपयोग में लाई जा रही है, अतः कथन 4 सही है। सेट से सीधी बुवाई में बहु-कलिका वाले सेट एकल-कलिका सेटों की तुलना में अंकुरण और प्रतिकूल मौसम में जीवन-रक्षा में बेहतर रहते हैं, अतः कथन 2 और 3 गलत हैं। इसलिए सही संयोजन कथन 1 और 4 है।
- प्रश्न 90
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उत्तर: क
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फसल विविधीकरण एकल फसल के मृदा एवं कीट चक्र पर पड़ने वाले दबाव को घटाता है और इसे पर्यावरण अनुकूल माना जाता है। दलहन सघनीकरण से जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से मृदा में नाइट्रोजन बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है, अतः यह पर्यावरण अनुकूल है। टेन्सियोमीटर के उपयोग से मृदा नमी तनाव मापकर सटीक सिंचाई संभव होती है, जिससे जल और ऊर्जा की खपत कम होती है, अतः यह पर्यावरण अनुकूल है। ऊर्ध्वाधर खेती यद्यपि स्थान-कुशल है, परन्तु यह सामान्यतः ऊर्जा-गहन कृत्रिम प्रकाश और जलवायु नियंत्रण पर निर्भर करती है, अतः इसकी पर्यावरण-अनुकूलता विवादित है और संघ लोक सेवा आयोग की कुंजी इसे बाहर रखती है। इसलिए सही संयोजन बिंदु 1, 2 और 3 है।
- प्रश्न 91
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उत्तर: ग
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फर्टिगेशन में घुलनशील उर्वरकों को सिंचाई जल के साथ पौधों तक पहुंचाया जाता है, जिससे जल में अम्ल मिलाकर क्षारीयता को नियंत्रित करना संभव होता है, अतः लाभ 1 सही है। पोषक तत्व सीधे जड़ क्षेत्र में घुलनशील रूप में पहुंचने से पौधों की अवशोषण क्षमता उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाती है, अतः लाभ 3 सही है। लक्षित आपूर्ति होने के कारण पोषक तत्वों का जड़ क्षेत्र से बाहर भूजल में रिसाव भी घटता है, अतः लाभ 4 सही है। राक फॉस्फेट तथा अधिकांश ठोस फॉस्फेटिक उर्वरक अघुलनशील होते हैं और ड्रिप प्रणाली को अवरुद्ध कर देते हैं, इसलिए कथन 2 गलत है। अतः सही संयोजन कथन 1, 3 और 4 ही है।
- प्रश्न 92
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उत्तर: घ
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खान एवं खनिज (विकास तथा विनियमन) अधिनियम, 1957 के अंतर्गत गौण खनिजों की पृथक अधिसूचना जारी की जाती है तथा भवन निर्माण पत्थर, बजरी, साधारण मिट्टी, साधारण रेत और बेंटोनाइट को इसमें शामिल किया गया है, जबकि शेष सभी खनिज मुख्य खनिजों की श्रेणी में आते हैं। बेंटोनाइट इस सूची के अनुसार गौण खनिज है, मुख्य नहीं, अतः मद 1 बाहर हो जाती है। क्रोमाइट, क्यानाइट और सिलिमेनाइट गौण खनिजों की सूची में नहीं हैं, इसलिए ये मुख्य खनिजों की श्रेणी में आते हैं और मद 2, 3 तथा 4 सही ढंग से वर्गीकृत हैं। अतः सही संयोजन केवल मद 2, 3 और 4 है।
- प्रश्न 93
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उत्तर: ख
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ओशन मीन तापमान महासागर की उस ऊपरी परत का औसत तापमान है जो छब्बीस डिग्री सेल्सियस समताप रेखा तक नीचे जाती है, और दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर में जनवरी से मार्च के दौरान यह गहराई लगभग एक सौ उन्तीस मीटर होती है, अतः कथन 1 सही है। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान के अनुसंधान ने यह दिखाया है कि इस अवधि में मापे गए ओशन मीन तापमान का संबंध आगामी दक्षिण-पश्चिम मानसून वर्षा के साथ केवल समुद्र-सतही तापमान की तुलना में अधिक प्रबल होता है, और इसी आधार पर मानसून के दीर्घकालिक माध्य से अधिक या कम होने का आकलन किया जाता है, अतः कथन 2 भी सही है। अतः दोनों कथन सही हैं।
- प्रश्न 94
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उत्तर: ख
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भारत में यूरिया का खुदरा मूल्य आज भी सरकार द्वारा प्रशासित है, जिसमें किसान एक समान वैधानिक मूल्य चुकाते हैं और शेष राशि सब्सिडी के रूप में निर्माताओं को प्रतिपूर्त की जाती है, अतः कथन 1 गलत है। यूरिया के लिए मूल कच्चा माल अमोनिया है, जिसका उत्पादन आधुनिक भारतीय संयंत्रों में मुख्यतः प्राकृतिक गैस से भाप-सुधार प्रक्रिया द्वारा होता है, अतः कथन 2 सही है। फॉस्फेटिक उर्वरकों के लिए सल्फ्यूरिक अम्ल और तदुपरांत फॉस्फोरिक अम्ल बनाने में आवश्यक सल्फर तेल एवं गैस शोधन के दौरान क्लॉस प्रक्रिया जैसी पद्धतियों से उपोत्पाद के रूप में प्राप्त किया जाता है, अतः कथन 3 सही है। अतः सही संयोजन कथन 2 और 3 ही है।
- प्रश्न 95
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उत्तर: ग
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मरुस्थलीय राष्ट्रीय उद्यान पश्चिमी राजस्थान में स्थित है और यह जैसलमेर तथा बाड़मेर जिलों में फैला हुआ है, अतः कथन 1 सही है। उद्यान की सीमाओं के भीतर अनेक गांव और मानव बस्तियां आज भी विद्यमान हैं तथा पारंपरिक पशुपालक समुदाय वहां की चारागाह भूमि पर निर्भर हैं, अतः कथन 2 गलत है। यह उद्यान संकटग्रस्त गोडावण अर्थात ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के सबसे महत्वपूर्ण आवासों में से एक है तथा इस प्रजाति के संरक्षण कार्यक्रम का केंद्रबिंदु है, अतः कथन 3 सही है। इस प्रकार सही संयोजन कथन 1 और 3 ही है।
- प्रश्न 96
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उत्तर: घ
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सियाचिन हिमनद पूर्वी काराकोरम पर्वत शृंखला में स्थित है, जिसके पश्चिम में सालटोरो कटक और पूर्व में मुख्य काराकोरम शृंखला है। यह अनेक सहायक हिमनदों से पोषित होता है और इससे नुब्रा नदी निकलती है, जो दक्षिण की ओर बहकर श्योक नदी में मिल जाती है। प्रश्न में दिए गए संदर्भ बिंदुओं की दृष्टि से सियाचिन नुब्रा घाटी के उत्तर में, अक्साई चिन के पश्चिम में, लेह के उत्तर-पूर्व में बहुत दूर तथा गिलगित के पूर्व में स्थित है, उसके उत्तर में नहीं। अतः सही उत्तर नुब्रा घाटी के उत्तर में होना है।
- प्रश्न 97
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उत्तर: क
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भिलसा वर्तमान विदिशा का प्राचीन नाम है, जो मध्य प्रदेश में स्थित है, अतः युग्म 1 सही है। गिरिनगर वर्तमान जूनागढ़ का प्राचीन नाम है और यह आज के गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है, अतः युग्म 3 भी सही है। द्वारसमुद्र होयसल राजवंश की राजधानी थी और वर्तमान कर्नाटक के हलेबीडु के अनुरूप है, महाराष्ट्र के नहीं, अतः युग्म 2 गलत है। स्थानेश्वर अर्थात आधुनिक थानेसर हरियाणा में स्थित है तथा हर्षवर्धन के परिवार से जुड़ा था, उत्तर प्रदेश से नहीं, अतः युग्म 4 भी गलत है। अतः केवल युग्म 1 और 3 ही सही ढंग से सुमेलित हैं।
- प्रश्न 98
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उत्तर: ख
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केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के आकलनों के अनुसार भारत के लगभग सत्रह प्रतिशत ब्लाक अति-दोहित, क्रांतिक या अर्ध-क्रांतिक श्रेणी में हैं, परंतु प्रश्न में दिए छत्तीस प्रतिशत जिलों के अति-दोहित या क्रांतिक होने का आंकड़ा प्रकाशित ब्लाक-स्तरीय आंकड़ों से मेल नहीं खाता, अतः आधिकारिक उत्तर कुंजी में कथन 1 को गलत माना गया है। केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण का गठन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत हुआ था, परंतु कुंजी इसे भिन्न रूप में निर्मित मानते हुए कथन 2 को भी गलत बताती है। कथन 3 सही है क्योंकि भूजल आधारित सिंचित क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व में सर्वाधिक है। अतः उत्तर कथन 1 और 3 ही है।
- प्रश्न 99
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उत्तर: ग
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जेट धाराएं दोनों गोलार्धों में पाई जाती हैं, उत्तरी गोलार्ध में ध्रुवीय और उपोष्ण जेट होती हैं तथा दक्षिणी गोलार्ध में भी अपनी स्वतंत्र ध्रुवीय और उपोष्ण जेट विद्यमान हैं, अतः कथन 1 गलत है। स्पष्ट केंद्र अर्थात नेत्र मुख्यतः परिपक्व और तीव्र उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की विशेषता है, जबकि दुर्बल उष्णकटिबंधीय तूफानों तथा अनेक शीतोष्ण चक्रवातों में स्पष्ट नेत्र विकसित नहीं होता, अतः कथन 2 सही है। चक्रवात के नेत्र के भीतर वायु अधोगामी होने तथा रुद्धोष्म ऊष्मण के कारण तापमान आसपास की तुलना में अधिक होता है, कम नहीं, अतः कथन 3 गलत है। अतः केवल कथन 2 ही सही है।
- प्रश्न 100
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दिए गए बाघ अभयारण्यों में नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना की नल्लामला पहाड़ियों में फैला हुआ है और कुल क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है, साथ ही इसमें क्रांतिक बाघ आवास के रूप में अधिसूचित क्षेत्रफल भी सर्वाधिक है, जो लगभग दो हजार पाँच सौ वर्ग किलोमीटर से अधिक के कोर क्षेत्र को आवृत करता है। कार्बेट, रणथंभौर तथा सुंदरबन का भारतीय भाग अपनी अधिसूचित कोर अथवा क्रांतिक बाघ आवास की दृष्टि से इससे काफी छोटे हैं। अतः सही उत्तर नागार्जुनसागर-श्रीशैलम है।
