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मुख्य बिंदु
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 9 जून 2000 को अधिनियमित और 17 अक्तूबर 2000 को लागू हुआ; यह इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य, डिजिटल हस्ताक्षर, साइबर अपराध और डेटा संरक्षण पर भारत का प्राथमिक कानून है; IT (संशोधन) अधिनियम, 2008 द्वारा महत्त्वपूर्ण रूप से संशोधित।
धारा 2 — मुख्य परिभाषाएँ: "कंप्यूटर" अर्थात् इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जो डेटा संसाधित करे; "डेटा" अर्थात् किसी औपचारिक तरीके से तैयार सूचना का प्रतिनिधित्व; "इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड" अर्थात् इलेक्ट्रॉनिक रूप में जनित, प्राप्त, संगृहीत, प्रेषित डेटा।
"निजी क्षेत्र" [धारा 2(y) 2008 संशोधन द्वारा]: अर्थात् नग्न या अंत:वस्त्र-आच्छादित जननांग, जघन क्षेत्र, नितंब या महिला स्तन — यह धारा 66E (गोपनीयता उल्लंघन) के लिए PYQ में आया; ताकझाँक एवं असहमतिपूर्ण अंतरंग छवि वितरण अभियोजन का कानूनी आधार।
धारा 65 — कंप्यूटर स्रोत दस्तावेज़ों से छेड़छाड़: जानबूझकर कंप्यूटर स्रोत कोड छुपाना, नष्ट करना या बदलना (जब कानून द्वारा रखना आवश्यक हो) 3 वर्ष तक कारावास या ₹2 लाख तक जुर्माने से दंडनीय है।
धारा 66 — कंप्यूटर संबंधित अपराध (हैकिंग): यदि कोई धारा 43 में उल्लिखित कार्य बेईमानी से करे, तो 3 वर्ष तक कारावास या ₹5 लाख तक जुर्माना। धारा 43 में: अनधिकृत पहुँच, डेटा डाउनलोड, वायरस, सेवा अवरोध शामिल।
धाराएँ 66A–66F (2008 संशोधन): 66A (आपत्तिजनक संदेश — सर्वोच्च न्यायालय ने श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ 2015 में असंवैधानिक घोषित); 66B (चोरी के कंप्यूटर संसाधन प्राप्त करना); 66C (पहचान की चोरी — 3 वर्ष + ₹1 लाख); 66D (कंप्यूटर से प्रतिरूपण धोखाधड़ी — 3 वर्ष + ₹1 लाख)।
धारा 66E — गोपनीयता का उल्लंघन: बिना सहमति के किसी व्यक्ति के निजी क्षेत्र की छवि जानबूझकर कैप्चर, प्रकाशित या प्रसारित करना 3 वर्ष तक कारावास या ₹2 लाख तक जुर्माने से दंडनीय है। यह ताकझाँक और "रिवेंज पोर्न" को संबोधित करती है।
धारा 66F — साइबर आतंकवाद: भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता को खतरा पहुँचाने या आतंक फैलाने के इरादे से किसी अधिकृत व्यक्ति को कंप्यूटर पहुँच से वंचित करना या बिना प्राधिकरण पहुँचना — आजीवन कारावास तक दंडनीय।
धारा 67 — अश्लील सामग्री प्रकाशन: इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करना — पहली सजा में 3 वर्ष और ₹5 लाख; दोहराने पर 5 वर्ष और ₹10 लाख। धारा 67A यौन सामग्री (5/7 वर्ष); धारा 67B बाल अश्लीलता (5/7 वर्ष, संज्ञेय, अजमानती)।
धारा 69 — अवरोधन/निगरानी/डिक्रिप्शन के निर्देश: केंद्र या राज्य सरकार संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा, मित्र देशों के साथ संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था या उकसावे को रोकने के लिए किसी सरकारी एजेंसी को किसी कंप्यूटर के माध्यम से सूचना अवरोधित, निगरानी या डिक्रिप्ट करने का निर्देश दे सकती है।
धारा 70 — संरक्षित प्रणालियाँ: केंद्र सरकार किसी कंप्यूटर संसाधन को "संरक्षित प्रणाली" घोषित कर सकती है; संरक्षित प्रणाली तक अनधिकृत पहुँच 10 वर्ष तक कारावास और जुर्माने से दंडनीय है। परमाणु, ऊर्जा, बैंकिंग, रक्षा आमतौर पर संरक्षित घोषित।
धाराएँ 72–78: मध्यस्थों द्वारा गोपनीयता उल्लंघन (धारा 72), इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य स्वीकार्यता, कंपनियों द्वारा अपराध (धारा 85), और साइबर अपीलीय न्यायाधिकरण। 2008 संशोधन के बाद धारा 78 निरीक्षक से ऊपर पुलिस अधिकारी को IT अधिनियम अपराधों की जाँच का अधिकार देती है (मूल धारा 78 में DSP या उससे ऊपर था; 2008 संशोधन ने सीमा को निरीक्षक स्तर तक कम किया)।
