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जिला कलेक्टर — ऐतिहासिक उत्पत्ति एवं वर्तमान भूमिका
2.1 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जिला कलेक्टर का पद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था:
- 1772: वॉरेन हेस्टिंग्स ने जिला कलेक्टर का पद बनाया — मुख्यतः जमींदारों से राजस्व संग्रह के लिए।
- 1786: लॉर्ड कॉर्नवालिस ने इस पद को सुदृढ़ किया और कलेक्टर को राजस्व एवं न्यायिक (आपराधिक) दोनों कार्य सौंपे — राजस्व-मजिस्ट्रेट की यह संयुक्त भूमिका आज भी जारी है।
- 1829–1833: कलेक्टर को कानून-व्यवस्था का भी उत्तरदायी बनाया गया — जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका औपचारिक रूप से विलय की गई।
- स्वतंत्रता पश्चात (1947): IAS ने ICS का स्थान लिया; कलेक्टर की भूमिका में विकास प्रशासन, आपदा प्रबंधन और चुनाव कार्य जुड़ गए।
पॉल अप्पलबी का अवलोकन (1953): भारतीय प्रशासन पर अपनी रिपोर्ट में अप्पलबी ने जिला कलेक्टर को "प्रशासनिक व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण पद" कहा — यह वर्णन आज भी सत्य है।
2.2 कलेक्टर की भूमिकाएँ — एक बहु-कार्यात्मक कार्यालय
राजस्थान में जिला कलेक्टर एक साथ कई भूमिकाएँ निभाता है:
