मुख्य बिंदु

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    जिला कलेक्टर (जिला मजिस्ट्रेट — DM) राजस्थान के जिले का धुरी प्रशासक है। IAS अधिकारी होने के नाते, कलेक्टर कार्यकारी, राजस्व, दंडाधिकारी और विकास भूमिकाएँ एक साथ निभाता है। राजस्थान में 50 जिले हैं (2023 पुनर्गठन के अनुसार)।

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    जिला कलेक्टर का पद ईस्ट इंडिया कंपनी के तहत उत्पन्न हुआ — 1786 में लॉर्ड कॉर्नवॉलिस ने बंगाल में राजस्व-संग्रह के लिए यह पद बनाया। धीरे-धीरे न्यायिक, दंडाधिकारी और प्रशासनिक कार्य जुड़े। स्वतंत्रता के बाद विकास कार्य भी जोड़े गए।

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    जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कलेक्टर दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कानून-व्यवस्था, धारा 144, निषेधाज्ञा, भीड़-नियंत्रण और कार्यपालक मजिस्ट्रेटी शक्तियों का प्रयोग करता है।

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    कलेक्टर के रूप में DM भूमि राजस्व संग्रह, भूमि अभिलेखों (खसरा, खतौनी, जमाबंदी) के रखरखाव, नामान्तरण और राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार है। तहसीलदार और नायब-तहसीलदार कलेक्टर के अधीन काम करते हैं।

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    पुलिस अधीक्षक (SP) जिले का वरिष्ठतम IPS अधिकारी है। SP जिला मजिस्ट्रेट के सामान्य अधीक्षण में कानून-व्यवस्था बनाए रखता है लेकिन पुलिस कर्मियों पर स्वतंत्र परिचालन कमान रखता है। यह द्वि-नियंत्रण व्यवस्था शासन की प्रमुख विशेषता है।

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    उप-विभागीय अधिकारी (SDO) उपखंड का प्रशासनिक व राजस्व प्रमुख होता है; तहसीलों की निगरानी, राजस्व कार्य, कार्यपालक मजिस्ट्रेटी और विकास योजनाओं के समन्वय में कलेक्टर की क्षेत्रीय कड़ी है।

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    विकास प्रशासन — कलेक्टर MGNREGS, PMAY, PMGSY, जल जीवन मिशन और राज्य कल्याण योजनाओं की जिला-स्तरीय निगरानी करता है। कलेक्टर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (DISHA) का अध्यक्ष है — केन्द्रीय योजनाओं का अभिसरण।

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    जिला कलेक्टरेट प्रशासनिक मुख्यालय है। जिला योजना समिति (DPC)अनुच्छेद 243ZD (73वाँ/74वाँ संशोधन) — कलेक्टर की अध्यक्षता में जिले के एकीकृत विकास की योजना बनाती है।

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    तहसील प्रशासन — तहसील जिले के नीचे प्राथमिक राजस्व एवं प्रशासनिक इकाई है। प्रत्येक तहसील का प्रमुख तहसीलदार (RAS अधिकारी) होता है — राजस्व संग्रह, भूमि अभिलेख, नामान्तरण, ग्रामीण विकास योजनाएँ और कार्यपालक मजिस्ट्रेट कार्य। राजस्थान में वर्तमान में 333+ तहसीलें हैं।

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    आपदा प्रबंधनआपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (धारा 25) के तहत जिला कलेक्टर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) का प्रमुख है। बाढ़, सूखा, भूकंप में राहत कार्य का नेतृत्व करता है।

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    भूमि अधिग्रहण — कलेक्टर भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (LARR) के तहत प्रमुख क्रियान्वयन प्राधिकरण है। मुआवजा निर्धारण, सामाजिक प्रभाव आकलन और पुनर्वास सुनिश्चित करना।

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    राजस्थान में जिला कलेक्टर की चुनौतियाँ: अत्यधिक कार्यभार, स्थानान्तरण में राजनीतिक हस्तक्षेप (व्यावहारिक औसत कार्यकाल ~1 वर्ष), SP के साथ कानून-व्यवस्था में द्वंद्व, अपर्याप्त क्षेत्र कर्मी, और राज्य स्तरीय स्वीकृति के बिना सीमित व्यय स्वायत्तता।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M राजस्थान में जिला कलेक्टर के राजस्व कार्य क्या हैं? 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

जिला कलेक्टर राजस्थान का प्रमुख राजस्व प्राधिकरण है। राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 के तहत: (1) भूमि राजस्व संग्रह; (2) भूमि अभिलेख (खसरा, खतौनी, जमाबंदी) पर्यवेक्षण; (3) नामान्तरण; (4) LARR 2013 के तहत भूमि अधिग्रहण; (5) तहसीलदार आदेशों पर अपील; (6) गिरदावरी पर्यवेक्षण। कलेक्टर के विरुद्ध अपील राजस्व मंडल, अजमेर में होती है।

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