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लोक प्रशासन

संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

संगठन: अनुक्रम, कमान की एकता, नियंत्रण-विस्तार, प्रत्यायोजन, केंद्रीकरण/विकेन्द्रीकरण, समन्वय

पेपर III · इकाई 2 अनुभाग 10 / 12 PYQ-शैली 23 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

प्र1 (5 अंक — 50 शब्द): नियंत्रण का विस्तार क्या है? Graicunas के सूत्र और Urwick की सिफारिशों की व्याख्या कीजिए।

आदर्श उत्तर:

नियंत्रण का विस्तार उन अधीनस्थों की संख्या है जिन्हें एक पर्यवेक्षक प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर सकता है। V.A. Graicunas (1933) ने दर्शाया कि प्रत्येक अधीनस्थ जुड़ने से संबंध ज्यामितीय अनुपात में बढ़ते हैं: 5 अधीनस्थ 100 संबंध उत्पन्न करते हैं; 6 अधीनस्थ 222 संबंध। Lyndall Urwick ने वरिष्ठ स्तरों पर 5–6 और परिचालन स्तरों पर 8–12 के विस्तार की सिफारिश की। सरकारी उदाहरण: जिला कलेक्टर (वरिष्ठ — 5–6 विभागाध्यक्षों की निगरानी) बनाम तहसीलदार (परिचालन — 10–15 पटवारियों की निगरानी)।


प्र2 (5 अंक — 50 शब्द): प्रत्यायोजन क्या है? प्रत्यायोजन का मूल सिद्धांत क्या है?

आदर्श उत्तर:

प्रत्यायोजन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा उच्चाधिकारी अधीनस्थ को कर्तव्य, अधिकार और उत्तरदायित्व सौंपता है। तत्व (Louis Allen): (1) कार्य सौंपना; (2) अधिकार हस्तांतरण; (3) जवाबदेही। मूल सिद्धांत: अधिकार प्रत्यायोजित किया जा सकता है; अंतिम उत्तरदायित्व नहीं। एक मंत्री जो सचिव को प्रत्यायोजित करता है, उस सचिव के कार्यों के लिए संसद के प्रति मंत्रिस्तरीय रूप से उत्तरदायी बना रहता है। प्रभावी प्रत्यायोजन के लिए स्पष्ट कार्य परिभाषा, पर्याप्त अधिकार और उच्चाधिकारी-अधीनस्थ के बीच परस्पर विश्वास आवश्यक है।


प्र3 (5 अंक — 50 शब्द): केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण में अंतर स्पष्ट कीजिए। भारत में प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।

आदर्श उत्तर:

केंद्रीकरण निर्णय लेने का अधिकार शीर्ष पर केंद्रित करता है — एकरूपता और संकट नियंत्रण सुनिश्चित करता है किंतु धीमा और स्थानीय आवश्यकताओं के प्रति अनुत्तरदायी है। विकेंद्रीकरण अधिकार को निचले स्तरों तक प्रसारित करता है, त्वरित स्थानीय प्रतिक्रिया और भागीदारी सक्षम बनाता है किंतु एकरूपता कम हो सकती है। केंद्रीकरण का उदाहरण: रक्षा और विदेश नीति — विशेष रूप से केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित। विकेंद्रीकरण का उदाहरण: 73वाँ संवैधानिक संशोधन (1992) — पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा देकर निर्वाचित ग्राम पंचायतों को 29 विषय हस्तांतरित; राजस्थान के नागौर जिले में 1959 में भारत की पहली PRIs आरंभ हुईं।


प्र4 (10 अंक — 150 शब्द): संगठन में पदानुक्रम, आदेश की एकता और नियंत्रण के विस्तार के सिद्धांतों की परीक्षा कीजिए। भारतीय जिला प्रशासन में ये सिद्धांत कैसे लागू होते हैं?

आदर्श उत्तर:

पदानुक्रम (स्केलर श्रृंखला, Fayol 1916) प्राधिकार की एक क्रमबद्ध श्रृंखला है जहाँ प्रत्येक स्तर ऊपर वाले के अधीन होता है, जो स्पष्ट जवाबदेही और आदेश चैनल प्रदान करती है। आदेश की एकता (Fayol) के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी केवल एक उच्चाधिकारी से आदेश प्राप्त करता है — भ्रम और पतला जवाबदेही रोकने के लिए। नियंत्रण का विस्तार (Graicunas 1933) उन अधीनस्थों की संख्या सीमित करता है जिन्हें एक पर्यवेक्षक प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर सकता है: ज्यामितीय संबंध वृद्धि विस्तार को सीमित करती है (Urwick की सिफारिश के अनुसार वरिष्ठ स्तरों पर 5–6)।

भारतीय जिला प्रशासन में अनुप्रयोग:

जिला भारत की प्राथमिक प्रशासनिक इकाई है। जिला कलेक्टर (IAS) एक पदानुक्रमित संरचना का नेतृत्व करता है जिसमें तीनों सिद्धांत लागू होते हैं:

पदानुक्रम: कलेक्टर → अतिरिक्त कलेक्टर → उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) → तहसीलदार → नायब तहसीलदार → पटवारी। यह 5–6 स्तरीय पदानुक्रम स्पष्ट आदेश और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। कलेक्टर संभागीय आयुक्त को जवाबदेह है, जो राज्य सरकार को।

आदेश की एकता: प्रत्येक पटवारी एक नायब तहसीलदार को रिपोर्ट करता है। प्रत्येक SDM एक कलेक्टर को। राजस्व प्रशासन में यह सिद्धांत बनाए रखा जाता है। हालाँकि, जब परियोजना प्राधिकारी (जिला अस्पताल, पुलिस, बैंक) अंतर-विभागीय समन्वय के लिए इस श्रृंखला को दरकिनार करते हैं तो उल्लंघन होता है।

नियंत्रण का विस्तार: कलेक्टर के सामान्यतः 5–7 प्रत्यक्ष रिपोर्ट होते हैं (अतिरिक्त कलेक्टर, SP, CMO, DFO, SE — लोक निर्माण, ZP CEO, DRDA निदेशक)। यह Urwick की वरिष्ठ स्तर की सिफारिश के अंतर्गत है। पटवारी स्तर पर, प्रत्येक नायब तहसीलदार 10–15 पटवारियों की निगरानी कर सकता है — नियमित क्षेत्रीय पर्यवेक्षण के लिए उपयुक्त।

व्यावहारिक सीमाएँ: राजस्व प्रशासन सुधार समिति (राजस्थान, 2019) ने पाया कि कुछ सर्किलों में तहसीलदार का विस्तार 20+ पटवारियों तक बढ़ गया था, जिससे अपर्याप्त पर्यवेक्षण और भूमि अभिलेखों में त्रुटियाँ हुईं। यह दर्शाता है कि प्रशासनिक प्रदर्शन के लिए सैद्धांतिक रूप से इष्टतम विस्तार क्यों मायने रखता है।


प्र5 (5 अंक — 50 शब्द): समन्वय क्या है? Mary Parker Follett के समन्वय सिद्धांतों की व्याख्या कीजिए।

आदर्श उत्तर:

समन्वय विभिन्न संगठनात्मक इकाइयों और गतिविधियों को दुहराव या संघर्ष के बिना साझा लक्ष्य की ओर एकीकृत करना है। Mary Parker Follett (1933) ने चार सिद्धांत दिए: (1) प्रारंभिक समन्वय — योजना चरण में समन्वय; (2) प्रत्यक्ष समन्वय — पक्ष बिचौलियों के माध्यम से नहीं, सीधे संवाद करें; (3) सतत समन्वय — निरंतर प्रक्रिया होनी चाहिए; (4) परस्पर संबंध के रूप में समन्वय — सभी पक्ष एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। भारत में कैबिनेट समितियाँ, अंतर-मंत्रालयी बैठकें और जिला समन्वय समितियाँ इन सिद्धांतों को लागू करती हैं।