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मुख्य बिंदु
अनुक्रम (पदसोपान) किसी संगठन में उच्चतम से निम्नतम स्तर तक अधिकार की श्रेणीबद्ध व्यवस्था है। हेनरी फेयोल (1916) ने इसे अनुश्रेणी शृंखला कहा — जिसके जरिये आदेश नीचे और सूचना ऊपर जाती है।
कमान की एकता (फेयोल, 1916): प्रत्येक कर्मचारी को केवल एक वरिष्ठ से आदेश मिलने चाहिए। उल्लंघन से भ्रम, परस्पर-विरोधी आदेश और जवाबदेही की कमी। अपवाद: कार्यात्मक प्राधिकार।
नियंत्रण-विस्तार (V.A. ग्रैक्यूनास, 1933): एक प्रबंधक कितने अधीनस्थों की प्रभावी निगरानी कर सकता है। उर्विक ने उच्च स्तर पर 5–6 और निचले स्तर पर 8–12 अधीनस्थ उचित माना।
प्रत्यायोजन: वरिष्ठ द्वारा अधीनस्थ को कर्तव्य, अधिकार एवं उत्तरदायित्व सौंपने की प्रक्रिया। सिद्धांत: अधिकार का प्रत्यायोजन हो सकता है; उत्तरदायित्व का नहीं। वरिष्ठ अंतिम रूप से जवाबदेह रहता है।
केन्द्रीकरण: निर्णय-निर्माण शक्ति शीर्ष स्तर पर केंद्रित; एकरूपता और समन्वय सरल, परंतु धीमी प्रतिक्रिया और क्षेत्र स्तर पर अनुत्तरदायित्व।
विकेन्द्रीकरण: निर्णय-शक्ति का निम्न स्तरों/स्थानीय निकायों को वितरण। भारत में 73वें एवं 74वें संशोधन (1992) ने पंचायती राज (PRIs) और शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया।
समन्वय: विभिन्न इकाइयों को साझे लक्ष्य में योगदान करने हेतु संरेखित करने की प्रक्रिया। फोलेट (1933): प्रारंभिक समन्वय, प्रत्यक्ष, सतत, और पारस्परिक संबंध के रूप में समन्वय।
रेखा एवं स्टाफ संगठन: रेखा एजेंसियाँ सीधे कार्यक्रम क्रियान्वित करती हैं (जिला प्रशासन, पुलिस, राजस्व); स्टाफ एजेंसियाँ सलाह देती हैं (NITI आयोग, वित्त आयोग)। रेखा-स्टाफ तनाव भारतीय PA में एक स्थायी समस्या है।
औपचारिक बनाम अनौपचारिक संगठन: औपचारिक: निर्धारित भूमिकाएँ, अनुक्रम, नियम। अनौपचारिक: स्वतःस्फूर्त संबंध और संचार नेटवर्क। बार्नार्ड (1938): अनौपचारिक संगठन औपचारिक के लिए अनिवार्य।
कार्यात्मक संगठन (टेलर): प्रत्येक कर्मचारी के कई कार्यात्मक पर्यवेक्षक — विभिन्न पहलुओं के लिए जिम्मेदार। कमान की एकता का उल्लंघन; गहन विशेषज्ञता। कार्यात्मक प्राधिकार: स्टाफ अधिकारी रेखा अधिकारियों को तकनीकी निर्देश दे सकते हैं।
