105. राजस्थान: लोक नीति-निर्माण, क्रियान्वयन की बाधाएँ — पूर्ण नोट्स
Rajasthan: Public Policy Framing, Implementation Bottlenecksपूरा पढ़ने के लिए मुफ़्त में साइन अप करें
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मूल मुख्य बिंदु
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लोक नीति — परिभाषा एवं प्रक्रिया
- सरकारी अभिनेताओं द्वारा सार्वजनिक समस्याओं के समाधान हेतु लिए गए प्राधिकृत निर्णयों का समुच्चय
- राजस्थान की नीति प्रक्रिया में विधानसभा, मंत्रिमंडल, सचिवालय और विभागीय नौकरशाही शामिल
- नागरिक समाज और हितग्राही प्रतिक्रिया की भूमिका बढ़ रही है
- प्रमुख अभिनेता: विधानसभा, मंत्री, IAS सचिवालय, क्षेत्र अधिकारी
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नीति-निर्माण शीर्ष संस्थाएं
- CMO — राजनीतिक दिशा और फ्लैगशिप निगरानी
- कैबिनेट सचिवालय — एजेंडा समन्वय और निर्णय पालन
- योजना विभाग — NITI राजस्थान और राज्य योजना बोर्ड
- वित्त विभाग — बजट और व्यय नियंत्रण
- ये चारों मिलकर नीति-बजट-क्रियान्वयन चक्र नियंत्रित करते हैं
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राजस्थान वार्षिक बजट — प्रमुख नीति दस्तावेज
- 2024-25 बजट: ₹4.18 लाख करोड़ (संशोधित अनुमान)
- प्राथमिकताएं: अवसंरचना, कल्याण योजनाएं (स्वास्थ्य, खाद्य, रोजगार)
- ऋण सेवा राजस्व व्यय का ~20% हिस्सा लेती है
- बजट सरकार की नीति प्राथमिकताओं का सबसे स्पष्ट संकेत है
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क्रियान्वयन की बाधाएं — पांच संरचनात्मक समस्याएं
- (क) अंतिम मील विफलता — योजनाएं लक्षित हितग्राहियों तक नहीं पहुंचतीं
- (ख) प्रशासनिक क्षमता अंतराल — रिक्तियां, क्षेत्र कार्यालयों में कौशल की कमी
- (ग) अंतर-विभागीय समन्वय विफलता — विभागीय साइलो अभिसरण रोकते हैं
- (घ) राजनीतिक हस्तक्षेप — ठेकेदार गठजोड़, हितग्राही सूची में हेरफेर
- (ङ) भूगोल — बड़ा राज्य, कम घनत्व, दुर्गम क्षेत्र
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राजस्थान का शासन सूचकांक प्रदर्शन
- DARPG के GGI 2021 में 20 बड़े राज्यों में 18वां स्थान
- श्रेष्ठ: वाणिज्य और उद्योग, मानव संसाधन विकास
- कमज़ोर: कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, SC/ST कल्याण
- केवल बिहार और उत्तर प्रदेश का स्थान नीचे
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MGNREGS — सफलता और चुनौती
- रोजगार सृजन में भारत का सबसे बड़ा राज्य: 2024-25 में 2,309 लाख मानव-दिवस
- कुल व्यय: ₹7,677 करोड़; ~53 लाख ग्रामीण परिवार लाभान्वित
- साथ ही: भ्रष्टाचार, विलंबित मजदूरी भुगतान (20–60 दिन देरी), फर्जी हाजिरी
- "क्रियान्वयन विरोधाभास" का उदाहरण — पहुंच की व्यापकता बनाम गुणवत्ता की गहराई
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राजस्थान राज्य नीति ढांचा
- राजस्थान विज़न दस्तावेज़ 2047 (2023) — $350 बिलियन GSDP लक्ष्य
- राज्य वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 — प्रदर्शन समीक्षा दस्तावेज
- क्षेत्रीय नीतियां: सौर ऊर्जा नीति 2022, खनिज नीति 2024, RIPS 2022
- राजस्थान संकल्प पत्र 2023 — भाजपा घोषणापत्र नीति प्रतिबद्धता के रूप में
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नागरिक समाज की भूमिका
- MKSS ने RTI आंदोलन प्रारंभ किया
- राजीविका SHG ने ग्रामीण आजीविका नीति प्रभावित की
- जनसुनवाई परंपरा जवाबदेही तंत्र को आकार देती है
- नागरिक समाज यहाँ वकालत से नीति-निर्माण तक पहुंचा — दुर्लभ उपलब्धि
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राजकोषीय चुनौती
- राजकोषीय घाटा: 2022-23 में GSDP का 4.51% (FRBM सीमा 3% से अधिक)
- ऋण भार बड़ा; राजस्व-पूंजी व्यय असंतुलन गंभीर
- राजस्व व्यय: बजट का 75%+ — विकास व पूंजीगत व्यय सीमित
- उच्च ऋण सेवा नीतिगत महत्वाकांक्षाओं को बाधित करती है
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कल्याण योजना वितरण ढांचा
- जन आधार — 97%+ आबादी के लिए पहचान आधार
- DBT (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) — भुगतान तंत्र; रिसाव कम करता है
- राजस्थान संपर्क (हेल्पलाइन 181) — शिकायत निवारण चैनल
- जन सूचना पोर्टल — 100+ योजनाओं का स्वप्रेरित सूचना प्रकाशन
- मिलकर ये राजस्थान का डिजिटल कल्याण वितरण स्टैक बनाते हैं
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जिला कलेक्टर की भूमिका
- जिले में सभी सरकारी कार्यक्रमों के समन्वय का शीर्ष क्षेत्र अधिकारी
- राजस्थान में 50 जिले (2023 पुनर्गठन के बाद)
- हर जिले में जिला कलेक्टर (IAS/RAS) क्रियान्वयन केंद्र
- कलेक्टर राज्य नीति निर्देशों और जमीनी क्रियान्वयन के बीच सेतु
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सामाजिक अंकेक्षण तंत्र
- राजस्थान ने MGNREGS का अनिवार्य वार्षिक सामाजिक अंकेक्षण प्रारंभ किया
- हर जिले में स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण इकाई (SAU) — क्रियान्वयन विभाग से अलग
- SAU ग्रामीणों को रिकॉर्ड पढ़ना, माप सत्यापन, हितग्राही साक्षात्कार सिखाती है
- निष्कर्ष ग्राम सभाओं में प्रस्तुत; निष्कर्षों पर कार्रवाई अनिवार्य
- जवाबदेही उपकरण जो नीति मंशा और क्षेत्र वास्तविकता को जोड़ता है
संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M लोक नीति चक्र के मुख्य चरण क्या हैं? एक राजस्थान योजना पर लागू करें।
आदर्श उत्तर
लोक नीति चक्र के छह चरण: समस्या पहचान, एजेंडा निर्धारण, नीति निर्माण, अंगीकरण, क्रियान्वयन और मूल्यांकन। MAA योजना पर: समस्या = स्वास्थ्य खर्च का बोझ → एजेंडा = चुनावी वादा → निर्माण = ₹25 लाख पैकेज → अंगीकरण = कैबिनेट → क्रियान्वयन = जन आधार + अस्पताल सूचीबद्धता → मूल्यांकन = 2024-25 में 24 लाख मरीज।
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