मुख्य बिंदु

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    • पहचान-आधारित राजनीति जाति, धर्म, भाषा, जनजाति, लिंग जैसी साझा विशेषताओं के आधार पर राजनीतिक गोलबंदी है
    • भारत में 1970 के दशक से जाति पहचान राजनीति की प्रमुख धुरी रही है
    • मंडल आयोग रिपोर्ट (1980) और 1990 में इसके क्रियान्वयन ने OBC राजनीतिक समेकन को उत्प्रेरित किया
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    • मुद्दा-आधारित राजनीति नीति परिणामों पर केंद्रित है
    • 2014 चुनाव में "विकास" और "भ्रष्टाचार-मुक्त शासन" के नारे चले
    • राज्य स्तर पर जाति समीकरण बने रहे — पहचान राजनीति समाप्त नहीं हुई
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    • महिला आरक्षण विधेयक (संविधान का 106वाँ संशोधन अधिनियम, 2023)नारी शक्ति वंदन अधिनियम
    • लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण देता है
    • यह अगले परिसीमन और जनगणना के बाद लागू होगा (संभावित 2026–2028)
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    • 2024 लोकसभा में 74 महिला सांसद (13.6%) — वैश्विक औसत 26.9% से कम
    • भारत IPU लैंगिक रैंकिंग 2024 में 148वें स्थान पर
    • राजस्थान विधानसभा 2023: 200 में से 30 महिला विधायक = 15%
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    • जाति-आधारित राजनीति: 1990 का मंडल क्षण V.P. सिंह के नेतृत्व में OBC पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बनाया
    • UP में SP-BSP (OBC+दलित), बिहार में MY गठजोड़ (मुस्लिम-यादव), तमिलनाडु में द्रविड़ दल
    • 2024 में जाति जनगणना प्रमुख चुनावी मुद्दा बना
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    • सांप्रदायिक राजनीति: जन संघ (1951), हिंदुत्व विचारधारा — धार्मिक पहचान को राजनीतिक स्वरूप दिया
    • बाबरी मस्जिद विध्वंस (1992) और राम मंदिर आंदोलन ने धार्मिक पहचान को चुनावी रूप दिया
    • राम मंदिर प्रतिष्ठा (जनवरी 2024) 2024 के चुनाव में BJP का प्रमुख मुद्दा रही
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    • AI-सक्षम गोलबंदी: सोशल मीडिया पर वोटर प्रोफाइलिंग आधारित माइक्रो-टार्गेटिंग
    • डीपफेक (ऑडियो/वीडियो), AI वॉयस बॉट अभियान — लाखों मतदाताओं तक व्यक्तिगत पहुँच
    • NLP-आधारित जनमत विश्लेषण; चैटबॉट वोटर हेल्पडेस्क
    • 2024 चुनावों में AI-जनित सामग्री का व्यापक उपयोग; ECI ने दिशानिर्देश जारी किए
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    • सोशल मीडिया: भारत में 76 करोड़+ इंटरनेट उपयोगकर्ता, 50 करोड़+ व्हाट्सऐप उपयोगकर्ता, 36 करोड़+ यूट्यूब उपयोगकर्ता
    • भाजपा की आईटी सेल और कांग्रेस की डिजिटल मीडिया टीम प्रमुख उदाहरण हैं
    • व्हाट्सऐप फॉरवर्ड राजनीतिक संदेशों और दुष्प्रचार का प्रमुख माध्यम हैं
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    • जाति का समाजशास्त्र: M.N. श्रीनिवास की संस्कृतीकरण अवधारणा — निचली जातियाँ उच्च जाति के रीति-रिवाज अपनाती हैं
    • योगेंद्र यादव और सुहास पाल्शीकर का "दूसरा लोकतांत्रिक उभार" — OBC और निचली जातियाँ राजनीतिक एजेंट बनीं
    • जाति गोलबंदी का साधन भी है और कल्याण नीति (आरक्षण) की इकाई भी
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    • राजनीतिक भागीदारी में लैंगिक अंतर: पितृसत्तात्मक मानदंड, वित्तीय परावलंबन, हिंसा का भय, पार्टी टिकट की कमी
    • ग्राम पंचायत में 33–50% महिला आरक्षण (73वाँ संशोधन) ने लाखों महिला प्रतिनिधि बनाए
    • किंतु "सरपंच पति" की समस्या बनी रही — महिला की जगह पुरुष रिश्तेदार शासन करते हैं
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    • मंडल के बाद दलित राजनीति: BSP (1984) — कांशीराम की स्थापना, मायावती का नेतृत्व
    • BSP की "सामाजिक इंजीनियरिंग" (दलित+OBC+मुस्लिम+उच्च जाति) ने 2007 UP में पूर्ण बहुमत दिलाया
    • 2012 के बाद BSP का पतन — पहचान राजनीति की अस्थिरता का प्रमाण
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    • अंतर-संबद्धता: दलित/OBC/मुस्लिम महिलाओं को दोहरा हाशियाकरण — जेंडर + जाति/धर्म
    • SHG आंदोलन, ASHA और आंगनवाड़ी नेटवर्क ग्रामीण महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के नए मार्ग
    • ये मार्ग औपचारिक दल राजनीति के बाहर जमीनी राजनीतिक क्षमता का निर्माण करते हैं

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 क्या है? इसके प्रमुख प्रावधान बताइए। 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संविधान 106वाँ संशोधन, 2023) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) आरक्षण देता है — SC/ST सुरक्षित क्षेत्रों में भी। यह अगले परिसीमन (अगली जनगणना के बाद) से लागू होगा। सीटें प्रत्येक परिसीमन के बाद रोटेशन से आवंटित होंगी। अवधि: 15 वर्ष। दिल्ली विधानसभा भी कवर।

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