99. पहचान-आधारित से मुद्दा-आधारित राजनीति, लैंगिक भागीदारी, AI-सक्षम जन-गोलबंदी — पूर्ण नोट्स
Identity-Based to Issue-Driven Politics, Gender Participation, AI-Enabled Mobilizationपूरा पढ़ने के लिए मुफ़्त में साइन अप करें
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मूल मुख्य बिंदु
- 1
- पहचान-आधारित राजनीति जाति, धर्म, भाषा, जनजाति, लिंग जैसी साझा विशेषताओं के आधार पर राजनीतिक गोलबंदी है
- भारत में 1970 के दशक से जाति पहचान राजनीति की प्रमुख धुरी रही है
- मंडल आयोग रिपोर्ट (1980) और 1990 में इसके क्रियान्वयन ने OBC राजनीतिक समेकन को उत्प्रेरित किया
- 2
- मुद्दा-आधारित राजनीति नीति परिणामों पर केंद्रित है
- 2014 चुनाव में "विकास" और "भ्रष्टाचार-मुक्त शासन" के नारे चले
- राज्य स्तर पर जाति समीकरण बने रहे — पहचान राजनीति समाप्त नहीं हुई
- 3
- महिला आरक्षण विधेयक (संविधान का 106वाँ संशोधन अधिनियम, 2023) — नारी शक्ति वंदन अधिनियम
- लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण देता है
- यह अगले परिसीमन और जनगणना के बाद लागू होगा (संभावित 2026–2028)
- 4
- 2024 लोकसभा में 74 महिला सांसद (13.6%) — वैश्विक औसत 26.9% से कम
- भारत IPU लैंगिक रैंकिंग 2024 में 148वें स्थान पर
- राजस्थान विधानसभा 2023: 200 में से 30 महिला विधायक = 15%
- 5
- जाति-आधारित राजनीति: 1990 का मंडल क्षण V.P. सिंह के नेतृत्व में OBC पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बनाया
- UP में SP-BSP (OBC+दलित), बिहार में MY गठजोड़ (मुस्लिम-यादव), तमिलनाडु में द्रविड़ दल
- 2024 में जाति जनगणना प्रमुख चुनावी मुद्दा बना
- 6
- सांप्रदायिक राजनीति: जन संघ (1951), हिंदुत्व विचारधारा — धार्मिक पहचान को राजनीतिक स्वरूप दिया
- बाबरी मस्जिद विध्वंस (1992) और राम मंदिर आंदोलन ने धार्मिक पहचान को चुनावी रूप दिया
- राम मंदिर प्रतिष्ठा (जनवरी 2024) 2024 के चुनाव में BJP का प्रमुख मुद्दा रही
- 7
- AI-सक्षम गोलबंदी: सोशल मीडिया पर वोटर प्रोफाइलिंग आधारित माइक्रो-टार्गेटिंग
- डीपफेक (ऑडियो/वीडियो), AI वॉयस बॉट अभियान — लाखों मतदाताओं तक व्यक्तिगत पहुँच
- NLP-आधारित जनमत विश्लेषण; चैटबॉट वोटर हेल्पडेस्क
- 2024 चुनावों में AI-जनित सामग्री का व्यापक उपयोग; ECI ने दिशानिर्देश जारी किए
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- सोशल मीडिया: भारत में 76 करोड़+ इंटरनेट उपयोगकर्ता, 50 करोड़+ व्हाट्सऐप उपयोगकर्ता, 36 करोड़+ यूट्यूब उपयोगकर्ता
- भाजपा की आईटी सेल और कांग्रेस की डिजिटल मीडिया टीम प्रमुख उदाहरण हैं
- व्हाट्सऐप फॉरवर्ड राजनीतिक संदेशों और दुष्प्रचार का प्रमुख माध्यम हैं
- 9
- जाति का समाजशास्त्र: M.N. श्रीनिवास की संस्कृतीकरण अवधारणा — निचली जातियाँ उच्च जाति के रीति-रिवाज अपनाती हैं
- योगेंद्र यादव और सुहास पाल्शीकर का "दूसरा लोकतांत्रिक उभार" — OBC और निचली जातियाँ राजनीतिक एजेंट बनीं
- जाति गोलबंदी का साधन भी है और कल्याण नीति (आरक्षण) की इकाई भी
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- राजनीतिक भागीदारी में लैंगिक अंतर: पितृसत्तात्मक मानदंड, वित्तीय परावलंबन, हिंसा का भय, पार्टी टिकट की कमी
- ग्राम पंचायत में 33–50% महिला आरक्षण (73वाँ संशोधन) ने लाखों महिला प्रतिनिधि बनाए
- किंतु "सरपंच पति" की समस्या बनी रही — महिला की जगह पुरुष रिश्तेदार शासन करते हैं
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- मंडल के बाद दलित राजनीति: BSP (1984) — कांशीराम की स्थापना, मायावती का नेतृत्व
- BSP की "सामाजिक इंजीनियरिंग" (दलित+OBC+मुस्लिम+उच्च जाति) ने 2007 UP में पूर्ण बहुमत दिलाया
- 2012 के बाद BSP का पतन — पहचान राजनीति की अस्थिरता का प्रमाण
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- अंतर-संबद्धता: दलित/OBC/मुस्लिम महिलाओं को दोहरा हाशियाकरण — जेंडर + जाति/धर्म
- SHG आंदोलन, ASHA और आंगनवाड़ी नेटवर्क ग्रामीण महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के नए मार्ग
- ये मार्ग औपचारिक दल राजनीति के बाहर जमीनी राजनीतिक क्षमता का निर्माण करते हैं
संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 क्या है? इसके प्रमुख प्रावधान बताइए।
आदर्श उत्तर
नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संविधान 106वाँ संशोधन, 2023) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) आरक्षण देता है — SC/ST सुरक्षित क्षेत्रों में भी। यह अगले परिसीमन (अगली जनगणना के बाद) से लागू होगा। सीटें प्रत्येक परिसीमन के बाद रोटेशन से आवंटित होंगी। अवधि: 15 वर्ष। दिल्ली विधानसभा भी कवर।
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